UPI MDR Charges Postponed : नेशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने त्योहारी सीजन को ध्यान में रखते हुए UPI पर लगने वाले मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) चार्ज को अस्थायी रूप से दिवाली तक के लिए टाल दिया है। जिसे पहले 15 अक्टूबर 2026 से लागू कर दिया जाना था—जिसके तहत ₹2,000 से अधिक के पेमेंट पर व्यापारियों से 0.4% शुल्क वसूला जाना था—उसे अब त्योहारों के बाद किसी तारीख से लागू किया जाएगा, हालाँकि अभी नई तारीख की घोषणा नहीं हुई है।
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त्योहारी मौके पर NPCI का बड़ा फैसला
देखा जाए तो NPCI का यह फैसला काफी समझदारी भरा है। दिवाली, धनतेरस और भाई दूज जैसे त्योहारों का सीजन शुरू होने वाला है, जब UPI ट्रांजैक्शन्स में 30-40% की वृद्धि होती है। ऐसे में अगर अचानक से MDR चार्ज लग जाता तो छोटे-बड़े दुकानदारों में भ्रम का माहौल बन सकता था और ग्राहकों को भी परेशानी होती।
और बस यहीं से शुरू हुई असली कहानी… NPCI ने तय किया है कि “पीक सीजन” के दौरान किसी भी तरह का नया बोझ नहीं डाला जाएगा। यह फैसला खासतौर पर उन लाखों छोटे व्यापारियों के लिए राहत भरा है जो अभी डिजिटल पेमेंट्स के अभ्यस्त हो रहे हैं और उन्हें डर था कि चार्ज लगने से उनका मार्जिन घट जाएगा।
MDR चार्ज क्या है और किसे देना होता है?
समझने वाली बात है कि मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) क्या होता है। यह वह फीस है जो कोई भी दुकानदार या व्यापारी डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड या UPI जैसे डिजिटल पेमेंट एक्सेप्ट करने के बदले बैंक और पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर्स (जैसे PhonePe, Google Pay, Paytm) को देता है।
दिलचस्प बात यह है कि यह चार्ज ग्राहक को नहीं, बल्कि व्यापारी को देना होता है। मतलब आप जब भी ₹2,000 से ज्यादा का Uपेमेंट करेंगे, तो दुकानदार को उस रकम का 0.4% बैंक को देना होगा। यह फीस डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर—सर्वर, नेटवर्क, सिक्योरिटी—को चलाने के खर्च को पूरा करने के लिए ली जाती है।
| पेमेंट राशि | MDR चार्ज (आम व्यापारी) | विशेष सेक्टर (रेल/टेलीकॉम/इंश्योरेंस/फ्यूल) |
|---|---|---|
| ₹2,000 तक | ₹0 (फ्री) | ₹0 (फ्री) |
| ₹2,001 – ₹74,999 | 0.4% + 18% GST | ₹5 फ्लैट |
| ₹75,000 या इससे अधिक | अधिकतम ₹300 + 18% GST | ₹5 फ्लैट |
नोट: यह चार्ज केवल उन व्यापारियों पर लागू होगा जिनका मासिक UPI कलेक्शन ₹1 लाख से अधिक है।
छोटे व्यापारियों को मिलेगी छूट
अगर गौर करें तो सरकार ने छोटे दुकानदारों का खास ख्याल रखा है। जिन व्यापारियों का महीने का कुल UPI कलेक्शन ₹1 लाख तक है, उन्हें ₹2,000 से ऊपर के भी ट्रांजैक्शन पर कोई भी चार्ज नहीं देना होगा। यानी अगर आप एक मोहल्ले की किराना दुकान चलाते हैं और महीने में ₹80,000-90,000 का UPI से पेमेंट लेते हैं, तो आप पूरी तरह से इस चार्ज से बचे रहेंगे—चाहे ग्राहक ₹5,000 का भी पेमेंट क्यों न कर दे।
लेकिन यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि यह छूट “स्थायी” नहीं है। अगर कोई छोटा दुकानदार लगातार 3 महीने तक ₹1 लाख से ज्यादा का कलेक्शन करता है, तो बैंक ऑटोमेटिक उसे “बड़े मर्चेंट” कैटेगरी में शिफ्ट कर देगा, और फिर उस पर भी 0.4% वसूला जाएगा। यह एक तरह का “प्रमोशन-डिमोशन” सिस्टम है जो हर तीन महीने में अपडेट होगा।
बड़े ट्रांजैक्शन पर ₹300 की कैपिंग
इसका मतलब है कि अगर कोई ग्राहक ₹1 लाख या ₹2 लाख का सामान खरीदता है, तो दुकानदार को 0.4% (यानी ₹400 या ₹800) नहीं देना होगा। सरकार ने ₹75,000 से ऊपर के पेमेंट के लिए एक सीलिंग (कैप) लगा दी है—चाहे पेमेंट ₹1 लाख का हो या ₹10 लाख का, अधिकतम ₹300 + 18% GST (कुल ₹354) ही वसूला जाएगा।
हैरान करने वाली बात यह है कि यह चार्ज क्रेडिट कार्ड (1.5-2.5%) और डेबिट कार्ड (0.9%) के MDR के मुकाबले बहुत कम है। मतलब UPI अभी भी सबसे सस्ता डिजिटल पेमेंट माध्यम बना रहेगा, खासकर बड़ी रकमों के लिए।
कितने ट्रांजैक्शन होंगे प्रभावित?
