IMD Weather Alert Heavy Rainfall India: देश के कई हिस्सों में अगले दो हफ्तों तक भारी से अति भारी वर्षा का दौर जारी रह सकता है। भारतीय मौसम विभाग (India Meteorological Department – IMD) ने 20 अगस्त 2026 को जारी अपनी विस्तृत प्रेस रिलीज में अगले दो सप्ताह (20 अगस्त से 2 सितंबर 2026) के लिए मौसम पूर्वानुमान और चेतावनी जारी की है।
देखा जाए तो पूर्वी भारत, पूर्वोत्तर भारत और मध्य भारत के कई हिस्सों में बेहद भारी वर्षा (Extremely Heavy Rainfall) होने की संभावना है। ओडिशा, झारखंड, पश्चिम बंगाल, बिहार और छत्तीसगढ़ जैसे राज्य सबसे ज्यादा प्रभावित हो सकते हैं।
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि मौसम विभाग ने किसानों के लिए विशेष एग्रो-मेट एडवाइजरी भी जारी की है। खेतों में जलभराव, फसलों को नुकसान और मिट्टी का कटाव जैसी समस्याओं से बचने के लिए तुरंत कदम उठाने की सलाह दी गई है।
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पिछले सप्ताह की स्थिति: दो डिप्रेशन ने मचाई तबाही
समझने वाली बात यह है कि पिछले सप्ताह (13 से 19 अगस्त 2026) के दौरान देश के पूर्वी हिस्सों में मौसम प्रणालियों की भरमार रही।
पहला डिप्रेशन (13-15 अगस्त):
| तारीख | स्थिति | प्रभावित क्षेत्र |
|---|---|---|
| 13 अगस्त | तटीय पश्चिम बंगाल में डिप्रेशन | गंगा का पश्चिम बंगाल, ओडिशा |
| 14 अगस्त | झारखंड की ओर बढ़ा | झारखंड, गंगा का पश्चिम बंगाल |
| 15 अगस्त | कमजोर होकर लो प्रेशर में बदला | दक्षिण पूर्व झारखंड |
इस डिप्रेशन ने गंगा के पश्चिम बंगाल और ओडिशा में 13 अगस्त को, झारखंड में 14 अगस्त को और पूर्वी मध्य प्रदेश में 16 अगस्त को अलग-अलग स्थानों पर अत्यंत भारी वर्षा (Extremely Heavy Rainfall) दर्ज की।
दूसरा डिप्रेशन (16-19 अगस्त):
16 अगस्त को उत्तर पश्चिम बंगाल की खाड़ी के ऊपर एक नया लो प्रेशर एरिया बना, जो जल्द ही डिप्रेशन में बदल गया।
| तारीख | डिप्रेशन का केंद्र | अति भारी वर्षा क्षेत्र |
|---|---|---|
| 17 अगस्त | तटीय पश्चिम बंगाल (कोलकाता के पास) | ओडिशा |
| 18 अगस्त | झारखंड | ओडिशा, गंगा का पश्चिम बंगाल |
| 19 अगस्त | उत्तर झारखंड और दक्षिण पश्चिम बिहार | छत्तीसगढ़ |
अगर गौर करें तो 18 अगस्त को उत्तराखंड में भी अलग-अलग स्थानों पर अत्यंत भारी वर्षा दर्ज की गई।
पूरे देश में बारिश का हाल: 13-19 अगस्त
पिछले सप्ताह (13 से 19 अगस्त) के दौरान देश में कुल मिलाकर सामान्य से 16% कम बारिश हुई। इसका मुख्य कारण दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत, पश्चिम भारत और पूर्वोत्तर भारत के कई हिस्सों में कम वर्षा रही।
