Ekadashi in April: अप्रैल माह की शुरुआत होने जा रही है और इस महीने में दो महत्वपूर्ण एकादशी व्रत आने वाले हैं। वैदिक पंचांग के अनुसार 13 अप्रैल को वरुथिनी एकादशी और 27 अप्रैल को मोहिनी एकादशी का व्रत किया जाएगा। हर महीने में दो बार एकादशी व्रत किया जाता है – एक कृष्ण पक्ष में और एक शुक्ल पक्ष में।
धार्मिक मान्यता के अनुसार विधिपूर्वक Ekadashi in April व्रत करने से साधक को सभी पापों से मुक्ति मिलती है और भगवान विष्णु की कृपा बनी रहती है। व्रत के दौरान नियम का पालन करना चाहिए, इससे साधक को व्रत का पूर्ण फल प्राप्त होता है और जीवन में सुख-शांति बनी रहती है।
इस बार वैशाख माह की दोनों एकादशी बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती हैं। वरुथिनी एकादशी कृष्ण पक्ष की एकादशी है जबकि मोहिनी एकादशी शुक्ल पक्ष की एकादशी है। आइए विस्तार से जानते हैं इन दोनों एकादशी की तिथि, पारण समय और पूजा विधि।
वरुथिनी एकादशी: 13 अप्रैल को व्रत
वैदिक पंचांग के अनुसार वैशाख माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि 13 अप्रैल को देर रात 1:16 बजे शुरू होगी। इसका समापन 14 अप्रैल को देर रात 1:08 बजे होगा। ऐसे में Varuthini Ekadashi का व्रत 13 अप्रैल को किया जाएगा।
यह एकादशी कृष्ण पक्ष की होने के कारण विशेष रूप से पापों से मुक्ति और जीवन की बाधाओं को दूर करने के लिए मानी जाती है। इस दिन व्रत रखने से भगवान विष्णु प्रसन्न होते हैं और भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
वरुथिनी एकादशी व्रत का पारण 14 अप्रैल को द्वादशी तिथि में ही करना चाहिए। पारण का सही समय जानना बहुत जरूरी है क्योंकि गलत समय पर पारण करने से व्रत का पूर्ण फल नहीं मिलता।
वरुथिनी एकादशी का पारण समय
वरुथिनी एकादशी व्रत का पारण 14 अप्रैल को सुबह 6:54 बजे से 8:31 बजे तक है। इस समय अवधि में ही व्रत खोलना चाहिए। पारण का समय बहुत महत्वपूर्ण होता है क्योंकि यह द्वादशी तिथि और सूर्योदय के समय के अनुसार निर्धारित किया जाता है।
पारण करते समय पहले तुलसी का पत्ता ग्रहण करना चाहिए और फिर सात्विक भोजन करना चाहिए। पारण में फलाहार या हल्का भोजन लेना उत्तम माना जाता है।
अगर किसी कारणवश इस समय में पारण नहीं कर पाते हैं तो द्वादशी तिथि समाप्त होने से पहले अवश्य पारण कर लेना चाहिए। लेकिन सबसे उत्तम यही है कि निर्धारित समय में ही पारण किया जाए।
मोहिनी एकादशी: 27 अप्रैल को व्रत
वैदिक पंचांग के अनुसार वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि की शुरुआत 26 अप्रैल को शाम 6:06 बजे होगी और समापन 27 अप्रैल को शाम 6:15 बजे होगा। ऐसे में Mohini Ekadashi का व्रत 27 अप्रैल को किया जाएगा।
मोहिनी एकादशी शुक्ल पक्ष की एकादशी है और यह बेहद शुभ मानी जाती है। इस एकादशी व्रत से समस्त पापों का नाश होता है और भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
मोहिनी नाम भगवान विष्णु के मोहिनी अवतार से जुड़ा है। इस दिन व्रत रखने से भक्तों को मोक्ष की प्राप्ति होती है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है।
मोहिनी एकादशी का पारण समय
मोहिनी एकादशी व्रत का पारण 28 अप्रैल को सुबह 5:43 बजे से 8:21 बजे तक रहेगा। इसी समय अवधि में व्रत खोलना चाहिए। यह समय द्वादशी तिथि के अनुसार निर्धारित किया गया है।
Mohini Ekadashi का पारण भी वरुथिनी एकादशी की तरह ही विधिपूर्वक करना चाहिए। पहले तुलसी जल या तुलसी का पत्ता ग्रहण करें, फिर फलाहार या सात्विक भोजन करें।
पारण के समय का ध्यान रखना अत्यंत आवश्यक है। सही समय पर पारण करने से व्रत का पूर्ण फल मिलता है और भगवान विष्णु प्रसन्न होते हैं।
एकादशी व्रत के नियम और सावधानियां
Ekadashi in April व्रत के दौरान कुछ खास बातों का ध्यान जरूर देना चाहिए। इन नियमों का पालन करने से व्रत का पूर्ण फल मिलता है और जीवन में सुख-शांति बनी रहती है।
एकादशी व्रत के दिन सात्विक भोजन का सेवन करना चाहिए। अनाज, चावल, दाल और मांसाहार का सेवन बिल्कुल वर्जित है। फलाहार, दूध, दही, फल और सब्जियां ली जा सकती हैं।
किसी से भी इस दिन वाद-विवाद बिल्कुल ना करें। क्रोध, लोभ, मोह और अहंकार से दूर रहें। मन को शांत रखें और भगवान के भजन-कीर्तन में लगे रहें।
एकादशी व्रत में क्या न करें?
इसके साथ ही काले रंग के कपड़े बिल्कुल ना पहनें। एकादशी के दिन सफेद, पीले या हल्के रंग के कपड़े पहनना शुभ माना जाता है। काला रंग अशुभ माना जाता है।
घर और मंदिर में साफ-सफाई का ध्यान जरूर रखें। एकादशी के दिन घर को स्वच्छ रखना और पूजा स्थल को साफ करना बहुत महत्वपूर्ण है।
व्रत का पारण द्वादशी तिथि पर ही करें। एकादशी तिथि में पारण करना वर्जित है। अगले दिन द्वादशी तिथि के निर्धारित समय में ही व्रत खोलना चाहिए।
एकादशी व्रत में दान का महत्व
अन्न, धन समेत आदि चीजों का दान करना चाहिए। एकादशी के दिन दान-पुण्य करना बेहद फलदायी माना जाता है। गरीबों को अन्न, वस्त्र, जूते-चप्पल या धन दान करने से विशेष पुण्य मिलता है।
ब्राह्मणों को भोजन कराना और दक्षिणा देना भी शुभ माना जाता है। मंदिर में दान-दक्षिणा करना और गरीबों की मदद करना एकादशी व्रत का अहम हिस्सा है।
जल, फल, छाता, पंखा जैसी चीजें दान करने से भी विशेष पुण्य मिलता है। अपनी क्षमता के अनुसार दान करना चाहिए।
तुलसी की पूजा और महत्व
तुलसी की पूजा-अर्चना करनी चाहिए। Ekadashi in April व्रत में तुलसी का विशेष महत्व है। तुलसी को भगवान विष्णु की प्रिय मानी जाती है और उनकी पूजा के बिना व्रत अधूरा माना जाता है।
व्रत के दिन तुलसी के पौधे को जल चढ़ाना चाहिए और दीप जलाना चाहिए। तुलसी की परिक्रमा करनी चाहिए और उनका आशीर्वाद लेना चाहिए।
भोग में तुलसी के पत्ते जरूर शामिल करें। भगवान को भोग लगाते समय तुलसी के पत्ते अवश्य रखें। बिना तुलसी के भोग अधूरा माना जाता है।
एकादशी व्रत कथा का पाठ करें
व्रत कथा का पाठ करें। हर एकादशी की अपनी व्रत कथा होती है। Varuthini Ekadashi और Mohini Ekadashi की अलग-अलग कथाएं हैं जो धार्मिक ग्रंथों में वर्णित हैं।
