Tamil Nadu LTTE Controversy: राजनीति और राष्ट्रीय सुरक्षा के बीच अक्सर एक बहुत ही पतली सी बारीक रेखा होती है। और जब एक राज्य का मुख्यमंत्री उस रेखा से सुरक्षित दूरी बनाने की जगह ठीक उस रेखा के ऊपर चलने का फैसला करता है, तो उसके परिणाम पूरे देश को महसूस होने लगते हैं। आज हम जिस मुद्दे पर बात करने वाले हैं, वह सिर्फ किसी नेता का एक साधारण बयान नहीं है, बल्कि राज्य की राजनीति और अंतर्राष्ट्रीय आतंकी फंडिंग का एक खतरनाक पैराडॉक्स है।
इस स्थिति को थोड़ा विजुअलाइज करने की कोशिश करते हैं। तारीख थी 18 मई। इस दिन को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर Mullivaikkal Remembrance Day या तमिल जेनोसाइड रिमेंबरेंस डे के रूप में मनाया जाता है। तमिलनाडु के नए मुख्यमंत्री तल्पति विजय अपनी पार्टी TVK के चीफ के रूप में X (Twitter) पर एक पोस्ट करते हैं और खुलेआम श्रीलंकाई तमिलों के साथ एकजुटता व्यक्त करते हैं और लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम (LTTE) के संस्थापक वेल्लुपिल्लई प्रभाकरण को श्रद्धांजलि दे देते हैं।
विजय यहां तक कहते हैं कि प्रभाकरण एक ऐसे लीडर थे जिन्होंने ईलम तमिलों को “मातृवत स्नेह” दिया था। और बस यहीं से शुरू हुई असली कहानी। एक राज्य का मुखिया एक ऐसे संगठन के लीडर को मातृवत फिगर कह रहा है जिसे भारत सरकार ने आतंकवादी घोषित किया हुआ है।
और ठीक उसी वक्त, जब यह भावनात्मक राजनीति चल रही थी, ग्राउंड पर एक साजिश को अंजाम दिया जा रहा था। नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) और एनफोर्समेंट डायरेक्टोरेट (ED) एक बहुत बड़ी अंतर्राष्ट्रीय साजिश को रोक रहे थे।
ED की चार्जशीट: डेनमार्क से ₹1.6 करोड़ का हवाला, ₹42 करोड़ की साजिश
ED की चार्जशीट के मुताबिक डेनमार्क में बैठा एक पूर्व LTTE एजेंट उमाकांतन भारत में ₹1.6 करोड़ का हवाला ‘सीड मनी’ भेजता है।
इस पैसे का मकसद क्या था?
बेसिकली एक मृत औरत के डॉर्मेंट बैंक अकाउंट से ₹42 करोड़ को साइफन ऑफ करना था ताकि तमिलनाडु और श्रीलंका में पूरी तरह खत्म हो चुके LTTE को फिर से वापस जिंदा किया जा सके।
देखा जाए तो एक तरफ राज्य सरकार का सबसे बड़ा चेहरा एक प्रतिबंधित आउटफिट की याद को जागृत कर रहा है, और दूसरी तरफ देश की इंटेलिजेंस एजेंसियां उसी आउटफिट के स्लीपर सेल्स को न्यूट्रलाइज करने के लिए जगह-जगह रेड कर रही हैं।
समझने वाली बात यह है कि एक मुख्यमंत्री का एक प्रतिबंधित आतंकी लीडर को महिमामंडित करना और उसी वक्त हवाला के जरिए LTTE को पुनर्जीवित करने की कोशिश होना – यह सिर्फ संयोग नहीं हो सकता।
LTTE क्या है? इतिहास की एक झलक
अगर आप LTTE की हिस्टरी से गहराई से वाकिफ नहीं हैं, तो थोड़ा कॉन्टेक्स्ट समझ लेते हैं।
LTTE (Liberation Tigers of Tamil Eelam) एक वक्त पर दुनिया के सबसे घातक और परिष्कृत गुरिल्ला आतंकी समूहों में से एक था। इसे वेल्लुपिल्लई प्रभाकरण ने स्थापित किया था।
