Hyundai Bayon India Launch के साथ ही Hyundai Motor India ने मिड-साइज SUV मार्केट में अपनी हुकूमत बचाने का बड़ा दांव खेल दिया है। कंपनी ने नया Bayon SUV पेश करते हुए 2027 से क्रेटा और बेयॉन की मिली-जुली सालाना बिक्री कम से कम 2.5 लाख यूनिट रखने का लक्ष्य तय किया है। मकसद साफ है: बढ़ते मुकाबले और क्रेटा की धीमी बिक्री के बावजूद सेगमेंट में लीडरशिप कायम रखना।
यह ऐलान कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर और सीईओ तरुण गर्ग ने बेयॉन के लॉन्च के दौरान पत्रकारों से बातचीत में किया। उनका कहना है कि 2.5 लाख यूनिट कोई सीमा नहीं है। यह तो बस बेसलाइन है, और कंपनी इससे आगे लगातार बढ़ती रहेगी।
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2.5 लाख यूनिट: सीमा नहीं, बेसलाइन है
तरुण गर्ग ने साफ शब्दों में कहा, “क्रेटा और बेयॉन के साथ मिलाकर हम आगे सालाना 2.5 लाख यूनिट से ज्यादा का वॉल्यूम देख रहे हैं। इस वॉल्यूम के साथ हम मिड-SUV सेगमेंट में अपनी लीडरशिप जारी रख सकते हैं। और 2.5 लाख यूनिट कोई लिमिट नहीं, बेसलाइन है। हम बढ़ते रहेंगे।”
देखा जाए तो यह आंकड़ा किसी एक मॉडल का नहीं है, बल्कि दो SUV मिलाकर हासिल करना है। हैरान करने वाली बात यह है कि पिछले दो वित्त वर्षों में हुंडई ने अकेले क्रेटा से इस सेगमेंट में करीब 2 लाख यूनिट सालाना बेची हैं। यानी अब कंपनी का पूरा गणित बदल चुका है।
| मुख्य आंकड़े | जानकारी |
|---|---|
| सेगमेंट की कुल बिक्री (पिछला वित्त वर्ष) | करीब 9 लाख यूनिट |
| हुंडई की बिक्री (पिछले 2 साल, सिर्फ क्रेटा) | करीब 2 लाख यूनिट सालाना |
| नया लक्ष्य (2027 से) | 2.5 लाख+ यूनिट सालाना |
| क्रेटा की बिक्री (FY2027 के पहले 6 महीने) | 89,727 यूनिट, 9% से ज्यादा गिरावट |
| सेगमेंट की हिस्सेदारी हुंडई की कुल बिक्री में (FY2026) | करीब 35% |
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि वित्त वर्ष 2026 में इसी सेगमेंट ने हुंडई की कुल घरेलू बिक्री में करीब 35 फीसदी हिस्सा दिया था। इसीलिए कंपनी इस क्लास को इतनी सीरियसली ले रही है।
9.99 लाख रुपये से शुरू होती है बेयॉन की कीमत
अब बात नए फौलाद की। हुंडई बेयॉन की कीमत 9.99 लाख रुपये (एक्स-शोरूम) से शुरू होती है। कंपनी ने इसे अपने सब-4 मीटर कॉम्पैक्ट SUV वेन्यू और मिड-साइज क्रेटा के बीच पोजीशन किया है। सीधे शब्दों में कहें तो जो ग्राहक वेन्यू को छोटा और क्रेटा को थोड़ा महंगा पाता है, वही अब बेयॉन का टारगेट है।
एक ही कैटेगरी में कई मॉडल रखने के तर्क पर गर्ग का जवाब दिलचस्प है। उन्होंने कहा, “यह सेगमेंट के आकार पर निर्भर करता है। अगर मौका है, तो क्यों नहीं?”
और बस यहीं से शुरू हुई असली कहानी। जानते हैं क्रेटा के साथ अभी हाल क्या है?
