Punjab Salary Employees के DA Arrears को लेकर चल रहे विवाद के बीच पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने बड़ा दावा किया है। चंडीगढ़ में पत्रकारों से बातचीत करते हुए चीमा ने कहा कि पंजाब के कर्मचारियों को देश में सबसे ज्यादा तनख्वाह मिल रही है। उनके साथ कैबिनेट मंत्री अमन अरोड़ा और डॉ. बलजीत कौर भी मौजूद थीं।
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गुजरात से 28%, हरियाणा से 13% ज्यादा सैलरी का दावा
देखा जाए तो वित्त मंत्री ने दावा किया कि पंजाब के कर्मचारियों को गुजरात के कर्मचारियों की तुलना में 28 फीसदी ज्यादा और हरियाणा के कर्मचारियों की तुलना में 13 फीसदी ज्यादा तनख्वाह दी जा रही है। इसी कारण पंजाब के कुल राजस्व का 51 फीसदी हिस्सा कर्मचारियों की तनख्वाह और पेंशन पर खर्च होता है।
समझने वाली बात यह है कि देश में औसतन राजस्व का सिर्फ 38 फीसदी हिस्सा ही कर्मचारियों की सैलरी और पेंशन पर खर्च होता है। यानी पंजाब में यह अनुपात काफी ज्यादा है।
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₹14,100 करोड़ का बकाया पुरानी सरकारों का
हरपाल सिंह चीमा ने दावा किया कि पंजाब सरकार पर कर्मचारियों के DA का जो ₹14,100 करोड़ रुपये का बकाया खड़ा है, वह पुरानी अकाली-भाजपा और कांग्रेस सरकारों के समय का है। उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी की सरकार इसका थोड़ा-थोड़ा करके भुगतान कर रही है।
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि पंजाब सरकार ने हाई कोर्ट में दिए गए प्लान के अनुसार ₹4,500 करोड़ रुपये से ज्यादा की रकम का भुगतान कर दिया है और बाकी का भुगतान किया जा रहा है।
विपक्षी पार्टियां गुमराह कर रहीं: चीमा
वित्त मंत्री ने कहा कि शिरोमणी अकाली दल, भाजपा और कांग्रेस पार्टियां पंजाब के कर्मचारियों और लोगों को झूठ बोलकर गुमराह कर रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि ये पार्टियां DA के मुद्दे को राजनीतिक रूप से भुनाने की कोशिश कर रही हैं।
अगर गौर करें तो यह विवाद काफी समय से चल रहा है और कर्मचारी संगठन लगातार सरकार पर दबाव बना रहे हैं कि DA का पूरा बकाया एक साथ दिया जाए।
AAP ने 2022 में झूठ नहीं बोला: अमन अरोड़ा
आम आदमी पार्टी पंजाब के प्रधान और कैबिनेट मंत्री अमन अरोड़ा ने कहा कि कांग्रेस पार्टी ने 2022 की चुनावों के नजदीक आने पर कर्मचारियों को DA देने का ऐलान कर दिया था, पर DA नहीं दिया।
दिलचस्प बात यह है कि अरोड़ा ने कहा, “इसी तरह आम आदमी पार्टी भी ऐलान कर सकती थी, पर AAP ने झूठ नहीं बोला।” उन्होंने कर्मचारियों से अपील की कि पंजाब सरकार उनके साथ हर पक्ष पर बातचीत करने को तैयार है, इसलिए हड़ताल करने की जगह सरकार के साथ बैठकर बातचीत करें।
राजकोषीय स्थिति और चुनौतियां
समझने वाली बात यह है कि पंजाब की वित्तीय स्थिति काफी कमजोर रही है। राज्य पर करीब ₹3 लाख करोड़ से ज्यादा का कर्ज है और राजस्व का बड़ा हिस्सा सैलरी और पेंशन पर खर्च हो जाता है। ऐसे में एकमुश्त बड़ी रकम का भुगतान करना सरकार के लिए चुनौतीपूर्ण है।
हालांकि कर्मचारी संगठनों का तर्क है कि यह उनका वैध हक है और केंद्र सरकार समय पर DA देती है तो राज्य सरकार क्यों नहीं दे सकती।
तुलनात्मक तस्वीर
| राज्य | पंजाब से तुलना | सैलरी अंतर |
|---|---|---|
| गुजरात | पंजाब में 28% ज्यादा | पंजाब के कर्मचारियों को फायदा |
| हरियाणा | पंजाब में 13% ज्यादा | पंजाब में बेहतर सैलरी |
| राष्ट्रीय औसत | पंजाब में 51% राजस्व सैलरी पर | राष्ट्रीय औसत सिर्फ 38% |
कर्मचारी संगठनों की मांग
पंजाब के विभिन्न कर्मचारी संगठन लगातार मांग कर रहे हैं कि:
- DA का पूरा बकाया तुरंत दिया जाए
- समय पर DA का भुगतान हो
- केंद्र सरकार की तर्ज पर DA में बढ़ोतरी की जाए
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि DA यानी Dearness Allowance महंगाई भत्ता होता है, जो महंगाई के बढ़ने पर कर्मचारियों को दिया जाता है ताकि उनकी क्रय शक्ति बनी रहे।
राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप
सरकार का कहना है कि बकाया पुरानी सरकारों का है, जबकि विपक्ष का आरोप है कि AAP सरकार कर्मचारियों के साथ न्याय नहीं कर रही। यह विवाद राजनीतिक रंग ले चुका है और आने वाले समय में इस मुद्दे पर और तीखी बहस होने की संभावना है।
आगे का रास्ता
सरकार ने कहा है कि वह कर्मचारियों के साथ बातचीत के लिए तैयार है। अगर सरकार और कर्मचारी संगठन बातचीत से कोई रास्ता निकाल लेते हैं तो यह विवाद सुलझ सकता है। लेकिन अगर गतिरोध बना रहा तो हड़ताल की स्थिति भी बन सकती है, जो आम जनता को भी प्रभावित करेगी।
मुख्य बातें (Key Points)
- पंजाब के कर्मचारियों को देश में सबसे ज्यादा तनख्वाह मिलती है: हरपाल चीमा
- गुजरात से 28% और हरियाणा से 13% ज्यादा सैलरी का दावा
- ₹14,100 करोड़ का DA बकाया पुरानी सरकारों का
- पंजाब के राजस्व का 51% सैलरी और पेंशन पर खर्च
- सरकार ने ₹4,500 करोड़ से ज्यादा का भुगतान किया











