Strait of Hormuz: मिडिल-ईस्ट में तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच हुई वार्ता बेनतीजा रही है, जिससे शांति की उम्मीदों को बड़ा झटका लगा है। करीब 21 घंटे तक चली बातचीत के बाद भी दोनों पक्ष किसी समझौते पर नहीं पहुंच सके।
सोमवार को तेल की कीमतें $100 प्रति बैरल के पार पहुंच गईं। इसकी वजह यह थी कि अमेरिकी नौसेना स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की नाकाबंदी की तैयारी कर रही थी, जिससे ईरान से होने वाली तेल की खेप पर रोक लग सकती है। यह दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में से एक है।
21 घंटे की मैराथन वार्ता भी विफल
US-Iran Tension को कम करने के लिए पाकिस्तान की मध्यस्थता में इस्लामाबाद में वार्ता आयोजित की गई थी। यह वार्ता रविवार सुबह से शुरू हुई और सोमवार सुबह तक चली। करीब 21 घंटे की मैराथन बातचीत के बाद भी दोनों देशों के बीच सहमति नहीं बन सकी।
अमेरिका की ओर से विदेश मंत्री और रक्षा सलाहकार शामिल हुए। ईरान की ओर से विदेश मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे। पाकिस्तान के विदेश मंत्री ने मध्यस्थता की कोशिश की लेकिन दोनों पक्ष अपनी-अपनी बात पर अड़े रहे।
सूत्रों के अनुसार मुख्य विवाद ईरान के परमाणु कार्यक्रम, तेल निर्यात पर प्रतिबंध और क्षेत्रीय प्रभाव को लेकर था। अमेरिका चाहता था कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को सीमित करे, जबकि ईरान ने कहा कि पहले प्रतिबंध हटाए जाएं।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की नाकाबंदी की तैयारी
वार्ता विफल होते ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सख्त कदम उठाने का आदेश दिया। अमेरिकी नौसेना ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की नाकाबंदी की तैयारी शुरू कर दी है। यह कदम 13 अप्रैल से लागू किया जाएगा।
Strait of Hormuz फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी के बीच एक संकरा जलमार्ग है। दुनिया की करीब 21% तेल आपूर्ति इसी मार्ग से होती है। अगर यह मार्ग बंद हो जाता है तो वैश्विक तेल आपूर्ति पर बड़ा असर पड़ेगा।
अमेरिकी नौसेना के युद्धपोत और विमानवाहक पोत इस क्षेत्र में तैनात किए जा रहे हैं। उनका काम ईरान से निकलने वाले तेल टैंकरों को रोकना होगा। यह कदम ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ाने के लिए उठाया जा रहा है।
तेल की कीमतें आसमान छू रहीं
Strait of Hormuz Blockade की खबर आते ही वैश्विक तेल बाजार में उथल-पुथल मच गई। सोमवार को ब्रेंट क्रूड की कीमत $100 प्रति बैरल के पार चली गई। यह पिछले दो साल में सबसे ऊंची कीमत है।
WTI क्रूड भी $96 प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गया। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि अगर नाकाबंदी लागू हो गई तो तेल की कीमतें $120-130 प्रति बैरल तक जा सकती हैं।
इसका सीधा असर भारत सहित तमाम देशों पर पड़ेगा। पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ेंगी और महंगाई और बढ़ेगी। विमानन उद्योग पर भी बड़ा असर पड़ेगा।
भारत अपनी जरूरत का करीब 85% तेल आयात करता है और इसमें से बड़ा हिस्सा मिडिल-ईस्ट से आता है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से भारत को आने वाली तेल आपूर्ति भी प्रभावित होगी।
ट्रंप का दावा: ईरान बातचीत के लिए तैयार
