RBI Financial Stability Report June 2026: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने अपनी जून 2026 की वित्तीय स्थिरता रिपोर्ट में कहा है कि मई 2026 में अप्रैल के मुकाबले सोने की दरामद (आयात) में वृद्धि काफी सुस्त रही है। साथ ही, वित्तीय प्रणाली के लिए सबसे महत्वपूर्ण अल्पकालिक खतरे के रूप में AI-आधारित साइबर हमलों को पहचाना गया है। हालांकि केंद्रीय बैंक ने यह भी कहा कि इन खतरों के बावजूद मजबूत पूंजी बफर के समर्थन से बैंक सुरक्षित और मजबूत बने हुए हैं। 30 जून को प्रकाशित इस रिपोर्ट में भारत की मैक्रो-आर्थिक नींव को बाहरी झटकों के विरुद्ध एक कुशन (सहारा) बताया गया है।
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सोने के आयात में सुस्ती: PM मोदी की अपील का असर?
दिलचस्प बात यह है कि 11 मई 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारतीयों को कम से कम एक साल के लिए सोना खरीदने से बचने की अपील की थी। श्री मोदी ने कहा था कि वैश्विक संकट के बीच, सोने की खरीद देश के विदेशी मुद्रा भंडार पर और दबाव डालेगी।
RBI की रिपोर्ट के अनुसार, मई 2026 में अप्रैल के मुकाबले सोने की दरामद (आयात) में वृद्धि काफी सुस्त रही है। समझने वाली बात यह है कि यह प्रधानमंत्री की अपील का प्रभाव हो सकता है या फिर सोने की ऊंची कीमतों के कारण लोगों ने खरीदारी कम की।
भारत दुनिया के सबसे बड़े सोना आयातकर्ताओं में से एक है और यह आयात चालू खाते के घाटे (Current Account Deficit) को बढ़ाता है। इसलिए सरकार और RBI दोनों ही सोने के आयात पर नजर रखते हैं।
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AI-आधारित साइबर हमले: वित्तीय प्रणाली के लिए सबसे बड़ा खतरा
RBI ने अपनी रिपोर्ट में वित्तीय प्रणाली के लिए सबसे महत्वपूर्ण अल्पकालिक खतरे के रूप में Artificial Intelligence (AI) आधारित साइबर हमलों को पहचाना है।
अगर गौर करें तो आजकल साइबर हमलावर AI का इस्तेमाल करके पहले से कहीं ज्यादा परिष्कृत (sophisticated) हमले कर रहे हैं। ये हमले बैंकिंग सिस्टम, ग्राहकों के डेटा और वित्तीय लेनदेन को निशाना बना सकते हैं।
हालांकि RBI ने यह भी स्पष्ट किया कि इन खतरों के बावजूद मजबूत पूंजी बफर (Capital Buffers) के समर्थन से बैंक सुरक्षित और मजबूत बने हुए हैं। यानी भारतीय बैंकों के पास इन खतरों से निपटने की क्षमता है।
भारत की मैक्रो-आर्थिक नींव मजबूत: RBI का दावा
केंद्रीय बैंक ने दावा किया है कि भारत की मैक्रो-आर्थिक नींव (Macro-economic Fundamentals) बाहरी झटकों के विरुद्ध एक कुशन (सहारा) के रूप में काम करती हैं।
हालांकि रिपोर्ट में यह भी नोट किया गया है कि सप्लाई चेन में रुकावटें और ऊर्जा की कीमतों में उतार-चढ़ाव अर्थव्यवस्था के लिए खतरा बने हुए हैं।
देखा जाए तो वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक अनिश्चितता, व्यापार युद्ध और तेल की कीमतों में अस्थिरता जैसे कारक भारतीय अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकते हैं। लेकिन RBI का कहना है कि हमारी आर्थिक बुनियाद इतनी मजबूत है कि हम इन झटकों को झेल सकते हैं।
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FY27 Q1 में विकास दर स्थिर, लेकिन तेल की कीमतें चिंता का विषय
बाहरी चुनौतियों के बावजूद RBI ने रिपोर्ट दी है कि आंकड़े दर्शाते हैं कि वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में विकास दर स्थिर थी।
रिपोर्ट में कहा गया है कि हालांकि एक अंतरिम अमेरिका-ईरान शांति समझौता अर्थव्यवस्था को हुलारा दे सकता है, परंतु तेल की ऊंची कीमतें वित्त वर्ष 2027 में भारत के विकास को प्रभावित कर सकती हैं।
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि भारत अपनी तेल की जरूरत का करीब 85% हिस्सा आयात करता है। इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में बढ़ोतरी सीधे हमारी अर्थव्यवस्था पर असर डालती है।
बैंकिंग सेक्टर लचीला, लेकिन फंडिंग बड़ी चुनौती
केंद्रीय बैंक के अनुसार मजबूत पूंजी प्रवाह, बढ़े हुए चालू खाते के घाटे के कारण पैदा हुए फंडिंग के दबाव को घटा सकता है।