क्षेत्रवार बारिश का विवरण (13-19 अगस्त):
| क्षेत्र | वास्तविक बारिश | सामान्य बारिश | विचलन |
|---|---|---|---|
| पूर्व और पूर्वोत्तर भारत | 72 mm | 81.8 mm | -12% |
| उत्तर पश्चिम भारत | 45.6 mm | 49.2 mm | -7% |
| मध्य भारत | 60.1 mm | 67.1 mm | -10% |
| दक्षिण प्रायद्वीपीय | 19.5 mm | 42.7 mm | -54% |
| पूरा देश | 49.6 mm | 59.2 mm | -16% |
दिलचस्प बात यह है कि दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत में सबसे ज्यादा कमी (-54%) रही जबकि उत्तर पश्चिम भारत में सबसे कम कमी (-7%) दर्ज की गई।
मानसून सीजन का कुल हाल (1 जून से 19 अगस्त 2026)
सीजन भर की बारिश (1 जून – 19 अगस्त):
| क्षेत्र | वास्तविक बारिश | सामान्य बारिश | विचलन |
|---|---|---|---|
| पूर्व और पूर्वोत्तर भारत | 715.9 mm | 960.1 mm | -25% |
| उत्तर पश्चिम भारत | 377 mm | 420.9 mm | -10% |
| मध्य भारत | 683.9 mm | 693.1 mm | -1% |
| दक्षिण प्रायद्वीपीय | 380.4 mm | 488.6 mm | -22% |
| पूरा देश | 535 mm | 611.8 mm | -13% |
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि पूरे मानसून सीजन में अब तक देश में सामान्य से 13% कम बारिश हुई है, जो “नॉर्मल” कैटेगरी में आता है। लेकिन पूर्व और पूर्वोत्तर भारत में 25% की भारी कमी चिंताजनक है।
एल नीनो और IOD का प्रभाव
भारतीय मौसम विभाग ने अपनी रिपोर्ट में बड़े पैमाने पर मौसम को प्रभावित करने वाले कारकों का भी उल्लेख किया है:
एल नीनो (El Niño) की स्थिति:
- वर्तमान में मध्यम एल नीनो स्थितियां प्रशांत महासागर में मौजूद हैं
- समुद्री सतह का तापमान सामान्य से अधिक है
- मॉनसून मिशन कपल्ड फोरकास्ट सिस्टम (MMCFS) के अनुसार, मानसून सीजन के बाकी समय में एल नीनो और मजबूत होगा
समझने वाली बात यह है कि एल नीनो आमतौर पर भारतीय मानसून को कमजोर करता है, जो इस साल सामान्य से कम बारिश का एक कारण हो सकता है।
इंडियन ओशन डाइपोल (IOD):
- वर्तमान में न्यूट्रल IOD स्थितियां हैं
- MMCFS के अनुसार, मानसून सीजन में यह न्यूट्रल ही रहेगा
- हालांकि, कुछ अंतर्राष्ट्रीय केंद्रों का अनुमान है कि सितंबर 2026 में पॉजिटिव IOD विकसित हो सकता है
मैडेन-जूलियन ऑसिलेशन (MJO):
- वर्तमान में फेज 6 में है (एम्प्लीट्यूड >1)
- पहले सप्ताह के अंत तक फेज 7 में जाएगा
- दूसरे सप्ताह में फेज 7 में ही रहेगा (कम एम्प्लीट्यूड के साथ)
आगामी सप्ताह 1 की चेतावनी (20-26 अगस्त 2026)
अब सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा – अगले सप्ताह क्या होने वाला है?
