Assam Floods 2025 Death Toll: असम में इस साल आई विनाशकारी बाढ़ ने एक बार फिर राज्य को तबाही के मुंह में धकेल दिया है। हालांकि स्थिति में सुधार के संकेत दिख रहे हैं, लेकिन दो और मौतों के साथ मृतकों की कुल संख्या बढ़कर 68 हो गई है। सरकारी अधिकारियों ने सोमवार को बताया कि प्रदेश के पांच जिलों में अभी भी 5.24 लाख से अधिक लोग बाढ़ की चपेट में हैं। और यहीं से शुरू होती है एक ऐसी कहानी जो हर साल दोहराई जाती है, लेकिन स्थायी समाधान अभी भी दूर है।
देखा जाए तो असम के लिए बाढ़ कोई नई समस्या नहीं है। ब्रह्मपुत्र और उसकी सहायक नदियां हर साल बरसात में उफान पर आती हैं और लाखों लोगों का जीवन अस्त-व्यस्त कर देती हैं। लेकिन इस बार का विनाश कुछ ज्यादा ही भयावह रहा है।
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चराईदेओ सबसे ज्यादा प्रभावित
ताजा दो मौतें चराईदेओ जिले से दर्ज की गई हैं, जो इस समय बाढ़ से सबसे ज्यादा प्रभावित इलाका है। यहां लगभग 1.9 लाख लोग पानी की मार झेल रहे हैं। गांवों के गांव पानी में डूबे हुए हैं, फसलें बर्बाद हो गई हैं और लोग राहत शिविरों में शरण लेने को मजबूर हैं।
अगर गौर करें तो चराईदेओ असम का एक ऐतिहासिक जिला है, जो अहोम राजवंश की राजधानी हुआ करता था। लेकिन अब यही जिला बाढ़ की सबसे बड़ी त्रासदी झेल रहा है।
अन्य प्रभावित जिलों में गोलाघाट, जोरहाट, नगांव और शिवसागर शामिल हैं। हालांकि इन जिलों में स्थिति चराईदेओ जितनी गंभीर नहीं है, लेकिन यहां भी हजारों लोग बेघर हो चुके हैं।
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354 राहत शिविरों में 37,724 लोग
अधिकारियों के अनुसार चार जिलों में कुल 354 राहत कैंप और सहायता वितरण केंद्र चलाए जा रहे हैं, जिनमें 37,724 बेघर हुए लोगों की देखभाल की जा रही है। यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि यह संख्या सिर्फ उन लोगों की है जो शिविरों में रह रहे हैं। इससे कहीं ज्यादा लोग अपने रिश्तेदारों या ऊंची जगहों पर शरण लिए हुए हैं।
राहत शिविरों में बुनियादी सुविधाएं मुहैया कराई जा रही हैं:
• खाना और पीने का साफ पानी
• चिकित्सा सहायता
• अस्थायी आवास
• बच्चों के लिए विशेष देखभाल
लेकिन समझने वाली बात यह है कि राहत शिविर कोई स्थायी समाधान नहीं हैं। लोग अपने घर, अपनी जमीन और अपनी आजीविका से दूर हैं।
बचाव कार्यों में जुटीं कई एजेंसियां
राहत और बचाव कार्यों में भारतीय सेना, NDRF (राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल), SDRF (राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल), फायर एंड इमरजेंसी सर्विसेज और स्थानीय पुलिस समेत कई एजेंसियां मुस्तैदी से जुटी हुई हैं।
दिलचस्प बात यह है कि बचाव दल न सिर्फ मनुष्यों को, बल्कि पालतू जानवरों और मवेशियों को भी बचा रहे हैं। असम एक कृषि प्रधान राज्य है और किसानों के लिए उनका मवेशी उनकी पूंजी है।
हेलीकॉप्टरों का उपयोग करके दुर्गम इलाकों में फंसे लोगों को निकाला जा रहा है। जहां सड़क या नाव से पहुंचना संभव नहीं है, वहां हवाई मार्ग से राहत सामग्री पहुंचाई जा रही है।
बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान
बाढ़ के कारण प्रदेश के विभिन्न जिलों में तटबंध, सड़कें, पुल और अन्य बुनियादी ढांचे को बुरी तरह नुकसान पहुंचा है। कई गांव मुख्य सड़कों से कट गए हैं। पुल बह जाने से संपर्क टूट गया है। बिजली के खंभे गिर गए हैं।
अनुमान है कि इस बाढ़ से हुए नुकसान की भरपाई में सैकड़ों करोड़ रुपये खर्च होंगे। सड़कों की मरम्मत, पुलों का पुनर्निर्माण और तटबंधों को मजबूत करना एक लंबी प्रक्रिया होगी।
मुख्यमंत्री सरमा का आश्वासन
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने बताया कि प्रभावित इलाकों में बिजली आपूर्ति बहाल करने का काम चरणबद्ध तरीके से चल रहा है। उन्होंने एक सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, “जैसे-जैसे असम बाढ़ की मार से उभर रहा है, प्रभावित जिलों में बिजली बहाली के प्रयास जारी हैं।”
उन्होंने बताया कि बाढ़ के दौरान सुरक्षा के लिहाज से बिजली बंद कर दी गई थी, लेकिन अब बिजली विभाग की टीमें सुरक्षा जांच के बाद शिवसागर, जोरहाट, चराईदेओ, धुबरी, बोंगाईगांव और अन्य इलाकों में बिजली की बहाली कर रही हैं।
दिलचस्प बात यह है कि मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि सरकार जरूरी सेवाओं को जल्द से जल्द बहाल करने और प्रभावित समुदायों में सामान्य स्थिति बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।
पुनर्वास और राहत कार्य
सीएम सरमा ने आश्वासन दिया कि:
• बाढ़ के बाद पुनर्वास का काम तेजी से किया जाएगा
• क्षतिग्रस्त स्कूलों और बुनियादी ढांचे की पूरी मरम्मत की जाएगी
• प्रभावित क्षेत्रों में चावल और अन्य राशन की निरंतर वितरण जारी रहेगा
• डॉक्टरों की टीमें स्वास्थ्य देखभाल में जुटी हुई हैं
• जरूरत पड़ने पर जरूरी वस्तुओं को हवाई मार्ग (एयर-ड्रॉप) से भी पहुंचाया जा रहा है
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि बाढ़ के बाद बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। गंदा पानी, खुले में शौच और स्वच्छता की कमी से डायरिया, हैजा और त्वचा रोग फैल सकते हैं। इसलिए चिकित्सा सहायता बेहद जरूरी है।
असम की बाढ़: एक सालाना समस्या
अगर गौर करें तो असम में बाढ़ एक पुरानी और दोहराई जाने वाली समस्या है। ब्रह्मपुत्र नदी और उसकी सहायक नदियां मानसून के दौरान उफान पर आती हैं और विशाल क्षेत्र को जलमग्न कर देती हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि:
• जलवायु परिवर्तन ने बाढ़ की गंभीरता बढ़ा दी है
• अनियंत्रित निर्माण ने प्राकृतिक जल निकासी को बाधित किया है
• तटबंधों का रखरखाव ठीक से नहीं होता
• नदियों में गाद जमा होने से जल धारण क्षमता कम हो गई है
स्थायी समाधान के लिए एक दीर्घकालिक योजना की जरूरत है, जिसमें नदी प्रबंधन, तटबंधों का आधुनिकीकरण और बाढ़ पूर्व चेतावनी प्रणाली शामिल हो।
मुख्य बातें (Key Points)
• असम में बाढ़ से मृतकों की संख्या बढ़कर 68 हो गई, ताजा दो मौतें चराईदेओ जिले से
• पांच जिलों में अभी भी 5.24 लाख से अधिक लोग प्रभावित, 354 राहत शिविरों में 37,724 लोग रह रहे हैं
• सेना, NDRF, SDRF और स्थानीय प्रशासन बचाव कार्यों में जुटे हुए हैं
• मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने बिजली बहाली और तेज पुनर्वास का आश्वासन दिया










