Raja Rallia Ram Heritage Dispute : महाराजा रणजीत सिंह के शासनकाल में मंत्री रहे राजा रलिया राम की ऐतिहासिक विरासत को बचाने के लिए उनके वंशजों ने आवाज बुलंद की है। शनिवार को चंडीगढ़ प्रेस क्लब में आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में कुमरिया परिवार ने पुश्तैनी जमीन पर कब्जे, कथित फर्जी दस्तावेजों और रजिस्ट्रियों के जरिए संपत्ति हड़पने के गंभीर आरोप लगाए हैं।
देखा जाए तो यह केवल जमीन का विवाद नहीं है, बल्कि पंजाब के इतिहास से जुड़ी एक महत्वपूर्ण विरासत को बचाने का संघर्ष है। सुरजीत चंद कुमरिया, अनिल कुमरिया, अजीत कुमरिया और उनके भतीजे आशीष कुमरिया ने वरिष्ठ अधिवक्ता गुरमोहन प्रीत सिंह के साथ मीडिया के समक्ष अपनी पीड़ा रखी।
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48 कनाल 9 मरले की पुश्तैनी जमीन
परिवार के अनुसार राजा रलिया राम से जुड़ी करीब 48 कनाल 9 मरले पुश्तैनी जमीन विवाद में फंसी हुई है। इस जमीन में:
- मंदिर
- समाधियां (पूर्वजों की)
- सरोवर (तालाब)
भी शामिल हैं। वंशजों ने कहा कि यह मामला केवल जमीन के मालिकाना हक का नहीं, बल्कि परिवार की ऐतिहासिक और धार्मिक विरासत को बचाने का भी है।
| पहलू | विवरण |
|---|---|
| कुल जमीन | 48 कनाल 9 मरले |
| खसरा नंबर | 2, 3, 4, 5 |
| स्थान | अमृतसर |
| शामिल संपत्ति | मंदिर, समाधियां, सरोवर |
| विवाद का वर्ष | 2004 से अब तक |
हाई कोर्ट ने दिए IPS स्तर की जांच के आदेश
समझने वाली बात यह है कि यह मामला अब पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट तक पहुंच चुका है। परिवार ने संविधान के अनुच्छेद 226 के साथ अनुच्छेद 21 के तहत जीवन, स्वतंत्रता और पुश्तैनी विरासत की सुरक्षा के लिए याचिका दायर की थी।
हाई कोर्ट ने मामले का निपटारा करते हुए पंजाब के DGP को निर्देश दिया कि:
- FIR नंबर 28, दिनांक 2 फरवरी 2026 की जांच के लिए IPS स्तर के अधिकारी को नामित किया जाए
- यह FIR अमृतसर सिटी के थाना डिवीजन B में भारतीय न्याय संहिता की धाराओं 318(4), 336(2), 336(3), 340(2) और 61(2) के तहत दर्ज है
- नामित अधिकारी दोनों पक्षों की शिकायतों और दावों को देखते हुए कानून के अनुसार कार्रवाई करेगा
दिलचस्प बात यह है कि परिवार को स्थानीय जांच की निष्पक्षता पर भरोसा नहीं था, इसलिए IPS स्तर की जांच महत्वपूर्ण है।
2004 में दबाव में हुई पावर ऑफ अटॉर्नी
कुमरिया परिवार ने गंभीर आरोप लगाया कि:
- वर्ष 2004 में कथित दबाव के तहत पावर ऑफ अटॉर्नी के माध्यम से जमीन का एक बड़ा हिस्सा हासिल किया गया
- यह बाजार मूल्य के करीब दसवें हिस्से में हुआ
- करीब 7-8 वर्ष बाद जमीन को अन्य लोगों के नाम स्थानांतरित करने के लिए कथित तौर पर फर्जी रजिस्ट्रियों का सहारा लिया गया
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि अगर यह आरोप सच हैं तो यह गंभीर धोखाधड़ी का मामला है।
समाधियां तोड़कर होटल बनाने का आरोप
परिवार ने सबसे दर्दनाक आरोप यह लगाया कि:
- जमीन के बचे हिस्से में उनके पूर्वजों की कई समाधियों को कथित तौर पर तोड़ दिया गया
