Diwali Food Adulteration का खतरा त्योहारी सीजन में कई गुना बढ़ जाता है, और इस बार विशेषज्ञों ने आम उपभोक्ताओं को सतर्क रहने की चेतावनी दी है। भारत में दीवाली के मौसम में दूध, पनीर, घी, मावा और मिठाइयों की मांग कई गुना बढ़ जाती है, और मुनाफे के लालच में मिलावटखोर लोगों की सेहत से खिलवाड़ करने से पीछे नहीं हटते। स्पेक्स संस्था के अध्यक्ष डॉ. ब्रह्म शर्मा, जो करीब 30 साल से मिलावट के खिलाफ अभियान चला रहे हैं, ने कुछ बेहद आसान घरेलू तरीके बताए हैं जिनसे आप घर बैठे खाद्य पदार्थों की शुद्धता परख सकते हैं।
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‘मावा और मिठाई: हाथ पर रगड़ो, सच पता चलेगा’
देखा जाए तो मावे की मिठाइयों में मिलावट पकड़ना सबसे आसान है, बशर्ते आपको सही तरीका पता हो। डॉ. ब्रह्म शर्मा के मुताबिक, बर्फी या मावे का एक छोटा टुकड़ा लें और उसे अपनी हथेली पर रगड़ें। अगर आपके हाथ चिकने हो जाते हैं, तो मावा शुद्ध है। लेकिन अगर वह आटे या मैदे जैसा महसूस हो और कोई चिकनाई न आए, तो समझ लीजिए कि मिलावट है।
एक और कंफर्म टेस्ट है: थोड़ा सा मावा या बर्फी लें, गुनगुने पानी में डालें, निथारकर उस पानी में जरा सी चीनी और दो बूंद नींबू डालें। अगर पानी पिंक हो जाए, तो उसमें यूरिया मिला है। हैरान करने वाली बात यह है कि यूरिया वही रसायन है जो खाद में इस्तेमाल होता है, और मिलावटखोर इसे मावे में डालते हैं ताकि वह ताजा दिखे।
‘पनीर और दूध: आयोडीन और pH पेपर से जांच’
अगर गौर करें तो पनीर में मिलावट पकड़ने का सबसे सरल तरीका भी हाथ पर रगड़ना है। असली पनीर में फैट होता है, इसलिए रगड़ने पर चिकनाहट आनी चाहिए। लेकिन अगर पनीर आटे की तरह बिखर जाए, तो उसमें अरारोट या मैदा मिला है। कंफर्म करने के लिए टिंचर आयोडीन डालें: अगर पर्पल कलर आए, तो मिलावट पक्की है।
दूध की जांच के लिए बाजार में महज 15-18 रुपए में pH पेपर मिलता है। एक छोटा टुकड़ा काटकर दूध में डुबोएं। अगर कलर न्यूट्रल नहीं आता, तो दूध में कुछ मिलाया गया है। सोडा डाला होगा तो अल्कलाइन होगा, और फॉर्मलिन डाला होगा तो अलग कलर आएगा। और बस यहीं से शुरू हुई असली कहानी यह कि फॉर्मलिन वही रसायन है जिससे मरे हुए जानवरों की बॉडी को प्रिजर्व किया जाता है, और कुछ मिलावटखोर इसे दूध में डालते हैं ताकि वह फटे नहीं।
‘मसाले और रोली: सबसे ज्यादा खतरनाक’
समझने वाली बात है कि मसालों में 90% तक मिलावट हो सकती है। डॉ. शर्मा के मुताबिक, सबसे बड़ी समस्या यह है कि मसाला बनाने वाली कंपनियां कच्चे मसालों को धोती ही नहीं हैं, इसलिए धूल-मिट्टी तो रहती ही है। इसके अलावा पुराने मसालों में रंग मिला दिया जाता है ताकि वे ताजा दिखें। हल्दी को पानी में डालकर देखें: असली हल्दी पानी में घुलती नहीं है, लेकिन मिलावटी हल्दी तुरंत रंग छोड़ देगी।
