Bhagwant Mann CBI Probe का मुद्दा पंजाब की राजनीति में एक बार फिर तूफान खड़ा कर रहा है। पंजाब के पूर्व उपमुख्यमंत्री और कांग्रेस सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा ने मंगलवार 24 मार्च को चंडीगढ़ में मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान पर तीखा हमला बोलते हुए उन्हें “अहंकारी” करार दिया। रंधावा ने सवाल उठाया कि अगर पंजाब सरकार के पास छिपाने के लिए कुछ नहीं है, तो केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से स्वतंत्र जांच कराने से डर क्यों है? उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने न्याय और पारदर्शिता के जो वादे किए थे, जमीनी हकीकत में उनका कहीं नामोनिशान नहीं है।
“छिपाने को कुछ नहीं तो CBI से जांच में डर क्यों”: रंधावा का सीधा सवाल
Bhagwant Mann CBI Probe को लेकर सुखजिंदर सिंह रंधावा ने आम आदमी पार्टी (AAP) की सरकार पर बेहद तीखी टिप्पणी की है। उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार केंद्रीय जांच एजेंसियों को शामिल करने में अनिच्छा दिखा रही है, जो अपने आप में एक बड़ा सवाल खड़ा करता है। एक लोकतांत्रिक सरकार जो पारदर्शिता का दावा करती हो, वह स्वतंत्र जांच से क्यों भागेगी?
रंधावा का तर्क साफ है: विवादित मामलों में CBI जांच से निष्पक्षता सुनिश्चित होगी और जनता का भरोसा बहाल होगा। जब राज्य की पुलिस और प्रशासन दोनों सरकार के अधीन हों, तो जांच की विश्वसनीयता पर सवाल उठना स्वाभाविक है। उन्होंने कहा कि “पारदर्शिता लोकतंत्र की आधारशिला है और स्वतंत्र जांच से बचना केवल संदेह को और गहरा करता है।”
डॉ. विजय सिंगला और विधायक रमन अरोड़ा के मामले: कार्रवाई ठप
Bhagwant Mann CBI Probe की माँग करते हुए रंधावा ने दो अहम मामलों का हवाला दिया जिनमें सरकार की जवाबदेही पूरी तरह नदारद दिख रही है। पहला मामला पूर्व कैबिनेट मंत्री डॉ. विजय सिंगला का है और दूसरा जालंधर के विधायक रमन अरोड़ा का।
रंधावा ने बताया कि इन दोनों मामलों में पुलिस और प्रशासन सरकार का ही था, लेकिन आज तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी। दोनों मामलों में जांच ठप पड़ी हुई है। पंजाब के लोग अभी भी इन मामलों में न्याय का इंतजार कर रहे हैं। सरकार ने सत्ता में आते ही जवाबदेही और भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कार्रवाई का वादा किया था, लेकिन जमीनी हकीकत पूरी तरह अलग कहानी बयान कर रही है।
यह सवाल वाकई गंभीर है कि जब AAP सरकार ने खुद अपने ही मंत्री डॉ. विजय सिंगला को भ्रष्टाचार के आरोप में बर्खास्त किया था और इसे “ईमानदार सरकार” का प्रमाण बताया था, तो उस मामले में आगे की कार्रवाई क्यों थम गई? अगर सरकार अपनी ही कार्रवाई पर आगे नहीं बढ़ सकती, तो जनता को न्याय कैसे मिलेगा?
“न्याय होना ही नहीं, दिखना भी चाहिए”: रंधावा की मान सरकार से अपील
Bhagwant Mann CBI Probe की माँग को और मजबूत करते हुए रंधावा ने कहा कि राज्य के कई संवेदनशील मामले अभी भी या तो लंबित हैं या फिर जनता की नजर में उनकी विश्वसनीयता ही नहीं बची है। सरकार की जवाबदेही और जमीनी हकीकत में बहुत बड़ा अंतर है। उन्होंने जांच में विलंबित और चयनात्मक न्याय (Selective Justice) को लेकर गहरी चिंता जताई।
रंधावा ने मान सरकार से राजनीति से ऊपर उठकर निष्पक्ष जांच की अनुमति देने का आग्रह किया। उन्होंने एक बेहद मार्मिक बात कही: “न्याय केवल होना ही नहीं चाहिए, बल्कि होता हुआ दिखना भी चाहिए।” यह वाक्य सीधे-सीधे मान सरकार की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लगाता है।
AAP-कांग्रेस तनातनी: शासन और कानून-व्यवस्था पर बढ़ रही राजनीतिक टक्कर
Bhagwant Mann CBI Probe की यह माँग ऐसे समय में आई है जब पंजाब में शासन और कानून-व्यवस्था के मुद्दों को लेकर विपक्षी कांग्रेस और सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी के बीच राजनीतिक तनातनी लगातार बढ़ रही है। एक तरफ AAP सरकार ‘गैंगस्टरां ते वार’ और ‘युद्ध नशेयां विरुद्ध’ जैसे अभियानों का हवाला देकर अपनी सख्त कार्रवाई का दावा कर रही है, दूसरी तरफ विपक्ष उन मामलों की ओर इशारा कर रहा है जहाँ सरकार ने वादे तो किए लेकिन अमल नहीं हुआ।
कांग्रेस सांसद रंधावा जो खुद पंजाब के पूर्व उपमुख्यमंत्री और अनुभवी राजनेता हैं, उनका यह हमला AAP सरकार के लिए असुविधाजनक इसलिए है क्योंकि AAP ने सत्ता में आने से पहले खुद CBI और स्वतंत्र जांच की वकालत की थी। अब जब विपक्ष वही माँग कर रहा है तो सरकार का इससे बचने का प्रयास उसकी अपनी विश्वसनीयता पर सवाल खड़ा करता है।
आम पंजाबी नागरिक के लिए यह मामला इसलिए मायने रखता है क्योंकि जब सत्तारूढ़ दल के अपने ही पूर्व मंत्री और विधायक के खिलाफ कार्रवाई ठप हो, तो आम आदमी को न्याय मिलने की उम्मीद कितनी बचती है? यह सवाल सिर्फ राजनीतिक नहीं, बल्कि पंजाब की जनता के लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़ा हुआ है।
मुख्य बातें (Key Points)
- Bhagwant Mann CBI Probe: कांग्रेस सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा ने CM भगवंत मान को “अहंकारी” बताते हुए CBI से जांच कराने की माँग की, कहा: “छिपाने को कुछ नहीं तो स्वतंत्र जांच से डर क्यों?”
- पूर्व कैबिनेट मंत्री डॉ. विजय सिंगला और जालंधर विधायक रमन अरोड़ा के मामलों में कार्रवाई ठप होने का उठाया मुद्दा, कहा: “सरकार ने जवाबदेही का वादा किया था, जमीनी हकीकत अलग है।”
- रंधावा ने कहा: “पारदर्शिता लोकतंत्र की आधारशिला है, न्याय होना ही नहीं, दिखना भी चाहिए।”
- AAP-कांग्रेस के बीच शासन, कानून-व्यवस्था और निष्पक्ष जांच को लेकर राजनीतिक तनातनी बढ़ रही है।








