Punjab Financial Crisis पर कांग्रेस ने मोर्चा खोल दिया है। पूर्व उपमुख्यमंत्री और सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा ने सोमवार 7 अप्रैल 2026 को चंडीगढ़ में आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार पर जोरदार हमला बोलते हुए कहा कि नए वित्त वर्ष के पहले ही हफ्ते में पंजाब सरकार ने 1500 करोड़ रुपये का कर्ज़ ले लिया है, जो बेहद चिंताजनक है। उन्होंने चेतावनी दी कि इस नए कर्ज़ के साथ राज्य का कुल कर्ज़ 4 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो चुका है और इस साल के अंत तक पौने पांच लाख करोड़ तक पहुंचने की आशंका है।
“AAP सरकार पंजाब को आर्थिक एमरजेंसी की ओर ले जा रही है”
रंधावा ने बेहद सख्त शब्दों में कहा कि आम आदमी पार्टी की सरकार पंजाब को आर्थिक एमरजेंसी की तरफ धकेल रही है। विकास कार्य ठप पड़े हैं और राज्य के हर व्यक्ति पर 1.26 लाख रुपये से ज्यादा का कर्ज़ हो चुका है। जो पार्टी कर्ज़ उतारने का वादा करके सत्ता में आई थी, उसी के कार्यकाल में पंजाब का कर्ज़ 1.33 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा बढ़ चुका है।
उन्होंने कहा कि सरकारी आंकड़ों के मुताबिक कर्ज़ का बड़ा हिस्सा पुरानी देनदारियों और मुफ्त सब्सिडी में जा रहा है। 300 यूनिट मुफ्त बिजली का वादा पूरा करने के लिए हर साल बिजली बोर्ड को 20,400 करोड़ रुपये से ज्यादा की सब्सिडी देनी पड़ रही है, जो राज्य की वित्तीय हालत को और कमज़ोर कर रहा है।
Punjab Financial Crisis: किसान भी देश में सबसे ज्यादा कर्ज़दार
रंधावा ने Punjab Financial Crisis का सबसे दर्दनाक पहलू उजागर करते हुए बताया कि देश का अन्नदाता पंजाब का किसान प्रति किसान कर्ज़ के मामले में पूरे देश में पहले स्थान पर पहुंच चुका है। आंकड़ों के मुताबिक 37.62 लाख किसान खाताधारकों पर 1.04 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का कृषि ऋण है।
उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि पंजाब कभी “सोने की चिड़िया” कहलाता था। सोने जैसा अनाज पैदा करने वाले यहां के अन्नदाता आज कर्ज़ के बोझ तले दबे हुए हैं। यह स्थिति किसी भी संवेदनशील सरकार के लिए शर्मनाक होनी चाहिए।
“कर्ज़ विकास के लिए नहीं, विज्ञापन और चार्टर्ड उड़ानों पर खर्च हो रहा”
रंधावा ने इस कदम की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि सरकार पंजाब के लोगों की भलाई की बजाय राजनीतिक दिखावे पर ज्यादा पैसा खर्च कर रही है। उन्होंने सीधा आरोप लगाया कि यह कर्ज़ राष्ट्रीय स्तर पर विज्ञापन और मुख्यमंत्री भगवंत मान की बार-बार की चार्टर्ड यात्राओं के लिए लिया गया है, न कि वास्तविक विकास के लिए।
रंधावा ने कहा कि “मुख्यमंत्री भगवंत मान पंजाब का भविष्य PR स्टंट्स के लिए गिरवी नहीं रख सकते। सरकार को पंजाब का कर्ज़ उतारने के लिए काम करने की जरूरत है, न कि कर्ज़ बढ़ाने के लिए।”
वित्तीय विशेषज्ञों की चेतावनी: आवश्यक सेवाओं पर पड़ेगा असर
रंधावा ने यह भी बताया कि वित्तीय विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि लगातार कर्ज़ लेने से राज्य की वित्तीय स्थिति पर गंभीर दबाव बढ़ सकता है। इसका सीधा असर स्वास्थ्य, शिक्षा और बुनियादी ढांचे जैसी आवश्यक सेवाओं पर पड़ेगा क्योंकि इन सेवाओं के लिए संसाधन कम बचेंगे।
उन्होंने मांग की कि सरकार को कर्ज़ के इस्तेमाल में अधिक पारदर्शिता लानी चाहिए। जनता को बताना चाहिए कि पैसा कहां जा रहा है। रंधावा ने पहले भी मार्च 2026 में बढ़ते कर्ज़ पर चर्चा के लिए सर्वदलीय बैठक की मांग की थी और कर्ज़, खर्चों और धन के उपयोग की निगरानी के लिए एक विधायी वित्तीय निगरानी समिति बनाने का प्रस्ताव दिया था।
मुख्य बातें (Key Points)
- रंधावा ने कहा कि नए वित्त वर्ष के पहले हफ्ते में ही सरकार ने 1500 करोड़ का कर्ज़ लिया, राज्य का कुल कर्ज़ 4 लाख करोड़ पार।
- AAP कार्यकाल में 1.33 लाख करोड़ से ज्यादा कर्ज़ बढ़ा, हर व्यक्ति पर 1.26 लाख का कर्ज़।
- 37.62 लाख किसानों पर 1.04 लाख करोड़ का कृषि ऋण, पंजाब प्रति किसान कर्ज़ में देश में पहले स्थान पर।
- 300 यूनिट मुफ्त बिजली पर सालाना 20,400 करोड़ की सब्सिडी राज्य की वित्तीय हालत बिगाड़ रही है।













