Raza Murad Prem Rog की कास्टिंग एक ऐसी कहानी है जो बॉलीवुड में आज भी याद की जाती है। 1982 में रिलीज हुई ऋषि कपूर और पद्मिनी कोल्हापुरे की फिल्म ‘प्रेम रोग’ ने ना सिर्फ बॉक्स ऑफिस पर धमाल मचाया, बल्कि रजा मुराद को बॉलीवुड का खूंखार विलेन भी बना दिया। लेकिन क्या आप जानते हैं कि राज कपूर के तीनों बेटे इस कास्टिंग के खिलाफ थे?
देखा जाए तो यह फिल्म ना सिर्फ विधवा विवाह के मुद्दे पर समाज की सोच पर कड़ा प्रहार करती थी, बल्कि इसने रजा मुराद के गिरते करियर को नया मुकाम भी दिया। फिल्म साल की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्मों में से एक बनी।
80 के दशक में रजा मुराद का संघर्ष
80 के दशक में रजा मुराद बड़ा चेहरा नहीं थे। फिल्मों में काम मिल रहा था लेकिन करियर ऊंचाइयों पर नहीं था। उनके पास एक के बाद एक छोटे-मोटे रोल आ रहे थे, लेकिन कोई ऐसा किरदार नहीं मिल रहा था जो उन्हें स्टारडम दे सके।
लेकिन फिल्म “प्रेम रोग” ने उनके गिरते करियर को नया मुकाम दिया। ठाकुर वीरेंद्र प्रताप सिंह के किरदार ने रजा मुराद को बॉलीवुड के सबसे डरावने विलेन के रूप में स्थापित कर दिया।
राज कपूर ने किसी फिल्म में देखकर चुना
साल 1980 में राज कपूर साहब फिल्म “प्रेम रोग” की कास्टिंग कर रहे थे। उन्होंने बिना नाम जाने रजा मुराद को एक फिल्म में देखकर ठाकुर वीरेंद्र प्रताप सिंह के किरदार के लिए चुन लिया था।
अभिनेता ने खुद एक पुराने इंटरव्यू में इस बात का खुलासा किया था। उन्होंने बताया था कि कपूर साहब ने रात को अपने मैनेजर को फोन करके कहा था, “ऋषि कपूर की मजदूरों की तकलीफों पर बनी फिल्म में एक पतला सा लड़का था, जो शायर बना था, उसे लेकर आओ।”
दिलचस्प बात यह है कि इस वक्त राज कपूर को उनका नाम तक नहीं पता था। बस उन्होंने स्क्रीन पर रजा मुराद की उपस्थिति देखकर फैसला कर लिया था।
डब्बू और बाकी बेटों का विरोध
तब रणधीर कपूर (डब्बू) जी ने विरोध किया कि वो ठाकुर वीरेंद्र प्रताप सिंह के किरदार के लिए बिल्कुल भी ठीक नहीं हैं और वह किरदार उन्हें जचेगा भी नहीं। उनके सारे बेटे नहीं चाहते थे कि रजा मुराद को यह किरदार मिले।
समझने वाली बात यह है कि उस समय रणधीर कपूर, ऋषि कपूर और राजीव कपूर सभी इस फैसले के खिलाफ थे। उन्हें लगता था कि रजा मुराद इतने हेवीवेट किरदार के लिए सही नहीं हैं।
राज कपूर अपने फैसले पर रहे अडिग
अभिनेता ने कहा, “बहुत सारे लोग मेरे ठाकुर वीरेंद्र प्रताप सिंह के किरदार करने के खिलाफ थे लेकिन राज कपूर साहब अपने फैसले पर अडिग थे।”
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि राज कपूर अपनी कास्टिंग के फैसलों के लिए जाने जाते थे। उन्हें अपनी आंख पर पूरा भरोसा था और वे जानते थे कि रजा मुराद इस किरदार के लिए परफेक्ट हैं।
रजा मुराद ने आगे कहा, “जब आप चढ़ते हुए सूरज होते हैं तो सब लोग आपको सलाम करते हैं और ढलते सूरज होते हैं तो हर कोई आपको कुचलना चाहता है। मेरे साथ भी कुछ वैसा ही हो रहा था।”
“पहली पसंद हो तुम”
राज कपूर साहब ने रजा मुराद को बहुत सम्मान दिया और पहली बात कही कि इस किरदार के लिए मैं ही उनकी पहली पसंद हूं और दूसरा नाम भी जहन में नहीं है। उन्होंने कहा, “अगर आप मना करेंगे तभी हम किसी दूसरे नाम पर विचार करेंगे।”
अगर गौर करें तो यह किसी भी एक्टर के लिए सबसे बड़ी तारीफ होती है जब कोई बड़ा निर्देशक उन्हें पहली पसंद बताए। रजा मुराद के लिए यह करियर का टर्निंग पॉइंट था।
सेट पर खूब मिला था सम्मान
सेट पर भी रजा मुराद को खूब सम्मान मिला। जब वे पहली बार सेट पर शूटिंग के लिए पहुंचे, तो राज कपूर ने सबको लाइन में खड़ा करके एक-एक से उनका परिचय कराया था, जैसे कोई हेड ऑफ स्टेट आया हो।
यह राज कपूर की महानता थी कि उन्होंने अपने एक्टर को इतना सम्मान दिया। यह भी बताया जाता है कि खास बात यह भी रही कि शूटिंग के बाद जिस-जिसने अभिनेता का विरोध किया था, राज कपूर ने स्क्रीन पर दिखाकर सबसे कहा था, “अब बताइए, इनसे बेहतर कौन हो सकता है।”
फिल्म बनी साल की सबसे बड़ी हिट
प्रेम रोग 1982 की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्मों में से एक थी। फिल्म की कहानी विधवा विवाह के मुद्दे पर समाज की सोच पर कड़ा प्रहार करती थी। पद्मिनी कोल्हापुरे और ऋषि कपूर की जोड़ी को खूब पसंद किया गया।
लेकिन रजा मुराद के खलनायक के अभिनय को भी खूब सराहा गया। उनका ठाकुर वीरेंद्र प्रताप सिंह का किरदार इतना शक्तिशाली था कि लोग आज भी उसे याद करते हैं।
राज कपूर की दूरदर्शिता
यह घटना राज कपूर की दूरदर्शिता को दर्शाती है। जब सभी लोग किसी एक्टर के खिलाफ थे, तब भी उन्होंने अपने फैसले पर भरोसा किया। और नतीजा सबके सामने है – रजा मुराद ने ना सिर्फ उस किरदार को परफेक्शन के साथ निभाया, बल्कि बॉलीवुड के सबसे यादगार विलेन्स में से एक बन गए।
दिलचस्प बात यह भी है कि इसके बाद रजा मुराद को कई बड़ी फिल्मों में विलेन के रोल मिलने लगे। उनका करियर नई ऊंचाइयों पर पहुंच गया।
मुख्य बातें (Key Points)
- 1982 की फिल्म ‘प्रेम रोग’ ने रजा मुराद को स्टारडम दिया
- राज कपूर के तीनों बेटे इस कास्टिंग के खिलाफ थे
- राज कपूर अपने फैसले पर रहे अडिग
- रजा मुराद को सेट पर हेड ऑफ स्टेट जैसा सम्मान मिला
- फिल्म साल की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्मों में रही