इसका मूल उद्देश्य था: श्रीलंका में रहने वाले तमिलों के लिए एक अलग आजाद देश यानी ‘ईलम’ बनाना।
श्रीलंका की सरकार और वहां की सिंहला बहुसंख्यक समुदाय के भेदभाव के खिलाफ इसे शुरू किया गया था। यह आंदोलन धीरे-धीरे एक पूर्ण 30 साल लंबी गृह युद्ध में तब्दील हो गया।
इस युद्ध का अंत 2009 में हुआ जब श्रीलंकाई सेना ने मुल्लीवायक्कल नामक एक तटीय गांव में प्रभाकरण को मार गिराया। इस अंतिम चरण में हजारों बेगुनाह तमिल नागरिकों की भी जान गई, जिसका दर्द आज भी तमिलनाडु में बहुत गहराई से गूंजता है।
| घटना | वर्ष | प्रभाव |
|---|---|---|
| LTTE की स्थापना | 1976 | प्रभाकरण द्वारा तमिल ईलम के लिए संघर्ष शुरू |
| राजीव गांधी की हत्या | 1991 | भारत ने LTTE को आतंकवादी संगठन घोषित किया |
| प्रभाकरण की मौत | 2009 | LTTE का औपचारिक अंत |
| Mullivaikkal नरसंहार | 2009 | हजारों तमिल नागरिकों की मौत |
भारत के लिए LTTE का मतलब: राजीव गांधी की हत्या
भारत के लिए LTTE का मतलब सिर्फ एक पड़ोसी देश का संघर्ष नहीं था।
1991 में इसी LTTE ने पूर्व भारतीय प्रधानमंत्री राजीव गांधी की क्रूर हत्या की थी, जिसमें प्रभाकरण एक प्रमुख आरोपी था।
इस काले अध्याय के बाद भारत सरकार ने LTTE को एक आतंकवादी संगठन घोषित करके इस पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया। और यह प्रतिबंध आज भी कायम है।
दिलचस्प बात यह है कि राजीव गांधी की हत्या का तमिलनाडु की घरेलू राजनीति पर गहरा असर पड़ा।
उस वक्त की मुख्यधारा की द्रविड़ पार्टियां – चाहे वो DMK हो या AIADMK – उन्होंने एक बहुत ही सोचा-समझा फैसला लिया। उन्हें समझ आ गया कि LTTE को खुलेआम समर्थन देना राजनीतिक आत्महत्या होगी। खासकर जब PM की हत्या हुई हो।
तो उन्होंने खुद को LTTE से काट लिया। द्रविड़ राजनीति का पूरा फोकस वापस मुड़ गया – सामाजिक न्याय, जाति-विरोधी आंदोलन और हिंदी-विरोधी प्रदर्शन पर।
नियो-द्रविड़ियनिज्म: विजय का नया राजनीतिक दांव
जब मुख्यधारा की पार्टियों ने इस मुद्दे से हाथ पीछे खींच लिए, तो राज्य की राजनीति में एक बड़ा भावनात्मक शून्य पैदा हो गया। तमिल पहचान और सभ्यतागत गर्व को लेकर जो आग थी, उसे प्रतिनिधित्व करने वाला कोई बड़ा राजनीतिक चेहरा नहीं बचा।
और राजनीति का एक सिद्धांत है: जहां शून्य होता है, वहां कोई न कोई उसे भरने जरूर आता है।
यही वो जगह है जहां आज तल्पति विजय की एंट्री होती है।
अक्सर लोग सोचते हैं कि एक्टर्स जब राजनीति में आते हैं तो बस अपनी फैन फॉलोइंग के भरोसे आते हैं। लेकिन विजय की राजनीतिक रणनीति को करीब से देखना पड़ेगा।
उनका प्रभाकरण का नाम लेना कोई महज गलती नहीं थी। यह एक बहुत ही सोची-समझी, अत्यधिक गणना की गई आइडियोलॉजिकल ब्लूप्रिंट का हिस्सा था जिसे विशेषज्ञ “नियो-द्रविड़ियनिज्म” कह रहे हैं।
विजय ने क्या किया?
