Punjab DA Arrears Contempt Notice : पंजाब के लगभग 7.5 लाख सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स के महंगाई भत्ता (DA) और महंगाई राहत (DR) के बकाया भुगतान न करने के मामले में पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने सोमवार को सख्त रुख अपाते हुए राज्य सरकार को Criminal Contempt (आपराधिक अवमानना) का औपचारिक नोटिस जारी कर दिया है। जस्टिस विनोद एस. भारद्वाज और जस्टिस रविंद्र मलिक की डिवीजन बेंच ने सरकार को 27 अक्टूबर तक अपना जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है, जबकि मामले की अगली सुनवाई 30 अक्टूबर को होगी।
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हाईकोर्ट के आदेश को ताक पर रखने का आरोप
यह मामला 8 अप्रैल के उस फैसले से शुरू हुआ था, जिसमें हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार को केंद्र सरकार की तर्ज पर All India Services के अधिकारियों की तरह अपने कर्मचारियों को DA/DR जारी करने के हुक्म दिए थे। इसके बाद 3 अगस्त को तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश अश्वनी कुमार मिश्रा और जस्टिस रोहित कपूर की बेंच ने सरकार की अपील खारिज करते हुए 15 दिनों के अंदर बकाया अदा करने के हुक्म दिए थे।
देखा जाए तो, इन दोनों फैसलों के बावजूद सरकार ने न तो भुगतान किया और न ही कोई सकारात्मक कदम उठाया। दिलचस्प बात यह है कि, बजाय अदालती आदेशों का पालन करने के, सरकार ने 28 अखबारों में इश्तिहार छापे और वित्त विभाग ने एक पत्र जारी करके यह घोषित कर दिया कि हाईकोर्ट का कोई भी आदेश उनकी ‘प्रवानगी’ (approval) के बिना लागू नहीं किया जाएगा।
झूठे हलफनामे और अदालत का गुस्सा
इस मामले में पंजाब के मुख्य सचिव द्वारा सुप्रीम कोर्ट में SLP (Special Leave Petition) दाखिल करने संबंधी दिए गए हलफनामे को हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री रिपोर्ट के आधार पर झूठा पाया था। यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि जब सरकार की ओर से सीनियर एडवोकेट विकास सिंह ने मुख्य सचिव की ओर से बिना शर्त माफी मांगने की पेशकश की, तो अदालत और मुलजिमों (कर्मचारियों) के वकीलों ने इसे खारिज कर दिया।
उनका कहना था कि अदालती कार्यवाही को गुमराह करने वाले ऐसे गंभीर मामले में माफी कबूल नहीं की जा सकती। समझने वाली बात यह है कि अदालत को लगा कि सरकार जानबूझकर समय खींच रही है ताकि आगामी विधानसभा चुनावों के लिए मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट लग जाए और फिर वो ‘चुनावी आचार संहिता’ का बहाना बनाकर भुगतान में और देरी कर सके।
Amicus Curiae नियुक्त और कड़ी चेतावनी
हाईकोर्ट ने इस मामले में सहायता के लिए सीनियर एडवोकेट आर.एस. चीमा को ‘Amicus Curiae’ (अदालत का मित्र) के रूप में नियुक्त किया है। अब यह देखना होगा कि 27 अक्टूबर तक सरकार क्या जवाब पेश करती है। अगर जवाब संतोषजनक नहीं मिला, तो हाईकोर्ट सरकार के शीर्ष अधिकारियों के खिलाफ सीधी कार्रवाई कर सकती है, जिसमें जेल की सजा तक शामिल हो सकती है।
जानें पूरा मामला: क्या है DA Arrears विवाद?
पंजाब में करीब 7.5 लाख सरकारी कर्मचारी और पेंशनर्स लंबे समय से मांग कर रहे थे कि उन्हें केंद्र सरकार के कर्मचारियों की तरह ही Dearness Allowance (DA) की दरें मिलनी चाहिए। अदालत ने भी इसे न्यायसंगत माना था, लेकिन राज्य सरकार खजाने के अभाव और अन्य कारणों से भुगतान में देरी करती रही, जिसे अदालत ने ‘अवमानना’ माना है।
मुख्य बातें (Key Points)
- Criminal Contempt Notice: पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच (जस्टिस भारद्वाज और जस्टिस मलिक) ने 27 अक्टूबर तक जवाब मांगा है।
- 7.5 लाख प्रभावित: सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स का DA/DR बकाया लंबित है।
- झूठा हलफनामा: मुख्य सचिव का SLP संबंधी हलफनामा SC रजिस्ट्री रिपोर्ट से झूठा पाया गया।
- चुनावी चाल: कर्मचारियों के वकीलों का आरोप – सरकार चुनावी आचार संहिता लगने तक मामला लम्बाना चाहती है।













