Southwest Monsoon Withdrawal 2026 की प्रक्रिया अब आधिकारिक रूप से शुरू होने जा रही है। India Meteorological Department (IMD) ने 18 सितंबर 2026 को जारी अपने प्रेस रिलीज़ में बताया है कि दक्षिण-पश्चिम मानसून की वापसी के लिए अनुकूल परिस्थितियां बन रही हैं और 19 सितंबर के आसपास पश्चिम राजस्थान के कुछ हिस्सों से मानसून वापस होना शुरू हो सकता है।
देखा जाए तो यह भारतीय मौसम चक्र का एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। हर साल जून में केरल से शुरू होने वाला मानसून सितंबर के मध्य या अंत तक देश से वापस होना शुरू करता है। इस साल मानसून की विदाई समय पर हो रही है।
लेकिन इसके साथ ही IMD ने एक और अहम चेतावनी जारी की है। अंडमान सागर और उसके आसपास के क्षेत्र में 19 सितंबर की शाम तक एक Low Pressure Area (निम्न दबाव का क्षेत्र) बनने की संभावना है। यह सिस्टम धीरे-धीरे तीव्र होकर अगले 3-4 दिनों में पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा में दक्षिण ओडिशा और उत्तर आंध्र प्रदेश के तटों की ओर बढ़ेगा।
समझने वाली बात है कि यह सिस्टम कई राज्यों में भारी से बहुत भारी बारिश ला सकता है। पूर्वी और दक्षिणी राज्यों को विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है।
पिछले 24 घंटों में कहां हुई सबसे ज्यादा बारिश?
IMD के अनुसार 17 सितंबर सुबह 8:30 बजे से 18 सितंबर सुबह 8:30 बजे तक के 24 घंटों में देश के कई हिस्सों में भारी बारिश रिकॉर्ड की गई:
बहुत भारी बारिश (12-20 सेमी):
- पूर्वी राजस्थान: असपुर (डूंगरपुर जिला) में 20 सेमी
- सिक्किम: डिमा में 16 सेमी
- सौराष्ट्र: मलिया मियाना (मोरबी) में 13 सेमी
- बिहार: पोठिया (किशनगंज) में 13 सेमी
भारी बारिश (7-11 सेमी):
- मराठवाड़ा, गुजरात, असम, गंगीय पश्चिम बंगाल, ओडिशा, झारखंड, मध्य प्रदेश, तेलंगाना, दक्षिण आंतरिक कर्नाटक और तमिलनाडु के विभिन्न हिस्सों में
दिलचस्प बात यह है कि राजस्थान और गुजरात जैसे शुष्क और अर्ध-शुष्क राज्यों में भी काफी अच्छी बारिश हुई है, जो किसानों के लिए राहत की खबर है।
अंडमान सागर में बन रहा Low Pressure: क्या है पूरा परिदृश्य?
IMD ने बताया है कि उत्तरी थाईलैंड के ऊपर एक ऊपरी वायु चक्रवाती परिसंचरण (upper air cyclonic circulation) मौजूद है। यह सिस्टम 18 सितंबर की शाम तक उत्तरी अंडमान सागर के ऊपर आ जाएगा।
इसके प्रभाव में 19 सितंबर की शाम तक अंडमान सागर और उसके आसपास के क्षेत्र में एक Low Pressure Area बनने की संभावना है। इसके बाद यह सिस्टम धीरे-धीरे तीव्र होगा और अगले 3-4 दिनों में पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा में दक्षिण ओडिशा और उत्तर आंध्र प्रदेश के तटों की ओर बढ़ेगा।
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि IMD ने अभी तक यह नहीं कहा है कि यह Depression या Cyclonic Storm में बदलेगा। लेकिन “gradually intensify” (धीरे-धीरे तीव्र होना) का मतलब है कि इसकी निगरानी जरूरी है।
अगर गौर करें तो सितंबर-अक्टूबर का महीना बंगाल की खाड़ी में चक्रवातों के लिए अनुकूल होता है। इसलिए यह सिस्टम आगे चलकर और मजबूत हो सकता है।
कई राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट
