Adani Mumbai Airport को लेकर पिछले कुछ दिनों से एक बड़ी कंट्रोवर्सी चर्चा में है। मुंबई एयरपोर्ट, जो अडानी ग्रुप द्वारा संचालित किया जाता है, वहां से कुछ फ्लाइट्स को नवी मुंबई एयरपोर्ट की तरफ शिफ्ट करने की चर्चा चल रही है। इसी को लेकर अडानी और एयरलाइंस के बीच टकराव शुरू हो गया है।
दिलचस्प बात यह है कि “एयरलाइंस अपोज एनी कट्स इन स्लॉट्स एट मुंबई एयरपोर्ट” जैसी हेडलाइंस इन दिनों सुर्खियों में हैं। समझने वाली बात है कि यह पूरा विवाद मुंबई एयरपोर्ट के टर्मिनल वन के रीडेवलपमेंट से जुड़ा हुआ है।
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‘टर्मिनल वन को क्यों करना है रीडेवलप’
मुंबई एयरपोर्ट में दो मुख्य टर्मिनल हैं, टर्मिनल वन और टर्मिनल टू। जहां डोमेस्टिक फ्लाइट्स दोनों टर्मिनल से ऑपरेट होती हैं, वहीं इंटरनेशनल फ्लाइट्स सिर्फ टर्मिनल टू से चलती हैं। टर्मिनल वन हर साल करीब 15 मिलियन यात्रियों को संभालता है।
लेकिन इसके नदर्न हिस्से का स्ट्रक्चर पुराना हो चुका है और यात्रियों की सुरक्षा के लिहाज से इसे रीडेवलप करना जरूरी हो गया है। इस रीडेवलपमेंट के दौरान करीब 5 मिलियन यात्रियों की क्षमता प्रभावित होगी, जिन्हें किसी दूसरी जगह शिफ्ट करना पड़ेगा।
‘265 इंटरनेशनल डिपार्चर होंगे शिफ्ट’
अडानी समूह ने प्रस्ताव रखा कि टर्मिनल वन की डोमेस्टिक फ्लाइट्स को टर्मिनल टू भेज दिया जाए। लेकिन यहां प्रॉब्लम यह है कि टर्मिनल टू की भी अपनी एक सीमित क्षमता है। इसलिए अडानी ने यह प्रस्ताव रखा कि टर्मिनल टू से साप्ताहिक करीब 770 इंटरनेशनल डिपार्चर में से लगभग एक-तिहाई यानी 265 डिपार्चर को नवी मुंबई शिफ्ट कर दिया जाए।
हैरान करने वाली बात यह है कि नवी मुंबई एयरपोर्ट, जो हाल ही में शुरू हुआ है, वह मुंबई एयरपोर्ट से करीब 50 किलोमीटर दूर स्थित है। और यह भी ध्यान देने वाली बात है कि यह एयरपोर्ट भी अडानी समूह द्वारा ही बनाया और संचालित किया जा रहा है।
‘एयरलाइंस को क्या है आपत्ति’
एयरलाइंस शिफ्ट करने से मना नहीं कर रहीं, लेकिन उन्हें डर है कि जानबूझकर बहुत सारी फ्लाइट्स को नवी मुंबई की तरफ शिफ्ट करने की कोशिश हो रही है। एयरलाइन ऑपरेटर्स कमिटी का कहना है कि इस 33% कटौती का जस्टिफिकेशन देने के लिए अडानी को स्ट्रक्चरल सेफ्टी ऑडिट रिपोर्ट, डिटेल रीडेवलपमेंट प्लान और दोनों टर्मिनलों के कैपेसिटी यूटिलाइजेशन का महीनावार डेटा देना चाहिए।
एयरलाइंस का यह भी कहना है कि उनका विंटर शेड्यूल यानी दिसंबर, जनवरी, फरवरी का शेड्यूल पहले से प्लान हो चुका है और टिकट भी सोल्ड आउट हो चुकी हैं। ऐसे में अचानक शिफ्टिंग से बड़ी दिक्कतें आ सकती हैं।