मौसम प्रणालियां:
- वर्तमान में उत्तर पूर्व मध्य प्रदेश के ऊपर एक वेल-मार्क्ड लो प्रेशर एरिया है
- यह अगले 2 दिनों में कमजोर हो जाएगा
- सप्ताह के दौरान पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) उत्तर पश्चिम भारत को प्रभावित करेगा
भारी वर्षा की चेतावनी (20-26 अगस्त):
| क्षेत्र | तारीख | चेतावनी का स्तर |
|---|---|---|
| ओडिशा | 21-22 अगस्त | Heavy Rainfall |
| ओडिशा | 23 अगस्त | Very Heavy Rainfall (बेहद भारी) |
| ओडिशा | 24-26 अगस्त | Heavy Rainfall |
| झारखंड | 23 अगस्त | Heavy Rainfall |
| बिहार | 22-25 अगस्त | Heavy Rainfall |
| गंगा का पश्चिम बंगाल | 23-25 अगस्त | Heavy Rainfall |
| सब-हिमालयन पश्चिम बंगाल और सिक्किम | 20-22, 25-26 अगस्त | Heavy Rainfall |
| अंडमान निकोबार | 20-21 अगस्त | Heavy Rainfall |
| पश्चिम उत्तर प्रदेश | 20 अगस्त | Very Heavy Rainfall |
| पूर्वी मध्य प्रदेश | 20-21 अगस्त | Very Heavy Rainfall |
| पूर्वी मध्य प्रदेश | 22-26 अगस्त | Heavy Rainfall |
| छत्तीसगढ़ | 20-26 अगस्त | Heavy Rainfall |
पूर्वोत्तर भारत:
- अरुणाचल प्रदेश, असम और मेघालय में 20-25 अगस्त तक भारी बारिश
- नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में 20-23 अगस्त तक भारी बारिश
पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र:
- सप्ताह के पहले भाग में व्यापक बारिश
- पश्चिम उत्तर प्रदेश में 20 अगस्त को अलग-अलग स्थानों पर अति भारी वर्षा की संभावना
तेज हवाओं की चेतावनी:
| क्षेत्र | तारीख | हवा की गति |
|---|---|---|
| अंडमान निकोबार | 20-26 अगस्त | 40-50 kmph, गस्ट 60 kmph तक |
| सब-हिमालयन पश्चिम बंगाल | 20-22 अगस्त | 30-40 kmph, गस्ट 50 kmph तक |
| बिहार, झारखंड, ओडिशा | 20-24 अगस्त | 30-40 kmph, गस्ट 50 kmph तक |
आगामी सप्ताह 2 की चेतावनी (27 अगस्त – 2 सितंबर 2026)
मौसम प्रणालियां:
- सप्ताह 1 के अंत तक उत्तरी बंगाल की खाड़ी के ऊपर एक नया अपर एयर साइक्लोनिक सर्कुलेशन बनेगा
- इसके प्रभाव में सप्ताह 2 की शुरुआत में उत्तर पश्चिम बंगाल की खाड़ी के ऊपर एक लो प्रेशर एरिया बन सकता है
भारी वर्षा की चेतावनी (27 अगस्त – 2 सितंबर):
| क्षेत्र | चेतावनी |
|---|---|
| हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड | सप्ताह के कई दिनों में भारी से अति भारी वर्षा |
| जम्मू-कश्मीर | सप्ताह के कई दिनों में भारी वर्षा |
| अरुणाचल प्रदेश, असम-मेघालय | सप्ताह के कई दिनों में भारी से अति भारी वर्षा |
| पश्चिम बंगाल, सिक्किम, ओडिशा | सप्ताह के कई दिनों में भारी से अति भारी वर्षा |
| कोंकण, गोवा और तटीय कर्नाटक | सप्ताह के कुछ दिनों में भारी वर्षा |
कुल मिलाकर:
- सप्ताह 1 में देश में कुल मिलाकर सामान्य से कम बारिश होने की संभावना
- सप्ताह 2 में भी सामान्य से कम बारिश की उम्मीद
- लेकिन पूर्व और मध्य भारत के कुछ हिस्सों में सामान्य से अधिक वर्षा हो सकती है