IMD ने अगले 5-6 दिनों के लिए विभिन्न राज्यों में भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी जारी की है:
बहुत भारी बारिश (115.6-204.4 mm):
- 18 सितंबर: पूर्वी राजस्थान, उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम, गुजरात, गंगीय पश्चिम बंगाल
- 18-19 सितंबर: अंडमान-निकोबार द्वीप समूह
- 23-24 सितंबर: ओडिशा
भारी बारिश (64.5-115.5 mm):
- उत्तर-पूर्वी राज्यों, पश्चिम बंगाल, बिहार, ओडिशा, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, केरल में अलग-अलग दिनों में
| राज्य/क्षेत्र | बहुत भारी बारिश की तारीख | चेतावनी का रंग |
|---|---|---|
| पूर्वी राजस्थान | 18 सितंबर | Orange |
| गंगीय पश्चिम बंगाल | 18 सितंबर | Orange |
| अंडमान-निकोबार | 18-19 सितंबर | Orange |
| सिक्किम | 18 सितंबर | Orange |
| ओडिशा | 23-24 सितंबर | Orange |
समझने वाली बात है कि Orange Alert का मतलब है “Be Prepared” – यानी तैयार रहें और स्थिति बिगड़ने पर तुरंत कार्रवाई करें।
ओडिशा और गंगीय पश्चिम बंगाल में बिजली गिरने की चेतावनी
IMD ने 18 सितंबर को ओडिशा और गंगीय पश्चिम बंगाल में मध्यम से तीव्र बिजली गिरने (moderate to severe lightning activity) की चेतावनी जारी की है।
यह काफी गंभीर चेतावनी है क्योंकि भारत में हर साल बिजली गिरने से सैकड़ों लोगों की मौत होती है। खासकर खेतों में काम कर रहे किसान, मछुआरे और खुले में काम करने वाले मजदूर सबसे ज्यादा खतरे में होते हैं।
IMD ने सलाह दी है कि:
- बिजली चमकने पर तुरंत पेड़ों के नीचे शरण न लें
- पानी के स्रोतों से दूर रहें
- इलेक्ट्रिकल/इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को तुरंत अनप्लग करें
- बिजली का संचालन करने वाली सभी वस्तुओं से दूर रहें
मछुआरों के लिए विशेष चेतावनी
IMD ने मछुआरों को सलाह दी है कि वे निम्नलिखित क्षेत्रों में मछली पकड़ने न जाएं:
अरब सागर:
- सोमालिया तट के साथ और उसके आसपास
- दक्षिण-पश्चिम अरब सागर के कुछ हिस्से (23 सितंबर तक)
- पश्चिम-मध्य अरब सागर के कुछ हिस्से (18 सितंबर को)
बंगाल की खाड़ी:
- दक्षिण-पूर्व बंगाल की खाड़ी (23 सितंबर तक)
- अंडमान सागर (23 सितंबर तक)
- दक्षिण-पश्चिम बंगाल की खाड़ी, श्रीलंका तटों के आसपास (19-23 सितंबर)
- पूर्व-मध्य बंगाल की खाड़ी और दक्षिण म्यांमार तट (21-22 सितंबर)
कहने का मतलब साफ है कि Low Pressure System के बनने से समुद्र में लहरें ऊंची हो सकती हैं और मौसम खराब हो सकता है। मछुआरों को सतर्क रहना चाहिए।
किसानों के लिए कृषि सलाह
IMD ने विभिन्न राज्यों के किसानों के लिए विस्तृत सलाह जारी की है:
अंडमान-निकोबार:
केले और पपीते के पौधों को यांत्रिक सहारा दें। खड़ी फसलों में जलभराव से बचने के लिए उचित जल निकासी की व्यवस्था करें।
असम और मेघालय:
मक्का, उड़द, मूंग और तिल के खेतों से अतिरिक्त पानी निकालें। धान में उचित जल स्तर बनाए रखें। पपीता, केला और कमजोर तने वाली फसलों को सहारा दें।
ओडिशा:
धान, मक्का, बाजरा, अदरक, हल्दी, सब्जियों, दालों और बागानों से अतिरिक्त पानी निकालने की तुरंत व्यवस्था करें। सब्जी की नर्सरियों को सुरक्षित रखें। केले के नए पौधों के चारों ओर मिट्टी चढ़ाएं।
तेलंगाना, तटीय आंध्र प्रदेश:
