Teachers Day 2026: अध्यापक दिवस की पूर्व संध्या पर शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता शिक्षकों के साथ बातचीत करते हुए एक अहम मुद्दे पर चिंता जताई। उन्होंने अध्यापकों से अपील की कि वे विद्यार्थियों को नशे की अलामत के बारे में जागरूक करें और उनका स्क्रीन टाइम घटाने में मदद करें।
देखा जाए तो यह सिर्फ एक औपचारिक भाषण नहीं था। पीएम मोदी ने बदलते सामाजिक ढांचे और बढ़ते खतरों को लेकर शिक्षकों की भूमिका को एक नए नजरिए से परिभाषित किया।
🔍 यह भी पढ़ें- Punjab CM Flags Off 72 Teachers to Finland: Education Revolution का Global Milestone
नशे की समस्या: शहरों और यूनिवर्सिटीज में बढ़ता खतरा
प्रधानमंत्री मोदी ने नशों के बारे में बोलते हुए कहा कि कुछ बड़े शहरों और यूनिवर्सिटीज में यह पता लगाना मुश्किल है कि कोई व्यक्ति इस समस्या से प्रभावित है या नहीं। समझने वाली बात यह है कि किसी को नहीं पता होता कि कौन किसे क्या दे रहा है।
उन्होंने कहा: “इन हालातों में, अध्यापकों को जागरूकता के लिए पहल करनी चाहिए और बारीकी से निगरानी भी करनी चाहिए कि क्या किसी बच्चे में कोई व्यवहारिक बदलाव देखने को मिल रहा है।”
दिलचस्प बात यह है कि पीएम ने अकादमिक परफॉर्मेंस से परे जाकर देखने की बात कही। उनका जोर इस बात पर रहा कि शिक्षकों को विद्यार्थियों के दैनिक जीवन और व्यवहार में होने वाले सूक्ष्म बदलावों पर पूरा ध्यान देना चाहिए।
🔍 यह भी पढ़ें- Bareilly Teachers Bhusa Order: मास्टर जी पढ़ाएं या 100 क्विंटल भूसा जुटाएं?
बचपन को बचाने की जिम्मेदारी
मोदी ने एक भावनात्मक अपील करते हुए कहा: “आपको किसी विद्यार्थी के बचपन को मरने नहीं देना चाहिए। विद्यार्थियों के जीवन में बचपन को जिंदा रखने के लिए अध्यापकों की ओर से सबसे बड़ा योगदान दिया जा सकता है।”
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि प्रधानमंत्री ने स्क्रीन टाइम को भी एक बड़ी चिंता के रूप में उठाया। फोन, कंप्यूटर और अन्य डिजिटल उपकरणों के अत्यधिक उपयोग को लेकर उन्होंने शिक्षकों से कहा कि वे बच्चों को सिर्जनात्मक कामों की ओर प्रेरित करें।
संयुक्त परिवार का टूटता सिस्टम और शिक्षक की बढ़ती भूमिका
प्रधानमंत्री ने कहा कि बच्चों के जीवन में अध्यापकों की भूमिका लगातार महत्वपूर्ण होती जा रही है क्योंकि अब संयुक्त परिवारों का सिस्टम घट रहा है।
अगर गौर करें तो पहले संयुक्त परिवारों में दादा-दादी, चाचा-चाची और अन्य रिश्तेदार बच्चों की परवरिश में सक्रिय भूमिका निभाते थे। लेकिन अब न्यूक्लियर फैमिली सिस्टम में बच्चे ज्यादातर समय अकेले या सिर्फ माता-पिता के साथ रहते हैं, जो अक्सर व्यस्त होते हैं।
ऐसे में शिक्षक ही वह व्यक्ति बन गए हैं जो बच्चों के व्यवहार, मानसिक स्थिति और समग्र विकास पर नजर रख सकते हैं।
सिर्जनात्मकता की ओर ले जाना
मोदी ने इस बात पर जोर दिया कि समाज में हर किसी को विद्यार्थियों को सिर्जनात्मक कामों की ओर प्रेरित करना चाहिए। उन्होंने शिक्षकों से कहा कि वे विद्यार्थियों के अकादमिक प्रदर्शन से परे देखें और उनके रोजाना जीवन पर पूरा ध्यान दें।
| पुरानी भूमिका | नई जिम्मेदारी |
|---|---|
| सिर्फ पढ़ाना | व्यवहार की निगरानी |
| अकादमिक फोकस | समग्र विकास |
| क्लासरूम तक सीमित | जीवन कौशल सिखाना |
| परीक्षा परिणाम | मानसिक स्वास्थ्य |
राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता शिक्षकों से संवाद
यह बातचीत Teachers Day की पूर्व संध्या पर आयोजित की गई थी। इस कार्यक्रम में देशभर से चुने गए राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता शिक्षकों ने हिस्सा लिया। प्रधानमंत्री ने उनके योगदान की सराहना करते हुए कहा कि आज के दौर में शिक्षक की भूमिका सिर्फ किताबी ज्ञान देने तक सीमित नहीं रह गई है।
वे एक गाइड, मेंटर, काउंसलर और कई बार माता-पिता की भूमिका भी निभा रहे हैं।
मुख्य बातें (Key Points)
• पीएम मोदी ने Teachers Day पूर्व संध्या पर राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता शिक्षकों से की बातचीत
• नशे के लक्षणों की पहचान और स्क्रीन टाइम घटाने पर दिया जोर
• संयुक्त परिवार घटने से शिक्षकों की भूमिका और महत्वपूर्ण हो गई
• अकादमिक प्रदर्शन से परे विद्यार्थियों के व्यवहार पर नजर रखने की अपील
• बचपन को बचाने की जिम्मेदारी शिक्षकों पर डाली












