Jaswant Singh Khalra Case Assembly में तब चर्चा का विषय बना जब शिरोमणि अकाली दल “वारिस पंजाब दे” के वरिष्ठ नेता और मुल्लांपुर दाखा से विधायक सरदार मनप्रीत सिंह इयाली ने पंजाब विधानसभा के चल रहे सत्र के दौरान शहीद जसवंत सिंह खालड़ा के जीवन और संघर्ष पर आधारित फिल्म ‘सतलुज’ से जुड़े मुद्दे को जोरदार ढंग से उठाया। देखा जाए तो यह एक बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण मुद्दा है जो पंजाब के काले दौर से जुड़ा है।
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दोषी कहां हैं? इयाली का सवाल
सरदार मनप्रीत सिंह इयाली ने सदन में सवाल किया कि मानवाधिकारों के योद्धा शहीद जसवंत सिंह खालड़ा के मामले में दोषी ठहराए गए पूर्व DSP जसपाल सिंह तथा सब-इंस्पेक्टर सतनाम सिंह और जसबीर सिंह वर्ष 2023 से कहां हैं।
उन्होंने कहा, “यह अत्यंत गंभीर मामला है और पंजाब के लोगों को इसके बारे में जानने का पूरा अधिकार है।”
अगर गौर करें तो इयाली का सवाल बिल्कुल सही है। अगर अदालत ने किसी को दोषी ठहराया है तो वे कहां हैं? सजा काट रहे हैं या फरार हैं?
इयाली ने कहा कि इन दोषियों की वर्तमान स्थिति के बारे में जानकारी सरकार द्वारा सार्वजनिक की जानी चाहिए। उन्होंने सवाल किया, “आखिर सरकार इस मामले पर चुप्पी क्यों साधे हुए है और दोषियों की तलाश अथवा उनके खिलाफ की गई कार्रवाई के बारे में कोई स्पष्ट जानकारी क्यों नहीं दी जा रही।”
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जसवंत सिंह खालड़ा कौन थे?
जसवंत सिंह खालड़ा एक मानवाधिकार कार्यकर्ता थे जिन्होंने 1990 के दशक में पंजाब के काले दौर में बेगुनाह युवकों की हत्याओं और फर्जी मुठभेड़ों का पर्दाफाश किया था। उन्होंने खुलासा किया था कि हजारों युवकों को पुलिस ने मार दिया और उनके शवों को लावारिस बताकर अंतिम संस्कार कर दिया।
1995 में खालड़ा को पुलिस ने अगवा कर लिया और उनकी हत्या कर दी गई। उनका शव कभी नहीं मिला। 2005 में CBI ने तीन पुलिस अधिकारियों को दोषी ठहराया और उन्हें सजा सुनाई।
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि खालड़ा ने सच्चाई उजागर करने की कोशिश की और इसकी कीमत उन्हें अपनी जान देकर चुकानी पड़ी।
मामला केवल एक व्यक्ति का नहीं
इयाली ने कहा, “जसवंत सिंह खालड़ा का मामला केवल एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि पंजाब में मानवाधिकारों और इंसाफ से जुड़ा हुआ है। इसलिए सरकार की जिम्मेदारी बनती है कि वह इस मामले में सदन और जनता को पूरी जानकारी दे।”
समझने वाली बात यह है कि खालड़ा का मामला पूरे पंजाब के उस काले दौर का प्रतीक है जब हजारों बेगुनाह मारे गए। यह सिर्फ एक केस नहीं, बल्कि हजारों परिवारों की पीड़ा है।
इयाली ने मांग की कि सरकार इस मामले में अपना रुख स्पष्ट करे और दोषी ठहराए गए अधिकारियों की वर्तमान स्थिति के बारे में तत्काल जानकारी सार्वजनिक करे।
चीमा के राजनीतिक जवाब पर करारा पलटवार
वित्त मंत्री हरपाल चीमा के राजनीतिक जवाब पर सरदार इयाली ने करारा पलटवार करते हुए कहा कि सरकार यह बताए कि “दोषी कहां हैं?”
