ED Raid Royale Estate Group: Enforcement Directorate (ED) ने आज सुबह बड़ी कार्रवाई करते हुए Chandigarh और Punjab में Royale Estate Group और Chandigarh Royale City Promoters Private Limited से जुड़े आधा दर्जन ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की। यह कार्रवाई निगम और काउंसिल चुनावों के दौरान हुई मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में की गई है।
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देखा जाए तो यह छापेमारी उस समय और अहम हो जाती है जब सामने आया कि रियल एस्टेट डेवलपर पर्वीन कांसल उर्फ रॉकी, जो कि सабका मंत्री सिकंदर सिंह मलूका के करीबी रहे हैं, उनके सेक्टर 20, चंडीगढ़ स्थित आवास पर भी ED की टीम ने दबिश दी। दिलचस्प बात यह है कि रॉकी रामपुरा फूल के रहने वाले हैं और रियल एस्टेट सेक्टर में इनकी अच्छी-खासी पकड़ मानी जाती है।
हैरान करने वाली बात यह है कि ED को जांच में पता चला कि GMADA (ग्रेटर मोहाली एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी) को कानूनी देनदारियों में धोखा देकर 32.67 करोड़ रुपये का डिसऑनर चेक जमा कराया गया था। यह रकम इतनी बड़ी है कि सवाल उठते हैं कि आखिर जमीन से जुड़ी कितनी बड़ी गड़बड़ियां हो रही थीं।
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सुबह 6 बजे एक साथ 6 ठिकानों पर छापेमारी
ED की टीमों ने आज सुबह ठीक 6 बजे Mohali, Zirakpur और चंडीगढ़ में एक साथ समन्वित छापेमारी अभियान चलाया। यह ऑपरेशन इतने बड़े पैमाने पर था कि कई टीमें अलग-अलग जगहों पर एक ही समय पर पहुंचीं।
जिन ठिकानों पर छापेमारी हुई:
| व्यक्ति का नाम | स्थान | संबंध |
|---|---|---|
| पर्वीन कांसल (रॉकी) | सेक्टर 20, चंडीगढ़ | मुख्य प्रमोटर, मलूका के करीबी |
| नीरज कांसल | – | कंपनी से जुड़े |
| अनुराग मिड्ढा | – | कंपनी से संबंधित |
| दलजीत सिंह | – | संदिग्ध व्यक्ति |
| सुमित बांसल | – | कंपनी से जुड़े |
| लियाकत अली | – | मामले में संलिप्त |
चंडीगढ़-दिल्ली राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित कंपनी के मुख्य कार्यालय की भी गहन तलाशी ली गई। समझने वाली बात यह है कि ED ने इस ऑपरेशन की योजना बेहद गोपनीय तरीके से बनाई ताकि कोई भी सबूत छुपाया न जा सके।
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क्या मिला छापेमारी में? दस्तावेज और डिजिटल सबूत जब्त
यहां ध्यान देने वाली बात है कि ED की टीमों ने केवल छापेमारी ही नहीं की, बल्कि बड़ी मात्रा में सबूत भी जब्त किए।
जब्त की गई सामग्री:
- जायदादों से संबंधित दस्तावेज
- डिजिटल डिवाइस (लैपटॉप, हार्ड डिस्क, मोबाइल फोन)
- वित्तीय लेन-देन के रिकॉर्ड
- बैंक स्टेटमेंट्स और चेक बुक्स
- जमीन की रजिस्ट्री से जुड़े कागजात
- संदिग्ध कंपनियों के साथ समझौते
राहत की बात यह नहीं है क्योंकि ED ने अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। लेकिन सूत्रों के मुताबिक, जो दस्तावेज मिले हैं वे काफी संवेदनशील प्रकृति के हैं और कई बड़े नामों को उजागर कर सकते हैं।
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मामले की जड़: 19 जुलाई 2025 की FIR
अब सवाल उठता है कि आखिर यह छापेमारी किस आधार पर हुई? तो जवाब है – 19 जुलाई 2025 को मोहाली में दर्ज हुई एक FIR।
FIR में क्या आरोप थे:
- धोखाधड़ी (Fraud)
- आपराधिक साजिश (Criminal Conspiracy)
- GMADA को कानूनी देनदारियों में धोखा
- 32.67 करोड़ रुपये का डिसऑनर चेक जमा कराना
- फंड्स को डायवर्ट करना
- जमीन से जुड़ी कथित बेनियमियां
दिलचस्प बात यह है कि डिसऑनर चेक का मतलब होता है कि जो चेक दिया गया, उसके बाउंस होने की पूरी संभावना थी या उसमें पर्याप्त राशि ही नहीं थी। यह एक गंभीर वित्तीय अपराध माना जाता है, खासकर जब रकम इतनी बड़ी हो।
GMADA के बकाए और फंड डायवर्जन का मामला
ED की जांच में जो सबसे चौंकाने वाली बात सामने आई, वह यह है कि कंपनी की तरफ से GMADA के बकाए खड़े हैं और फंड्स को डायवर्ट किए जाने का भी मामला है।
क्या है पूरा गणित:
| मुद्दा | विवरण |
|---|---|
| GMADA को देय राशि | बड़ी रकम बकाया |
| डिसऑनर चेक | 32.67 करोड़ रुपये |
| फंड डायवर्जन | संदिग्ध लेन-देन |
| जमीन की बेनियमियां | कई मामलों में गड़बड़ी |
समझने वाली बात यह है कि GMADA एक सरकारी संस्था है जो Greater Mohali Area के विकास के लिए जिम्मेदार है। अगर डेवलपर्स इसे धोखा दे रहे हैं, तो यह सीधे तौर पर सार्वजनिक संपत्ति के साथ धोखा है।
यहां गौर करने वाली बात यह भी है कि Royale Estate Group से संबंधित कंपनियों का लेन-देन शुरू से ही संदिग्ध पाया गया है। ED को शक है कि कई शेल कंपनियों के जरिए पैसा घुमाया गया हो सकता है।
पर्वीन कांसल उर्फ रॉकी: कौन हैं और क्यों हैं राडार पर?
