Punjab Vigilance Bureau ने भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी सख्त मुहिम को और तेज करते हुए फरवरी 2026 के दौरान बड़ी कार्रवाई की है। चंडीगढ़ से 19 मार्च को मिली जानकारी के मुताबिक, पंजाब विजिलेंस ब्यूरो ने पिछले महीने 14 अलग-अलग ट्रैप ऑपरेशन के तहत 17 सरकारी अधिकारियों और 1 निजी व्यक्ति — कुल 18 लोगों को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार करने में सफलता हासिल की है।
यह आंकड़ा बताता है कि मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार ने भ्रष्टाचार के खिलाफ “जीरो टॉलरेंस” की जो नीति अपनाई है, वह सिर्फ कागजों पर नहीं बल्कि जमीन पर भी असर दिखा रही है।
एक महीने में 14 ट्रैप, 18 गिरफ्तारियां: ब्यूरो ने दिखाई ताकत
Punjab Vigilance Bureau के प्रवक्ता ने बताया कि फरवरी के दौरान ब्यूरो ने सरकारी कर्मचारियों और हर क्षेत्र में भ्रष्टाचार को जड़ से खत्म करने के लिए हर संभव प्रयास किया। 14 अलग-अलग ट्रैप मामलों में 17 सरकारी अधिकारी और 1 निजी व्यक्ति रिश्वत की रकम लेते हुए पकड़े गए।
ट्रैप ऑपरेशन यानी जाल बिछाकर रंगे हाथों पकड़ना — यह विजिलेंस ब्यूरो का सबसे कारगर हथियार है। जब कोई नागरिक किसी सरकारी कर्मचारी की रिश्वत मांगने की शिकायत करता है, तो ब्यूरो पहले से निशानदेही किए गए नोटों के साथ शिकायतकर्ता को भेजता है। जैसे ही रिश्वतखोर रकम लेता है, विजिलेंस टीम मौके पर पहुंचकर उसे गिरफ्तार कर लेती है। इस पूरी प्रक्रिया में सबूत इतने पुख्ता होते हैं कि अदालत में दोषसिद्धि की संभावना बढ़ जाती है।
26 मामलों में चालान पेश, 3 नई विजिलेंस जांचें दर्ज
Punjab Vigilance Bureau ने फरवरी के दौरान सिर्फ गिरफ्तारियां ही नहीं कीं, बल्कि पुराने मामलों में भी तेजी दिखाई। ब्यूरो ने विभिन्न सक्षम अदालतों में 26 विजिलेंस मामलों से संबंधित चालान पेश किए। इसका मतलब है कि पहले से दर्ज मामलों में आरोप पत्र तैयार करके अदालतों में मुकदमे की कार्यवाही शुरू कराई गई।
इसके अलावा भ्रष्टाचार के मामलों की गहन जांच के लिए 3 नई विजिलेंस जांचें भी दर्ज की गई हैं। ये जांचें उन मामलों से जुड़ी हैं जहां भ्रष्टाचार की शिकायतों की प्रारंभिक पड़ताल में गड़बड़ी के संकेत मिले। साथ ही 35 आरोपियों के खिलाफ 9 आपराधिक मामले भी दर्ज किए गए, जिनमें 11 सरकारी कर्मचारी शामिल हैं। जब रिश्वत के अलावा अन्य आपराधिक कृत्य — जैसे सरकारी धन का गबन, फर्जी बिल, या सरकारी संपत्ति का दुरुपयोग — सामने आता है, तो ऐसे मामले आपराधिक मुकदमे के रूप में दर्ज होते हैं।
4 दोषियों को मिली साढ़े तीन से चार साल की सजा
सबसे अहम बात यह है कि Punjab Vigilance Bureau के प्रयासों का नतीजा अदालतों में भी दिख रहा है। फरवरी के दौरान विभिन्न सक्षम अदालतों ने ब्यूरो द्वारा दायर और लड़े गए रिश्वतखोरी के 4 मामलों में फैसला सुनाया। चारों आरोपियों को दोषी करार दिया गया और उन्हें साढ़े तीन साल से लेकर चार साल तक की कैद की सजा सुनाई गई। इसके साथ ही 10,000 रुपये से लेकर 50,000 रुपये तक का जुर्माना भी लगाया गया।
यह दोषसिद्धि का आंकड़ा बेहद महत्वपूर्ण है। भारत में भ्रष्टाचार के मामलों में अक्सर गिरफ्तारी तो होती है लेकिन सजा तक पहुंचना बहुत मुश्किल होता है। जब अदालत सजा सुनाती है, तो यह उन तमाम रिश्वतखोरों के लिए चेतावनी बन जाती है जो सोचते हैं कि पकड़े जाने के बाद भी वे बच निकलेंगे।
आम आदमी पर इस कार्रवाई का क्या असर
जब कोई पटवारी जमीन की रजिस्ट्री के लिए रिश्वत मांगता है, कोई क्लर्क पेंशन फाइल आगे बढ़ाने के बदले पैसे लेता है, या कोई पुलिस अधिकारी FIR दर्ज करने के लिए रकम वसूलता है — तो सबसे ज्यादा नुकसान उस आम आदमी को होता है जो अपने जायज काम के लिए दफ्तरों के चक्कर काट रहा है। Punjab Vigilance Bureau की यह कार्रवाई ठीक ऐसे ही रिश्वतखोरों के खिलाफ है।
