Jhotta Murder Case की जांच अब पूरी तरह CBI के हाथ में आ चुकी है, और यही वजह है कि पूरे पंजाब की निगाहें मानसा पर टिकी हैं। मंगलवार की आधी रात को जब पूरा शहर सो रहा था, ठीक उसी वक्त CBI की टीम मानसा थाने पहुंच गई। टीम ने रात में ही रिकॉर्ड और सबूत अपने कब्जे में ले लिए। दिलचस्प बात यह है कि यह सब अमित शाह के पंजाब से रवाना होने के महज छह घंटे बाद ही हो गया।
परविंदर सिंह झोटा नशे के खिलाफ आवाज उठाने वाले एक जाना-माना चेहरा थे। 13 अक्टूबर को केमिस्ट अश्विनी कुमार ने उन्हें गोली मारकर हत्या कर दी थी। तब से उनका परिवार धरने पर बैठा है, और आज इस धरने का नौंवा दिन है। समझने वाली बात है कि अभी तक शव का पोस्टमार्टम तक नहीं हुआ क्योंकि परिवार इंसाफ चाहता है, शव नहीं।
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रातों-रात एक्शन में आई CBI
CBI के प्रवक्ता के मुताबिक, इस केस की अगुआई एक सीनियर DIG स्तर के अधिकारी कर रहे हैं। एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि प्रतिबंधित नशीले पदार्थ केमिस्ट की दुकानों पर खुलेआम कैसे बिकते रहे। और सबसे बड़ा सवाल यह है कि इसके पीछे कोई बड़ा संरक्षण तो नहीं था।
फॉरेंसिक एक्सपर्ट्स, ड्रग कंट्रोलर्स और दूसरे विशेषज्ञ भी मानसा पहुंच रहे हैं। झोटा का परिवार सुबह करीब साढ़े ग्यारह बजे मंडी बोर्ड रेस्ट हाउस में पहुंचेगा, जहां उनके बयान दर्ज किए जाएंगे। रेस्ट हाउस में साफ-सफाई और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जा रहे हैं। CBI अश्विनी कुमार समेत बाकी आरोपियों की कस्टडी भी मांगेगी, यह लगभग तय माना जा रहा है।
अमित शाह की इमोशनल पॉलिटिक्स ने बदला माहौल
अब जरा पीछे चलते हैं। दशहरे के दिन केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह पंजाब के तीन जिलों में पहुंचे और नशे की भेंट चढ़े तीन परिवारों से मिले। गुरदासपुर में उन्होंने एक बुजुर्ग महिला के पैर छुए, वहीं मानसा में झोटा की मां के सामने झुककर प्रणाम किया। यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि यह सिर्फ एक मुलाकात नहीं थी, बल्कि एक सोची-समझी रणनीति नजर आई।
राजनीतिक विश्लेषक वैवस्वत वेंकट का कहना है कि पंजाबी स्वाभिमानी होने के साथ-साथ भावुक भी हैं, और कोई भी पार्टी डर दिखाकर उन्हें अपने पक्ष में नहीं कर सकती। उनके मुताबिक अमित शाह ने नशे के मुद्दे पर पंजाब की नब्ज पकड़ ली है, और इसीलिए इमोशनल कनेक्ट बनाने की कोशिश हो रही है।
पंजाब सरकार के सामने खड़ी हुई दुविधा
और यहीं से शुरू होती है असली राजनीतिक कहानी। पूर्व DGP डीआर भट्टी के अनुसार, अमित शाह ने पंजाब सरकार को एक मुश्किल मोड़ पर ला खड़ा किया है। गुलजार सिंह सुसाइड केस में वित्त मंत्री हरपाल चीमा का नाम सामने आ चुका है।
अगर सरकार यह केस भी CBI को सौंपती है, तो जांच की आंच बड़े मंत्री तक पहुंच सकती है। और अगर नहीं सौंपती, तो चुनाव के मौसम में विपक्ष इसे मुद्दा बना सकता है। चिंता का विषय यह है कि सरकार के पास फिलहाल कोई आसान रास्ता नहीं बचा।
रिटायर्ड कर्नल सीएम लखनपाल मानते हैं कि CBI की एंट्री से चुनाव से ठीक दो-तीन महीने पहले सरकार की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं। उनके मुताबिक आने वाले महीनों में नशा तस्करी से जुड़े कई नेता और अफसर जांच के दायरे में आ सकते हैं।