अब बात करते हैं उस शख्स की जो इस पूरे मामले के केंद्र में हैं – पर्वीन कांसल उर्फ रॉकी।
रॉकी की प्रोफाइल:
- रियल एस्टेट डेवलपर
- रामपुरा फूल, पंजाब के रहने वाले
- सेक्टर 20, चंडीगढ़ में आवास
- पूर्व मंत्री सिकंदर सिंह मलूका के करीबी
- Royale Estate Group और Chandigarh Royale City Promoters Pvt Ltd से जुड़े
चिंता का विषय यह है कि रॉकी कुछ समय से ED के रडार पर थे। नीरज कांसल के साथ मिलकर ये दोनों कई रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स में सक्रिय रहे हैं।
हैरान करने वाली बात यह भी है कि रॉकी का नाम राजनीतिक हलकों में भी चर्चित रहा है। सिकंदर सिंह मलूका, जो पूर्व मंत्री रहे हैं, से इनकी नजदीकी को लेकर कई बार चर्चा हुई है।
विजिलेंस ब्यूरो का केस: जून 2025 में दर्ज हुआ था मामला
दरअसल, यह पहली बार नहीं है जब पर्वीन कांसल मुश्किल में फंसे हैं। Punjab Vigilance Bureau ने भी जून 2025 में इनके खिलाफ केस दर्ज किया था।
विजिलेंस का मामला:
- बिल्डर पर्वीन कांसल (रॉकी) सहित तीन लोगों पर धोखाधड़ी का मुकदमा
- शिकायतकर्ता: प्यारे लाल गर्ग (रॉकी के साथी)
- आरोप: New Chandigarh में प्रमुख जमीन की धोखाधड़ी से मालिकी बदली गई
- राजस्व विभाग के अधिकारियों की रिपोर्ट के बाद मामला खुला
और बस यहीं से शुरू हुई पूरी कहानी। दिलचस्प बात यह है कि जब रॉकी के अपने ही साथी ने शिकायत की, तो पता चला कि मामला कितना गहरा है।
न्यू चंडीगढ़ भूमि घोटाला:
- एक प्रमुख जमीन की मालिकी में गड़बड़ी
- फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल (आरोप)
- राजस्व अधिकारियों की मिलीभगत की आशंका
- प्यारे लाल गर्ग को धोखा देने का आरोप
मनी लॉन्ड्रिंग का कनेक्शन: चुनाव और काला धन
यहां सबसे अहम सवाल है – निगम और काउंसिल चुनावों का इससे क्या कनेक्शन?
समझने वाली बात यह है कि मनी लॉन्ड्रिंग का मतलब होता है काले धन को सफेद बनाना। अक्सर रियल एस्टेट सेक्टर का इस्तेमाल इसी काम के लिए किया जाता है।
संभावित मनी लॉन्ड्रिंग तरीके:
- जमीन की कीमत कम या ज्यादा दिखाना
- शेल कंपनियों के जरिए लेन-देन
- नकद पैसे को चेक/ट्रांसफर में बदलना
- फर्जी खरीदारों के नाम पर रजिस्ट्री
- चुनावी फंडिंग के लिए काला धन का इस्तेमाल
सवाल उठता है कि क्या यह पैसा चुनावों में इस्तेमाल हुआ? ED की जांच इसी दिशा में आगे बढ़ रही है।
ED की रणनीति: क्यों एक साथ 6 ठिकानों पर छापा?
