Ethanol Blending Program भारत में जैव ईंधन के इस्तेमाल को लेकर एक बड़ा कदम उठाने की तैयारी है। सरकार पेट्रोल में 20 फीसदी से ज्यादा इथेनॉल मिलाने की इजाजत देने पर काम कर रही है। प्रधानमंत्री के सलाहकार तरुण कपूर ने बुधवार को कहा कि इसके लिए फ्लेक्सी-फ्यूल वाहनों की वर्तों को उत्साहित किया जाएगा।
‘द इंडिया शुगर एंड बायो-एनर्जी कॉन्फ्रेंस 2026’ को वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए संबोधित करते हुए कपूर ने कहा कि देश में E20 प्रोग्राम अब तक ‘बहुत सफल’ रहा है। देखा जाए तो यह भारत की ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
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क्या है E20 और क्यों है महत्वपूर्ण?
E20 का मतलब है पेट्रोल में 20 फीसदी इथेनॉल की मिलावट। इथेनॉल एक जैव ईंधन है जो गन्ने, मक्का या अन्य कृषि उत्पादों से बनाया जाता है। यह पर्यावरण के लिए बेहतर है और कच्चे तेल पर निर्भरता कम करता है।
अगर गौर करें तो भारत अपनी जरूरत का करीब 85% कच्चा तेल आयात करता है। ऐसे में इथेनॉल जैसे स्वदेशी विकल्प आर्थिक और रणनीतिक दोनों लिहाज से फायदेमंद हैं।
अब 20% से ज्यादा मिलावट की तैयारी
तरुण कपूर ने कहा कि अब सरकार का ध्यान फ्लेक्सी-फ्यूल वाहनों की ओर है और पेट्रोल में 20 फीसदी से ज्यादा इथेनॉल मिलाने की संभावना पर काम किया जा रहा है। इसके साथ ही पेट्रोल पंपों पर शुद्ध इथेनॉल की उपलब्धता भी बढ़ानी होगी।
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि कई वाहन निर्माता जल्द ही फ्लेक्सी-फ्यूल वाहन बाजार में लाने की योजनाओं का ऐलान कर चुके हैं। ये वाहन पेट्रोल और इथेनॉल के किसी भी अनुपात पर चल सकते हैं, यहां तक कि 100% इथेनॉल पर भी।
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क्यों जरूरी है यह कदम?
पश्चिमी एशिया में चल रहे संकट के कारण कच्चे तेल की सप्लाई प्रभावित हो रही है और कीमतें करीब 100 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई हैं। इस स्थिति का हवाला देते हुए कपूर ने कहा कि देश में उपलब्ध ईंधन स्रोतों की ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल करना महत्वपूर्ण है।
समझने वाली बात यह है कि जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें बढ़ती हैं, तो भारत जैसे आयातक देशों पर भारी आर्थिक बोझ पड़ता है। इथेनॉल जैसे स्थानीय विकल्प इस बोझ को कम कर सकते हैं।
उत्पादन क्षमता से ज्यादा हो गई है डिमांड
कपूर ने कहा कि देश की इथेनॉल उत्पादन क्षमता अब मिलावट की जरूरत से ज्यादा हो गई है। इसलिए उद्योग को इथेनॉल की इस्तेमाल के दूसरे विकल्प ढूंढने होंगे।
यह एक दिलचस्प स्थिति है। एक तरफ हमारे पास इथेनॉल की अच्छी उत्पादन क्षमता है, दूसरी तरफ इसके इस्तेमाल के नए रास्ते तलाशने की जरूरत है।
डीजल में भी बायोफ्यूल की संभावना
कपूर ने डीजल में बायोफ्यूल आधारित एडिटिव और आइसोब्यूटेनॉल की इस्तेमाल की संभावनाओं का भी जिक्र किया। यह दर्शाता है कि सरकार केवल पेट्रोल तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि डीजल में भी जैव ईंधन का इस्तेमाल बढ़ाना चाहती है।
उद्योग को विविधीकरण की सलाह
कपूर ने इथेनॉल निर्माताओं से अपील की कि वे कंप्रेस्ड बायोगैस (CBG) और पोटाश जैसे अन्य मूल्य-वर्धित उप-उत्पादों की ओर विविधता लाएं। यह उद्योग के लिए आर्थिक रूप से फायदेमंद हो सकता है।
देखा जाए तो यह एक समझदारी भरा सुझाव है। इथेनॉल उत्पादन के दौरान निकलने वाले उप-उत्पादों का सही इस्तेमाल न केवल पर्यावरण के लिए अच्छा है, बल्कि किसानों और उद्योग दोनों के लिए अतिरिक्त आय का जरिया भी बन सकता है।
आम आदमी पर क्या होगा असर?
अगर यह योजना लागू होती है तो आम उपभोक्ताओं को कई फायदे मिल सकते हैं:
सस्ता ईंधन: इथेनॉल आमतौर पर पेट्रोल से सस्ता होता है, तो ज्यादा मिलावट से कीमतें कम हो सकती हैं
कम प्रदूषण: इथेनॉल क्लीनर ईंधन है, जिससे वायु प्रदूषण में कमी आएगी
ऊर्जा सुरक्षा: तेल आयात पर निर्भरता कम होगी
किसानों को फायदा: गन्ना और अन्य फसलों की मांग बढ़ेगी
चुनौतियां भी हैं
हालांकि इस योजना की अपनी चुनौतियां भी हैं। फ्लेक्सी-फ्यूल वाहनों की कीमत सामान्य वाहनों से ज्यादा हो सकती है। पेट्रोल पंपों पर इथेनॉल की उपलब्धता सुनिश्चित करना भी एक बड़ी लॉजिस्टिक चुनौती है।
सवाल उठता है कि क्या भारत की मौजूदा बुनियादी ढांचा इस बदलाव के लिए तैयार है? क्या छोटे शहरों और गांवों में भी इथेनॉल आसानी से मिल पाएगा?
मुख्य बातें (Key Points)
• सरकार पेट्रोल में 20% से ज्यादा इथेनॉल मिलावट की इजाजत देने पर काम कर रही है
• E20 प्रोग्राम अब तक बहुत सफल रहा है, अब फोकस फ्लेक्सी-फ्यूल वाहनों और शुद्ध इथेनॉल की उपलब्धता पर
• देश की इथेनॉल उत्पादन क्षमता मांग से ज्यादा हो गई है, उद्योग को CBG और पोटाश जैसे विकल्पों पर ध्यान देना होगा
• पश्चिमी एशिया संकट के बीच कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों से निपटने के लिए स्वदेशी ईंधन स्रोतों का इस्तेमाल जरूरी
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