Sukhbir Badal Akal Takht Controversy — पंजाब के कैबिनेट मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने बुधवार को शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल पर कड़ा हमला बोलते हुए कहा कि श्री अकाल तख्त साहिब के 2 दिसंबर 2024 के हुक्मनामों पर सवाल उठाना सिख पंथ की सर्वोच्च सत्ता पर सीधा हमला है। उन्होंने कहा कि ऐसे बयान पंथ की पवित्रता और सामूहिक भावनाओं को गहरी चोट पहुंचाते हैं।
“अकाल तख्त साहिब का हर हुक्मनामा ब्रह्म आदेश, सवाल नहीं उठा सकता कोई”
हरजोत सिंह बैंस ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि श्री अकाल तख्त साहिब पंथ का सर्वोच्च आध्यात्मिक और सांसारिक केंद्र है। वहां से जारी हर हुक्मनामा अकाल पुरख का ब्रह्म आदेश होता है और किसी को भी इस पर सवाल उठाने का अधिकार नहीं है। उन्होंने कड़ी चेतावनी दी कि जो भी व्यक्ति श्री अकाल तख्त साहिब के हुक्मनामे पर सवाल उठाएगा, उसे गुरु साहिब के प्रति जवाबदेह होना पड़ेगा।
कार्यकारी जत्थेदार से सख्त कार्रवाई की मांग
तुरंत हस्तक्षेप की मांग करते हुए मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने कार्यकारी जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज्ज से अपील की कि वे इस मामले का सख्त संज्ञान लें। उन्होंने कहा कि सुखबीर सिंह बादल ने अपने शब्दों से श्री अकाल तख्त साहिब पर हमला किया है और यह पूरे सिख समुदाय के विश्वास पर हमला है। कोई भी सिख जो अकाल तख्त के हुक्मनामे को नहीं मानता या उसकी प्रामाणिकता पर सवाल उठाता है, वह सिख कहलाने का अधिकार खो देता है।
पूर्व जत्थेदार ज्ञानी रघबीर सिंह ने भी की कड़ी निंदा
बैंस ने बताया कि श्री अकाल तख्त साहिब के पूर्व जत्थेदार ज्ञानी रघबीर सिंह ने भी सुखबीर सिंह बादल के बयान की कड़ी निंदा की है। उन्होंने पंथ से अपील की कि तख्त की सत्ता पर सवाल उठाने की किसी भी कोशिश के खिलाफ पूरा सिख समुदाय एकजुट होकर खड़ा हो।
SGPC ने राजनीतिक कारणों से रोकी श्री आनंदपुर साहिब Heritage Street Project
इसी संदर्भ में हरजोत सिंह बैंस ने धार्मिक और विरासत से जुड़े मामलों में राजनीतिक हस्तक्षेप पर भी गंभीर खुलासा किया। उन्होंने कहा कि शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) ने श्री आनंदपुर साहिब हेरिटेज स्ट्रीट प्रोजेक्ट के मूल डिजाइन का 90 प्रतिशत हिस्सा सिर्फ इसलिए बदल दिया क्योंकि वह नहीं चाहती थी कि इसका श्रेय मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान सरकार या हरजोत सिंह बैंस को मिले।
उन्होंने बताया कि उन्हें दो महीने के लिए पर्यटन विभाग का कार्यभार सौंपा गया था और इस दौरान उन्होंने पूरी लगन से इस परियोजना को तैयार किया। इसकी SGPC द्वारा समीक्षा भी की गई थी और आज भी इसका एक मॉडल, जिसमें एक ड्योढ़ी भी शामिल है, तख्त श्री केशगढ़ साहिब के सामने रखा हुआ है।
“तख्त श्री दमदमा साहिब में बनी ड्योढ़ी, फिर यहां क्यों बदला डिजाइन?”
बैंस ने सवाल उठाते हुए कहा कि तख्त श्री दमदमा साहिब में पहले ही इस तरह की ड्योढ़ी बनाई जा चुकी है, फिर स्वीकृत डिजाइन का इतना बड़ा हिस्सा क्यों बदला गया? हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि शिरोमणि कमेटी या तख्त श्री केशगढ़ साहिब के जत्थेदार जो भी निर्णय लें, वह उनके लिए पंथ का आदेश है। उन्होंने कहा कि इस परियोजना को पूरा होते देखना उनकी दिली इच्छा थी।
तख्त श्री केशगढ़ साहिब से गुरुद्वारा सीस गंज साहिब तक जोड़ने की थी योजना
बैंस ने बताया कि प्रस्तावित हेरिटेज मार्ग का उद्देश्य तख्त श्री केशगढ़ साहिब को गुरुद्वारा सीस गंज साहिब से जोड़ना था — वह पवित्र स्थान जहां नौवें गुरु के पवित्र शीश का अंतिम संस्कार हुआ था और जहां गुरु गोबिंद सिंह जी प्रतिदिन मत्था टेकते थे। उन्होंने बताया कि तख्त श्री केशगढ़ साहिब की ओर जाने वाला मौजूदा रास्ता बहुत अधिक ढलानदार है और इसके समाधान के लिए सीढ़ियों, एक लिफ्ट और नगर कीर्तन के लिए खुले मार्ग की योजना बनाई गई थी। आज बुजुर्गों और कई अन्य लोगों के लिए इस चढ़ाई पर जाना कठिन है।
उन्होंने कहा कि वे सिख संस्था के निर्णय को पूरे दिल से स्वीकार करते हैं, लेकिन अब फैसला कौम और श्री आनंदपुर साहिब के लोगों को करना है। उन्होंने पुष्टि की कि अब यह परियोजना तख्त श्री केशगढ़ साहिब से गुरुद्वारा सीस गंज साहिब और किला आनंदगढ़ साहिब तक विकसित की जाएगी।
मुख्य बातें (Key Points)
- हरजोत सिंह बैंस ने कहा कि श्री अकाल तख्त साहिब के हुक्मनामों पर सवाल उठाना पंथ पर सीधा हमला है
- कार्यकारी जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज्ज से सुखबीर बादल के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग
- SGPC ने राजनीतिक कारणों से श्री आनंदपुर साहिब हेरिटेज स्ट्रीट प्रोजेक्ट का 90% डिजाइन बदला
- पूर्व जत्थेदार ज्ञानी रघबीर सिंह ने भी सुखबीर बादल के बयान की निंदा की