अगर गौर करें तो ED ने यह ऑपरेशन बेहद सोच-समझकर किया।
रणनीतिक फायदे:
- एक साथ छापा = सबूत छुपाने का मौका नहीं
- अलग-अलग लोगों के बयान मिलाए जा सकते हैं
- डिजिटल डेटा डिलीट होने से पहले जब्त
- आपसी संपर्क रोका जा सके
- पूरे नेटवर्क की जानकारी एक साथ मिले
यह वही तरीका है जो बड़े आर्थिक अपराधों में अपनाया जाता है।
आम आदमी पर क्या असर? GMADA की देनदारी का मतलब
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि यह केवल बड़े लोगों का मामला नहीं है। आम आदमी भी इससे प्रभावित होता है।
जनता पर असर:
- GMADA को पैसा नहीं मिला = विकास कार्य रुके
- जमीन खरीदारों को धोखा हो सकता है
- सरकारी खजाने का नुकसान = टैक्सपेयर्स का नुकसान
- रियल एस्टेट में भरोसे की कमी
- ईमानदार बिल्डर्स की छवि खराब
यही वजह है कि ED जैसी एजेंसियों की सख्त कार्रवाई जरूरी हो जाती है।
राजनीतिक कनेक्शन: सिकंदर सिंह मलूका का नाम क्यों?
दिलचस्प बात यह है कि रॉकी को सिकंदर सिंह मलूका का करीबी बताया जा रहा है। अब सवाल है – क्या इसका कोई राजनीतिक एंगल है?
फिलहाल तो मलूका के खिलाफ कोई आरोप नहीं है। लेकिन चुनाव के दौरान मनी लॉन्ड्रिंग की जांच में यह कनेक्शन जांच एजेंसियों के लिए अहम हो सकता है।
आगे क्या होगा? जांच और कार्रवाई की दिशा
अब ED की जांच कई दिशाओं में आगे बढ़ेगी:
अगले कदम:
- जब्त दस्तावेजों का विश्लेषण
- डिजिटल डेटा की फोरेंसिक जांच
- बैंक खातों की स्क्रूटनी
- संदिग्ध लोगों से पूछताछ
- संभावित गिरफ्तारी
- संपत्ति कुर्की की कार्रवाई
राहत की बात यह नहीं है कि ED ने अभी तक आधिकारिक बयान नहीं दिया। यह मतलब है कि जांच अभी शुरुआती दौर में है और बड़े खुलासे आने बाकी हैं।
पंजाब-चंडीगढ़ में रियल एस्टेट घोटालों का इतिहास
यह पहला मामला नहीं है। पंजाब और चंडीगढ़ में पहले भी कई रियल एस्टेट घोटाले सामने आ चुके हैं:
- जमीन की रजिस्ट्री में गड़बड़ी
- ग्रेटर मोहाली में अवैध कब्जे
- फर्जी दस्तावेजों से जमीन हथियाना
- सरकारी जमीन का निजी इस्तेमाल
यह दर्शाता है कि इस सेक्टर में कड़ी निगरानी की सख्त जरूरत है।
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मुख्य बातें (Key Points)
- Enforcement Directorate ने चंडीगढ़ और पंजाब में Royale Estate Group से जुड़े 6 ठिकानों पर छापेमारी की
- निगम और काउंसिल चुनावों के दौरान मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में कार्रवाई
- बिल्डर पर्वीन कांसल उर्फ रॉकी (सेक्टर 20, चंडीगढ़) सहित नीरज कांसल, अनुराग मिड्ढा, दलजीत सिंह, सुमित बांसल, लियाकत अली के ठिकानों पर छापा
- रॉकी पूर्व मंत्री सिकंदर सिंह मलूका के करीबी बताए जाते हैं
- सुबह 6 बजे मोहाली, जीरकपुर और चंडीगढ़ में एक साथ छापेमारी
- चंडीगढ़-दिल्ली राजमार्ग पर कंपनी के मुख्य कार्यालय की भी तलाशी
- GMADA को 32.67 करोड़ रुपये का डिसऑनर चेक जमा कराने का आरोप
- फंड डायवर्जन और जमीन से जुड़ी बेनियमियों का मामला
- जायदाद के दस्तावेज, डिजिटल डिवाइस और वित्तीय रिकॉर्ड जब्त
- मामला 19 जुलाई 2025 को मोहाली में दर्ज FIR पर आधारित
- पंजाब विजिलेंस ब्यूरो ने भी जून 2025 में रॉकी पर धोखाधड़ी का केस दर्ज किया था
- न्यू चंडीगढ़ में जमीन की धोखाधड़ी से मालिकी बदलने का आरोप
- ED की तरफ से अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं













