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The News Air - Breaking News - बड़ा खुलासा: PM Modi की अपील के बाद भी Gold Import में 32% की छलांग!

बड़ा खुलासा: PM Modi की अपील के बाद भी Gold Import में 32% की छलांग!

प्रधानमंत्री मोदी ने चार महीने में दो बार सोना न खरीदने की अपील की, लेकिन भारत का गोल्ड इंपोर्ट 32% बढ़ा। असली कारण है वैश्विक कीमतों में उछाल।

Ajay Kumar by Ajay Kumar
शुक्रवार, 4 सितम्बर 2026
in Breaking News, NEWS-TICKER, बिज़नेस
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Gold Import
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Gold Import — प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले चार महीनों में दो बार देशवासियों से गैर-जरूरी सोने की खरीद कम करने की सार्वजनिक अपील की है। एक बार देश में, दूसरी बार विदेश में SEO Summit के दौरान। लेकिन इसके बावजूद भारत का Gold Import करीब 32% बढ़ गया है। पहली नजर में लगता है कि जनता ने PM की बात अनसुनी कर दी, लेकिन हकीकत कुछ और ही है।

देखा जाए तो यह 32% की छलांग सिर्फ आंकड़ों का खेल है, जिसके पीछे छिपी है अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतों की भयंकर आग। आइए, इस पूरे मामले को गहराई से समझते हैं — क्यों मोदी ने ये अपील की, क्यों आंकड़े भ्रामक हैं, और भारतीय रुपये पर इसका क्या असर पड़ता है।

🔍 यह भी पढ़ें- Goldy Brar Associate Bail Rejected: गोल्डी बराड़ के साथी की जमानत खारिज, चंडीगढ़ कोर्ट ने लिया सख्त फैसला

PM मोदी ने क्या कहा था?

प्रधानमंत्री मोदी ने स्पष्ट शब्दों में कहा: “जहां तक संभव हो, सोना न खरीदें।” उन्होंने यह भी कहा कि डेस्टिनेशन वेडिंग विदेश में न करें, विदेशों में गैर-जरूरी छुट्टियां न बिताएं, और सब कुछ अपने देश में करने का प्रयास करें।

यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि मोदी सरकार का मुख्य तर्क ‘वोकल फॉर लोकल’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ है। मतलब साफ है — आपकी मेहनत की कमाई देश की सरहदों के भीतर घूमे, ताकि रोजगार बढ़े और अर्थव्यवस्था मजबूत हो।

लेकिन सवाल यह है कि सोना इस लिस्ट में कैसे आया? जवाब बेहद सरल है।

🔍 यह भी पढ़ें- Gold-Silver Rate Today: धड़ाम से गिरे सोने-चांदी के दाम, जानें भाव

सोने का विदेशी कनेक्शन

आपकी अंगूठी पर जो नक्काशी है, वह भले ही जयपुर, सूरत या राजकोट के किसी कारीगर ने की हो, लेकिन उस अंगूठी के अंदर का कच्चा सोना भारत की जमीन से नहीं निकला है। World Gold Council के आंकड़ों के अनुसार, भारत में इस्तेमाल होने वाले कुल सोने का 86% हिस्सा विदेशों से आता है।

दिलचस्प बात यह है कि हमारी अपनी खदानें — चाहे वह कर्नाटक की हट्टी हो — देश की कुल खपत का 1% भी पूरा नहीं कर पातीं। और दुनिया का कोई भी देश हमें मुफ्त में या भारतीय रुपये में सोना नहीं देता। दुबई हो, स्विट्जरलैंड हो या साउथ अफ्रीका — सब जगह से सोना आता है, तो भारत की तिजोरी से निकलते हैं अमेरिकन डॉलर्स।

अगर गौर करें, तो एक तरफ हमें गाड़ियां चलाने के लिए कच्चा तेल खरीदना है, फैक्ट्रियों के लिए मशीनरी लानी है, और दूसरी तरफ अरबों डॉलर केवल सोने की ईंटें मंगाने में खर्च हो रहे हैं।

रुपये पर असर: मांग और आपूर्ति का खेल

जब देश का व्यापारी सोना मंगाने के लिए Reserve Bank और बाजार से डॉलर मांगता है, तो डॉलर की demand बढ़ जाती है और रुपये की supply बढ़ जाती है। मांग और आपूर्ति का सीधा नियम है — जिसकी मांग बढ़ेगी, वह मजबूत होगा। यानी डॉलर मजबूत होगा, और रुपया कमजोर।

समझने वाली बात यह है कि जब रुपया कमजोर होता है, तो सिर्फ विदेश जाने वालों को झटका नहीं लगता। बल्कि:

