8th Pay Commission HRA Hike: देश में एक करोड़ से ज्यादा केंद्रीय कर्मचारी और पेंशनर्स बढ़ी हुई सैलरी और पेंशन का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। तो वहीं 8वां वेतन आयोग भी तेजी से काम कर रहा है। आयोग ने 22 और 23 जून को उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में कई संगठनों के साथ मीटिंग की, जिसमें HRA यानी हाउस रेंट अलाउंस प्रमुख चर्चा का विषय रहा।
कर्मचारी संगठनों और पेंशनर्स के प्रतिनिधियों ने 8वें वेतन आयोग के सामने HRA की दरों को मौजूदा स्तर से काफी ऊपर ले जाने का प्रस्ताव रखा है। कई संगठनों ने X श्रेणी के शहरों में HRA को 40% तक करने की मांग की है।
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क्यों जरूरी है HRA में बढ़ोतरी?
कर्मचारी संगठनों का कहना है कि बड़े शहरों में किराए तेजी से बढ़े हैं, जबकि मौजूदा HRA कर्मचारियों की जरूरतों को पूरा नहीं कर पा रहा।
ऑल इंडिया NPS एम्प्लॉइज फेडरेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष मनजीत सिंह पटेल ने कहा कि दिल्ली और मुंबई जैसे महानगरों में मकानों का किराया बेहद ऊंचा हो चुका है।
उन्होंने कहा, “दिल्ली में लेवल 1 का कर्मचारी वर्तमान व्यवस्था के तहत लगभग ₹5,400 HRA पाता है, जबकि एक साधारण 2 BHK मकान का किराया भी करीब ₹12,000 या उससे अधिक है। ऐसे में कर्मचारियों के लिए खर्च संभालना मुश्किल हो रहा है।”
अगर गौर करें तो यह एक वास्तविक समस्या है जो लाखों केंद्रीय कर्मचारियों को प्रभावित कर रही है।
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फेडरेशन की मांग: 36%, 24%, 12%
फेडरेशन ने 8वें वेतन आयोग के सामने निम्नलिखित मांग रखी है:
- X श्रेणी के शहरों के लिए: 36% HRA
- Y श्रेणी के शहरों के लिए: 24% HRA
- Z श्रेणी के शहरों के लिए: 12% HRA
फेडरेशन का दावा है कि यदि यह प्रस्ताव स्वीकार होता है तो कर्मचारियों को HRA के रूप में उल्लेखनीय बढ़ोतरी मिल सकती है।
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वर्तमान में कितना मिलता है HRA?
वर्तमान में केंद्रीय कर्मचारियों को 10%, 20% और 30% की दर से HRA मिलता है।
दरअसल 7वें वेतन आयोग ने शुरुआत में Z, Y और X शहरों के लिए क्रमशः 8%, 16% और 24% HRA तय किया था। जनवरी 2024 में महंगाई भत्ता (DA) 50% पहुंचने के बाद वित्त मंत्रालय ने इन दरों को बढ़ाकर 10%, 20% और 30% कर दिया।
| शहर श्रेणी | 7वीं पे कमीशन (शुरुआत) | DA 50% के बाद (वर्तमान) | मांग (8वीं पे कमीशन) |
|---|---|---|---|
| X श्रेणी | 24% | 30% | 36-40% |
| Y श्रेणी | 16% | 20% | 24-35% |
| Z श्रेणी | 8% | 10% | 12-30% |
NCJCM की सिफारिश: सबसे बड़ी मांग
केंद्रीय कर्मचारियों के सबसे बड़े मंच नेशनल काउंसिल जॉइंट कंसल्टेटिव मशीनरी (NCJCM) ने सबसे बड़ी मांग रखी है:
- X शहरों के लिए: 40% HRA
- Y शहरों के लिए: 35% HRA
- Z शहरों के लिए: 30% HRA
दिलचस्प बात यह है कि संगठन ने यह भी सुझाव दिया कि भविष्य में DA बढ़ने के साथ HRA में भी खुद-ब-खुद बढ़ोतरी होनी चाहिए।
IRTSA का अनोखा प्रस्ताव: चार श्रेणियां
इंडियन रेलवे टेक्निकल सुपरवाइजर्स एसोसिएशन (IRTSA) ने HRA की मौजूदा तीन श्रेणी वाली व्यवस्था को चार श्रेणियों में बदलने का प्रस्ताव दिया है:
- 50 लाख से अधिक आबादी वाले शहरों के लिए: 40% + DA
- 20 से 50 लाख आबादी वाले शहरों के लिए: 30% + DA
- 5 से 20 लाख आबादी वाले शहरों के लिए: 20% + DA
- 5 लाख से कम आबादी वाले शहरों के लिए: 10% + DA
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि IRTSA ने HRA को सीधे DA से जोड़ने का सुझाव दिया है, जो एक क्रांतिकारी कदम हो सकता है।
AIDEF और FNPO की मांगें
ऑल इंडिया डिफेंस एम्प्लॉइज फेडरेशन (AIDEF) ने भी NCJCM की तरह 40%, 35% और 30% HRA की सिफारिश की है।
वहीं फेडरेशन ऑफ नेशनल पोस्टल ऑर्गनाइजेशन (FNPO) ने HRA को DA से जोड़ने और साथ ही पेंशनर्स तक इसका लाभ बढ़ाने की भी मांग उठाई है।
अगर मांग मान ली जाए तो कितना फर्क पड़ेगा?
मान लीजिए एक लेवल 1 कर्मचारी की बेसिक सैलरी ₹18,000 है:
वर्तमान HRA (X शहर में):
- 30% HRA = ₹5,400
अगर 40% HRA मिले:
- 40% HRA = ₹7,200
- अंतर = ₹1,800 प्रति माह
- सालाना अतिरिक्त = ₹21,600
एक उच्च स्तर के कर्मचारी के लिए यह अंतर हजारों रुपये प्रति माह का हो सकता है।
मुख्य बातें (Key Points)
- 8वें वेतन आयोग की 22-23 जून को लखनऊ में बैठक हुई
- HRA प्रमुख चर्चा का विषय रहा
- NCJCM ने X शहरों के लिए 40% HRA की मांग की
- IRTSA ने चार श्रेणियों में HRA बांटने का प्रस्ताव दिया
- वर्तमान में 10%, 20%, 30% HRA मिलता है
- दिल्ली में 2 BHK का किराया ₹12,000+, लेकिन HRA सिर्फ ₹5,400
- 1 करोड़ से अधिक कर्मचारी प्रभावित होंगे