फरवरी में हुई 18 गिरफ्तारियां और 4 दोषसिद्धियां पंजाब के हर सरकारी दफ्तर में एक स्पष्ट संदेश भेजती हैं कि अब रिश्वत मांगने की कीमत सालों की जेल हो सकती है। आम नागरिकों को भी यह हिम्मत मिलती है कि अगर कोई अधिकारी रिश्वत मांगे, तो वे बेझिझक विजिलेंस ब्यूरो को शिकायत कर सकते हैं।
2025 में भी ब्यूरो ने दिखाई थी धमक
Punjab Vigilance Bureau की यह कार्रवाई कोई एकबारगी अभियान नहीं है, बल्कि यह एक निरंतर चलने वाली मुहिम है। पिछले साल 2025 में विजिलेंस ब्यूरो ने पूरे वर्ष में 127 ट्रैप मामलों में 187 लोगों को रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया था। इनमें 18 राजपत्रित अधिकारी (गजेटेड ऑफिसर), 126 गैर-राजपत्रित कर्मचारी और 43 निजी व्यक्ति शामिल थे।
अगर फरवरी 2026 की रफ्तार बनी रही, तो इस साल यह आंकड़ा और भी ऊपर जा सकता है। जनवरी 2026 में भी भूमि रिकॉर्ड विभाग के कर्मचारी को 4,000 रुपये की रिश्वत पर पकड़ा गया था। फरवरी में पंजाब वक्फ बोर्ड के रेंट कलेक्टर और चपरासी को 18,000 रुपये लेते, एक सरपंच को 50,000 रुपये मांगते गिरफ्तार किया गया। मार्च में भी यह सिलसिला जारी है — जालंधर में एक ASI 8,000 रुपये और बरनाला में SSP ऑफिस के वरिष्ठ सहायक को 10,000 रुपये की रिश्वत पर पकड़ा गया।
भ्रष्टाचार के खिलाफ पंजाब का संदेश साफ है
पंजाब सरकार का संदेश बिल्कुल साफ है — चाहे छोटा क्लर्क हो या बड़ा अधिकारी, रिश्वत लेने वाला बख्शा नहीं जाएगा। Punjab Vigilance Bureau ने ट्रैप ऑपरेशन से लेकर अदालत में दोषसिद्धि तक का पूरा चक्र मजबूत किया है। जब गिरफ्तारी भी हो और सजा भी मिले, तभी भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई का असली मतलब बनता है।
फरवरी के ये आंकड़े — 14 ट्रैप, 18 गिरफ्तारियां, 26 चालान, 9 FIR, 3 जांचें और 4 दोषसिद्धियां — मिलकर एक ऐसी तस्वीर पेश करते हैं जो बताती है कि विजिलेंस ब्यूरो सिर्फ पकड़ने तक सीमित नहीं है, बल्कि सजा दिलवाने तक लड़ता है।
जानें पूरा मामला
पंजाब विजिलेंस ब्यूरो राज्य की प्रमुख भ्रष्टाचार निरोधक एजेंसी है जो भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत काम करती है। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान की सरकार ने सत्ता में आने के बाद से विजिलेंस ब्यूरो को और अधिक सक्रिय और स्वतंत्र बनाया है। ब्यूरो ट्रैप ऑपरेशन (रंगे हाथों पकड़ना), विजिलेंस जांच (गहन पड़ताल), और आपराधिक मामले (FIR) — तीन स्तरों पर भ्रष्टाचार से लड़ती है। फरवरी 2026 में ब्यूरो ने 14 ट्रैप मामलों में 18 लोगों को पकड़ा, 26 चालान पेश किए, 3 नई जांचें शुरू कीं, 35 आरोपियों पर 9 FIR दर्ज कीं और 4 पुराने मामलों में दोषसिद्धि कराई। 2025 में ब्यूरो ने साल भर में 127 ट्रैप में 187 लोगों को पकड़ा था। नागरिक रिश्वत की शिकायत विजिलेंस ब्यूरो की हेल्पलाइन या नजदीकी विजिलेंस ऑफिस में कर सकते हैं।
मुख्य बातें (Key Points)
- Punjab Vigilance Bureau ने फरवरी 2026 में 14 ट्रैप ऑपरेशन में 17 सरकारी अधिकारियों और 1 निजी व्यक्ति को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया।
- 26 विजिलेंस मामलों में चालान पेश, 3 नई विजिलेंस जांचें दर्ज, 35 आरोपियों पर 9 आपराधिक मामले दर्ज किए गए।
- 4 रिश्वतखोरी मामलों में अदालतों ने दोषसिद्धि करते हुए साढ़े तीन से चार साल की कैद और 10,000 से 50,000 रुपये तक जुर्माना लगाया।
- 2025 में ब्यूरो ने 127 ट्रैप में 187 लोगों को पकड़ा था, 2026 में भी मुहिम पूरी ताकत से जारी है।