  • विदेशों से आने वाला कच्चा तेल महंगा हो जाता है
  • डीजल-पेट्रोल की कीमतें बढ़ जाती हैं
  • घर आने वाली सब्जी और दूध का माल भाड़ा बढ़ जाता है
  • रसोई गैस, दवाइयां, इलेक्ट्रॉनिक पार्ट्स — सब महंगे हो जाते हैं

यानी आपके घर की तिजोरी में रखा सोना भले ही शांत बैठा हो, लेकिन उसे देश में लाने के लिए जो डॉलर बाहर गया, उसने पेट्रोल पंप से लेकर आपकी रसोई तक महंगाई को भड़काने में पूरी भूमिका निभाई।

32% वृद्धि का असली सच

अब आते हैं सबसे तीखे सवाल पर: अगर PM ने अपील की, तो फिर अप्रैल से जुलाई के बीच सोने का आयात 32% कैसे उछल गया?

जवाब है — यहां आंकड़ों की बाजीगरी है। इसे एक उदाहरण से समझिए:

सालसेब खरीदे (किलो)कीमत प्रति किलो (₹)कुल बिल (₹)
पिछला साल101001,000
इस साल82001,600

आपने कम सेब खरीदे (8 किलो बनाम 10 किलो), लेकिन बिल ज्यादा आया (₹1,600 बनाम ₹1,000) — यानी ₹600 की वृद्धि, जो 60% है।

सोने के साथ भी यही हुआ। Financial Year 2025-26 में सोने के आयात का वजन लगभग 4.8% कम आया है। लेकिन दुनिया में मचे भू-राजनीतिक तनाव और युद्धों (Russia-Ukraine, Middle East tensions) की वजह से अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतें आसमान छू रही हैं।

भारत ने सोना वजन में कम मंगाया, लेकिन उसके लिए रिकॉर्ड पेमेंट करना पड़ा — $71.98 billion का। तो यह 32% की छलांग कहीं से भी जनता की लालच नहीं है, बल्कि वैश्विक बाजार में लगी आग का नतीजा है।

परिवार के नजरिए से सोना

एक परिवार के लिए सोना सबसे बड़ी ढाल है। जब बैंक हाथ खड़े कर देता है, तो वही सोना Muthoot और Manappuram में 10 मिनट में गिरवी रखकर आपकी इज्जत बचा लेता है। शेयर बाजार क्रैश हो जाए, तो सोना चमकता रहता है।

हमारे देश में बेटी के पैदा होते ही मां-बाप एक गुल्लक अलग रख लेते हैं कि शादी में कम से कम 10 तोले का सोना देना है। खेती में सूखा पड़ जाए, घर में कोई गंभीर बीमार हो जाए या शेयर बाजार धड़ाम हो जाए — आखिरी उम्मीद क्या बचती है? तिजोरी में रखा वही मां का कंगन या पत्नी का मंगलसूत्र।

समस्या व्यक्ति की नियत में नहीं है। समस्या system के ढांचे में है।

समाधान क्या है?

समाधान यह नहीं है कि सरकार भावनात्मक रूप से अपील करती रहे। समाधान तीन स्तरों पर हो सकता है:

1. सोने का Monetization: भारत में घरों और मंदिरों में करीब 25,000 टन सोना पड़ा है। अगर सरकार ऐसी आसान और सुरक्षित monetization नीतियां लाए कि लोग पुराना सोना बिना tax के डर से recycle करा सकें, तो हमें बाहर से 1 ग्राम सोना भी मंगाने की जरूरत नहीं होगी।

2. Sovereign Gold Bond: Digital विकल्प मजबूत किए जाएं। Sovereign Gold Bond और इसी तरह के instruments में निवेशक को return पक्का मिलता है जो सोने पर मिलता है, और भारत से डॉलर भी बाहर जाने से बचता है।

3. घरेलू सोने का उत्पादन: हमारी खदानों की क्षमता बढ़ानी होगी। वर्तमान में हम अपनी जरूरत का 1% भी खुद नहीं बना पाते।

अंतिम विश्लेषण

PM की अपील कोई फरमान नहीं है। यह देश की आर्थिक मजबूरी का प्रतिबिंब है। जब दुनिया युद्ध के मुहाने पर खड़ी हो, ऊर्जा संकट सिर पर हो, तब गैर-जरूरी सोने के लिए अरबों डॉलर बाहर भेजना किसी भी देश की अर्थव्यवस्था के लिए खतरनाक है।

