Parvinder Jhota Murder Case : पंजाब के मानसा जिले में मंगलवार (13 अक्टूबर 2026) की सुबह एंटी-ड्रग टास्क फोर्स के संचालक परविंदर सिंह झोटा (45) की एक मेडिकल स्टोर मालिक अश्वनी कुमार ने तीन गोली मारकर निर्मम हत्या कर दी। नशा बेचने के खिलाफ अभियान चलाने वाले झोटा की हत्या के बाद मानसा शहर में भारी तनाव है, स्कूलों को बंद करना पड़ा है, और मुख्यमंत्री भगवंत मान को तुरंत प्रदेश के सभी एसएसपी और डीसी के साथ हाई-लेवल सुरक्षा मीटिंग बुलानी पड़ी है।
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घटनाक्रम: सुबह की बहस बनी मौत की वजह
देखा जाए तो यह पूरा मामला महज एक छोटी सी बहस से शुरू हुआ था, लेकिन कुछ ही मिनटों में वह खूनखराबे में बदल गया। परविंदर सिंह झोटा सुबह करीब 10 बजे अपने ही इलाके की एक मेडिकल दुकान पर पहुंचे थे। उन्हें शक था कि दुकानदार अश्वनी कुमार वहां नशीली दवाओं का अवैध कारोबार कर रहा है। झोटा ने फेसबुक लाइव पर भी यह पूरा घटनाक्रम रिकॉर्ड करना शुरू कर दिया था, जिसमें वह दुकानदार से कह रहे थे, “बाबा नशा लेकर आया है, निकाल ले पिस्टल, मार दे फायर।”
और बस यहीं से शुरू हुई असली कहानी… लगभग चार मिनट की गर्मागर्म बहस के बाद अश्वनी ने अचानक पिस्टल निकाली और झोटा पर तीन गोलियां दाग दीं—दो पेट में और एक जांघ में। वहां मौजूद एक चश्मदीद के मुताबिक, झोटा करीब 10 मिनट तक खून से लथपथ दुकान के बाहर तड़पते रहे, लेकिन न तो एंबुलेंस पहुंची और न ही पुलिस। बाद में एक दूसरे दुकानदार ने अपनी गाड़ी में उन्हें सिविल अस्पताल मानसा पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
पुलिस-जनता टकराव: अस्पताल में बना तनावपूर्ण माहौल
इस हत्य की खबर जैसे ही फैली, मानसा का पूरा माहौल बदल गया। झोटा के समर्थक और परिजन सिविल अस्पताल के बाहर जुड़ने लगे। उन्होंने शहर बंद का ऐलान कर दिया और पोस्टमॉर्टम न करवाने पर अड़ गए। दिलचस्प बात यह है कि उनकी मांग थी कि झोटा का शव उन्हें सौंप दिया जाए, लेकिन पुलिस को डर था कि भीड़ शव को सड़क पर रखकर प्रदर्शन करेगी।
एसएसपी वैभव चौधरी खुद मौके पर पहुंचे और घायलों से मिले, लेकिन स्थिति पर काबू पाना मुश्किल हो रहा था। एक तरफ जहां झोटा के पिता भीमसेन ने कहा, “न बेटा बिका, न मैं बिकूंगा,” वहीं दूसरी ओर मां रोते-बिलखते कह रही थीं कि बेटे ने घर से निकलते वक्त कहा था, “मां, ये मुझे मार देंगे, मेरा खाना तैयार रखना।”
राजनीतिक गरमाहत: विपक्ष ने सरकार पर साधा निशाना
इस घटना ने सिर्फ एक अपराधिक मामला होने की बजाय पंजाब की राजनीति में भी भूचाल ला दिया। पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने तुरंत आम आदमी पार्टी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि “आप हटाओ, पंजाब की जवानी बचाओ” अब घर-घर का नारा बन गया है। उन्होंने युवाओं में बढ़ते एड्स के मामलों का भी जिक्र करते हुए कहा कि शादी से पहले एचआईवी टेस्ट की मांग उठ रही है—यह सरकारी विफलता का सबूत है।
भाजपा के राज्य अध्यक्ष केवल ढिल्लों ने तो यहां तक कह दिया कि पंजाब में “जंगलराज” चल रहा है। अकाली दल ने लॉ एंड ऑर्डर पूरी तरह फेल होने का आरोप लगाया। वहीं, हरसिमरत कौर बादल ने कहा कि एक एक्टिविस्ट की मौत ने पूरे ऑपरेशन क्लीन की पोल खोल दी है।
CM भगवंत मान की Emergency Response
हैरान करने वाली बात यह है कि इस हत्या के सिर्फ कुछ घंटों बाद ही मुख्यमंत्री भगवंत मान ने ऐक्शन मोड में आ गए। उन्होंने पूरे पंजाब के सभी जिलों के डिप्टी कमिशनर्स और एसएसपी को तुरंत ऑनलाइन हाई-लेवल मीटिंग में शामिल होने का आदेश दिया।
