Varuthini Ekadashi Date: वैशाख महीने के कृष्ण पक्ष की वरुथिनी एकादशी 13 अप्रैल को मनाई जाएगी। भगवान विष्णु को समर्पित इस व्रत पर श्रद्धालु प्रातः स्नान-ध्यान के बाद लक्ष्मी नारायण की पूजा करेंगे और मनचाही मुराद के लिए उपवास रखेंगे। वैदिक पंचांग के अनुसार एकादशी तिथि 13 अप्रैल को देर रात 1:16 बजे शुरू होगी और 14 अप्रैल को देर रात 1:08 बजे समाप्त होगी। व्रत का पारण 14 अप्रैल सुबह 6:54 बजे से 8:31 बजे तक किया जाएगा।
धार्मिक मत के अनुसार, वरुथिनी एकादशी का व्रत करने से साधक के सुख और सौभाग्य में वृद्धि होती है। इसके साथ जीवन में व्याप्त संकटों से मुक्ति मिलने की मान्यता भी जुड़ी है। यही वजह है कि Varuthini Ekadashi date, पारण समय और शुभ योग की जानकारी श्रद्धालुओं के लिए खास मानी जा रही है।
वरुथिनी एकादशी की सही तिथि क्या है
वैदिक पंचांग के अनुसार वैशाख महीने के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि 13 अप्रैल को देर रात 1:16 बजे शुरू होगी। इसका समापन 14 अप्रैल को देर रात 1:08 बजे होगा। इसी आधार पर 13 अप्रैल को वरुथिनी एकादशी मनाई जाएगी।
यह पर्व भगवान विष्णु को समर्पित माना जाता है। इस दिन भक्त प्रातः काल में स्नान-ध्यान कर भक्ति भाव से लक्ष्मी नारायण की पूजा करते हैं और मनचाही मुराद के लिए व्रत रखते हैं।
पारण का समय नोट कर लें
वरुथिनी एकादशी का पारण 14 अप्रैल को किया जाएगा। पारण का समय सुबह 6:54 बजे से सुबह 8:31 बजे तक है। इस दौरान साधक स्नान-ध्यान कर विधिवत लक्ष्मी नारायण की पूजा करें। इसके बाद अन्न का दान कर व्रत खोलें।
व्रत रखने वाले लोगों के लिए यह समय सबसे अहम है। सुबह का पारण समय सीमित है, इसलिए पूजा और व्रत खोलने की तैयारी पहले से रखना जरूरी रहेगा।
शुभ योग और नक्षत्र इस बार क्यों खास हैं
ज्योतिषियों के अनुसार वरुथिनी एकादशी पर शुभ और शुक्ल योग का संयोग बन रहा है। इसके साथ ही शिववास योग भी है। इस दौरान देवों के देव महादेव कैलाश पर विराजमान रहेंगे।
एकादशी के दिन शतभिषा और घनिष्ठा नक्षत्र का भी संयोग है। इन योगों में भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा करने से साधक के सुख और सौभाग्य में अपार वृद्धि होने की मान्यता है। यही कारण है कि इस बार यह तिथि केवल व्रत तक सीमित नहीं, बल्कि योगों की वजह से भी विशेष मानी जा रही है।
भक्तों के लिए इसका सीधा मतलब क्या है
इस बार वरुथिनी एकादशी पर तिथि, पारण समय और कई शुभ संयोग एक साथ बन रहे हैं। ऐसे में श्रद्धालुओं के लिए 13 अप्रैल का व्रत और 14 अप्रैल की सुबह का पारण समय पहले से नोट करना जरूरी है।
जो लोग विधिवत पूजा करना चाहते हैं, उनके लिए सुबह स्नान-ध्यान, लक्ष्मी नारायण की पूजा और उसके बाद अन्न दान के साथ व्रत खोलने का क्रम महत्वपूर्ण रहेगा। समय की सही जानकारी होने से व्रत का विधान बिना जल्दबाजी के पूरा किया जा सकेगा।
व्रत से क्या फल माना गया है
धार्मिक मत है कि वरुथिनी एकादशी का व्रत करने से साधक के सुख और सौभाग्य में वृद्धि होती है। साथ ही जीवन में फैले संकटों से मुक्ति मिलने की मान्यता भी है।
इसी के साथ यह भी माना जाता है कि इस व्रत को श्रद्धा और नियम से करने वाले साधक को मृत्यु के बाद उच्च लोक में स्थान मिलता है। इसलिए यह एकादशी आस्था और फल की दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जाती है।
जानें पूरा मामला
हर साल वैशाख महीने के कृष्ण पक्ष की दशमी तिथि के अगले दिन वरुथिनी एकादशी मनाई जाती है। यह पर्व भगवान विष्णु को समर्पित होता है। इस अवसर पर भक्त प्रातः काल में स्नान-ध्यान कर लक्ष्मी नारायण की पूजा करते हैं और मनचाही मुराद पाने के लिए व्रत रखते हैं। इस बार एकादशी 13 अप्रैल को रहेगी, जबकि पारण 14 अप्रैल सुबह 6:54 बजे से 8:31 बजे के बीच किया जाएगा।
मुख्य बातें (Key Points)
- वरुथिनी एकादशी 13 अप्रैल को मनाई जाएगी।
- एकादशी तिथि 13 अप्रैल देर रात 1:16 बजे शुरू होकर 14 अप्रैल देर रात 1:08 बजे समाप्त होगी।
- व्रत का पारण 14 अप्रैल सुबह 6:54 बजे से 8:31 बजे तक होगा।
- इस दिन शुभ, शुक्ल और शिववास योग के साथ शतभिषा और घनिष्ठा नक्षत्र का संयोग है।