सीमन नामक नेता ने अपनी पार्टी Naam Tamilar Katchi (NTK) के जरिए पहले से इस भावनात्मक शून्य को भरने की कोशिश की थी। सीमन की राजनीति शुद्ध, अनफिल्टर्ड तमिल राष्ट्रवाद पर आधारित थी। लेकिन उनका रुख इतना आक्रामक और अनन्य था कि मध्यमार्गी मतदाता, शहरी मध्यम वर्ग और अल्पसंख्यक उनसे डरने लगे। कट्टरता नजर आती थी।
दूसरी तरफ पारंपरिक द्रविड़ पार्टियां जैसे DMK ने युवाओं को कल्याणकारी योजनाएं दीं, लेकिन आज की डिजिटल पीढ़ी को एक नया वीरतापूर्ण भावना चाहिए था।
विजय ने इन दोनों चरम सीमाओं के बीच एक शानदार पैंतरा मारा।
उन्होंने सीमन के तमिल राष्ट्रवाद की भावनात्मक आग को उठाया और उसे DMK की सामाजिक न्याय और कल्याणकारी राजनीति के साथ मिला दिया।
विजय का एक बहुत प्रसिद्ध राजनीतिक कथन है:
“द्रविड़वाद और तमिल राष्ट्रवाद इस मिट्टी की दो आंखें हैं।”
विजय की चालाकी: धर्म बनाम पहचान की राजनीति
पुरानी द्रविड़ राजनीति की एक बड़ी कमजोरी थी। उसकी कट्टर पेरियार-आधारित विचारधारा जो आक्रामक नास्तिकता और हिंदू-विरोधी बयानबाजी पर चलती थी।
इसी वजह से तमिलनाडु के बहुत से साधारण और बहुत ही गहराई से धार्मिक लोग खुद को अलग-थलग महसूस करने लगे।
विजय ने इस पुराने टकराव को पूरी तरह बायपास कर दिया। उन्होंने धर्म को गाली देने की बजाय पूरे नैरेटिव को ही शिफ्ट कर दिया।
अब मुद्दा नास्तिक बनाम आस्तिक का नहीं रहा। विजय ने इसे “गर्वित तमिल बनाम बाहरी” का मुद्दा बना दिया है।
अगर आप उनकी पार्टी TVK के झंडे और प्रतीकों को देखेंगे तो:
- झंडे में लाल और पीले रंग हैं जो सीधे LTTE और NTK की प्रतीकात्मकता से मेल खाते हैं
- उन्होंने अपने रोल मॉडल्स में सिर्फ पेरियार या अन्नादुरै को नहीं रखा, बल्कि BR अंबेडकर, पूर्व मुख्यमंत्री कामराज और 18वीं सदी की योद्धा रानी वेलु नचियार को भी शामिल किया
विजय बेसिकली एक साथ दो भाषाओं में बात कर रहे हैं:
- प्रशासन में द्रविड़ कल्याणकारी मॉडल का संदेश
- प्रभाकरण और Mullivaikkal की यादों को जगाकर युवाओं में सोए हुए तमिल गर्व को टैप करना
राजनीतिक सिद्धांत के हिसाब से यह एक शानदार मिश्रण है।
₹42 करोड़ की साजिश: ED-NIA की खोजी रिपोर्ट
अब जरा पिछले महीने की न्यूज़ हेडलाइंस देखें। एनफोर्समेंट डायरेक्टोरेट (ED) और NIA की एक विस्फोटक चार्जशीट सामने आई।
इसकी डिटेल्स इस बात का सबूत है कि LTTE का खतरा सिर्फ इतिहास के पन्नों तक सीमित नहीं है।
इन्वेस्टिगेशन के मुताबिक:
डेनमार्क में बैठा उमाकांतन नामक एक पूर्व LTTE एजेंट एक पूरे हवाला और टेरर फाइनेंसिंग नेटवर्क का मास्टरमाइंड है। और वह अभी भी सक्रिय है।
उमाकांतन ने 90 के दशक में LTTE की ओर से श्रीलंकाई सेना के खिलाफ कई हमले किए थे।
उसने एक विस्तृत योजना बनाई: भारत के वित्तीय सिस्टम को हैक करके फंड जुटाना।
उसने अपनी एक सहयोगी लेचुमन मैरी फ्रांसिस्का को भारत भेजा। यह ऑपरेशन शुरू करने के लिए। ताकि डेनमार्क से हवाला और फर्जी कंपनियों के जरिए ₹1.6 करोड़ का सीड मनी चेन्नई के एक बिजनेसमैन के भास्करन के अकाउंट्स में भेजा गया।
अब इस ₹1.6 करोड़ का प्राथमिक उद्देश्य था: इतने पैसे का उपयोग करके और पैसा अनलॉक किया जाए।
एक बहुत बड़ा वित्तीय धोखाधड़ी एग्जीक्यूट करना था।
इसमें टारगेट था: मुंबई की इंडियन ओवरसीज बैंक की फोर्ट ब्रांच में एक डॉर्मेंट अकाउंट जो एक मृत महिला हमीदा ए लालजी के नाम पर था।