केले और पपीते के पौधों को यांत्रिक सहारा दें। गन्ने में propping (सहारा देना) करें। सिंचाई, अंतर-खेती कार्य और कीटनाशक/उर्वरक का उपयोग बारिश के दौरान न करें।
पश्चिम मध्य प्रदेश:
सोयाबीन, कपास, मक्का और गन्ने के खेतों में उचित जल निकासी सुनिश्चित करें। लंबे गन्ने में गिरने से बचाने के लिए सहारा दें।
गुजरात:
गीली परिस्थितियों में सिंचाई, उर्वरक और अंतर-खेती से बचें। उचित जल निकासी सुनिश्चित करें।
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि IMD ने सिर्फ मौसम की जानकारी नहीं दी बल्कि किसानों को व्यावहारिक सलाह भी दी है। यह सराहनीय है क्योंकि भारत में कृषि मुख्य रूप से मानसून पर निर्भर है।
दिल्ली-NCR में मौसम का हाल
IMD ने दिल्ली-NCR के लिए अगले 4 दिनों का मौसम पूर्वानुमान भी जारी किया है:
18 सितंबर:
- मुख्यतः साफ आसमान, दोपहर से शाम तक आंशिक बादल
- अधिकतम तापमान: 33-35°C
- हवा: उत्तर-पश्चिम दिशा से 15 किमी/घंटा तक
19-21 सितंबर:
- आंशिक बादल छाए रहेंगे
- अधिकतम तापमान: 34-36°C
- न्यूनतम तापमान: 22-24°C
- न्यूनतम तापमान सामान्य से 1.6-3.0°C कम रहेगा
दिल्लीवासियों के लिए राहत की बात यह है कि बारिश की संभावना नहीं है और मौसम सामान्य रहेगा। लेकिन दिन का तापमान अभी भी 34-36°C के बीच रहेगा।
मानसून की वापसी का मतलब क्या?
मानसून की वापसी एक क्रमिक प्रक्रिया है। यह एकदम से पूरे देश से नहीं हट जाता। सबसे पहले यह पश्चिमी राजस्थान से हटना शुरू होता है, फिर धीरे-धीरे पूर्व और दक्षिण की ओर बढ़ता है।
मानसून वापसी की शर्तें:
- बारिश में लगातार कमी
- नमी में कमी
- पश्चिमी हवाओं का प्रभाव बढ़ना
- आसमान साफ होना
आमतौर पर पूरे देश से मानसून की वापसी अक्टूबर के पहले या दूसरे सप्ताह तक पूरी हो जाती है।
अगर गौर करें तो इस साल का मानसून समय पर वापस हो रहा है। कई बार मानसून देर से वापस होता है जो फसल चक्र को प्रभावित करता है।
क्या है आम लोगों के लिए सलाह?
IMD ने आम जनता को निम्नलिखित सलाह दी है:
मौसम बिगड़ने पर:
- स्थिति पर नजर रखें
- सुरक्षित स्थानों पर जाने के लिए तैयार रहें
बिजली चमकने पर:
- सुरक्षित आश्रय लें
- पेड़ों के नीचे शरण न लें
- इलेक्ट्रिकल उपकरण अनप्लग करें
- पानी के स्रोतों से दूर रहें
पर्यटन और मनोरंजन:
- गतिविधियों को नियमित करें
- समुद्री गतिविधियों में सतर्कता बरतें
हेलीकॉप्टर सेवाएं:
- नियमित की जाएंगी
समझने वाली बात है कि भारी बारिश के दौरान सबसे ज्यादा खतरा शहरी इलाकों में जलभराव और पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन का होता है। इसलिए लोगों को सतर्क रहना चाहिए।
मुख्य बातें (Key Points)
- 19 सितंबर से पश्चिम राजस्थान से मानसून की वापसी शुरू होगी
- अंडमान सागर में 19 सितंबर को Low Pressure Area बनने की संभावना
- यह सिस्टम 3-4 दिनों में ओडिशा-आंध्र तट की ओर बढ़ेगा
- पूर्वी राजस्थान, बंगाल, सिक्किम, अंडमान में 18 सितंबर को बहुत भारी बारिश
- ओडिशा और गंगीय बंगाल में बिजली गिरने की चेतावनी
- मछुआरों को अरब सागर और बंगाल की खाड़ी में सतर्कता बरतने की सलाह
- किसानों को फसलों में जल निकासी की व्यवस्था करने की सलाह
- दिल्ली में मौसम सामान्य रहेगा, कोई बारिश नहीं