आंकड़ों की बात करें तो ₹2,000 से बड़े UPI पेमेंट्स कुल संख्या के हिसाब से केवल 5% से भी कम हैं। यानी 100 में से सिर्फ 4-5 ट्रांजैक्शन ऐसे हैं जो इस चार्ज के दायरे में आएंगे। लेकिन यहां वैल्यू की बात अलग है—यही 5% ट्रांजैक्शन कुल UPI वैल्यू का लगभग 67% हिस्सा बनाते हैं!
यह हर महीने करीब ₹6 लाख करोड़ का खेल है—जो पूरे देश के कुल UPI वॉल्यूम का 20% है। तो समझा जा सकता है कि भले ही ट्रांजैक्शन कम हैं, लेकिन पैसों का बड़ा हिस्सा इन्हीं बड़े पेमेंट्स से आता है, और इसीलिए बैंक और पेमेंट कंपनियां इस पर अड़ी हुई थीं।
विरोध के बाद सरकार ने किया था प्रस्ताव
दरअसल, जब सरकार ने पहली बार यह प्रस्ताव रखा था, तो कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) और अन्य व्यापारी संगठनों ने जोरदार विरोध किया था। उनका कहना था कि यह छोटे व्यापारियों पर डबल बोझ डालेगा—पहले GST अब MDR। विपक्षी नेताओं ने भी इसे “डिजिटल इंडिया को कमजोर करने” की साजिश बताया था।
लेकिन सरकार का तर्क था कि 2021-22 में शुरू हुई UPI इंसेंटिव स्कीम पर अब तक ₹8,276 करोड़ खर्च हो चुके हैं, और अब सिस्टम को “सेल्फ-सस्टेनेबल” बनाने की जरूरत है। जून 2026 तक देश में 55.5 करोड़ UPI यूजर्स हो चुके हैं—अब इतने बड़े नेटवर्क को चलाना सरकार अकेले नहीं सकती।
क्या है पृष्ठभूमि
भारत में UPI क्रांति 2016 के डेमोनेटाइजेशन के बाद शुरू हुई थी, लेकिन असली तेजी 2020 के बाद आई। सरकार ने शुरुआत में लोगों को UPI अपनाने के लिए कई इंसेंटिव दिए—जैसे छोटे व्यापारियों को ₹2,000 तक के पेमेंट पर 0.15% कैशबैक। लेकिन अब जब सिस्टम मैच्योर हो गया है, तो “फ्री की पार्टी” खत्म करने की तैयारी चल रही है। MDR चार्ज लागू होने से पेमेंट ऐप्स (PhonePe, GPay, Paytm, CRED) को अपने रेवेन्यू मॉडल को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी, और यह लंबे समय में डिजिटल इकोसिस्टम को ज्यादा मजबूत भी बनाएगा। फिलहाल, दिवाली तक की राहत ने सबकी सांस फुली रखी है।
मुख्य बातें (Key Points)
- NPCI ने 15 अक्टूबर से लागू होने वाले UPI MDR चार्ज (0.4%) को दिवाली तक के लिए टाल दिया है।
- यह चार्ज केवल ₹2,000 से अधिक के पेमेंट पर और वो भी उन व्यापारियों पर लगेगा जिनका मासिक कलेक्शन ₹1 लाख से ज्यादा है।
- छोटे व्यापारी (₹1 लाख तक मासिक कलेक्शन) और ₹2,000 तक के सभी पेमेंट पर कोई चार्ज नहीं लगेगा।
- ₹75,000 से अधिक के पेमेंट पर अधिकतम ₹300 + 18% GST की सीमा होगी, जबकि रेलवे/टेलीकॉम/इंश्योरेंस/फ्यूल पर सिर्फ ₹5 फ्लैट फीस लगेगी।













