Mid-Day Meal Scam Punjab: चंडीगढ़ में 5 मई को पंजाब कांग्रेस की प्रवक्ता टीना चौधरी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान भगवंत मान के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के पास मार्कफेड का विभाग होने के बावजूद, सरकार ने जानबूझकर मिड-डे मील, पंजीरी और अन्य खाद्य आपूर्ति के ठेके निजी कंपनियों को दिए।
देखा जाए तो Mid-Day Meal Scam Punjab में टीना चौधरी ने आरोप लगाया कि इन निजी कंपनियों द्वारा घटिया स्तर का भोजन सप्लाई किया गया, जिससे गरीब बच्चों और गर्भवती महिलाओं की सेहत के साथ सीधा खिलवाड़ हुआ।
उन्होंने कहा कि महंगे दामों पर सस्ता और निम्न गुणवत्ता वाला खाद्य सामग्री देकर सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचाया गया।
एक जैसे पते, एक ही समय पर टेंडर – मिलीभगत का सबूत
Mid-Day Meal Scam Punjab में सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि टीना चौधरी ने बताया कि जिन कंपनियों को टेंडर दिए गए, उनके पते एक जैसे हैं और सभी ने एक ही दिन लगभग एक ही समय पर टेंडर भरे।
समझने वाली बात यह है कि यह बड़े स्तर पर मिलीभगत और घोटाले की ओर इशारा करता है। यह पूरा मामला हजारों करोड़ रुपये के घोटाले का प्रतीत होता है।
टीना चौधरी ने कहा कि पूर्व चेयरमैन द्वारा भी इस बात को स्वीकार किया गया कि एक कंपनी वेरका के नाम का दुरुपयोग कर भारी मुनाफा कमा रही थी, जिससे संस्थान की छवि खराब हुई।
चार कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग
Mid-Day Meal Scam Punjab में टीना चौधरी ने मांग की कि जिन चार कंपनियों को ठेके दिए गए, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। ये कंपनियां हैं:
1. चंडीगढ़ स्वीट्स
2. इंटरलिंक फूड्स प्राइवेट लिमिटेड
3. एमपी एग्रीटॉनिक्स लिमिटेड
4. प्रकाश मसाले
दिलचस्प बात यह है कि इन सभी कंपनियों के पते एक जैसे हैं। टेंडर भी एक ही दिन, एक ही समय पर भरे गए। यह साफ तौर पर पूर्व नियोजित साजिश की ओर इशारा करता है।
घी की जगह रिफाइंड तेल – गुणवत्ता से समझौता
कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि कांग्रेस सरकार के समय पंजीरी घी से तैयार की जाती थी और लगभग ₹91-92 प्रति किलो के हिसाब से दी जाती थी।
यहां ध्यान देने वाली बात है कि मौजूदा सरकार ने रिफाइंड तेल से बनी निम्न गुणवत्ता की पंजीरी सप्लाई की, जिसकी लागत कम होने के बावजूद उसे महंगे दामों पर खरीदा गया।
टीना चौधरी ने कहा, “यह स्पष्ट रूप से भ्रष्टाचार और कमीशनखोरी का मामला है।”
Mid-Day Meal Scam Punjab में यह सबसे बड़ा सबूत है कि सरकार ने गुणवत्ता से समझौता करके कमीशन कमाया।
50% बच्चे कुपोषण का शिकार
टीना चौधरी ने सबसे गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि पिछले कई वर्षों में निजी कंपनियों द्वारा सप्लाई किए गए घटिया भोजन के कारण राज्य के 50% से अधिक बच्चे कुपोषण का शिकार हो रहे हैं।
हैरान करने वाली बात यह है कि बच्चों का शारीरिक विकास प्रभावित हुआ है। यह सिर्फ आंकड़ों की बात नहीं है, बल्कि पंजाब के भविष्य के साथ खिलवाड़ है।
सवाल उठता है कि क्या सरकार को इस बात की चिंता नहीं है कि घटिया खाना खिलाकर बच्चों की सेहत बर्बाद की जा रही है?
मार्कफेड के पास विभाग होने के बाद भी निजी कंपनियों को ठेका क्यों?