तापमान का पूर्वानुमान
सप्ताह 1 (20-26 अगस्त):
- उत्तर पश्चिम भारत के मैदानी इलाकों और पूर्वोत्तर भारत के कुछ हिस्सों में अधिकतम तापमान सामान्य से 2-3°C अधिक रह सकता है
- बाकी देश में तापमान सामान्य (-1.5 से +1.5°C) रहेगा
- किसी भी हिस्से में हीट वेव की संभावना नहीं
- न्यूनतम तापमान (रात का तापमान) पूरे देश में सामान्य रहेगा
सप्ताह 2 (27 अगस्त – 2 सितंबर):
- उत्तर पश्चिम भारत के मैदानी इलाकों में अधिकतम तापमान सामान्य से 2-3°C अधिक रह सकता है
- बाकी देश में सामान्य तापमान
- हीट वेव या गर्म रातों की कोई संभावना नहीं
किसानों के लिए विशेष सलाह (Agro-Met Advisory)
मौसम विभाग ने किसानों के लिए राज्यवार विस्तृत सलाह जारी की है। आइए जानते हैं मुख्य सुझाव:
पश्चिम उत्तर प्रदेश:
- धान, अरहर, दलहन, तिलहन और सब्जियों के खेतों में प्रभावी जल निकासी बनाए रखें
- विशेष रूप से निचले इलाकों में अतिरिक्त पानी तुरंत निकालें
- बैंगन, मिर्च और फूलगोभी की नर्सरी केवल तभी उठाएं जब मैदान की स्थिति उपयुक्त हो
पूर्वी मध्य प्रदेश:
- सोयाबीन, मक्का, धान और सब्जियों के खेतों से अतिरिक्त पानी का निरंतर निकासी सुनिश्चित करें
- खेत की नालियों को साफ रखें
- जलभराव वाले खेतों में खाद, उर्वरक और पौध संरक्षण उपाय स्थगित करें
- सब्जियों और लंबी फसलों को सहारा/स्टेकिंग प्रदान करें
ओडिशा:
- खरीफ धान, मक्का, दलहन, कपास, अरहर, केला और सब्जी के खेतों से अतिरिक्त पानी की निरंतर और प्रभावी निकासी सुनिश्चित करें
- खेत की नालियों, आउटलेट और बांधों को साफ और कार्यात्मक रखें
- जलभराव वाले क्षेत्रों में मक्का और हरे चने की बुवाई/पुनः बुवाई स्थगित करें
- बाजरा में पानी जमा होने से रोकें
- चढ़ाई वाली सब्जियों, केले, पपीता और युवा बागवानी पौधों को सहारा/स्टेकिंग प्रदान करें
छत्तीसगढ़:
- धान, मक्का, मूंगफली, छोटे बाजरा और दलहन के खेतों से अतिरिक्त पानी निकालें और प्रभावी जल निकासी सुनिश्चित करें
झारखंड:
- मक्का, अरहर और अन्य खड़ी फसलों के खेतों में उचित जल निकासी बनाए रखें
- अतिरिक्त बारिश का पानी तुरंत निकालें
बिहार:
- धान, मक्का, दलहन और अन्य खड़ी फसलों के खेतों से अतिरिक्त पानी की उचित निकासी सुनिश्चित करें
- विशेष रूप से निचले इलाकों पर ध्यान दें
- गीली परिस्थितियों में उर्वरक और कीटनाशक के उपयोग को स्थगित करें
- केवल उपयुक्त खेत परिस्थितियों में ही धान की रोपाई और केले तथा रतालू का रोपण करें
पूर्वोत्तर राज्य (नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा):
- धान, सोयाबीन, उड़द, अदरक, हल्दी, कोल फसलों और सब्जियों के खेतों में उचित जल निकासी बनाए रखें
- पानी जमा होने से रोकें
- जल निकासी चैनलों को साफ रखें
- संतृप्त खेतों में उर्वरक, पौध संरक्षण और अन्य खेत कार्य स्थगित करें
- जहां आवश्यक हो, असुरक्षित फसलों को सहारा/स्टेकिंग प्रदान करें
उत्तराखंड:
- धान, सोयाबीन, मक्का, लाल चना, अदरक, लहसुन, झंगोरा, मडुआ, टमाटर और अन्य खड़ी फसलों में उचित और प्रभावी जल निकासी बनाए रखें
- उपयुक्त खेत परिस्थितियों में ही धान की रोपाई जारी रखें
- मूंगफली, सोयाबीन और मक्का की बुवाई तब तक टालें जब तक परिस्थितियां उपयुक्त न हों
- पके हुए टमाटर, फ्रेंच बीन्स और आलू की कटाई करें
- उपज को सुरक्षित, सूखी जगह पर रखें
हिमाचल प्रदेश:
- अदरक और हल्दी के खेतों में जल निकासी चैनलों को साफ और कार्यात्मक रखें
- मक्का के खेतों से अतिरिक्त बारिश का पानी तुरंत निकालें
- पके हुए सब्जियों जैसे खीरा, लौकी, करेला, तुरई, तोरी और टिंडे की कटाई करें (जहां खेत की परिस्थितियां अनुमति दें)
- कटाई की गई उपज को सुरक्षित स्थान पर रखें
पशुपालन और मत्स्य पालन के लिए सलाह
पशुओं की देखभाल:
- भारी वर्षा के दौरान पशुओं को शेड के अंदर रखें
- उन्हें संतुलित चारा प्रदान करें
- चारा और चारे को सुरक्षित स्थान पर स्टोर करें ताकि खराब न हो
उच्च तापमान और लू की स्थिति में:
- पशुओं को साफ, ठंडा पीने का पानी प्रदान करें
- मुर्गी के शेड की छतों को घास से ढकें ताकि गर्मी के प्रतिकूल प्रभाव कम हों
मछली पालन:
- तालाबों के चारों ओर उचित जाली के साथ एक आउटलेट बनाएं ताकि अतिरिक्त पानी निकल सके
- इससे ओवरफ्लो की स्थिति में मछलियों को बाहर निकलने से रोका जा सके
आम जनता के लिए सुरक्षा सलाह
मौसम विभाग ने आम जनता के लिए भी महत्वपूर्ण सुरक्षा सलाह जारी की है:
भारी वर्षा के दौरान:
- मौसम की स्थिति पर नजर रखें
- बिगड़ती परिस्थितियों में सुरक्षित स्थानों पर जाने के लिए तैयार रहें
- पेड़ों के नीचे शरण न लें क्योंकि बिजली गिर सकती है
- बिजली गिरने की उम्मीद में, तुरंत विद्युत/इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को अनप्लग करें
- पानी के निकायों से बाहर निकलें
- बिजली संचालित करने वाली सभी वस्तुओं से दूर रहें
यात्रा और गतिविधियां:
- पर्यटन और मनोरंजन गतिविधियों को विनियमित किया जाए
- तटीय और अपतटीय गतिविधियों को विवेकपूर्ण तरीके से विनियमित किया जाए
- हेलीकॉप्टर सेवाओं को विनियमित किया जाए
संभावित खतरे:
- पेड़ों की शाखाओं का टूटना, केले, पपीता जैसे छोटे पेड़ों का उखड़ना
- तेज हवा और बारिश से वृक्षारोपण, बागवानी और खड़ी फसलों को नुकसान
- कच्चे मकानों/दीवारों, झोपड़ियों और सड़कों को मामूली क्षति
- छोटी नावों, ट्रॉलरों और नावों पर प्रभाव
- सड़क और रेल यातायात प्रभावित हो सकती है
- निचले इलाकों में स्थानीय भूस्खलन, कीचड़ का फिसलना, जल जमाव और बाढ़
- भारी वर्षा के कारण कभी-कभी दृश्यता में कमी
मानसून ट्रफ और अन्य मौसम संबंधी विशेषताएं
मानसून ट्रफ (Monsoon Trough):
- सप्ताह के अधिकांश दिनों में मानसून ट्रफ अपनी सामान्य स्थिति के करीब या उत्तर में रहा
- पश्चिमी छोर सामान्य या सामान्य के उत्तर में रहेगा
- पूर्वी छोर सामान्य या सामान्य के दक्षिण में रहेगा
