Bhagat Chunni Lal Demise पंजाब की राजनीति का एक युग बुधवार को समाप्त हो गया। भाजपा के सीनियर नेता और पंजाब के पूर्व कैबिनेट मंत्री भगत चुन्नी लाल का 94 साल की उम्र में गुरुवार तड़के जालंधर स्थित फोर्टिस हस्पताल में निधन हो गया। वह पिछले सात सालों से ज्यादा समय से बीमार थे और व्हीलचेयर पर थे।
देखा जाए तो भगत चुन्नी लाल सिर्फ एक राजनेता नहीं, बल्कि पंजाब की राजनीति में एक संस्था थे। उन्होंने विभाजन से लेकर आधुनिक पंजाब तक का सफर देखा और राजनीति में अपनी अमिट छाप छोड़ी।
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राजनीतिक सफर: तीन बार विधायक, कई विभागों के मंत्री
भगत चुन्नी लाल 1997, 2007 और 2012 में जालंधर पश्चिमी (पहले जालंधर दक्षिणी) हल्के से तीन बार विधायक चुने गए। 2012 से 2017 तक अकाली-भाजपा गठबंधन सरकार के दौरान वह कई अहम विभागों के मंत्री रहे।
उनके पास स्थानीय सरकारें, मेडिकल शिक्षा, वन, वन्यजीव और श्रम जैसे महत्वपूर्ण विभाग थे। समझने वाली बात यह है कि इतने विभागों को संभालना उनकी प्रशासनिक क्षमता का प्रमाण है।
विधानसभा के उपाध्यक्ष भी रहे
इसके अलावा वह पंजाब विधानसभा के डिप्टी स्पीकर के रूप में भी सेवाएं निभा चुके थे। यह पद विधानसभा की कार्यवाही को सुचारू रूप से चलाने के लिए बेहद महत्वपूर्ण होता है। इस जिम्मेदारी को निभाना उनके संतुलित और निष्पक्ष व्यक्तित्व को दर्शाता है।
विभाजन से जालंधर तक का सफर
देश की बंटवार के समय वह पाकिस्तान के सियालकोट से भारत आए थे। यहां उन्होंने खेल का सामान बनाने का कारोबार शुरू किया। जालंधर खेल के सामान के उत्पादन के लिए प्रसिद्ध है और भगत चुन्नी लाल इस उद्योग के अग्रणियों में से एक थे।
अगर गौर करें तो विभाजन के दर्द को झेलकर, शरणार्थी के रूप में आकर, खुद को स्थापित करना और फिर राजनीति में इतनी ऊंचाई तक पहुंचना – यह उनके संघर्ष और दृढ़ संकल्प की कहानी है।
पारिवारिक विरासत: बेटा AAP में मंत्री, पोता क्रिकेटर
भगत चुन्नी लाल अपने पीछे चार बेटियां और चार बेटे छोड़ गए हैं। दिलचस्प बात यह है कि उनका बेटा मोहिंदर भगत इस वक्त आम आदमी पार्टी की सरकार में कैबिनेट मंत्री है।
यह पंजाब की राजनीति की एक रोचक विडंबना है – पिता भाजपा के दिग्गज नेता थे और बेटा AAP में मंत्री है। यह दर्शाता है कि राजनीति में विचारधाराएं बदल सकती हैं, लेकिन जनसेवा का जज्बा परिवार में बना रहता है।
उनका पोता कृष भगत एक क्रिकेटर है, जो इसी साल अप्रैल में मुंबई इंडियंस के लिए खेल चुका है। यह परिवार की बहुआयामी प्रतिभा को दर्शाता है।
सात साल से चल रहे थे बीमार
भगत चुन्नी लाल पिछले सात सालों से बीमार थे और व्हीलचेयर पर थे। कई बार हस्पताल में भर्ती होने के बाद आज तड़के फोर्टिस हस्पताल में उन्होंने अंतिम सांस ली। यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि 94 साल की उम्र में भी वह जीवटता से लड़ रहे थे।
अंतिम संस्कार आज शाम
उनका अंतिम संस्कार आज शाम 5 बजे जालंधर के मॉडल हाउस के पास स्थित श्मशानघाट में किया जाएगा। राजनीतिक हलकों से लेकर व्यापारिक जगत तक शोक की लहर है।
राजनीतिक जगत में शोक
भगत चुन्नी लाल के निधन पर पंजाब के विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने शोक व्यक्त किया है। भाजपा ने अपने एक वरिष्ठ और अनुभवी नेता को खो दिया है। अकाली दल ने भी उनकी सेवाओं को याद किया।
सवाल उठता है कि क्या आज की युवा पीढ़ी ऐसे नेताओं से सीख लेगी जिन्होंने शून्य से शुरुआत करके राजनीति में शिखर तक का सफर तय किया?
एक युग का अंत
भगत चुन्नी लाल का जाना पंजाब की राजनीति में एक युग का अंत है। वह उस पीढ़ी के नेता थे जिन्होंने विभाजन का दर्द देखा, संघर्ष किया, खुद को स्थापित किया और फिर जनसेवा में अपना जीवन समर्पित कर दिया।
देखा जाए तो आज की राजनीति में ऐसे नेता दुर्लभ हो गए हैं जो व्यापार, राजनीति और सामाजिक सेवा तीनों क्षेत्रों में सफल रहे हों। उनका जीवन आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बना रहेगा।
मुख्य बातें (Key Points)
• पंजाब के पूर्व कैबिनेट मंत्री और भाजपा के सीनियर नेता भगत चुन्नी लाल का 94 साल की उम्र में जालंधर में निधन
• 1997, 2007 और 2012 में जालंधर पश्चिमी से तीन बार विधायक चुने गए, 2012-17 में स्थानीय सरकारें, मेडिकल शिक्षा, वन और श्रम मंत्री रहे
• देश के विभाजन के समय सियालकोट से आकर जालंधर में खेल के सामान का कारोबार शुरू किया
• उनका बेटा मोहिंदर भगत AAP सरकार में कैबिनेट मंत्री है और पोता कृष भगत मुंबई इंडियंस के लिए खेल चुका क्रिकेटर है
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