Pulwama Attack Mastermind: गुरुवार को सामने आई मीडिया रिपोर्ट्स ने एक बार फिर साल 2019 की उस दर्दनाक घटना की याद ताजा कर दी है जिसने पूरे देश को झकझोर दिया था। दरअसल, पुलवामा आतंकी हमले का कथित मास्टरमाइंड हमजा बुरहान पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में रहस्यमय परिस्थितियों में मारा गया है। अज्ञात बंदूकधारियों ने उसे गोलियों से भून डाला। देखा जाए तो यह खबर उन शहीदों के परिजनों के लिए थोड़ी राहत भरी हो सकती है जिन्होंने उस काले दिन अपनों को खोया था।
Hamza Burhan, जिसे अरजुमंद गुलजार डार के नाम से भी जाना जाता था, कथित तौर पर आतंकी संगठन अल-बद्र का कमांडर था। दिलचस्प बात यह है कि वह खुद जम्मू-कश्मीर के पुलवामा जिले का रहने वाला था। यानी वही जगह जहां उसने 40 जवानों की जान लेने की साजिश रची थी। कहने का मतलब साफ है कि धरती ने अपने ही बेटे को आतंक का रास्ता दिखाया और आज वही जमीन उसकी कब्र बन गई।
मुजफ्फराबाद में हुई गोलीबारी
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मुजफ्फराबाद इलाके में अज्ञात हमलावरों ने हमजा बुरहान को निशाना बनाया। गोलियों की बौछार में वह मौके पर ही ढेर हो गया। अगर गौर करें तो यह घटना उस वक्त हुई जब पाकिस्तान खुद आतंकवाद की आग में झुलस रहा है।
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि पाकिस्तान और PoK में रह रहे कई आतंकी कमांडर अब एक-एक करके ठिकाने लगाए जा रहे हैं। क्या यह सिर्फ इत्तफाक है या कोई बड़ा खेल चल रहा है, यह तो वक्त ही बताएगा।
वह काला दिन – 14 फरवरी 2019
जिक्रयोग्य है कि साल 2019 में हुए पुलवामा आतंकी हमले के दौरान CRPF के 40 जवान शहीद हो गए थे। वह दिन हर भारतीय के दिल में आज भी एक गहरा घाव छोड़ जाता है।
और बस यहीं से शुरू हुई असली कहानी। एक आत्मघाती हमलावर ने विस्फोटकों से लदी अपनी गाड़ी को जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा बलों के काफिले से टक्कर मार दी थी। धमाका इतना जोरदार था कि आसपास की जमीन हिल गई। 40 जवानों की एक साथ शहादत ने पूरे देश को रुला दिया था।
इस हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव चरम पर पहुंच गया था। भारत ने Balakot Air Strike को अंजाम देकर दुश्मन के घर में घुसकर जवाब दिया था। समझने वाली बात यह है कि उस वक्त पूरा देश एक सुर में खड़ा था।
कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं
कई मीडिया संस्थानों ने इस हत्या की रिपोर्ट दी है, लेकिन अभी तक भारतीय सुरक्षा एजेंसियों या पाकिस्तानी अधिकारियों की तरफ से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं आई है। न ही हमलावरों की पहचान का खुलासा हुआ है।
देखा जाए तो यह चुप्पी ही कई सवाल खड़े करती है। क्या यह किसी गुप्त ऑपरेशन का हिस्सा था? क्या भारतीय खुफिया एजेंसियों का इसमें हाथ है? या फिर यह पाकिस्तान के आंतरिक गुटबाजी का नतीजा है?
लगातार निशाने पर आतंकी कमांडर
यह घटना हाल के सालों में पाकिस्तान और PoK में रह रहे मोस्ट वांटेड आतंकियों और कमांडरों को निशाना बनाकर किए गए लगातार हमलों के बीच सामने आई है।
चिंता का विषय यह है कि पाकिस्तान की धरती पर पल रहे आतंकी अब खुद भी सुरक्षित नहीं हैं। जो लोग दूसरों की जान लेने की साजिश रचते हैं, आखिर उनका अंत भी ऐसा ही होता है।
शहीदों के परिवार और देश की भावना
पुलवामा शहीदों के परिवारों ने जो दर्द झेला है, वह शब्दों में बयान नहीं किया जा सकता। 40 घरों में एक साथ चिराग बुझ गए थे। मांओं की गोद सूनी हो गई थी। पत्नियां विधवा हो गई थीं। बच्चे अनाथ हो गए थे।
हैरान करने वाली बात यह है कि आतंकवाद के नाम पर कुछ लोग कैसे इंसानियत को दफन कर देते हैं। लेकिन राहत की बात यह है कि अब ऐसे आतंकियों को एक-एक करके ठिकाने लगाया जा रहा है।
इस घटना का भारत-पाक रिश्तों पर असर
अगर गौर करें तो हमजा बुरहान की मौत भारत-पाकिस्तान के संबंधों में एक नया मोड़ ला सकती है। यह दर्शाता है कि आतंकवाद का समर्थन करने वाले देश खुद भी इसकी आग में जल रहे हैं।
इससे साफ होता है कि जो देश आतंकवाद को अपना हथियार बनाता है, वह खुद भी उसी हथियार से घायल होता है। पाकिस्तान की धरती पर पल रहे आतंकी अब उसी देश में मारे जा रहे हैं।
आगे क्या होगा?
सवाल उठता है कि क्या यह घटना पुलवामा शहीदों के परिवारों को न्याय दिलाने की दिशा में एक कदम है? क्या भारत की सुरक्षा एजेंसियां अब और आक्रामक तरीके से काम कर रही हैं?
हालांकि, जब तक आधिकारिक पुष्टि नहीं आती, तब तक कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी। लेकिन उम्मीद की किरण तो जरूर दिखाई दे रही है।
मुख्य बातें (Key Points)
- Pulwama Attack Mastermind हमजा बुरहान PoK में मारा गया
- मुजफ्फराबाद में अज्ञात बंदूकधारियों ने की गोलीबारी
- 2019 के पुलवामा हमले में 40 CRPF जवान शहीद हुए थे
- अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं आई है
- हाल के वर्षों में PoK में कई आतंकी कमांडर निशाने पर











