CM Bhagwant Mann ने आज एक बड़ा सियासी धमाका करते हुए सीधा आरोप लगाया कि पंजाब में नशा गुजरात से आ रहा है। यह बयान उन्होंने उस वक्त दिया, जब केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह खुद पंजाब के दौरे पर मौजूद थे। मान ने साफ कहा कि केंद्र सरकार पंजाब को बदनाम करने की साजिश रच रही है।
दिलचस्प बात यह है कि यह प्रेस कॉन्फ्रेंस ऐसे दिन हुई, जब मान फ्रांस दौरे से लौटकर सीधे मानसा पहुंचे थे और परविंदर झोटा मर्डर केस की जांच CBI को सौंपने का ऐलान किया था। यानी एक ही दिन में मुख्यमंत्री ने कई बड़े सियासी कदम उठा दिए।
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‘प्रचार के लिए आए गृहमंत्री’ : मान का सीधा तंज
समझने वाली बात है कि मान ने अमित शाह के दौरे पर सवाल नहीं उठाया, बल्कि इसके मकसद पर सवाल खड़ा किया। उन्होंने कहा कि गृहमंत्री जब मर्जी पंजाब आ सकते हैं, यह उनका अधिकार है। लेकिन भारतीय जनता पार्टी यह प्रचार कर रही है कि वे पंजाब को बचाने और नशामुक्त करने आए हैं।
मान ने दो टूक कहा कि इस दावे पर उनके कुछ सीधे सवाल गृहमंत्री से हैं, और उन्होंने उन सवालों को एक-एक करके प्रेस कॉन्फ्रेंस में सामने रखा।
2007 से 2017 तक नशे का ‘पौधा’ कैसे बना ‘पेड़’
अगर गौर करें तो मान का सबसे तीखा सवाल इतिहास से जुड़ा था। उन्होंने कहा कि जब 2007 से 2017 तक भाजपा की अकाली दल के साथ साझा सरकार थी, उसी दौरान नशे का पौधा बड़ा होकर पेड़ बन गया। क्विंटल-क्विंटल ड्रग पंजाब में आती रही, लेकिन उस समय भाजपा को पंजाब बचाने की याद नहीं आई।
मान ने यह भी याद दिलाया कि उस दौर में मजीठिया के खिलाफ CBI जांच की मांग उठी थी, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई, क्योंकि वे भाजपा के ही गठबंधन सहयोगी थे। इससे साफ होता है कि मान इतिहास के पन्ने पलटकर भाजपा को कठघरे में खड़ा करने की पूरी कोशिश में जुटे हैं।
किसान आंदोलन और 700 मौतों का जिक्र
मान यहीं नहीं रुके। उन्होंने किसान आंदोलन का हवाला देते हुए कहा कि जब केंद्र के कृषि कानूनों के खिलाफ दिल्ली की दहलीज पर डेढ़ साल तक धरना चला, उस दौरान 700 से अधिक किसानों की जान चली गई। सवाल उठता है कि उस वक्त केंद्र सरकार उनके घर जाकर हमदर्दी क्यों नहीं जता पाई।
मान ने दावा किया कि पंजाब सरकार ने पीड़ित किसान परिवारों को पांच-पांच लाख रुपये का मुआवजा और सरकारी नौकरियां दी हैं। यह बताकर उन्होंने अपनी सरकार की संवेदनशीलता को सामने रखने की कोशिश की।
राज्यों के आरोपों की पूरी सूची, एक नजर में
समझने के लिए मान द्वारा लगाए गए राज्य-वार आरोपों को नीचे टेबल में देखा जा सकता है:
| राज्य/संस्था | मान का आरोप |
|---|---|
| राजस्थान | आज देश में सबसे ज्यादा नशा यहीं मौजूद |
| हरियाणा | गैंगस्टरों की नर्सरी बन चुका है |
| गुजरात | यहीं से नशा पंजाब में आ रहा है |
| अडानी पोर्ट | यहां से 3,000 किलो तक की खेप पकड़ी गई |
| पाकिस्तान सीमा | BSF के अधीन होने के बावजूद नशा नहीं रुका |
अडानी पोर्ट और BSF पर सीधा निशाना
दिलचस्प बात यह है कि मान ने इस बार सीधे कारोबारी जगत को भी निशाने पर लिया। उन्होंने कहा कि गुजरात से नशा आ रहा है और गृहमंत्री के दोस्त अडानी के पोर्ट से तीन-तीन हजार किलो की खेप पंजाब पुलिस खुद पकड़ती रही है। सवाल यह है कि इसे रोकने की जिम्मेदारी किसकी बनती है।
मान ने याद दिलाया कि सीमा से 50 किलोमीटर के दायरे में BSF की जिम्मेदारी है, फिर भी पाकिस्तान से आने वाले नशे को रोकने के लिए केंद्र सरकार कुछ खास नहीं कर पा रही। उनका कहना था कि गृहमंत्री को पंजाब सिर्फ वोट के समय ही याद आता है।
आम आदमी के लिए क्यों अहम है यह बहस?
पंजाब में नशे का मुद्दा अब सिर्फ राजनीतिक बयानबाजी नहीं रहा, बल्कि हर घर की चिंता बन चुका है। जब राज्य और केंद्र सरकार एक-दूसरे पर आरोप लगाने में व्यस्त रहती हैं, तो असल नुकसान उन परिवारों का होता है जो पहले ही नशे की वजह से अपने प्रियजन खो चुके हैं।
सियासी आरोप-प्रत्यारोप या ठोस समाधान की उम्मीद?
यह दर्शाता है कि नशे जैसा गंभीर मुद्दा अब पूरी तरह राजनीतिक मैदान में तब्दील हो चुका है। एक तरफ केंद्र सरकार पीड़ित परिवारों से मिलकर सहानुभूति जता रही है, तो दूसरी तरफ राज्य सरकार इतिहास के आंकड़े गिनाकर जवाबी हमला बोल रही है। उम्मीद की किरण यही है कि इस आरोप-प्रत्यारोप के बीच कहीं असली मुद्दा, यानी नशे की सप्लाई चेन को तोड़ना, पीछे न छूट जाए।
जानें पूरा मामला
दरअसल अमित शाह आज पंजाब के तीन पीड़ित परिवारों से मिलने पहुंचे थे, जिनके सदस्यों ने नशे के खिलाफ आवाज उठाने की कीमत जान देकर चुकाई। इसी दौरे के बीच CM भगवंत मान ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर केंद्र सरकार पर पलटवार किया और दावा किया कि पंजाब में आने वाला नशा दरअसल भाजपा शासित राज्यों से आ रहा है। यह बयान पंजाब की सियासत में नया मोड़ ला दिया है।
मुख्य बातें (Key Points)
- CM भगवंत मान ने आरोप लगाया कि पंजाब में गुजरात से नशा आ रहा है
- मान ने 2007-2017 के अकाली-भाजपा शासन में नशे के बढ़ने का आरोप दोहराया
- किसान आंदोलन में 700 से अधिक मौतों का हवाला देकर केंद्र को घेरा
- अडानी पोर्ट और BSF की भूमिका पर भी सीधे सवाल उठाए गए