‘नवी मुंबई अलग एयरपोर्ट, टर्मिनल नहीं’
यहां एक अहम बात समझने वाली है कि नवी मुंबई एक अलग एयरपोर्ट है, न कि मुंबई एयरपोर्ट का नया टर्मिनल। इसलिए टर्मिनल वन से टू जाने जितना यह आसान नहीं है। जैसे कोई यात्री अहमदाबाद से लंदन के लिए मुंबई होते हुए कनेक्टेड फ्लाइट पकड़ता है, अगर टर्मिनल टू से सीधे नवी मुंबई भेज दिया जाए, तो कनेक्टेड फ्लाइट का पूरा मकसद ही खत्म हो जाएगा।
एमिरेट्स ने भी सार्वजनिक रूप से इस मुद्दे पर सवाल उठाए हैं कि क्या नवी मुंबई इतनी बड़ी संख्या में ट्रांसफर को संभालने के लिए तैयार है। कैटरिंग, कार्गो जैसी कई चीजों को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
नीचे टेबल में पूरे विवाद का सार दिया गया है:
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| टर्मिनल वन क्षमता | 15 मिलियन यात्री/वर्ष |
| रीडेवलपमेंट के बाद क्षमता | 20 मिलियन यात्री/वर्ष |
| रीडेवलपमेंट पूरा होने का समय | 2029 तक |
| साप्ताहिक इंटरनेशनल डिपार्चर | 770 |
| शिफ्ट होने वाले डिपार्चर | 265 (करीब एक-तिहाई) |
| प्रभावित एयरलाइंस | लगभग 46 |
| बदलाव लागू होने की तारीख | 25 अक्टूबर (टला हुआ) |
| अगली बैठक | 28 अक्टूबर |
‘जानें पूरा मामला’
यह पूरा बदलाव 25 अक्टूबर से लागू होना था, लेकिन अडानी और एयरलाइंस के बीच विवाद के चलते यह टल गया। मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड, यानी अडानी की कंपनी का कहना है कि रीडेवलपमेंट के कारण 5 मिलियन यात्रियों को शिफ्ट करना ही पड़ेगा। एयरलाइंस इसे स्वीकार करने को तैयार नहीं हैं, और दोनों पक्षों के बीच फिर से 28 अक्टूबर को मीटिंग होनी है।
अगर कानूनी और नियामक एंगल से देखें तो एयरपोर्ट स्लॉट्स किसी एयरलाइन को एयरपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर इस्तेमाल करने की अनुमति होती है। मुंबई जैसे भीड़भाड़ वाले एयरपोर्ट पर स्लॉट्स का बहुत महत्व होता है। एयरलाइन ऑपरेटर्स कमिटी ने सिविल एविएशन मंत्रालय की स्लॉट एलोकेशन गाइडलाइंस और इंटरनेशनल एयरलाइंस बॉडी IATA के नियमों का हवाला देते हुए कहा है कि मनमाने तरीके से एयरलाइंस को एक टर्मिनल से दूसरी जगह शिफ्ट नहीं किया जा सकता। फिलहाल सिविल एविएशन मंत्रालय ने इस मामले में हस्तक्षेप करने का फैसला लिया है।
मुख्य बातें (Key Points)
- मुंबई एयरपोर्ट के टर्मिनल वन के रीडेवलपमेंट से शिफ्टिंग विवाद शुरू हुआ
- करीब 265 इंटरनेशनल डिपार्चर नवी मुंबई शिफ्ट करने का प्रस्ताव
- एयरलाइंस को जानबूझकर शिफ्टिंग कराने का शक, पारदर्शिता की मांग
- सिविल एविएशन मंत्रालय ने मामले में हस्तक्षेप का फैसला लिया, 28 अक्टूबर को अगली बैठक













