NEET Protest Delhi: राजधानी दिल्ली की सड़कें आज गवाह बनीं एक बड़े छात्र आंदोलन की, जब कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के हजारों कार्यकर्ता और छात्र जंतर मंतर से सीधे संसद भवन की ओर कूच कर गए। NEET परीक्षा में पेपर लीक और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर शुरू हुए इस मार्च ने पूरी दिल्ली को थाम लिया। पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े, धारा 163 लागू की और नोएडा-दिल्ली बॉर्डर पर किलोमीटरों लंबा जाम लग गया।
देखा जाए तो यह सिर्फ एक विरोध प्रदर्शन नहीं, बल्कि लाखों छात्रों के भविष्य से जुड़ा एक सवाल है। 20 जुलाई 2026 की सुबह से ही राजधानी में अजीब सी बेचैनी थी। एक तरफ संसद का मानसून सत्र चल रहा था, दूसरी तरफ सड़कों पर छात्रों का गुस्सा उबल रहा था।
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भूख हड़ताल से संसद मार्च तक का सफर
कहानी शुरू होती है दो दिन पहले से, जब CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने भूख हड़ताल शुरू की थी। उनकी मांग साफ थी: NEET और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में हो रही गड़बड़ियों की निष्पक्ष जांच हो। पेपर लीक का मामला सामने आए और जिम्मेदार लोगों को सजा मिले।
आज सुबह अभिजीत दीपके ने अपना अनशन तो तोड़ दिया, लेकिन साथ ही एक बड़े आंदोलन का ऐलान कर दिया—संसद मार्च। जंतर मंतर से सीधे संसद भवन तक। और फिर शुरू हुआ वो सिलसिला जिसने पूरी दिल्ली की रफ्तार रोक दी।
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि यह कोई साधारण विरोध प्रदर्शन नहीं था। हजारों की संख्या में छात्र, युवा और कार्यकर्ता सड़कों पर उतर आए। उनके हाथों में तख्तियां थीं, नारे गूंज रहे थे—”शिक्षा मंत्री इस्तीफा दो”, “NEET में न्याय चाहिए”, “पेपर लीक बंद करो”।
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दिल्ली पुलिस ने क्यों छोड़े आंसू गैस के गोले
जैसे-जैसे प्रदर्शनकारी संसद भवन के करीब पहुंचने लगे, सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ने लगी। आखिरकार संसद का मानसून सत्र चल रहा था। देश के सभी बड़े नेता, मंत्री और सांसद संसद भवन के अंदर थे।
दिल्ली पुलिस ने तुरंत एक्शन लिया। संसद भवन के गेट नंबर 1 को CISF ने तुरंत बंद कर दिया। प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए बैरिकेडिंग की गई। लेकिन जब भीड़ बढ़ती गई और प्रदर्शनकारी आगे बढ़ने लगे, तो पुलिस को आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े।
दिलचस्प बात यह है कि पुलिस ने सिर्फ आंसू गैस ही नहीं, बल्कि पूरी दिल्ली में थ्री-टायर सुरक्षा व्यवस्था लागू कर दी। इसका मतलब क्या है? तीन परतों की सुरक्षा—पहली और दूसरी परत में दिल्ली पुलिस के जवान और तीसरी परत में अर्धसैनिक बल तैनात।
जंतर मंतर, पार्लियामेंट स्ट्रीट, सेंट्रल विस्टा, कनॉट प्लेस और शंकर चौक—इन सभी जगहों पर भारी सुरक्षा तैनात कर दी गई। किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए रैपिड रिस्पांस टीमें भी 24 घंटे ड्यूटी पर लगा दी गईं।
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धारा 163 क्या है और क्यों लगाई गई
अब यहां समझने वाली बात यह है कि नई दिल्ली के डीसीपी सचिन शर्मा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पब्लिक एडवाइजरी जारी की। उन्होंने साफ-साफ कहा कि इस विरोध मार्च या जुलूस के लिए पुलिस से कोई इजाजत नहीं मांगी गई थी और न ही ऐसी किसी मार्च की अनुमति दी गई है।