हालांकि डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि ईरान अभी बातचीत की मेज पर है। ईरानी अधिकारी बातचीत से पीछे नहीं हटे हैं और कुछ रियायतों के साथ वापस आ सकते हैं।
ट्रंप ने कहा, “ईरान रिटर्न्स के नाम से पहले तेल-गैस की कीमतें दे सकती है। मौजूदा हालात स्थिर होने पर तेल-गैस की कीमतों में गिरावट आने की संभावना है।”
उन्होंने यह भी कहा कि अगर चीन ने ईरान को हथियार दिए तो अमेरिका उस पर 50% टैरिफ लगाएगा। यह चेतावनी चीन को ईरान से दूर रखने के लिए दी गई है।
लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप बातचीत का दरवाजा खुला रख रहे हैं ताकि पूरी जिम्मेदारी ईरान पर डाली जा सके।
ईरान का जवाब: नाकाबंदी नहीं होने देंगे
होर्मुज जलडमरूमध्य पर अमेरिका की सख्ती के दावे पर ईरान ने साफ कह दिया है कि वह अमेरिकी नाकाबंदी नहीं होने देगा। ईरानी सेना ने कहा कि वह हर हाल में अपने तेल निर्यात को जारी रखेगी।
ईरान ने धमकी दी है कि अगर उसके तेल टैंकरों को रोका गया तो वह स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को पूरी तरह बंद कर देगा। इससे किसी भी देश का तेल टैंकर नहीं निकल पाएगा। यह कदम वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा झटका होगा।
ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने इस क्षेत्र में अपनी गश्त बढ़ा दी है। उनके पास तेज गति वाली नौकाएं और मिसाइलें हैं जो अमेरिकी जहाजों पर हमला कर सकती हैं।
पिछले कुछ सालों में कई बार ईरान और अमेरिका के बीच इस इलाके में तनाव बढ़ा है। लेकिन इस बार स्थिति ज्यादा गंभीर दिख रही है।
भारत पर क्या होगा असर?
Strait of Hormuz Blockade का सबसे ज्यादा असर भारत जैसे तेल आयातक देशों पर पड़ेगा। भारत सरकार ने हालांकि दावा किया है कि देश में ईंधन की किल्लत नहीं है। पश्चिम एशिया में तनाव के बावजूद पर्याप्त भंडार मौजूद हैं।
लेकिन अगर तनाव लंबे समय तक बना रहा तो कीमतों पर असर तो पड़ेगा ही। पेट्रोल-डीजल महंगे होंगे। रसोई गैस की कीमतें भी बढ़ेंगी। परिवहन खर्च बढ़ेगा जिससे आम आदमी की जेब पर बोझ पड़ेगा।
सरकार वैकल्पिक आपूर्ति स्रोतों की तलाश में है। रूस और अन्य देशों से तेल आयात बढ़ाने की योजना है। रणनीतिक भंडार भी भरे जा रहे हैं।
व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा के लिए भारतीय नौसेना भी सतर्क है। वह इस क्षेत्र में गश्त बढ़ा सकती है।
वैश्विक अर्थव्यवस्था पर खतरा
ईरानी बंदरगाहों पर अमेरिका की नाकाबंदी का असर पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा। तेल की कीमतों में उछाल के अलावा वैश्विक व्यापार पर भी असर पड़ने की आशंका है।
कई एशियाई देश अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए मिडिल-ईस्ट पर निर्भर हैं। चीन, जापान, दक्षिण कोरिया और भारत सभी बड़े तेल आयातक हैं। इन सभी की अर्थव्यवस्था प्रभावित होगी।
शेयर बाजारों में भी उथल-पुथल देखी जा रही है। निवेशक सुरक्षित निवेश की ओर भाग रहे हैं। सोने की कीमतें भी बढ़ रही हैं।
अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने दोनों देशों से संयम बरतने की अपील की है। संयुक्त राष्ट्र ने कहा है कि युद्ध किसी समस्या का समाधान नहीं है।
मुख्य बातें (Key Points):
• इस्लामाबाद में US-Iran के बीच 21 घंटे की वार्ता बेनतीजा
• अमेरिकी नौसेना 13 अप्रैल से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की नाकाबंदी करेगी
• तेल की कीमतें $100 प्रति बैरल के पार, भारत पर असर की आशंका
• ईरान ने कहा – अमेरिकी नाकाबंदी नहीं होने देंगे