- वहां होटल का निर्माण किया जा रहा है
- संपत्ति से होकर सीवर पाइपलाइन डाली गई है
- भगवान राम को समर्पित मंदिर के ऊपर से भी सीवर लाइन निकाली गई है
चिंता का विषय यह है कि अगर यह सच है तो यह न केवल संपत्ति का उल्लंघन है बल्कि धार्मिक भावनाओं का भी अपमान है।
राजनीतिक संरक्षण के आरोप
प्रेस कांफ्रेंस में परिवार ने कुछ तत्वों पर राजनीतिक संरक्षण और प्रभाव का आरोप लगाते हुए उन्हें कथित भूमि माफिया और आपराधिक नेटवर्क से जुड़ा बताया।
उन्होंने तजिंदर सिंह उर्फ गोगी (प्रतिवादी नंबर-6) पर आरोप लगाया कि:
- उसने कथित तौर पर फर्जी दस्तावेजों और प्रभाव के इस्तेमाल के जरिए संपत्ति पर कब्जा करने का प्रयास किया
- उसे राजनीतिक संरक्षण हासिल है
- अमृतसर में प्रभाव रखता है
परिवार ने कुछ पुलिस अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए और जांच में निष्पक्षता की मांग की।
Nemo judex in causa sua का सिद्धांत
वंशजों ने “Nemo judex in causa sua” (कोई भी अपने मामले में न्यायाधीश नहीं हो सकता) के कानूनी सिद्धांत का हवाला देते हुए कहा कि जांच ऐसे अधिकारियों से कराई जानी चाहिए जिनकी निष्पक्षता पर कोई सवाल न हो।
समझने वाली बात यह है कि यह एक महत्वपूर्ण कानूनी सिद्धांत है जो निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करता है।
दस्तावेज और सरकारी रिकॉर्ड मौजूद
परिवार ने दावा किया कि उनके पास:
- जमीन के मालिकाना हक के दस्तावेज हैं
- विरासत से जुड़े दस्तावेज हैं
- सरकारी रिकॉर्ड मौजूद हैं
उन्होंने इन दस्तावेजों को मीडिया के समक्ष प्रस्तुत किया।
सरकार से मांगें
कुमरिया परिवार ने पंजाब सरकार और प्रशासन से मांग की:
- मंदिरों, समाधियों और सरोवरों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए
- कथित फर्जी दस्तावेजों और रजिस्ट्रियों की जांच हो
- कानून के अनुसार कार्रवाई की जाए
अनिल कुमरिया और उनके भाइयों ने कहा: “पुश्तैनी जमीन का कुछ हिस्सा अभी भी परिवार के नाम दर्ज है। विरासत की रक्षा के लिए हम हर कानूनी रास्ता अपनाएंगे और न्याय मिलने तक हमारी लड़ाई जारी रहेगी।”
स्वतंत्र सत्यापन की जरूरत
महत्वपूर्ण नोट: प्रेस कांफ्रेंस में लगाए गए इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है। संबंधित व्यक्तियों और अन्य पक्षों का पक्ष सामने आने पर उसे भी रिपोर्ट में शामिल किया जाना उचित होगा।
राहत की बात यह है कि IPS स्तर की जांच से निष्पक्ष सच्चाई सामने आने की उम्मीद है।
मुख्य बातें (Key Points)
- राजा रलिया राम (महाराजा रणजीत सिंह के मंत्री) की विरासत से जुड़ी 48 कनाल 9 मरले जमीन विवाद में
- कुमरिया परिवार ने फर्जी दस्तावेज, जाली रजिस्ट्री और जमीन कब्जे के आरोप लगाए
- हाई कोर्ट ने IPS स्तर के अधिकारी से जांच के निर्देश दिए
- आरोप है कि समाधियां तोड़कर होटल बनाया जा रहा है
- मंदिर के ऊपर सीवर लाइन डालने का भी आरोप
- परिवार ने राजनीतिक संरक्षण और भूमि माफिया के आरोप लगाए
- नोट: आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी, दूसरे पक्ष का पक्ष जानना जरूरी