समझने वाली बात है कि यह मीटिंग सिर्फ इस एक मामले को लेकर नहीं बुलाई गई है—इसके पीछे एक बड़ा राजनीतिक दबाव भी है। महज 13 दिन पहले ही 30 सितंबर को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने जालंधर में घोषणा की थी कि 31 दिसंबर 2029 तक पंजाब को ड्रग्स से पूरी तरह मुक्त कर दिया जाएगा, और अब एक एंटी-ड्रग एक्टिविस्ट की हत्या ने सरकार की कार्यशीलता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
झोटा कौन थे: 2023 से चल रहा था अभियान
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि परविंदर सिंह झोटा कोई आम आदमी नहीं थे। साल 2023 में उन्होंने मानसा और आसपास के इलाकों में मेडिकल स्टोरों पर प्रतिबंधित कैप्सूल बेचने के खिलाफ अभियान शुरू किया था। 12 जुलाई 2023 को उन्होंने इसी अश्वनी कुमार (जिसने अब उनकी हत्या की) को नशा बेचते पकड़ा था और उसके गले में जूतों की माला पहनाकर बाजार में घुमाया था। उस वीडियो ने पूरे पंजाब में तहलका मचा दिया था।
15 जुलाई 2023 को उन्हें गिरफ्तार किया गया था, लेकिन सितंबर 2023 में वो जेल से बाहर आ गए। तब से वो फिर से अपने अभियान में जुट गए थे। उनके पिता का कहना है कि उनका बेटा अरबों रुपये के आगे भी झुकने वाला नहीं था—वो न बिका और न ही किसी से डरता था।
| घटना का समय | मुख्य घटनाक्रम | स्थिति/परिणाम |
|---|---|---|
| 12 जुलाई 2023 | झोटा ने अश्वनी कुमार को जूतों की माला पहनाई | वायरल हुआ, विवाद शुरू |
| 15 जुलाई 2023 | झोटा की गिरफ्तारी (मारपीट/जबरन प्रवेश) | जेल भेजा गया |
| सितंबर 2023 | अदालत के आदेश पर रिहा | फिर से अभियान शुरू |
| 13 अक्टूबर 2026 | अश्वनी ने झोटा को 3 गोली मारी | मौत, शहर बंद, राजनीतिक संकट |
मौजूदा स्थिति: आरोपी फरार, तलाश जारी
फिलहाल, मानसा पुलिस पूरे इलाके में आरोपी अश्वनी कुमार की तलाश में जुटी हुई है। घटना के बाद से वो फरार है। बठिंडा के DIG हरजीत सिंह भी मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायzaा ले चुके हैं। जिला प्रशासन ने सभी स्कूलों की छुट्टी कर दी है ताकि बच्चों को किसी तरह की अनहोनी से बचाया जा सके।
इसका मतलब है कि अगले कुछ घंटे बेहद नाजुक होने वाले हैं। एक तरफ झोटा के समर्थक अंतिम संस्कार करने से इनकार कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर राजनीतिक दलों ने मौके का फायदा उठाना शुरू कर दिया है। अखिल भारतीय जीव रक्षा बिश्नोई सभा ने तो यहां तक कह दिया है कि पुलिस ने पहले ही इतनी सख्त कार्रवाई क्यों नहीं की, जबकि आरोपी खुलेआम नशा बेच रहा था।
क्या है पृष्ठभूमि
यह मामला सिर्फ एक हत्यकांड नहीं है, बल्कि पंजाब में चल रहे नशे के खिलाफ संघर्ष और राजनीतिक दर्द की कहानी है। परविंदर सिंह झोटा एक सामान्य नौजवान थे जिन्होंने अपने इलाके को नशे मुक्त देखना चाहा। उनका तरीका शायद कड़ा था—लोगों को जूतों की माला पहनाना, सोशल मीडिया पर लाइव करना—लेकिन उनका मकसद साफ था। अब जब वो नहीं रहे, तो सवाल यह है कि क्या उनका संघर्ष व्यर्थ गया या उनकी शहादत से एक नई क्रांति शुरू होगी? सीएम भगवंत मान की बैठक से कुछ ठोस निर्णय निकलता है या यह सिर्फ एक और राजनीतिक खाना-पूर्ति बनकर रह जाएगा—यह वक्त ही बताएगा।
मुख्य बातें (Key Points)
- परविंदर सिंह झोटा (45), एंटी-ड्रग टास्क फोर्स संचालक, की मानसा में 13 अक्टूबर 2026 को गोली मारकर हत्या कर दी गई।
- आरोपी अश्वनी कुमार (मेडिकल स्टोर मालिक) ने नशा बेचने के विरोध को लेकर हुई बहस के दौरान 3 गोलियां दागीं और फरार हो गया।
- मुख्यमंत्री भगवंत मान ने तुरंत प्रदेश के सभी एसएसपी और डीसी के साथ आपातकालीन हाई-लेवल सुरक्षा मीटिंग बुलाई।
- घटना के बाद मानसा शहर में तनावपूर्ण माहौल है, स्कूल बंद हैं, और झोटा के समर्थक पोस्टमॉर्टम न करवाने पर अड़े हुए हैं।