तीन परिवार, तीन मांगें, एक ही उम्मीद
अमित शाह के सामने तीनों पीड़ित परिवारों ने अपनी-अपनी मांगें रखीं। देखा जाए तो तीनों की कहानी अलग है, मगर दर्द एक जैसा है।
| पीड़ित परिवार | जिला | मुख्य मांग |
|---|---|---|
| परविंदर सिंह झोटा | मानसा | CBI जांच, हत्या की साजिश का पूरा पर्दाफाश |
| गुलजार सिंह | संगरूर | वित्त मंत्री पर नाम आने के बावजूद कार्रवाई |
| विक्रमजीत सिंह | गुरदासपुर | असली दोषियों को सख्त सजा |
झोटा के पिता भीम सिंह ने बताया कि अमित शाह ने भरोसा दिलाया है कि बुधवार से ही CBI जांच शुरू हो जाएगी और 2029 तक पंजाब को नशा मुक्त कर दिया जाएगा। वहीं संगरूर में गुलजार सिंह के बेटे लखविंदर सिंह ने बताया कि पिता ने मरने से पहले बनाए वीडियो में वित्त मंत्री का नाम लिया था, लेकिन पुलिस ने अब तक कोई कार्रवाई नहीं की।
भाजपा सांसद की बड़ी मांग
भाजपा राज्यसभा सांसद विक्रमजीत सिंह साहनी ने गृहमंत्री से मांग की है कि आरोपी अश्विनी कुमार की करीब 34 करोड़ रुपए की संपत्ति सीज की जाए या फिर झोटा परिवार को सौंप दी जाए। उनका तर्क साफ है, एक परिवार ने अपना होनहार बेटा खोया है।
कांग्रेस का इंपैक्ट हुआ कमजोर
राजनीतिक विश्लेषक पवनदीप शर्मा के मुताबिक दो दिन पहले ही कांग्रेस के पंजाब प्रभारी सचिन पायलट भी झोटा के घर गए थे और कानूनी लड़ाई में साथ देने का वादा किया था। मगर अमित शाह के दौरे ने उस असर को लगभग खत्म कर दिया। अब लोगों की उम्मीदें सीधे केंद्र सरकार और CBI पर टिक गई हैं।
वहीं पूर्व कर्नल जेएस गिल का मानना है कि पंजाब सरकार ने केस CBI को सौंपकर यह कबूल कर लिया कि वह खुद इस मामले को सुलझाने में सक्षम नहीं थी। यह दर्शाता है कि राज्य की कानून-व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं।
आम आदमी पर क्या असर पड़ेगा
इस पूरे घटनाक्रम का सीधा असर उन परिवारों पर पड़ेगा जो नशे की वजह से अपने बच्चों को खो रहे हैं। अगर CBI की जांच वाकई तेज और निष्पक्ष रहती है, तो पंजाब में नशा तस्करी के बड़े नेटवर्क पर लगाम लग सकती है। मगर अगर राजनीति हावी हो गई, तो पीड़ित परिवारों का इंसाफ फिर लटक सकता है।
जानें पूरा मामला
13 अक्टूबर को केमिस्ट अश्विनी कुमार ने नशा विरोधी एक्टिविस्ट परविंदर सिंह झोटा की गोली मारकर हत्या कर दी थी। परिवार ने इंसाफ की मांग को लेकर धरना शुरू किया और शव का पोस्टमार्टम तक रोक दिया। 20 अक्टूबर को मुख्यमंत्री भगवंत मान ने केस CBI को सौंपने का ऐलान किया। इसके अगले ही दिन अमित शाह पंजाब पहुंचे, परिवार से मिले और भरोसा दिलाया कि जांच जल्द शुरू होगी। ठीक उनके जाने के छह घंटे बाद CBI की टीम आधी रात को मानसा पहुंच गई।
मुख्य बातें (Key Points)
- परविंदर सिंह झोटा हत्याकांड में CBI ने नई FIR दर्ज कर रातों-रात मानसा से रिकॉर्ड और सबूत जब्त किए।
- अमित शाह के पंजाब दौरे के छह घंटे बाद ही CBI एक्टिव हुई, जिसे राजनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है।
- गुलजार सिंह केस में वित्त मंत्री हरपाल चीमा का नाम आने से पंजाब सरकार दुविधा में फंसती दिख रही है।
- तीनों पीड़ित परिवारों ने नशा तस्करी के खिलाफ सख्त कार्रवाई और निष्पक्ष जांच की मांग की है।













