One Officer One Official Car Policy: क्या आपने कभी अपने इलाके में किसी बड़े सरकारी अधिकारी का घर देखा है? घर के बाहर दो-दो, तीन-तीन चमचमाती गाड़ियां खड़ी रहती हैं। सफेद रंग, ऊपर लाल-नीली बत्ती या सायरन, और ड्राइवर मुस्तैद।
अब जरा सोचिए, अफसर साहब तो एक ही हैं। फिर इतनी गाड़ियों की फौज क्यों? एक गाड़ी उनके खुद के दफ्तर के लिए, दूसरी गाड़ी दूसरे विभाग का प्रभार यानी कि चार्ज संभालने के लिए, और तीसरी गाड़ी कभी-कभार घर की सब्जी लाने या बच्चों को छोड़ने के लिए भी दिख जाती थी।
लेकिन दोस्तों, अब यह शाही ठाट हमेशा के लिए बंद होने जा रहा है। देखा जाए तो केंद्र सरकार ने एक ऐसा डंडा चलाया है जिससे बड़े-बड़े नौकरशाहों के पसीने छूट गए।
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नियम एक: वन ऑफिसर वन कार
सरकार ने साफ कह दिया है कि नियम एक ही होगा – One Officer One Car। यानी एक अफसर को सिर्फ एक ही सरकारी गाड़ी मिलेगी। चाहे उनके पास 10 विभागों का चार्ज ही क्यों न हो।
समझने वाली बात यह है कि वित्त मंत्रालय का व्यय विभाग (Department of Expenditure) इस नियम को सख्ती से लागू करवा रहा है।
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अब तक क्या होता था?
मान लीजिए एक बड़े IAS अफसर हैं। वह किसी एक मंत्रालय में सचिव हैं। उन्हें वहां से एक बढ़िया सरकारी गाड़ी मिली हुई है। अब मान लीजिए पास के ही किसी दूसरे मंत्रालय या किसी सरकारी कंपनी में जगह खाली हुई है, तो उन्हें वहां का भी अतिरिक्त प्रभार (additional charge) दे दिया गया है।
फिर क्या था, साहब को उस दफ्तर से भी एक नई चमचमाती गाड़ी अलॉट हो जाती है। यानी:
| स्थिति | पहले क्या होता था | अब क्या होगा |
|---|---|---|
| एक विभाग में पद | 1 गाड़ी | 1 गाड़ी |
| अतिरिक्त चार्ज मिलने पर | 2 गाड़ियां | 1 गाड़ी ही |
| PSU का चेयरमैन भी बने तो | 3 गाड़ियां | 1 गाड़ी ही |
पेट्रोल का खर्च डबल, मेंटेनेंस का खर्च डबल, और ड्राइवर का खर्च भी डबल। और यह सब पैसा किसकी जेब से जा रहा था? आपके और हमारे टैक्स से।
सरकार ने कहा: बस, बहुत हुआ!
लेकिन अब सरकार ने कहा कि सरकारी पैसे का ऐसा इस्तेमाल बहुत हुआ। नए नियमों के मुताबिक:
✓ अतिरिक्त चार्ज मिला तो भी गाड़ी एक ही रहेगी
✓ अगर किसी अफसर को किसी दूसरे डिपार्टमेंट, PSU या बोर्ड की एक्स्ट्रा जिम्मेदारी मिलती है, तो वह दूसरी गाड़ी की मांग नहीं कर सकते
✓ उन्हें अपनी पुरानी गाड़ी से ही काम चलाना होगा
PSU की गाड़ियों पर नो एंट्री
अक्सर देखा जाता था कि सरकारी अफसर PSU (सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रम) यानी सरकारी कंपनियों की महंगी-महंगी गाड़ियां अपने निजी या दफ्तर इस्तेमाल में ले लेते थे।
हैरान करने वाली बात यह है कि सरकार ने इस पर पूरी तरह ब्रेक लगा दिया है। अब जब तक आप किसी ऑफिशियल टूर पर न हों, आप PSU की गाड़ियां इस्तेमाल नहीं कर सकते।
खाली गाड़ियों पर सख्त पहरा
अब आप सोचेंगे कि जो गाड़ियां अब एक्स्ट्रा बच जाएंगी, उनका क्या होगा? कहीं ऐसा न हो कि कोई भी उनका गलत इस्तेमाल कर ले।
समझने वाली बात यह है कि सरकार ने कहा है कि खाली बची गाड़ियों को लॉक करके सुरक्षित रखा जाएगा। उनका कोई अनाधिकृत (unauthorized) इस्तेमाल नहीं होगा।
यह नियम अचानक क्यों?
अब सवाल उठता है कि सरकार को अचानक यह नियम दोबारा याद दिलाने की जरूरत क्यों पड़ी?
दरअसल, सितंबर 2022 में सरकार ने गाड़ी के इस्तेमाल से जुड़े सारे नियमों को मिलाकर एक बड़ा गाइडलाइन बनाया था। लेकिन वक्त के साथ लोग नियम भूलने लगते हैं।
दिलचस्प बात यह है कि इसलिए सरकार ने फिर से यह सख्त आदेश जारी करके साफ कर दिया है कि इसे ढिलाई में न लिया जाए।
तीन बड़े मकसद
इसके पीछे सरकार के तीन बड़े मकसद हैं:
1. सरकारी गाड़ियों का दुरुपयोग रोकना
2. जनता के टैक्स का पैसा बचाना (पेट्रोल, डीजल और गाड़ियों के मेंटेनेंस में हर साल करोड़ों-अरबों रुपए खर्च होते हैं)
3. वित्तीय अनुशासन (Financial Discipline) – जब आम जनता को बजट संभालकर चलना पड़ता है, तो सरकारी दफ्तरों में यह फिजूलखर्ची क्यों?
VIP कल्चर पर बड़ी स्ट्राइक
देखा जाए तो जब एक अफसर एक ही गाड़ी में जाकर अपने सारे काम निपटा सकता है, तो दो-दो गाड़ियां रखना सिर्फ VIP कल्चर को बढ़ावा देना ही होता था।
सरकार का यह ‘वन ऑफिसर वन कार’ का फैसला न सिर्फ सरकारी संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल सुनिश्चित करेगा, बल्कि इस VIP कल्चर पर एक बड़ी स्ट्राइक है।
मुख्य बातें (Key Points)
✓ केंद्र सरकार ने ‘वन ऑफिसर वन कार’ पॉलिसी सख्ती से लागू की
✓ अतिरिक्त चार्ज मिलने पर भी दूसरी गाड़ी नहीं मिलेगी
✓ PSU की गाड़ियों का निजी इस्तेमाल बंद
✓ खाली गाड़ियां लॉक करके रखी जाएंगी
✓ करोड़ों रुपये की बचत, VIP कल्चर पर लगाम