संसद के मानसून सत्र और इस हंगामे को देखते हुए नई दिल्ली इलाके में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 लागू कर दी गई है। यह पुरानी धारा 144 जैसी ही है।
इसके तहत क्या प्रावधान हैं? पांच या उससे अधिक लोगों का एक जगह जमा होना प्रतिबंधित है। प्रदर्शन करना या जुलूस निकालना पूरी तरह से रोक है। हां, जंतर मंतर पर पहले से परमिशन लेकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन की छूट दी गई है।
पुलिस ने चेतावनी दी है कि जो भी इन नियमों को तोड़ेगा, उस पर भारतीय न्याय संहिता की धारा 223 के तहत सख्त कानूनी कारवाई होगी।
आखिर CJP की मांगें क्या हैं
अगर गौर करें तो यह पूरा विरोध प्रदर्शन तीन बड़ी मांगों को लेकर है:
पहली मांग: NEET और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में हुई गड़बड़ियों की पूरी तरह से निष्पक्ष जांच हो। पेपर लीक के सभी मामलों का खुलासा हो।
दूसरी मांग: जो भी अधिकारी या व्यक्ति इन गड़बड़ियों के लिए जिम्मेदार हैं, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई हो। खासतौर पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा।
तीसरी मांग: देश में बढ़ती बेरोजगारी और सरकारी भर्ती परीक्षाओं के नतीजों में होने वाली देरी को रोका जाए। युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ बंद हो।
कहने का मतलब साफ है—छात्रों का गुस्सा सिर्फ एक परीक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरी शिक्षा व्यवस्था और भर्ती प्रक्रिया को लेकर है।
नोएडा-दिल्ली बॉर्डर पर क्यों लगा जाम
इस पूरे विरोध प्रदर्शन का सीधा असर दिल्ली-NCR के आम लोगों पर भी पड़ा। सुरक्षा जांच और बैरिकेडिंग की वजह से नोएडा-दिल्ली रूट पर किलोमीटरों लंबा ट्रैफिक जाम लग गया। दिल्ली जाने वाले रास्ते पर गाड़ियां रेंग रही थीं।
ऑफिस जाने वाले लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। सोशल मीडिया पर लोग अपनी तस्वीरें शेयर कर रहे थे कि कैसे वे घंटों से जाम में फंसे हुए हैं। कई लोगों ने अपने ऑफिस में देरी से पहुंचने की जानकारी दी।
राहत की बात यह रही कि दिल्ली मेट्रो सामान्य रूप से चल रही थी, इसलिए कई लोगों ने मेट्रो का सहारा लिया।
सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच बातचीत की संभावना
और अब आती है इस पूरी कहानी का सबसे दिलचस्प मोड़। सड़कों पर हंगामा मचा हुआ था, तो सियासी गलियारों में भी हलचल तेज हो गई। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान खुद गृह मंत्री अमित शाह से मिलने के लिए संसद भवन में उनके कक्ष में पहुंचे।
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि दोनों बड़े नेताओं के बीच इस पूरे मुद्दे और मौजूदा स्थिति को लेकर लंबी बातचीत हुई। हालांकि अभी तक इस बैठक के बारे में कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।
दूसरी तरफ एक बड़ी खबर यह भी आ रही है कि सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच बातचीत का रास्ता खुल गया है। CJP के प्रवक्ता सौरभ दास का दावा है कि उन्हें केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने बातचीत के लिए बुलाया है।
सौरभ दास और CJP के आशुतोष रांका केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा से मिलने के लिए निकल चुके हैं। अब इस बैठक में क्या बातचीत होती है, इस पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं।
CJP ने अपने समर्थकों से की अपील
