ED Raid on LPU: केंद्रीय एजेंसी एनफोर्समेंट डायरेक्टरेट (ED) ने आम आदमी पार्टी के सांसद, लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी के फाउंडर और चांसलर अशोक मित्तल के घर और ऑफिस में रेड की। 15 अप्रैल बुधवार की सुबह ED की टीमों ने नौ लोकेशंस पर छापेमारी की। यह कार्रवाई FEMA (Foreign Exchange Management Act) के कथित उल्लंघन से जुड़ी है।
देखा जाए तो यह सिर्फ एक रेड नहीं, बल्कि एक बड़ा राजनीतिक तूफान है जो पंजाब की राजनीति में मचा है। खासकर जब पंजाब में चुनाव की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं।
नौ लोकेशंस पर रेड
15 अप्रैल बुधवार की सुबह एनफोर्समेंट डायरेक्टरेट की टीमों ने अशोक मित्तल की नौ लोकेशंस पर रेड की। इनमें शामिल हैं:
- लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (LPU)
- लवली ऑटोस
- लवली स्वीट्स
- डिस्टेंस एजुकेशन सेंटर, जालंधर और फगवाड़ा
- गुड़गांव में टेटर कॉलेज ऑफ बिजनेस
- मास्टर्स यूनियन कॉलेज ऑफ बिजनेस
रेड्स ED की जालंधर और चंडीगढ़ टीमों ने की। इसमें AAP के सांसद अशोक मित्तल का रेजिडेंस भी शामिल था। ऑफिशियल डिटेल्स फिलहाल डिस्क्लोज नहीं की गई हैं। लेकिन इतना बता दिया गया है कि FEMA के कथित उल्लंघन के मामले में यह कार्रवाई की गई है।
FEMA क्या है?
FEMA यानी Foreign Exchange Management Act। यह रेगुलेट करता है कि कैसे पैसा भारत के अंदर आ रहा है या यहां से बाहर जा रहा है। यह 1999 में लाया गया था और इसने स्ट्रिक्टर FERA को रिप्लेस किया था।
बेसिकली यह रेगुलेट करता है कि किस तरीके से विदेशी पैसा भारत में आ रहा है, भारतीय पैसा बाहर जा रहा है और RBI के नियमों का पालन हो रहा है या नहीं। यह मेकिंग श्योर करता है कि कोई अवैध रूप से अपने फंड्स बॉर्डर के बाहर पार्क नहीं कर रहा।
कौन हैं अशोक मित्तल?
अशोक मित्तल लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी के फाउंडर और चांसलर हैं। वे गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी से लॉ ग्रेजुएट हैं और पेशे से चार्टर्ड अकाउंटेंट हैं। आम आदमी पार्टी के राज्यसभा में सात सदस्य हैं और वे उनमें से एक हैं। उन्होंने 2022 में संसद में प्रवेश किया।
दिलचस्प बात यह है कि अशोक मित्तल वह शख्स हैं जिन्होंने राज्यसभा में राघव चड्ढा को पार्टी के डेप्युटी लीडर के पद से रिप्लेस किया।
राघव चड्ढा की सुरक्षा भी हटी
टाइमिंग देखिए – आज ही राघव चड्ढा की Z-Plus सुरक्षा को विड्रॉ कर लिया गया। यह कवर उन्हें पंजाब पुलिस द्वारा प्रोवाइड किया जा रहा था। अब वे केवल सेंट्रल सिक्योरिटी कवर के तहत होंगे।
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि राघव चड्ढा और AAP के बीच पहले भी विवाद हुआ है। उनकी पार्टी में पोजीशन कमजोर हुई और अब सुरक्षा भी कम कर दी गई। यह सब एक साथ हो रहा है।
AAP का तीखा रिएक्शन
इतनी बड़ी खबर आने पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं तो आनी ही थीं, खासतौर पर AAP से। अरविंद केजरीवाल ने ट्वीट किया: “मोदी जी ने पंजाब में चुनावों की तैयारी शुरू कर दी, लेकिन पंजाब के लोग यह बर्दाश्त नहीं करेंगे। BJP को इसका करारा जवाब देंगे।”
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने भी X पर पोस्ट किया: “टिपिकल मोदी स्टाइल। हम वो पत्ते नहीं जो शाख से टूटकर गिर जाएंगे। आंधियों को कह दो अपनी औकात में रहें।”
ED और चुनाव: बदनाम रिश्ता