इस अकाउंट में ₹42.28 करोड़ आइडल पड़े हुए थे।
फ्रांसिस्का ने चेन्नई में बैठकर:
- स्थानीय वकीलों और बिचौलियों को रिश्वत दी
- फर्जी आधार कार्ड, पैन कार्ड बनवाए
- यहां तक कि पावर ऑफ अटॉर्नी भी बनवाई
- ई मोहन नामक एक स्थानीय आदमी को हायर किया ताकि वह इस मृत महिला के बेटे स्कंदर के रूप में इंपर्सोनेट कर सके
उन्होंने इस आदमी को:
- ठीक से हिंदी बोलना सिखाया
- बैंक मैनेजर के सामने कॉन्फिडेंस से बोलने की ट्रेनिंग दी: “मेरा नाम स्कंदर ए लालजी है”
योजना लगभग अंतिम चरण में थी। फ्रांसिस्का और उसका इंपर्सोनेटर मुंबई की फ्लाइट लेने ही वाले थे।
तभी तमिलनाडु क्रिमिनल इन्वेस्टिगेशन डिपार्टमेंट (CID) की Q ब्रांच – जो ऐतिहासिक रूप से LTTE कैडर्स को ट्रैक करने में एक्सपर्ट मानी जाती है – ने फ्रांसिस्का को चेन्नई एयरपोर्ट पर गिरफ्तार कर लिया।
यह ₹42 करोड़ सीधे LTTE के बचे हुए स्लीपर सेल्स और अंडरग्राउंड मॉड्यूल्स को सक्रिय करने में उपयोग होने थे।
खतरनाक विरोधाभास: CM विजय बनाम Q ब्रांच
अब यहां एक बहुत ही भयानक कंट्रास्ट देखिए:
एक तरफ: राज्य की स्पेशलाइज्ड पुलिस फोर्स (Q ब्रांच) और केंद्रीय एजेंसियां अपनी जान पर खेलकर इन अंतर्राष्ट्रीय सिंडिकेट्स को न्यूट्रलाइज कर रही हैं।
दूसरी तरफ: उसी राज्य के मुख्यमंत्री एक सार्वजनिक मंच से उस आतंकी आउटफिट के संस्थापक को “मातृवत फिगर” का दर्जा दे रहे हैं।
क्या पैराडॉक्स है ना?
राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए यह अच्छा नहीं है।
भू-राजनीतिक प्रभाव: भारत-श्रीलंका संबंधों पर असर
अब इस मुद्दे को थोड़ा और गहराई से समझते हैं भू-राजनीतिक लेंस के जरिए।
विदेश नीति कभी भी घरेलू राजनीति से अलग नहीं होती। जो बयान एक राज्य का नेता स्थानीय वोट हासिल करने के लिए देता है, उसकी गूंज अंतर्राष्ट्रीय गलियारों में सुनाई देती है।
जब CM विजय जैसे मास लीडर प्रभाकरण को खुलेआम महिमामंडित करते हैं, तो इसका सबसे पहला और सबसे सीधा प्रभाव भारत-श्रीलंका के द्विपक्षीय संबंधों पर पड़ता है।
नई दिल्ली पिछले एक दशक से श्रीलंका में अपना प्रभाव वापस हासिल करने की कोशिश कर रही है ताकि हिंद महासागर में बढ़ते हुए चीनी फुटप्रिंट को काउंटर किया जा सके। हंबनटोटा पोर्ट इसका जीता जागता उदाहरण है।
ऐसे में जब एक भारतीय राज्य का मुखिया श्रीलंका के उस आतंकी आउटफिट को वैधता देता है जिसने उनके देश में लाखों जानें लीं, तो कोलंबो के प्रतिष्ठान में भारत की नीयत पर सीधे संदेह पैदा होगा ही।
यह चीन को एक परफेक्ट मौका देता है श्रीलंकाई सरकार से यह कहने का: “India is directly supporting your enemies.”
आंतरिक सुरक्षा पर खतरा: Q ब्रांच पर दबाव
दूसरा सबसे बड़ा खतरा आंतरिक सुरक्षा तंत्र पर है।
तमिलनाडु एक तटीय राज्य है। ऐतिहासिक रूप से LTTE की तस्करी नौकाएं और ड्रग सिंडिकेट यहां की तटरेखा का दुरुपयोग करते आए हैं।
अगर राज्य का नेतृत्व खुलेआम LTTE की भावनाओं को टैप करता है, तो राज्य की पुलिस और नौकरशाही पर एक बहुत ही सूक्ष्म दबाव बनता है।
आप खुद सोचिए: जिस Q ब्रांच ने फ्रांसिस्का को गिरफ्तार किया, अगर उन्हें यह संदेश मिले कि उनके मुख्यमंत्री खुद प्रभाकरण के समर्थक हैं, तो क्या वो भविष्य में LTTE सहानुभूति रखने वालों के खिलाफ उसी आक्रामकता से कार्रवाई कर पाएंगे?