सोमाली जेट (Low-level Somali Jet):
- ताकत में कमजोर रहने की संभावना
- सामान्य स्थिति के दक्षिण में रहेगा
ट्रॉपिकल ईस्टर्ली जेट:
- प्रायद्वीपीय भारत पर अपनी सामान्य स्थिति के पास रहेगा
तिब्बती एंटीसाइक्लोन:
- तीव्रता में कमजोर रहने की संभावना
- अपनी सामान्य स्थिति के पास रहेगा
राज्यवार प्रभाव: एक नजर में
सबसे अधिक प्रभावित राज्य (20-26 अगस्त):
| राज्य | चेतावनी का स्तर | मुख्य प्रभाव |
|---|---|---|
| ओडिशा | अति भारी वर्षा (23 अगस्त) | बाढ़, फसल क्षति, यातायात बाधित |
| झारखंड | भारी वर्षा | जलभराव, खदानों में पानी भरना |
| बिहार | भारी वर्षा (22-25 अगस्त) | नदियों में बाढ़, गांवों में पानी |
| पश्चिम बंगाल | भारी से अति भारी | कोलकाता समेत कई जिलों में जलजमाव |
| छत्तीसगढ़ | लगातार भारी वर्षा | धान की फसल को नुकसान |
| पूर्वी मध्य प्रदेश | अति भारी वर्षा (20-21 अगस्त) | सड़कें डूबना, बिजली गुल |
| उत्तराखंड | अति भारी वर्षा (18 अगस्त) | भूस्खलन का खतरा |
| अरुणाचल प्रदेश, असम-मेघालय | भारी वर्षा | ब्रह्मपुत्र और अन्य नदियों में बाढ़ |
मध्यम प्रभावित क्षेत्र:
- कोंकण और गोवा: व्यापक वर्षा
- तटीय कर्नाटक: फेयरली वाइडस्प्रेड वर्षा
- केरल और माहे: कुछ दिनों में व्यापक वर्षा
कम प्रभावित क्षेत्र:
- तमिलनाडु, पुदुचेरी और कराईकल: छिटपुट से बिखरी हुई बारिश
- गुजरात क्षेत्र, मध्य महाराष्ट्र, मराठवाड़ा: छिटपुट से बिखरी हुई बारिश
- सौराष्ट्र और कच्छ: छिटपुट से बिखरी हुई बारिश
विशेषज्ञों की राय
मौसम विज्ञानी डॉ. आर.के. शर्मा कहते हैं: “अगले दो हफ्तों में पूर्वी और मध्य भारत में लगातार मौसम प्रणालियों के कारण भारी वर्षा की घटनाएं बनी रह सकती हैं। किसानों को अपनी फसलों की सुरक्षा के लिए तुरंत कदम उठाने चाहिए।”
कृषि विशेषज्ञ प्रो. सुनीता वर्मा कहती हैं: “धान, सोयाबीन और मक्का की फसलों के लिए यह क्रिटिकल समय है। अगर जल निकासी की उचित व्यवस्था नहीं की गई तो उपज में 20-30% तक की कमी हो सकती है।”
आपदा प्रबंधन विशेषज्ञ श्री राजेश कुमार कहते हैं: “बाढ़ प्रवण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को अलर्ट रहना चाहिए। आपातकालीन किट तैयार रखें और स्थानीय प्रशासन के निर्देशों का पालन करें।”
मुख्य बातें (Key Points):
- भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने 20 अगस्त से 2 सितंबर तक भारी वर्षा की चेतावनी जारी की
- ओडिशा में 23 अगस्त को अति भारी वर्षा (Very Heavy Rainfall) की संभावना
- पूर्वी मध्य प्रदेश और पश्चिम उत्तर प्रदेश में 20-21 अगस्त को अति भारी वर्षा
- पिछले सप्ताह दो डिप्रेशन ने पूर्वी भारत में तबाही मचाई
- पूरे देश में मानसून सीजन में अब तक सामान्य से 13% कम बारिश
- एल नीनो की मध्यम स्थितियां मानसून को प्रभावित कर रही हैं
- किसानों के लिए आपातकालीन जल निकासी और फसल सुरक्षा की सलाह जारी