RBI ने यह भी कहा कि बैंकिंग क्षेत्र की लचकता के बावजूद फंडिंग एक बड़ी रुकावट बनी हुई है। यानी बैंकों को पर्याप्त फंड जुटाने में चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।
रिपोर्ट में नोट किया गया है कि यह मूल्यांकन भू-राजनीतिक अनिश्चितता, सख्त वित्तीय स्थितियों और बार-बार आने वाले झटकों के वैश्विक संदर्भ में तैयार किया गया है।
घरेलू वित्तीय क्षेत्र पर तनाव अपेक्षाकृत हल्का
RBI के अनुसार, अन्य संकटों के मुकाबले घरेलू वित्तीय क्षेत्र पर तनाव अभी भी तुलनात्मक तौर पर हल्का है।
| संकेतक | वर्तमान स्थिति | अनुमान |
|---|---|---|
| SCB का GNPA अनुपात (मार्च 2026) | निम्न स्तर | – |
| SCB का GNPA (बेसलाइन, मार्च 2028) | – | 1.9% |
| SCB का GNPA (प्रतिकूल परिदृश्य, मार्च 2028) | – | 3.8-4.1% |
स्ट्रेस टेस्ट के नतीजे: NPA अनुपात नियंत्रण में
RBI ने आगे उजागर किया कि बैंक स्ट्रेस टेस्टों ने संकेत दिया है कि बेसलाइन दृश्य (Baseline Scenario) के तहत अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों (SCBs) का कुल गैर-कार्यकुशल संपत्ति (GNPA) अनुपात मार्च 2028 तक 1.9 प्रतिशत तक पहुंच सकता है।
राहत की बात यह है कि यह काफी कम स्तर है और यह दर्शाता है कि भारतीय बैंकों की asset quality में सुधार हो रहा है।
इसके अलावा, अगर मैक्रो-आर्थिक स्थितियां बिगड़ती हैं (Adverse Scenario) तो बैंकों का कुल GNPA अनुपात मार्च 2028 तक 3.8-4.1 प्रतिशत तक बढ़ सकता है। लेकिन यह भी प्रबंधनीय स्तर माना जाता है।
NBFC सेक्टर में भी तनाव के संकेत
गैर-बैंकिंग वित्तीय उद्योग (NBFC) में तनाव वाले क्षेत्रों को भी रिपोर्ट में उजागर किया गया है।
बेसलाइन दृश्य के तहत, गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों के लिए RBI के स्ट्रेस टेस्ट ने मार्च 2027 तक कुल GNPA के 2.8 प्रतिशत होने का अनुमान लगाया है।
NBFCs का समुच्चा पूंजी अनुपात (Overall Capital Ratio) मार्च 2027 तक 20.8 प्रतिशत होने का अनुमान लगाया गया था, जो स्वस्थ स्तर है।
लेकिन चिंता का विषय यह है कि RBI के अनुसार 15 NBFCs एक गंभीर क्रेडिट स्ट्रेस टेस्ट के तहत पूंजी के मानकों को पूरा नहीं कर सकती हैं। यानी अगर गंभीर आर्थिक संकट आता है तो ये 15 NBFCs मुश्किल में पड़ सकती हैं।
म्यूचुअल फंड्स में तरलता उल्लंघन की रिपोर्ट
म्यूचुअल फंड कारोबार के कुछ क्षेत्रों में, केंद्रीय बैंक ने तरलता की उल्लंघना (Liquidity Breaches) की भी रिपोर्ट की है।
रिपोर्ट के अनुसार, डेबिट स्कीमों (Debt Schemes) में कुछ म्यूचुअल फंड मार्च में न्यूनतम तरलता के मानकों को पूरा नहीं कर सके। हालांकि, उल्लंघनाओं को तुरंत ठीक कर दिया गया था।
यह दर्शाता है कि SEBI और RBI दोनों ही म्यूचुअल फंड सेक्टर पर कड़ी नजर रख रहे हैं और किसी भी अनियमितता को तुरंत ठीक करवा रहे हैं।
वैश्विक अनिश्चितता के बीच भारत की स्थिति
रिपोर्ट में उजागर किया गया है कि वैश्विक अनिश्चितता के बावजूद भारत के वित्तीय स्थिरता के जोखिम अभी भी नियंत्रण में हैं।
हालांकि, RBI ने चेतावनी दी है कि अक्सर बाहरी झटके:
- वित्तीय स्थितियों को सख्त कर सकते हैं
- मैक्रो-आर्थिक दृष्टिकोण को प्रभावित कर सकते हैं
- घरेलू वित्तीय स्थिरता पर सीधा असर डाल सकते हैं
इसलिए सतर्क रहने की जरूरत है।
चालू खाता घाटा और पूंजी प्रवाह
केंद्रीय बैंक ने कहा कि मजबूत पूंजी प्रवाह (Capital Flows) बढ़े हुए चालू खाते के घाटे (Current Account Deficit) के कारण पैदा हुए फंडिंग के दबाव को घटा सकता है।
यानी अगर विदेशी निवेशक भारत में पैसा लगाते रहें तो हमारे चालू खाते के घाटे को फंड करने में मदद मिलेगी। लेकिन यह विदेशी निवेशकों के भरोसे पर निर्भर है, जो वैश्विक परिस्थितियों के अनुसार बदल सकता है।
मुख्य बातें (Key Points)
- RBI की जून 2026 रिपोर्ट में मई में सोने के आयात में सुस्ती का उल्लेख
- AI-आधारित साइबर हमले वित्तीय प्रणाली के लिए सबसे बड़ा अल्पकालिक खतरा
- बैंकों का GNPA मार्च 2028 तक 1.9% रहने का अनुमान (बेसलाइन में)
- प्रतिकूल परिस्थितियों में GNPA 3.8-4.1% तक बढ़ सकता है
- 15 NBFCs गंभीर क्रेडिट स्ट्रेस में पूंजी मानक पूरे नहीं कर सकतीं
- म्यूचुअल फंड में तरलता उल्लंघन, लेकिन तुरंत ठीक किए गए