Mid-Day Meal Scam Punjab में सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब मुख्यमंत्री के पास मार्कफेड का विभाग है, तो फिर निजी कंपनियों को ठेके क्यों दिए गए?
मार्कफेड और वेरका जैसी विश्वसनीय सरकारी संस्थाएं खाद्य सामग्री की आपूर्ति कर सकती थीं। लेकिन सरकार ने जानबूझकर निजी कंपनियों को ठेके दिए।
टीना चौधरी ने कहा, “यह साबित करता है कि इसमें भारी कमीशनखोरी हुई है।”
मार्कफेड ने अनुबंध समाप्त किया – अब जांच हो
टीना चौधरी ने कहा कि अब जबकि मार्कफेड ने इन चारों कंपनियों के साथ अनुबंध समाप्त कर दिया है, तो पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए।
दोषियों को सजा दी जानी चाहिए। जिन अधिकारियों ने इस घोटाले में मदद की, उन पर भी कार्रवाई होनी चाहिए।
समझने वाली बात यह है कि अगर अनुबंध समाप्त हो गया है, तो इसका मतलब है कि सरकार ने भी माना कि कुछ गड़बड़ थी।
भविष्य में मार्कफेड और वेरका से आपूर्ति हो – मांग
Mid-Day Meal Scam Punjab के बाद टीना चौधरी ने मांग की कि भविष्य में मिड-डे मील और आंगनवाड़ी के लिए खाद्य सामग्री की आपूर्ति दोबारा से मार्कफेड और वेरका जैसी विश्वसनीय सरकारी संस्थाओं के माध्यम से की जाए।
“ताकि बच्चों और महिलाओं को पौष्टिक भोजन मिल सके और उनका स्वास्थ्य सुरक्षित रहे,” टीना चौधरी ने कहा।
यह मांग बिल्कुल जायज है क्योंकि बच्चों और गर्भवती महिलाओं की सेहत से समझौता नहीं किया जा सकता।
हजारों करोड़ का घोटाला?
Mid-Day Meal Scam Punjab कितने बड़े स्तर का है? टीना चौधरी ने इसे हजारों करोड़ रुपये का घोटाला बताया।
अगर गौर करें तो पंजाब में हजारों स्कूलों और आंगनवाड़ियों में रोजाना लाखों बच्चों और महिलाओं को भोजन दिया जाता है। अगर इसमें प्रति किलो भी ₹10-20 का घोटाला हुआ, तो यह करोड़ों में चला जाता है।
कई वर्षों तक यह चलता रहा तो हजारों करोड़ का आंकड़ा पहुंच सकता है।
उच्चस्तरीय जांच की मांग
टीना चौधरी ने उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। उन्होंने कहा कि निम्नलिखित सवालों के जवाब मिलने चाहिए:
1. चार कंपनियों के पते एक जैसे क्यों हैं?
2. एक ही दिन एक ही समय पर टेंडर कैसे भरे गए?
3. घी की जगह रिफाइंड तेल का इस्तेमाल क्यों हुआ?
4. कम लागत की चीज महंगे दामों पर क्यों खरीदी गई?
5. मार्कफेड को क्यों नहीं दिया गया काम?
6. किन अधिकारियों और मंत्रियों ने इसमें मदद की?
मुख्य बातें (Key Points):
• टीना चौधरी ने मान सरकार पर मिड-डे मील और पंजीरी घोटाले का आरोप लगाया
• चार कंपनियों को ठेके दिए गए जिनके पते एक जैसे हैं, एक ही समय पर टेंडर भरे गए
• घी की जगह रिफाइंड तेल से पंजीरी बनाई गई, महंगे दामों पर खरीदी गई
• 50% से अधिक बच्चे कुपोषण का शिकार, शारीरिक विकास प्रभावित हुआ
• मार्कफेड ने चारों कंपनियों के साथ अनुबंध समाप्त किया, उच्चस्तरीय जांच की मांग
• भविष्य में मार्कफेड और वेरका से आपूर्ति की मांग, बच्चों को पौष्टिक भोजन मिले
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