क्रेटा की गिरती बिक्री और असली वजह
चिंता का विषय यह है कि वित्त वर्ष 2027 के पहले छह महीनों में क्रेटा की बिक्री साल दर साल 9 फीसदी से ज्यादा गिरकर 89,727 यूनिट पर आ गई। उधर इंडस्ट्री में इसी सेगमेंट का वॉल्यूम 50 फीसदी से ज्यादा बढ़ा। यानी बाजार भाग रहा था, मगर क्रेटा पीछे रह गई।
इस गिरावट की एक बड़ी वजह गर्ग ने डीजल मॉडल की सीमित सप्लाई बताई। दरअसल, क्रेटा के डीजल वेरिएंट पर एक महीने से ज्यादा की वेटिंग पीरियड चल रही है। ग्राहक गाड़ी खरीदना चाहता है, पर मिल नहीं रही। ऐसे में उसकी नजर दूसरे ब्रांड्स पर जाना लाजमी है।
समझने वाली बात यह है कि बेयॉन को इसी दबाव के बीच मंजर पर लाया गया है। कंपनी चाहती है कि एक गाड़ी की धीमी रफ्तार पूरे सेगमेंट की कमाई न रोक दे।
मारुति के 3, टाटा के 2: मुकाबला कितना कड़ा है
अगर गौर करें तो हुंडई अब तक इस सेगमेंट में भरोसा सिर्फ क्रेटा पर रखती थी। वहीं मारुति सुजुकी के पास ग्रैंड विटारा, विक्टोरिस और अर्टिगा तीन मॉडल हैं। दूसरी ओर टाटा मोटर्स ने कर्व और सिएरा के साथ दो मॉडलों की मौजूदगी बनाई है।
| कंपनी | सेगमेंट में मौजूद मॉडल |
|---|---|
| हुंडई | क्रेटा, बेयॉन (2 मॉडल) |
| मारुति सुजुकी | ग्रैंड विटारा, विक्टोरिस, अर्टिगा (3 मॉडल) |
| टाटा मोटर्स | कर्व, सिएरा (2 मॉडल) |
Mobility Global के एसोसिएट डायरेक्टर (लाइट व्हीकल प्रोडक्शन फोरकास्टिंग) गौरव वांगाल का मानना है कि बेयॉन हुंडई के लिए बेहद मायने रखता है। 2015 में क्रेटा के बाद यह कंपनी का मिड-साइज SUV सेगमेंट में पहला नया नेमप्लेट है। मकसद साफ है: अपने ही मॉडल्स के बीच ग्राहकों को इधर-उधर घुमाने की जगह नए ग्राहक जीतना।
लेकिन वे यह चेतावनी भी देते हैं कि रास्ता आसान नहीं होगा। उनके शब्दों में, “सेगमेंट बेरहम है और हर बड़ी कार कंपनी एक ही ग्राहक के लिए लड़ रही है।”
डीजल नहीं, इलेक्ट्रिक भी नहीं: बेयॉन सिर्फ पेट्रोल और CNG में
अब सवाल उठता है कि बेयॉन में कौन सा इंजन मिलेगा? जवाब है: सिर्फ पेट्रोल और CNG। हुंडई ने इसमें डीजल या इलेक्ट्रिक वेरिएंट की कोई योजना नहीं बनाई है।
गर्ग ने कहा, “हमारी मार्केट रिसर्च के आधार पर हम मजबूती से मानते हैं कि इस सेगमेंट में सबसे ज्यादा बिक्री पेट्रोल से आने वाली है।” उन्होंने आगे समझाया कि एक ही मॉडल में हर तरह का पावरट्रेन देना ग्राहकों को उलझन में डाल सकता है और प्रोडक्ट रेंज संभालना भी मुश्किल बना देता है।
राहत की बात डीजल प्रेमियों के लिए यह है कि हुंडई के पूरे पोर्टफोलियो से डीजल गायब नहीं हो रहा। कंपनी उन मॉडल्स में डीजल इंजन बनाए रखेगी जहां ग्राहक शुरुआती टॉर्क को अहमियत देते हैं।
चेन्नई के प्लांट में बनेगा बेयॉन
बेयॉन का प्रोडक्शन हुंडई के चेन्नई स्थित प्लांट में होगा। गर्ग के मुताबिक वेन्यू की प्रोडक्शन पुणे शिफ्ट हो जाने के बाद बेयॉन कंपनी की क्षमता को बेहतर तरीके से इस्तेमाल करने में मदद करेगा। यानी नई गाड़ी आएगी भी और फैक्ट्री की दक्षता भी सुधरेगी।
बेयॉन के आने के बाद हुंडई का पोर्टफोलियो अब 10 मॉडल्स का हो गया है। इसमें 6 SUV, 2 सेडान और 2 हैचबैक शामिल हैं। डीजल, पेट्रोल, CNG और इलेक्ट्रिक: सभी तरह के पावरट्रेन की पेशकश कंपनी के पास मौजूद है।