ED और इलेक्शंस का यह एक बदनाम रिश्ता है जो बार-बार खबरों में आता है। टाइमिंग जो है वह हमेशा चुनाव से पहले होती है और ज्यादातर विपक्षी लीडर्स पर कार्रवाई होती है। इस सबके बीच बहुत सारे लीडर्स, खासतौर पर विपक्षी लीडर्स, एक कोइंसिडेंस देखते हैं, एक टाइमिंग देखते हैं, एक पैटर्न देखते हैं।
अगर गौर करें तो आंकड़े चौंकाने वाले हैं।
95% केस विपक्ष के खिलाफ
Indian Express की एक शानदार रिपोर्ट के अनुसार, 2014 और 2022 के बीच ED के रडार के अंडर 121 प्रोमिनेंट लीडर्स आए। इसमें से 115 विपक्ष के लीडर्स थे – जो कि 95% है। 95% का स्ट्राइक रेट ऑन ऑपोजिशन लीडर्स।
और इस रिपोर्ट के बाद भी यह सिलसिला थमा नहीं:
- दिल्ली के डिप्टी CM मनीष सिसोदिया पर 2023 में जांच
- JMM के लीडर हेमंत सोरेन पर 2024 जनवरी में जांच, झारखंड के CM पद से इस्तीफा देना पड़ा
- BRS की लीडर कविता पर भी ED की जांच
वाशिंग मशीन फिनोमिनन
दूसरा जो बहुत सारे विपक्षी लीडर्स ने नाम दिया है – ‘वाशिंग मशीन फिनोमिनन’। उदाहरण के तौर पर हेमंत बिश्वा शर्मा को देखिए। वे अब असम के मुख्यमंत्री हैं। लेकिन 2014-15 में शारदा चिटफंड स्कैम के तहत उनके ऊपर ED की इंक्वायरी शुरू हुई थी।
उस वक्त वे कांग्रेस का हिस्सा थे। उनके घर पर रेड हुई, क्वेश्चनिंग हुई। और जब से वे BJP में शामिल हुए, केस में कोई डेवलपमेंट नहीं। यह ‘वाशिंग मशीन’ है – विपक्ष में गए तो ED, BJP में आए तो सब साफ।
1% कन्विक्शन रेट
बीते साल एक और आंकड़ा सामने आया कि जो राजनीतिक लीडर्स जिन पर कार्रवाई हुई, उसमें सिर्फ 1% का कन्विक्शन रेट आया। यानी 1% केसेस में आप साबित कर पाए कि हां, यह इंसान गुनहगार था।
यह दर्शाता है कि या तो जांच सही नहीं है, या फिर इसका उद्देश्य सिर्फ राजनीतिक दबाव बनाना है।
UPA में भी होता था
यह यूपीए के वक्त में भी होता था जहां पर विपक्षी लीडर्स पर ऐसी कार्रवाई केंद्रीय एजेंसियों द्वारा होती थी। UPA की रिजीम के तहत कई प्रोमिनेंट BJP लीडर्स ED स्कैनर में आए:
- लक्ष्मीकांत शर्मा (व्यापम केस)
- कर्नाटक के फॉर्मर CM BS येदियुरप्पा
- TMC के सुदीप बंद्योपाध्याय
2004 और 2014 के बीच जब UPA की सरकार थी, तो 26 पॉलिटिशियंस को इन्वेस्टिगेट किया गया था ED द्वारा और इसमें रफली 14 विपक्षी पार्टियों से थे। दैट्स अ स्ट्राइक रेट ऑफ 54%।
तो तब भी आधे से ज्यादा केसेस विपक्ष वालों के खिलाफ ही थे। लेकिन अंतर देखिए – NDA के 8 साल और 95% केसेस विपक्ष पर। UPA के 10 साल और 54% केसेस विपक्ष पर।
ओवरऑल केसेस भी बढ़े
एक इंटरेस्टिंग पॉइंट यह भी है कि ओवरऑल ED की रेड्स, जो केसेस हैं, वो भी उनका नंबर ओवरऑल बड़ा है। 2004-14 का टर्म लें और 2014-2022 का टर्म लें – द जंप इज 27 टाइम्स। तो आपको यह भी फैक्टर इन करना होगा कि ओवरऑल नंबर ऑफ केसेस भी बड़े हैं।
पंजाब चुनाव से पहले सियासत
पंजाब में जल्द चुनाव होने वाले हैं और इस समय ED की यह कार्रवाई राजनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील है। AAP का आरोप है कि यह चुनाव से पहले उन्हें कमजोर करने की कोशिश है।
समझने वाली बात यह है कि ED की हर कार्रवाई गलत नहीं हो सकती। लेकिन जब पैटर्न इतना साफ दिखता है, तो सवाल उठना स्वाभाविक है।
मुख्य बातें (Key Points)
• ED ने AAP सांसद अशोक मित्तल के 9 ठिकानों पर रेड की
• FEMA उल्लंघन के आरोप में कार्रवाई हुई
• 2014-22 के बीच ED के 95% केस विपक्षी लीडर्स पर
• राघव चड्ढा की Z-Plus सुरक्षा भी हटाई गई
• AAP ने इसे चुनाव से पहले राजनीतिक हमला बताया
• कन्विक्शन रेट केवल 1% है













