Rajbir Ghumman ED Case Jalandhar : पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान के OSD राजबीर सिंह घुम्मन को लेकर प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ा कदम उठाया है। ED ने जालंधर स्थित अपने क्षेत्रीय कार्यालय से इस मामले में आधिकारिक तौर पर केस दर्ज कर लिया है। यह कार्रवाई इसलिए चौंकाने वाली है क्योंकि महज 24 घंटे पहले ही सुप्रीम कोर्ट ने घुम्मन को गिरफ्तारी से अंतरिम सुरक्षा प्रदान की थी, लेकिन ED ने अपनी जांच को आगे बढ़ाने में कोई देरी नहीं की।
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सुप्रीम कोर्ट की राहत के बीच ED का बड़ा दांव
देखा जाए तो यह पूरा घटनाक्रम पिछले कुछ हफ्तों से चल रहे एक गहरे राजनीतिक-कानूनी संघर्ष का हिस्सा है। 12 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट ने राजबीर घुम्मन को यह कहते हुए बड़ी राहत दी थी कि जब तक आगे कोई आदेश नहीं आता, उन्हें गिरफ्तारी या किसी भी कठोर कार्रवाई से बचाया जाए। यह आदेश पंजाब सरकार द्वारा दायर SLP (Special Leave Petition) पर आया था, जिसमें सरकार ने पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के 5 अक्टूबर के उस आदेश को चुनौती दी थी जिसमें कोर्ट ने CBI को जांच सौंपी थी।
और बस यहीं से शुरू हुई असली रस्साकशी… हाईकोर्ट ने ED की ओर से दी गई जानकारी को “अपराध की ओर इशारा करने” वाला बताते हुए CBI को दो महीने में स्टेटस रिपोर्ट देने का आदेश दिया था। लेकिन तब से लेकर अब तक मामले में कई नए मोड़ आ चुके हैं।
ED की जांच: तीन चिट्ठियों से खुला पूरा खेल
दिलचस्प बात यह है कि ED की यह जांच अचानक शुरू नहीं हुई। एजेंसी ने जुलाई-अगस्त 2026 में ही पंजाब के DGP गौरव यादव को तीन अलग-अलग चिट्ठियां भेजकर CM ऑफिस में कथित भ्रष्टाचार की शिकायत की थी। इन चिट्ठियों में क्या-क्या आरोप लगाए गए थे, यह जानना बेहद जरूरी है:
| आरोप का क्षेत्र | कथित गतिविधि | संबंधित व्यक्ति/संस्था |
|---|---|---|
| ट्रांसफर-पोस्टिंग | सरकारी कर्मचारियों के तबादले में पैसा लेना | राजबीर घुम्मन, नितिन गोहल |
| नीतिगत फैसले | सरकारी नीतियों को प्रभावित करना | CM ऑफिस के अधिकारी |
| टेंडर और CLU | सरकारी टेंडर और भूमि उपयोग में दखल | GMADA, रियल एस्टेट कंपनियां |
| डिजिटल सबूत | WhatsApp चैट में साजिश | नितिन गोहल (बिचौलिया) |
ED का दावा है कि नितिन गोहल नाम का व्यक्ति उन लोगों और OSD राजबीर घुम्मन के बीच कथित बिचौलिया का काम करता था जो सरकारी काम करवाना चाहते थे। तलाशी के दौरान गोहल के ठिकानों से 20.98 लाख रुपये नकद, दस्तावेज और डिजिटल सामग्री बरामद हुई है। यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि ED ने WhatsApp चैट को ही मुख्य सबूत बनाया है, जिसमें ट्रांसफर, पॉलिसी फैसले और टेंडर की बातचीत दर्ज है।
जालंधर ED ऑफिस: नया केंद्र बना राजनीतिक गर्माहट का
समझने वाली बात है कि ED ने अपने जालंधर रीजनल ऑफिस से यह केस दर्ज कराया है, न कि चंडीगढ़ या दिल्ली से। इसका एक राजनीतिक और तकनीकी दोनों मायने निकलते हैं। तकनीकी रूप से, अगर मामले में GMADA (ग्रेटर मोहाली एरिया डवलपमेंट अथॉरिटी) की जमीन और प्रॉपर्टी डील्स शामिल हैं, तो जालंधर का ऑफिस इस क्षेत्र की जांच के लिए जिम्मेदार हो सकता है। लेकिन राजनीतिक रूप से, यह संदेश देता है कि एजेंसी इसे सिर्फ एक “राजधानी केंद्रित” मामला नहीं मान रही।
इसका मतलब है कि अब जांच का दायरा बढ़ गया है। विपक्षी दल जहां इसे आम आदमी पार्टी सरकार पर हमला करने का मौका समझ रहे हैं, वहीं सत्ता पक्ष को अब दोहरी चुनौती का सामना करना पड़ेगा—ए तो सुप्रीम कोर्ट में चल रही कानूनी लड़ाई और दूसरा ED की आजाद जांच।
क्या है पृष्ठभूमि
यह मामला असल में पिछले सालों से चले आ रहे CM ऑफिस में कथित अनियमितताओं की एक लंबी कड़ी का हिस्सा है। जब से भगवंत मान की सरकार आई है, ट्रांसफर-पोस्टिंग और नौकरशाही में “बिचौलियों” की भूमिका को लेकर सवाल उठते रहे हैं। ED का यह कदम उन सवालों को और भी गंभीर बना देता है क्योंकि अब यह सिर्फ आरोप नहीं, बल्कि एक आधिकारिक जांच में बदल चुका है। अगली सुनवाई तक सबकी निगाहें टिकी रहेंगी—क्या ED की जांच में कोई ठोस सबूत मिल पाएगा या यह राजनीतिक दबाव का हथियार बनकर रह जाएगा?
मुख्य बातें (Key Points)
- प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने OSD राजबीर सिंह घुम्मन मामले में जालंधर में आधिकारिक केस दर्ज कर लिया है।
- यह कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट की ओर से घुम्मन को गिरफ्तारी से अंतरिम राहत मिलने के अगले ही दिन हुई।
- ED ने DGP गौरव यादव को भेजी तीन चिट्ठियों में CM ऑफिस में ट्रांसफर, टेंडर और CLU में कथित दखल का आरोप लगाया है।
- नितिन गोहल को ED ने बिचौलिया बताया है और उससे 20.98 लाख रुपये नकद बरामद होने का दावा किया है।