दिलचस्प बात यह है कि सरकार ने सीधा जवाब देने के बजाय राजनीतिक बयानबाजी की। इयाली ने इसे स्वीकार नहीं किया और सीधा सवाल दोहराया।
यह दिखाता है कि सरकार के पास शायद कोई ठोस जवाब नहीं है या फिर वह जानकारी छुपाना चाहती है।
पंजाब का काला दौर याद किया
सरदार मनप्रीत सिंह इयाली ने विधानसभा के भीतर बोलते हुए पंजाब के उस काले दौर को याद करवाया, जब तत्कालीन कांग्रेस सरकार के समय हजारों बेगुनाह युवाओं को चुन-चुनकर मार दिया गया था।
उस दौर में मारे गए युवाओं के शवों का लावारिस बताकर अंतिम संस्कार कर दिया जाता था। इयाली ने कहा कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि आज तक पीड़ित परिवारों को न्याय नहीं मिल सका है।
अगर गौर करें तो 1980-90 के दशक में पंजाब में आतंकवाद के नाम पर भारी मानवाधिकार हनन हुए। पुलिस ने हजारों लोगों को फर्जी मुठभेड़ों में मारा। खालड़ा ने इसी का खुलासा किया था।
खालड़ा को ही गुमशुदा लाश बना दिया
इयाली ने कहा, “इन अज्ञात शवों को न्याय दिलाने के लिए संघर्ष करने वाले भाई जसवंत सिंह खालड़ा को तत्कालीन सरकार ने स्वयं एक गुमशुदा लाश बना दिया।”
यह बयान बेहद मार्मिक है। जो व्यक्ति गुमशुदा लोगों को न्याय दिलाने की कोशिश कर रहा था, उसे ही गायब कर दिया गया। उनका शव भी कभी नहीं मिला।
इयाली ने कहा, “यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि आज तक न्याय पूरी तरह नहीं मिल पाया है।”
फिल्म ‘सतलुज’ का मुद्दा
इयाली ने फिल्म ‘सतलुज’ का मुद्दा भी उठाया जो जसवंत सिंह खालड़ा के जीवन पर आधारित है। यह फिल्म उनके संघर्ष और बलिदान को दिखाती है।
फिल्म से जुड़ा मुद्दा क्या है, यह प्रेस विज्ञप्ति में स्पष्ट नहीं है। लेकिन संभवतः इयाली का कहना है कि सरकार को इस फिल्म को बढ़ावा देना चाहिए ताकि युवा पीढ़ी को उस काले दौर के बारे में पता चले।
सरकार की चुप्पी चिंताजनक
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि सरकार ने इयाली के सवालों का सीधा जवाब नहीं दिया। यह चुप्पी कई सवाल खड़े करती है:
- क्या दोषी फरार हैं?
- क्या उन्हें कोई राजनीतिक संरक्षण मिला है?
- क्या वे सजा काट रहे हैं?
- सरकार के पास जानकारी क्यों नहीं है?
विपक्षी विधायक ने एक वाजिब सवाल पूछा है और सरकार को जवाब देना चाहिए।
मानवाधिकारों का सवाल
यह मामला सिर्फ राजनीतिक नहीं, बल्कि मानवाधिकारों का भी है। हर नागरिक को न्याय पाने का अधिकार है। अगर किसी के साथ अन्याय हुआ है तो दोषियों को सजा मिलनी चाहिए।
खालड़ा ने बेगुनाह लोगों के लिए आवाज उठाई थी। उनकी हत्या एक बड़ा अपराध था। दोषियों को सजा मिली, लेकिन वे कहां हैं? यह जानने का अधिकार जनता को है।
मुख्य बातें (Key Points)
- मनप्रीत इयाली ने विधानसभा में जसवंत सिंह खालड़ा मामला उठाया
- पूछा – दोषी पूर्व DSP और सब-इंस्पेक्टर 2023 से कहां हैं?
- वित्त मंत्री चीमा के राजनीतिक जवाब पर करारा पलटवार
- पंजाब के काले दौर को याद किया, फिल्म ‘सतलुज’ का मुद्दा उठाया










