TCS Nashik case में एक नया मोड़ आया है। BPO में उत्पीड़न और धर्म परिवर्तन के मामले में मुख्य आरोपी Nida Khan ने दावा किया है कि वह गर्भवती हैं। उनके वकील ने बताया कि वह मुंबई में हैं और अदालत में अग्रिम जमानत के लिए आवेदन दिया है। अब तक इस मामले में आठ लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है।
देखा जाए तो यह मामला लगातार सुर्खियों में बना हुआ है। TCS नासिक BPO में महिला कर्मचारियों के साथ कथित उत्पीड़न और धर्म परिवर्तन की कोशिश के गंभीर आरोप लगे हैं।
निदा खान फरार थीं
जब से TCS नासिक BPO में उत्पीड़न और धर्म परिवर्तन के मामले सामने आए, तब से HR प्रमुख निदा खान फरार चल रही थीं। अब तक आठ लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है, लेकिन निदा खान पकड़ से बाहर रहीं।
अब उनके वकील ने खुलासा किया है कि वह मुंबई में हैं और गर्भवती होने का दावा किया है। उन्होंने अदालत में अग्रिम जमानत की अर्जी दाखिल की है, जिसकी सुनवाई संभवतः नासिक की अदालत में होगी।
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि गर्भावस्था के दावे के साथ जमानत की अर्जी दाखिल करना एक रणनीति हो सकती है। अदालतें आमतौर पर गर्भवती महिलाओं के मामले में विशेष विचार करती हैं।
आठ लोग पहले ही गिरफ्तार
अब तक गिरफ्तार किए गए कर्मचारियों में दानिश शेख, तौसीफ अत्तार, रजा मेमन, शाहरुख कुरैशी, शफी शेख, आसिफ अफताब अंसार, शाहरुख शेख और BPO यूनिट के ऑपरेशंस हेड शामिल हैं।
HR मैनेजर निदा खान पर महिला पीड़ितों द्वारा उठाई गई शिकायतों की अनदेखी करने का आरोप है। रिपोर्ट्स के अनुसार, निदा ने एक महिला को धर्म परिवर्तन और उत्पीड़न के मामले से संबंधित शिकायत दर्ज करने से रोका, यह कहते हुए कि “ये चीजें होती रहती हैं” और आरोपियों का पक्ष लेते हुए दिखाई दीं।
दिलचस्प बात यह है कि एक HR की भूमिका कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है, लेकिन निदा खान पर आरोप है कि उन्होंने इस जिम्मेदारी को नजरअंदाज किया।
टाटा सन्स चेयरमैन की प्रतिक्रिया
टाटा सन्स के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन ने इन आरोपों को “गंभीर रूप से चिंताजनक और परेशान करने वाला” बताया है। उन्होंने कहा कि TCS की COO अराथी सुब्रमण्यम के नेतृत्व में एक व्यापक जांच की जा रही है ताकि तथ्यों का पता लगाया जा सके और जिम्मेदार लोगों की पहचान की जा सके।
यह दर्शाता है कि TCS जैसी बड़ी कंपनी इस मामले को गंभीरता से ले रही है और आंतरिक जांच कर रही है।
गंभीर आरोप
नासिक पुलिस कमिश्नर कर्णिक ने बताया कि सात पुरुष और दो महिला आरोपियों ने कथित तौर पर अपने अधिकार के पदों का दुरुपयोग करके सहकर्मियों को परेशान किया। उन्होंने आगे कहा कि पुरुष कर्मचारी ज्यादातर मामलों में सह-आरोपी हैं, जो कार्यस्थल के भीतर संभावित समन्वित कार्रवाई का संकेत देता है।
एक महिला संदिग्ध धार्मिक उत्पीड़न के एकल मामले में फंसी है, जबकि निदा खान पर एक पीड़िता को शिकायत दर्ज करने से हतोत्साहित करने का आरोप है।
समझने वाली बात यह है कि ये केवल व्यक्तिगत घटनाएं नहीं थीं, बल्कि एक संगठित पैटर्न की तरह दिखती हैं।
महिला और पुरुष दोनों पीड़ित
नौ रिपोर्ट किए गए मामलों में से एक शिकायत एक पुरुष कर्मचारी की है, जिसमें कथित धर्म परिवर्तन की कोशिश और कार्यस्थल उत्पीड़न का आरोप है। पहले, आठ महिला कर्मचारियों ने वरिष्ठ सहकर्मियों द्वारा मानसिक और यौन उत्पीड़न की रिपोर्ट की थी, इस आरोप के साथ कि HR ने उनकी शिकायतों को नजरअंदाज किया।
यह दिखाता है कि समस्या व्यापक थी और सिर्फ महिलाओं तक सीमित नहीं थी। एक विशेष जांच दल का गठन किया गया था जब आठ महिला कर्मचारियों ने मानसिक और यौन उत्पीड़न की शिकायत की थी।
कानूनी प्रक्रिया
निदा खान के वकील ने अग्रिम जमानत के लिए आवेदन दाया है। यह संभावना है कि मामले की सुनवाई नासिक की अदालत में होगी। गर्भावस्था के दावे को कानूनी रूप से सत्यापित करने की आवश्यकता होगी।
अगर गौर करें तो यह मामला कानूनी रूप से काफी जटिल है, क्योंकि इसमें कार्यस्थल उत्पीड़न, धार्मिक मुद्दे और HR की जिम्मेदारी जैसे कई पहलू शामिल हैं।
कंपनी की छवि पर असर
यह घटना TCS जैसी प्रतिष्ठित कंपनी की छवि पर भी असर डाल रही है। हालांकि कंपनी ने तुरंत कार्रवाई की और जांच शुरू की, लेकिन यह सवाल उठता है कि ऐसी गंभीर समस्याएं इतने लंबे समय तक कैसे चलती रहीं।
TCS ने यह सुनिश्चित करने की बात कही है कि भविष्य में ऐसी घटनाएं नहीं होंगी और कर्मचारियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है।
मुख्य बातें (Key Points)
- निदा खान ने गर्भवती होने का दावा किया
- आठ लोग पहले ही गिरफ्तार हो चुके हैं
- अग्रिम जमानत के लिए आवेदन दाखिल
- TCS के चेयरमैन ने आरोपों को “गंभीर” बताया
- नौ मामले दर्ज, जिनमें एक पुरुष पीड़ित भी शामिल