इस बीच CJP ने अपने समर्थकों से एक जरूरी अपील की है। उन्होंने कहा है कि भले ही पुलिस द्वारा कुछ जगहों पर आपको रोका गया हो, लेकिन आप सभी शांति बनाए रखें।
उनका कहना है कि वे इस मुद्दे को शांति और बातचीत के जरिए ही सुलझाना चाहते हैं। हिंसा किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है। उनका मानना है कि छात्रों के हक की लड़ाई लोकतांत्रिक तरीके से ही लड़ी जाएगी।
पूरे मामले का राजनीतिक पहलू
समझने वाली बात यह भी है कि यह मुद्दा अब सिर्फ शिक्षा तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन चुका है। विपक्षी दल भी इस मामले को उठा रहे हैं और सरकार पर दबाव बना रहे हैं।
संसद के मानसून सत्र में भी यह मुद्दा गूंजने की पूरी संभावना है। विपक्ष शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर अड़ा हुआ है। कई विपक्षी सांसदों ने कहा है कि जब तक इस मामले की पूरी जांच नहीं होती और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई नहीं होती, वे चुप नहीं बैठेंगे।
दूसरी तरफ सरकार का कहना है कि जांच चल रही है और जल्द ही सच सामने आ जाएगा। लेकिन छात्रों और युवाओं का कहना है कि सिर्फ जांच की बात से काम नहीं चलेगा, ठोस कदम उठाने होंगे।
NEET विवाद की पृष्ठभूमि
अगर इस पूरे मामले की पृष्ठभूमि देखें तो NEET परीक्षा को लेकर विवाद नया नहीं है। पिछले कुछ वर्षों में कई बार पेपर लीक के आरोप लगे हैं। छात्रों को परिणाम में गड़बड़ियां नजर आई हैं। कई छात्रों ने कोर्ट का दरवाजा भी खटखटाया है।
इस साल की NEET परीक्षा में भी कई राज्यों से पेपर लीक की खबरें आईं। सोशल मीडिया पर परीक्षा से पहले ही कुछ सवालों की तस्वीरें वायरल हो गईं। इसके बाद छात्रों में गुस्सा फैल गया।
जो छात्र महीनों, सालों मेहनत करके परीक्षा की तैयारी करते हैं, उनके साथ यह अन्याय है। एक तरफ ईमानदार छात्र मेहनत कर रहे हैं, दूसरी तरफ कुछ लोग पैसे देकर पेपर खरीद रहे हैं—यह कैसा न्याय है?
अब आगे क्या होगा
फिलहाल स्थिति यह है कि CJP के प्रतिनिधि जेपी नड्डा से मिलने जा रहे हैं। इस बैठक में क्या फैसला होता है, यह बहुत महत्वपूर्ण होगा। अगर सरकार कोई ठोस आश्वासन देती है तो शायद प्रदर्शनकारी अपना आंदोलन स्थगित कर दें।
लेकिन अगर बातचीत विफल रहती है तो आने वाले दिनों में यह आंदोलन और तेज हो सकता है। CJP ने पहले ही संकेत दे दिए हैं कि वे अपनी मांगों को लेकर किसी भी कीमत पर पीछे नहीं हटेंगे।
संसद के मानसून सत्र में भी यह मुद्दा गर्म रहेगा। विपक्ष सरकार को घेरने का कोई मौका नहीं छोड़ेगा। शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान पर दबाव बढ़ता जा रहा है।
छात्रों और युवाओं की निगाहें अब सरकार के अगले कदम पर टिकी हुई हैं। क्या सरकार उनकी मांगों को गंभीरता से लेगी? क्या जांच में सच्चाई सामने आएगी? क्या जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई होगी? ये सवाल अभी भी अनुत्तरित हैं।
मुख्य बातें (Key Points)
• CJP का संसद मार्च 20 जुलाई को जंतर मंतर से शुरू हुआ, हजारों छात्र और कार्यकर्ता शामिल हुए
• दिल्ली पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े, धारा 163 लागू की और थ्री-टायर सुरक्षा व्यवस्था की
• नोएडा-दिल्ली बॉर्डर पर किलोमीटरों लंबा जाम, ऑफिस जाने वाले लोगों को भारी परेशानी
• केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा से CJP प्रतिनिधियों की बैठक, शिक्षा मंत्री और गृह मंत्री के बीच भी चर्चा