चिंता का विषय यह है कि पूजा सामग्री में इस्तेमाल होने वाली रोली सबसे ज्यादा खतरनाक है। बाजार में मिलने वाली रोली में लेड क्रोमेट, लेड ऑक्साइड और इंडस्ट्रियल डाई मिली होती है। यह कैंसर तक का कारण बन सकती है।
‘लड्डू में न चीनी, न घी: चौंकाने वाला खुलासा’
दिलचस्प बात यह है कि डॉ. शर्मा ने एक लड्डू का प्रयोग करके दिखाया कि बाजार में मिलने वाले चमकदार लड्डू में न तो चीनी है और न ही देसी घी। लड्डू को फ्रिज में रखने के बाद भी वह जमा नहीं, जबकि असली देसी घी और चीनी का लड्डू ठंडा होने पर जम जाना चाहिए। इसमें स्वीट कॉर्न और वनस्पति घी का इस्तेमाल किया गया था, जो सेहत के लिए बेहद हानिकारक है।
| खाद्य पदार्थ | मिलावट की पहचान | घरेलू टेस्ट |
|---|---|---|
| मावा/बर्फी | मैदा, अरारोट, यूरिया | हाथ पर रगड़ें, गुनगुने पानी में नींबू-चीनी |
| पनीर | अरारोट, मैदा | हाथ पर रगड़ें, टिंचर आयोडीन |
| दूध | पानी, सोडा, फॉर्मलिन | pH पेपर (₹15-18) |
| हल्दी | इंडस्ट्रियल कलर | पानी में डालें, असली हल्दी नहीं घुलती |
| रोली | लेड क्रोमेट, लेड ऑक्साइड | बचें, इंडस्ट्रियल डाई युक्त |
| लड्डू | स्वीट कॉर्न, वनस्पति घी | फ्रिज में रखें, न जमे तो मिलावटी |
‘जानें पूरा मामला’
त्योहारी सीजन में खाद्य पदार्थों की बढ़ती मांग के बीच मिलावट का खतरा बढ़ जाता है। स्पेक्स संस्था के अध्यक्ष डॉ. ब्रह्म शर्मा ने दूध, पनीर, मावा, मिठाई, मसाले और रोली में मिलावट पहचानने के आसान घरेलू तरीके बताए। हालांकि, घरेलू जांच से सिर्फ संकेत मिलते हैं, शुद्धता की पक्की पुष्टि के लिए प्रमाणित लैब जांच जरूरी है।
‘विश्लेषण: खुद बनाओ, सुरक्षित रहो’
डॉ. शर्मा का सबसे अहम संदेश यही है कि खाने की चीजें खुद बनाएं। साबुत मसाले लाएं, धोएं, धूप में सुखाएं और घर पर पीसें। दूध से पनीर और मावा घर पर बनाएं। यह थोड़ा मेहनत का काम जरूर है, लेकिन सेहत के साथ समझौता करने से बेहतर है। आम आदमी के लिए यह जानना जरूरी है कि ब्रांडेड हो या नॉन-ब्रांडेड, मिलावट हर जगह हो सकती है। जागरूकता ही सबसे बड़ा हथियार है।
‘मुख्य बातें (Key Points)’
- त्योहारी सीजन में दूध, पनीर, मावा, मिठाई और मसालों में मिलावट का खतरा बढ़ जाता है।
- मावा हाथ पर रगड़ने से, दूध pH पेपर से और पनीर आयोडीन टेस्ट से जांचें।
- बाजार की रोली में लेड क्रोमेट और इंडस्ट्रियल डाई होती है, जो कैंसर का कारण बन सकती है।
- घरेलू जांच से सिर्फ संकेत मिलते हैं, पक्की पुष्टि के लिए लैब जांच जरूरी है।













