IMD November 2026 Rainfall Forecast के मुताबिक इस बार दक्षिण भारत के किसानों और आम लोगों के लिए राहत की खबर नहीं है। भारत मौसम विज्ञान विभाग यानी IMD ने नवंबर महीने के लिए जो मासिक पूर्वानुमान जारी किया है, उसमें साफ कहा गया है कि दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत में बारिश सामान्य से काफी कम रहने वाली है। यह रिपोर्ट पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले इस विभाग ने जारी की है।
देखा जाए तो यह पूर्वानुमान सिर्फ बारिश तक सीमित नहीं है, बल्कि तापमान को लेकर भी कुछ अहम संकेत दिए गए हैं। चिंता का विषय यह है कि अधिकतर हिस्सों में तापमान भी सामान्य से ऊपर रहने की संभावना जताई गई है, जिससे ठंड के मौसम में भी गर्मी का असर बना रह सकता है।
‘दक्षिण भारत में क्यों है सूखे जैसी स्थिति’
IMD के मुताबिक दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत में पांच मौसम उपखंड आते हैं: तमिलनाडु, पुडुचेरी एवं कराईकल, तटीय आंध्र प्रदेश एवं यनम, रायलसीमा, केरल एवं माहे और दक्षिण आंतरिक कर्नाटक। नवंबर 2026 में इन सभी क्षेत्रों में बारिश सामान्य से कम यानी दीर्घावधि औसत (LPA) के 77% से भी कम रहने का अनुमान है।
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि 1971 से 2020 के आंकड़ों के आधार पर दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत में नवंबर महीने का दीर्घावधि औसत करीब 118.7 मिमी है। वहीं पूरे देश का औसत करीब 29.7 मिमी आंका गया है। IMD का अनुमान है कि पूरे देश में भी इस बार बारिश सामान्य से कम ही रहने वाली है।
| विवरण | पूर्वानुमान |
|---|---|
| दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत में बारिश | सामान्य से कम (LPA के 77% से कम) |
| देशभर में बारिश | सामान्य से कम (LPA के 77% से कम) |
| दक्षिण भारत का LPA (1971-2020) | 118.7 मिमी |
| राष्ट्रीय LPA (नवंबर माह) | 29.7 मिमी |
| अधिकतम तापमान | अधिकांश भागों में सामान्य से अधिक |
| न्यूनतम तापमान | अधिकांश भागों में सामान्य से अधिक |
| अल नीनो स्थिति | अत्यंत प्रबल |
| IOD स्थिति | न्यूट्रल |
‘किन राज्यों में मिलेगी राहत’
वहीं दूसरी ओर पूरे देश को देखें तो तस्वीर हर जगह एक जैसी नहीं है। मध्य, उत्तर-पश्चिम, पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत के कुछ हिस्सों में सामान्य से अधिक बारिश होने की उम्मीद जताई गई है। इसका मतलब है कि देश के बाकी हिस्सों को इस बार दक्षिण भारत जैसी स्थिति का सामना नहीं करना पड़ेगा।
तापमान के मोर्चे पर भी असमान तस्वीर दिख रही है। हिमालय की तलहटी से सटे इलाकों को छोड़कर अधिकांश हिस्सों में अधिकतम तापमान सामान्य से ऊपर रहने की संभावना है। इसी तरह न्यूनतम तापमान भी ज्यादातर इलाकों में सामान्य से अधिक रहेगा, सिवाय मध्य और पूर्वी भारत के कुछ क्षेत्रों के, जहां यह सामान्य से नीचे भी जा सकता है।
‘अल नीनो और IOD की भूमिका’
समझने वाली बात है कि इस बार के पूर्वानुमान के पीछे सबसे बड़ी वजह है भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर में बना अत्यंत प्रबल अल नीनो। IMD के मॉनसून मिशन कपल्ड फोरकास्ट सिस्टम (MMCFS) सहित अन्य वैश्विक जलवायु मॉडल बताते हैं कि यह अत्यंत प्रबल अल नीनो नवंबर-दिसंबर 2026 के दौरान भी जारी रह सकता है।
इसी बीच हिंद महासागर में इंडियन ओशन डाइपोल (IOD) की स्थिति फिलहाल न्यूट्रल बनी हुई है, हालांकि हाल में यह पॉजिटिव IOD की सीमा (+0.4°C) को पार करता दिखा है। लेकिन किसी घटना को स्थापित मानने के लिए इस सीमा से ऊपर लगातार मान बने रहना जरूरी होता है। मॉडल पूर्वानुमान बताते हैं कि दिसंबर 2026 तक न्यूट्रल IOD की स्थिति बने रहने की संभावना है।
विशेषज्ञ विश्लेषण
अगर गौर करें तो यह पूर्वानुमान सिर्फ मौसम की जानकारी नहीं, बल्कि कृषि और जल प्रबंधन के लिहाज से भी बेहद अहम है। दक्षिण भारत का अक्टूबर-दिसंबर सीजन वहां की खेती के लिए बारिश का प्रमुख स्रोत माना जाता है, ऐसे में सामान्य से कम बारिश सीधे तौर पर रबी फसलों और जलाशयों के जलस्तर को प्रभावित कर सकती है। अत्यंत प्रबल अल नीनो की मौजूदगी इस स्थिति को और गंभीर बना देती है, क्योंकि ऐतिहासिक रूप से अल नीनो वर्षों में भारत में बारिश की कमी देखी गई है। उम्मीद की किरण यह है कि मध्य और उत्तर-पश्चिम भारत के कुछ हिस्सों को इस बार राहत मिल सकती है।
‘जानें पूरा मामला’
2021 से IMD ने मासिक और मौसमी पूर्वानुमान जारी करने के लिए एक नई रणनीति अपनाई है, जिसमें पारंपरिक सांख्यिकीय प्रणाली के साथ मल्टी-मॉडल एन्सेम्बल (MME) आधारित पूर्वानुमान प्रणाली को जोड़ा गया है। यह प्रणाली दुनियाभर के विभिन्न जलवायु अनुसंधान केंद्रों से मिले कपल्ड ग्लोबल क्लाइमेट मॉडल (CGCM) डेटा का इस्तेमाल करती है, जिसमें IMD का अपना मॉनसून मिशन कपल्ड फोरकास्ट सिस्टम (MMCFS) भी शामिल है। इसी प्रणाली के आधार पर 2026 के दक्षिण-पश्चिम मॉनसून सीजन और पोस्ट-मॉनसून सीजन के पूर्वानुमान पहले ही जारी किए जा चुके हैं।
IMD हर हफ्ते गुरुवार को अगले चार हफ्तों के लिए विस्तारित रेंज पूर्वानुमान भी अपडेट करता है, जो विभाग की वेबसाइट पर उपलब्ध रहता है। इसके अलावा दिसंबर-जनवरी सीजन का पूर्वानुमान और दिसंबर महीने का मासिक पूर्वानुमान नवंबर के अंत तक जारी किया जाएगा।
मुख्य बातें (Key Points)
- दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत और पूरे देश में नवंबर 2026 में बारिश सामान्य से कम (LPA के 77% से कम) रहने की संभावना है।
- मध्य, उत्तर-पश्चिम, पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत के कुछ हिस्सों में सामान्य से अधिक बारिश हो सकती है।
- अधिकतर हिस्सों में अधिकतम और न्यूनतम तापमान सामान्य से ऊपर रहने का अनुमान है।
- भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर में अत्यंत प्रबल अल नीनो नवंबर-दिसंबर 2026 तक जारी रह सकता है।