26 नए मॉडल और 15.5 अरब डॉलर का निवेश
बड़ी तस्वीर पर नजर डालें तो मई 2025 में हुंडई मोटर इंडिया ने इस दशक के अंत तक देश में 26 मॉडल लॉन्च करने की योजना का ऐलान किया था। इनमें 20 इंजन (ICE) वाले वाहन और 6 इलेक्ट्रिक वाहन शामिल हैं। बिल्कुल नए मॉडल, पूरी तरह बदले हुए मॉडल और मौजूदा उत्पादों के अपग्रेड: तीनों को इस लिस्ट में जगह मिलेगी।
इससे भी बड़ी बात यह है कि हुंडई की साउथ कोरियन पेरेंट कंपनी Hyundai Motor Company ने 2032 तक भारत में 15.5 अरब डॉलर के निवेश का वादा किया है। यह दर्शाता है कि भारतीय बाजार कंपनी की ग्लोबल रणनीति का सबसे बड़ा पहिया बन चुका है।
समझिए हुंडई का असली गेमप्लान
तो आखिर यह सब क्या बताता है? सबसे पहली बात यह कि हुंडई ने समझ लिया है कि एक ही मॉडल पर टिके रहना अब जोखिम भरा है। जब इंडस्ट्री का सेगमेंट 50 फीसदी बढ़ रहा हो और आपकी बिक्री 9 फीसदी गिर रही हो, तो रणनीति बदलना मजबूरी हो जाती है। बेयॉन इसी सोच का नतीजा है।
दूसरी बात, 9.99 लाख रुपये की शुरुआती कीमत साफ करती है कि कंपनी वेन्यू और क्रेटा के बीच की खाली जगह पर कब्जा जमाना चाहती है। इससे वह ग्राहक भी हाथ में आएगा जो अब तक क्रेटा छोड़कर भाग रहा था या वेन्यू से संतुष्ट नहीं था। गौरव वांगाल की भाषा में कहें तो ग्राहकों को अपने ही मॉडल्स में घुमाने की जगह नए ग्राहक जीतना।
तीसरी और सबसे अहम बात: इस सेगमेंट ने वित्त वर्ष 2026 में हुंडई की कुल घरेलू बिक्री का करीब 35 फीसदी हिस्सा दिया था। यानी यहां लीडरशिप खोने का मतलब सीधे कंपनी की जेब पर सीधा असर होगा। इसीलिए 2.5 लाख का लक्ष्य सिर्फ एक आंकड़ा नहीं, बल्कि हुंडई की आने वाली कमाई की रक्षा की तैयारी है।
अगले 6 महीने दिलचस्प होंगे। बेयॉन की डिलीवरी शुरू होने के बाद देखना होगा कि डीजल वाली दिक्कत के बावजूद हुंडई अपनी रफ्तार पकड़ पाती है या नहीं। एक बात तय है, मुकाबला आसान नहीं होगा।
जानें पूरा मामला
बता दें कि मिड-साइज यूटिलिटी व्हीकल सेगमेंट में 4 से 4.4 मीटर लंबाई वाले SUV और MPV गिने जाते हैं। Society of Indian Automobile Manufacturers (SIAM) के आंकड़ों के मुताबिक पिछले वित्त वर्ष में इस सेगमेंट की कुल बिक्री करीब 9 लाख यूनिट रही। हुंडई पिछले दो वित्त वर्षों से अकेले क्रेटा से इस क्लास में सालाना करीब 2 लाख यूनिट बेच रही है। अब बेयॉन के आने के बाद कंपनी को उम्मीद है कि 2027 से दोनों गाड़ियों की मिली-जुली बिक्री 2.5 लाख यूनिट के पार जाएगी।
मुख्य बातें (Key Points)
- हुंडई ने बेयॉन लॉन्च करते हुए 2027 से क्रेटा और बेयॉन की मिली-जुली 2.5 लाख यूनिट सालाना बिक्री का लक्ष्य रखा है।
- बेयॉन की कीमत 9.99 लाख रुपये (एक्स-शोरूम) से शुरू होती है और यह वेन्यू और क्रेटा के बीच पोजीशन किया गया है।
- FY2027 के पहले 6 महीने में क्रेटा की बिक्री 9% गिरकर 89,727 यूनिट रही, जबकि सेगमेंट 50% से ज्यादा बढ़ा।
- बेयॉन सिर्फ पेट्रोल और CNG में आएगा और इसका प्रोडक्शन चेन्नई प्लांट में होगा।