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लेकिन सिक्के का दूसरा पहलू भी है। अगर सरकार चाहती है कि आम भारतीय नागरिक सोना न खरीदे, तो सरकार और वित्तीय बाजार को आम आदमी को सोने जैसा सुरक्षित, liquid और भरोसेमंद विकल्प जमीन पर देना ही होगा।

और बस यहीं से शुरू हुई असली कहानी — जब एक परिवार की जरूरत और देश की अर्थव्यवस्था आमने-सामने आ गईं।


मुख्य बातें (Key Points):

  • PM मोदी ने चार महीने में दो बार गैर-जरूरी सोना न खरीदने की अपील की
  • भारत का Gold Import 32% बढ़ा, लेकिन यह value में है, weight में नहीं
  • आयात का वजन 4.8% कम हुआ, लेकिन अंतरराष्ट्रीय कीमतें आसमान छू गईं
  • भारत में इस्तेमाल होने वाले सोने का 86% विदेश से आता है, जिससे डॉलर बाहर जाता है और रुपया कमजोर होता है
  • समाधान है — Gold Monetization, Sovereign Gold Bonds और घरेलू उत्पादन बढ़ाना

FAQ – अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1. PM मोदी ने सोना न खरीदने की अपील क्यों की?

क्योंकि भारत में इस्तेमाल होने वाले 86% सोने का आयात विदेश से होता है, जिसके लिए अरबों डॉलर बाहर जाते हैं। इससे रुपया कमजोर होता है और trade deficit बढ़ता है।

2. Gold Import 32% बढ़ने का मतलब क्या है?

यह वृद्धि value (मूल्य) में है, quantity (मात्रा) में नहीं। वास्तव में सोने का वजन 4.8% कम आया, लेकिन अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें बढ़ने से भुगतान $71.98 billion तक पहुंच गया।

3. सोने का आयात रुपये को कैसे कमजोर करता है?

जब व्यापारी सोना खरीदने के लिए डॉलर की मांग करते हैं, तो डॉलर की demand बढ़ती है और रुपये की supply। इससे डॉलर मजबूत और रुपया कमजोर होता है, जिससे पेट्रोल, गैस और दवाइयां महंगी हो जाती हैं।

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पत्रकारिता में एक दशक से अधिक का ठोस अनुभव रखने वाले अजय कुमार 'शोर से ज़्यादा सार' की पत्रकारिता पर दृढ़ विश्वास करते हैं। वर्तमान में वे The News Air में डिप्टी चीफ प्रोड्यूसर के पद पर कार्यरत हैं, जहां वे समाचारों की रणनीति, लेखन, तथ्य-सत्यापन (Fact-Checking) और सटीक प्रस्तुति की जिम्मेदारी संभालते हैं।पत्रकारिता का सफर और अनुभव - अजय कुमार का करियर ग्राउंड ज़ीरो की रिपोर्टिंग से लेकर न्यूज़ डेस्क के कुशल प्रबंधन तक विस्तृत है। The News Air में पिछले 3 वर्षों से नेतृत्व करने से पहले, उन्होंने 'दैनिक जागरण' और 'सिटी न्यूज़' जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। पत्रकारिता में उनकी मजबूत शैक्षणिक पृष्ठभूमि ने उनके काम करने के तरीके को बेहद व्यावहारिक और तथ्य-आधारित बनाया है।विशेषज्ञता और कार्यक्षेत्र (Expertise & Beats) - वे जटिल राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों को सरल भाषा, स्पष्ट तथ्यों और निष्पक्ष तरीके से पाठकों तक पहुंचाने में माहिर हैं। उनकी पत्रकारिता की मुख्य विशेषज्ञता इन क्षेत्रों में है:राजनीतिक कवरेज: लोकसभा चुनावों और कई राज्यों के विधानसभा चुनावों की ग्राउंड और डेस्क रिपोर्टिंग।कानूनी और संसदीय खबरें: संसद के दोनों सदनों की कार्यवाही और सुप्रीम कोर्ट की महत्वपूर्ण सुनवाइयों की नियमित और रियल-टाइम कवरेज।खोजी पत्रकारिता: ब्रेकिंग स्टोरीज़ और विज़ुअल न्यूज़ रिपोर्टिंग के जरिए अंदरूनी खबरों की पड़ताल।विश्वसनीयता और डिजिटल योगदान (Trust & Authority) - सटीक और प्रामाणिक ख़बरों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता उन्हें पाठकों के बीच एक विश्वसनीय पत्रकार बनाती है। डिजिटल न्यूज़ इकोसिस्टम को बेहतर बनाने और फेक न्यूज़ से लड़ने की दिशा में, अजय कुमार गूगल जर्नलिस्ट्स स्टूडियो में भी अपना महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।

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