Q ब्रांच राज्य की है, केंद्र की नहीं।
आगे चलकर ED और NIA ने कार्रवाई की, लेकिन वोट बैंक राजनीति के चक्कर में CM विजय शायद एक ऐसी आग से खेल रहे हैं जो राज्य की कानून व्यवस्था मशीनरी को अंदर से लकवाग्रस्त कर सकती है।
केंद्रीय एजेंसियों और राज्य के बीच का यह वैचारिक टकराव किसी भी सीमावर्ती या तटीय राज्य के लिए एक आपदा की परफेक्ट रेसिपी होती है।
निष्कर्ष: तमिल गर्व बनाम आतंकवादी महिमामंडन की लक्ष्मण रेखा
तो इस पूरे जटिल भू-राजनीतिक और घरेलू परिदृश्य का अब क्या निष्कर्ष निकलता है?
मेरा इस मुद्दे पर स्टैंड एकदम स्पष्ट और निर्णायक है।
एक स्वस्थ, परिपक्व लोकतंत्र में क्षेत्रीय पहचान, सांस्कृतिक गर्व और अपनी भाषा को मजबूती से रखना न सिर्फ वैध है बल्कि जरूरी भी है।
श्रीलंकाई तमिलों के ऐतिहासिक संघर्ष, उनके मानवाधिकार और 2009 के गृह युद्ध में मारे गए बेगुनाह नागरिकों के प्रति सहानुभूति रखना एक मानवीय मुद्दा है।
लेकिन तमिल गर्व को व्यक्त करने और एक प्रतिबंधित आतंकी संगठन के लीडर को महिमामंडित करने के बीच एक बहुत ही स्पष्ट लक्ष्मण रेखा है।
और एक मुख्यमंत्री को इस लक्ष्मण रेखा को हर हाल में सम्मान करना चाहिए।
वेल्लुपिल्लई प्रभाकरण ने तमिल मुद्दे को वैश्विक ध्यान जरूर दिलवाया, लेकिन उनका रास्ता हिंसा, हत्याओं और चरमपंथ का था। एक ऐसा रास्ता जिसने न सिर्फ एक पूर्व भारतीय प्रधानमंत्री की जान ली बल्कि पूरे क्षेत्र को कई दशकों तक अस्थिरता में धकेल दिया।
CM विजय को यह समझना होगा कि सिनेमा स्क्रीन पर एक मास हीरो होना जहां आप आक्रामक डायलॉग बोलकर तालियां बटोर सकते हैं – यह एक बिल्कुल अलग बात है।
और असल जिंदगी में एक संवेदनशील तटीय राज्य का मुख्यमंत्री होना – यह एक बिल्कुल अलग जिम्मेदारी है।
आप नियो-द्रविड़वाद के नाम पर LTTE के भूत को जिंदा करके चुनाव जरूर जीत सकते हैं। लेकिन आप उस LTTE टाइगर पर सवार नहीं हो सकते और उम्मीद नहीं कर सकते कि वह आपके राज्य की सुरक्षा को नहीं काटेगा।
तमिलनाडु को प्रगति, निवेश और आगे बढ़ने की जरूरत है। वापस 1990 के दशक की हिंसा और चरमपंथ के काले युग में जाने की जरूरत नहीं है।
राष्ट्रीय सुरक्षा को वोट बैंक की वेदी पर आहुति नहीं दी जा सकती, CM साहब।
मुख्य बातें (Key Points)
- तमिलनाडु CM तल्पति विजय ने 18 मई को LTTE संस्थापक प्रभाकरण को श्रद्धांजलि दी
- Mullivaikkal Remembrance Day पर श्रीलंकाई तमिलों के साथ एकजुटता व्यक्त की
- उसी वक्त ED और NIA ने LTTE फंडिंग नेटवर्क का भंडाफोड़ किया
- डेनमार्क से पूर्व LTTE एजेंट उमाकांतन ने ₹1.6 करोड़ हवाला भेजा
- ₹42 करोड़ के डॉर्मेंट अकाउंट से पैसा निकालने की साजिश
- तमिलनाडु CID की Q ब्रांच ने लेचुमन मैरी फ्रांसिस्का को चेन्नई एयरपोर्ट पर गिरफ्तार किया
- विजय की राजनीति “नियो-द्रविड़ियनिज्म” पर आधारित – तमिल गर्व + कल्याणकारी नीतियां
- 1991 में LTTE ने राजीव गांधी की हत्या की थी, भारत ने इसे आतंकवादी घोषित किया
- भारत-श्रीलंका संबंधों और आंतरिक सुरक्षा पर खतरा
- विशेषज्ञों का कहना: वोट बैंक के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा से समझौता नहीं किया जा सकता