व्रत कथा सुनने या पढ़ने से व्रत का पूर्ण फल मिलता है। कथा में बताए गए नियमों और महत्व को समझना चाहिए और उनका पालन करना चाहिए।
परिवार के सभी सदस्यों को साथ बैठकर व्रत कथा सुननी चाहिए। इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा आती है और भगवान की कृपा बनी रहती है।
एकादशी व्रत का धार्मिक महत्व
धार्मिक मान्यता के अनुसार विधिपूर्वक एकादशी व्रत करने से साधक को सभी पापों से मुक्ति मिलती है और भगवान विष्णु की कृपा बनी रहती है। यह व्रत मोक्ष प्राप्ति का मार्ग है।
हिंदू धर्म में एकादशी व्रत को सबसे महत्वपूर्ण व्रतों में गिना जाता है। यह व्रत आत्मशुद्धि, पाप मुक्ति और भगवान के निकट जाने का माध्यम है।
नियमित रूप से एकादशी व्रत करने वाले भक्तों को जीवन में सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य और शांति की प्राप्ति होती है। यह व्रत भौतिक और आध्यात्मिक दोनों तरह की सिद्धि देता है।
एकादशी व्रत के स्वास्थ्य लाभ
एकादशी व्रत केवल धार्मिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि स्वास्थ्य की दृष्टि से भी लाभकारी है। महीने में दो बार उपवास रखने से शरीर की सफाई होती है और पाचन तंत्र मजबूत होता है।
व्रत के दिन सात्विक भोजन करने से मन और शरीर दोनों स्वस्थ रहते हैं। अनाज से परहेज करने से शरीर के विषाक्त पदार्थ बाहर निकलते हैं।
नियमित एकादशी व्रत रखने वाले लोगों में तनाव कम होता है और मानसिक शांति बनी रहती है। यह व्रत समग्र स्वास्थ्य के लिए बेहद फायदेमंद है।
जानें पूरा मामला
एकादशी व्रत हिंदू धर्म का एक अत्यंत महत्वपूर्ण व्रत है जो भगवान विष्णु को समर्पित है। प्रत्येक माह में दो एकादशी होती हैं – कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष की। अप्रैल 2025 में वैशाख माह की दो एकादशी आ रही हैं। पहली वरुथिनी एकादशी 13 अप्रैल को और दूसरी मोहिनी एकादशी 27 अप्रैल को है। इन दोनों व्रतों का अपना विशेष महत्व है। व्रत के दौरान सात्विक जीवन, तुलसी पूजा, दान-पुण्य और व्रत कथा का पाठ करना चाहिए। पारण का सही समय बहुत महत्वपूर्ण है – वरुथिनी के लिए 14 अप्रैल सुबह 6:54 से 8:31 और मोहिनी के लिए 28 अप्रैल सुबह 5:43 से 8:21। नियमों का पालन करने से व्रत का पूर्ण फल मिलता है और भगवान विष्णु की कृपा बनी रहती है।
मुख्य बातें (Key Points)
• Ekadashi in April: अप्रैल में दो एकादशी – वरुथिनी एकादशी 13 अप्रैल (वैशाख कृष्ण पक्ष) और मोहिनी एकादशी 27 अप्रैल (वैशाख शुक्ल पक्ष)
• वरुथिनी तिथि 13 अप्रैल रात 1:16 से 14 अप्रैल रात 1:08, पारण 14 अप्रैल सुबह 6:54 से 8:31; मोहिनी तिथि 26 अप्रैल शाम 6:06 से 27 अप्रैल शाम 6:15, पारण 28 अप्रैल सुबह 5:43 से 8:21
• व्रत नियम: सात्विक भोजन, वाद-विवाद न करें, काले कपड़े न पहनें, साफ-सफाई रखें, द्वादशी पर पारण, दान-पुण्य करें
• तुलसी पूजा अनिवार्य, व्रत कथा पाठ करें, भोग में तुलसी पत्ते शामिल करें, भगवान विष्णु की कृपा से पाप मुक्ति और सुख-शांति













