GMADA ED Raid मामले में पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने आज एक बड़ा फैसला सुनाते हुए प्रवर्तन निदेशालय (ED) को नोटिस जारी कर दिया है। चीफ जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा और जस्टिस रोहित कपूर की डिवीजन बेंच ने ED को 15 दिन के अंदर जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है। अगली सुनवाई 28 अक्टूबर को होगी।
50 घंटे की छापेमारी ने मचाई हलचल, अब कोर्ट ने उठाए सवाल
दिलचस्प बात यह है कि यह पूरा मामला 22 से 24 सितंबर की उस छापेमारी से जुड़ा है, जब ED की टीम ने लगातार करीब 50 घंटे तक GMADA (ग्रेटर मोहाली एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी) के दफ्तर में तलाशी ली थी। इस दौरान दफ्तर के रिकॉर्ड से भरे 30 से ज्यादा बैग जब्त किए गए। इतना ही नहीं, सीनियर अफसरों के मोबाइल फोन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का डेटा भी कॉपी किया गया।
और बस यहीं से शुरू हुई असली कहानी। पंजाब सरकार ने इस पूरी कार्रवाई को हाई कोर्ट में चुनौती दे दी। याचिका को ‘जरूरी सुनवाई वाली सूची’ में डाला गया और आज इस पर सुनवाई हुई।
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238 करोड़ का बैंक घोटाला: लेकिन GMADA का क्या कसूर?
अगर गौर करें तो याचिका में एक बहुत ही अहम सवाल उठाया गया है। पंजाब सरकार का कहना है कि यह जांच ‘तिरुपति इन्फ्रा प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड’ के प्रमोटर्स से जुड़े 238 करोड़ रुपये के कथित बैंक घोटाले की CBI FIR पर आधारित है।
समझने वाली बात यह है कि इस मामले में न तो पंजाब सरकार के किसी अफसर का नाम है और न ही GMADA के किसी अधिकारी का। फिर भी ED ने GMADA दफ्तर में 50 घंटे तक तलाशी क्यों ली? यही वो सवाल है जिस पर हाई कोर्ट अब ED से जवाब चाहता है।
ED पर दुरुपयोग के गंभीर आरोप
याचिका में ED पर अपने अधिकारों के दुरुपयोग का भी आरोप लगाया गया है। कहा गया है कि ED ने सीनियर अफसरों को हिरासत में रखा, जो कानूनी सीमाओं के बाहर था। इसके अलावा याचिका में दो अहम मांगें की गई हैं: पहली, तलाशी और सर्वेक्षण की मंजूरियां रद्द की जाएं, और दूसरी, ED द्वारा कॉपी किए गए डेटा के इस्तेमाल पर रोक लगाई जाए।
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि आज कोर्ट में ED ने खुद जवाब के लिए दो हफ्ते का समय मांगा था, जिसे कोर्ट ने 15 दिन में तब्दील कर दिया।
इस मामले का बड़ा मतलब क्या है
इस पूरे प्रकरण को अगर गहराई से देखा जाए तो यह सिर्फ एक छापेमारी का मामला नहीं है। यह सवाल केंद्रीय एजेंसियों की ताकत और उसकी सीमाओं से जुड़ा है। जब किसी मामले में राज्य सरकार के अफसरों का नाम ही नहीं है, तो इतने बड़े पैमाने पर कार्रवाई का औचित्य क्या है? यह सवाल आने वाले दिनों में और भी जोर पकड़ सकता है।
28 अक्टूबर को होने वाली अगली सुनवाई में ED का जवाब आने के बाद ही तस्वीर साफ होगी कि क्या यह कार्रवाई कानूनी दायरे में थी या नहीं।
जानें पूरा मामला
GMADA यानी ग्रेटर मोहाली एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी पंजाब का एक प्रमुख शहरी विकास प्राधिकरण है जो मोहाली और आसपास के इलाकों में जमीन और रियल एस्टेट से जुड़े कामकाज को संभालता है। ED ने 22 से 24 सितंबर तक इसके दफ्तर में छापेमारी की थी, जिसका आधार तिरुपति इन्फ्रा प्रोजेक्ट्स से जुड़ी 238 करोड़ रुपये की CBI FIR थी।
मुख्य बातें (Key Points)
- पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने GMADA ED Raid मामले में ED को नोटिस जारी किया है।
- ED को 15 दिन के अंदर जवाब देना होगा, अगली सुनवाई 28 अक्टूबर को है।
- ED ने 22-24 सितंबर को 50 घंटे तक GMADA दफ्तर में तलाशी ली और 30 से ज्यादा बैग जब्त किए।
- यह कार्रवाई 238 करोड़ के तिरुपति इन्फ्रा बैंक घोटाले की CBI FIR पर आधारित है।
- याचिका में ED पर अधिकारों के दुरुपयोग और सीनियर अफसरों को हिरासत में रखने का आरोप लगाया गया है।













