India LPG Crisis ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया है। पंजाब के बरनाला जिले में 13 मार्च 2026 को 66 वर्षीय भूषण कुमार मित्तल सुबह से सिर्फ एक गैस सिलेंडर लेने के लिए लाइन में खड़े थे। लाइन इतनी लंबी थी कि उसका छोर दिखाई नहीं दे रहा था। घंटों धूप में खड़े रहने के बाद उन्हें कार्डियक अरेस्ट आया और उनकी मौके पर ही मौत हो गई। सिर्फ एक सिलेंडर के लिए एक बुजुर्ग ने अपनी जान गंवा दी। यह घटना भारत में गहराते LPG संकट की सबसे दर्दनाक तस्वीर है।
सोशल मीडिया पर कॉपी-पेस्ट ट्वीट्स का खेल
भूषण कुमार की मौत वाले दिन ही इंस्टाग्राम और X (Twitter) पर हजारों लोगों ने एक ही तरह के मैसेज पोस्ट करने शुरू कर दिए। सबका दावा था कि “मेरा सिलेंडर सुबह 11:45 बजे बुक हुआ और दोपहर 1:30 बजे डिलीवर हो गया।” सबका समय एक, डिलीवरी एक, और स्क्रिप्ट भी बिल्कुल एक जैसी। यह सब कॉपी-पेस्ट था। जब जमीनी हकीकत में लोग लाइनों में मर रहे थे, तब सोशल मीडिया पर एक संगठित अभियान चलाकर यह दिखाने की कोशिश की गई कि कोई किल्लत ही नहीं है।
India LPG Crisis की असली जड़: Strait of Hormuz
भारत में हर साल करीब 3.1 करोड़ मीट्रिक टन LPG की खपत होती है। इसमें से 60 फीसदी गैस विदेशों से आयात होती है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस 60 फीसदी आयात का 90 प्रतिशत हिस्सा सिर्फ एक ही रास्ते से आता है: Strait of Hormuz, जो ईरान और ओमान के बीच स्थित है।
यह संकट तब शुरू हुआ जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ युद्ध छेड़ा। जवाब में ईरान ने Strait of Hormuz को बंद कर दिया। इसके साथ ही भारत की आधी से ज्यादा LPG सप्लाई एक झटके में रुक गई। लॉकडाउन और कोरोना महामारी के बाद यह तीसरा मौका है जब देश की जनता को लाइनों में खड़ा होना पड़ रहा है।
देशभर में गैस सिलेंडर के लिए लंबी लाइनें और अफरातफरी
India LPG Crisis का असर पूरे देश में दिखाई दे रहा है। गोरखपुर, पुणे, नोएडा और दिल्ली से ऐसे कई वीडियो सामने आए हैं जिनमें सैकड़ों लोग सिर्फ एक सिलेंडर के लिए घंटों लाइन में खड़े दिख रहे हैं। लखनऊ का एक वीडियो वायरल हुआ जिसमें एक व्यक्ति हताशा में LPG सिलेंडर से भरे ट्रक के आगे लेट गया।
मध्य प्रदेश और गुरुग्राम में ऑनलाइन बुकिंग सिस्टम क्रैश हो गए। व्हाट्सएप पर बुकिंग फेल हो रही हैं। इसकी वजह से लोग फिजिकल गैस एजेंसियों पर पहुंच रहे हैं और लाइनें और लंबी हो रही हैं।
इन लाइनों में खड़े लोग दम तोड़ रहे हैं। उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद में 75 वर्षीय मुख्तार अंसारी लाइन में खड़े-खड़े गिर पड़े और अस्पताल पहुंचने से पहले ही उनकी मौत हो गई। सिर्फ एक सिलेंडर के लिए।
होटल-रेस्टोरेंट बंद, Swiggy-Zomato पर ऑर्डर आधे
India LPG Crisis ने खाद्य उद्योग की कमर तोड़ दी है। बेंगलुरु और मुंबई जैसे शहरों में 20 से 30 प्रतिशत रेस्टोरेंट बंद हो चुके हैं। Swiggy और Zomato जैसे फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म्स पर ऑर्डर 50 से 60 प्रतिशत तक गिर गए हैं। जो रेस्टोरेंट चल भी रहे हैं, वे सीमित मेनू पर काम कर रहे हैं। लाखों लोगों की रोजी-रोटी सीधे तौर पर प्रभावित हो रही है।
काला बाजार में सिलेंडर 6 गुना महंगा
लोगों में इतनी दहशत है कि वे ब्लैक मार्केट से सिलेंडर खरीदने पर मजबूर हो रहे हैं। घरेलू सिलेंडर जिसकी आधिकारिक कीमत करीब 900 रुपये है, वह दिल्ली के काला बाजार में 2,000 से 3,000 रुपये में बिक रहा है। कमर्शियल सिलेंडर 3,000 से 5,000 रुपये तक पहुंच गया है। बेंगलुरु में तो यह 6,000 रुपये तक बिक रहा है, यानी असली कीमत से 6 गुना ज्यादा।
हालात इतने बिगड़ गए हैं कि महाराष्ट्र में गैस सिलेंडर ले जाने वाले वाहनों को पुलिस सुरक्षा दी जा रही है। पश्चिमी देहरादून में लोगों ने एक ट्रक रोककर सिलेंडर लूटने शुरू कर दिए। उत्तर प्रदेश में लोगों ने एक गैस एजेंसी में घुसकर 76 से ज्यादा सिलेंडर चुरा लिए।
सरकार का दावा: कोई कमी नहीं, जनता का अनुभव: कुछ और ही
विपक्ष ने दावा किया कि संसद की कैंटीन में चाय तक नहीं मिल रही थी। चाय या कॉफी मांगो तो जवाब मिलता है कि नहीं है। लेकिन सरकार की तरफ से संसद में कहा गया कि LPG की कोई कमी नहीं है।
12 मार्च को पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने लोकसभा में कहा कि घरेलू LPG सप्लाई पूरी तरह सुरक्षित है, कोई कमी नहीं है, और जो हो रहा है वह पैनिक बाइंग और जमाखोरी की वजह से है। उन्होंने कहा, “Domestic supply is fully protected and the delivery cycle is unchanged.”
खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि जो लोग कमी से डर रहे हैं, वे देश का बड़ा नुकसान कर रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि कुछ लोग जानबूझकर दहशत फैला रहे हैं।
सरकार के कदम खुद उनके दावों को झुठलाते हैं
अगर सच में कोई कमी नहीं है तो फिर सरकार ने 7 मार्च को घरेलू सिलेंडर की कीमत 60 रुपये और कमर्शियल सिलेंडर की कीमत 115 रुपये क्यों बढ़ाई? 8 मार्च को LPG कंट्रोल ऑर्डर जारी करके रिफाइनरियों से उत्पादन अधिकतम करने को क्यों कहा गया? सरकार ने खुद बताया कि 5 दिनों में उत्पादन 28 प्रतिशत बढ़ाया गया और नए देशों से इमरजेंसी सप्लाई मंगाई गई।
9 मार्च को नेचुरल गैस कंट्रोल ऑर्डर जारी हुआ। कमर्शियल LPG सप्लाई पर 20 प्रतिशत की कैप लगा दी गई, यानी होटल और रेस्टोरेंट को उनकी मांग का सिर्फ 20 फीसदी ही मिलेगा। शहरों में सिलेंडर बुकिंग का अंतराल 25 दिन और गांवों में 45 दिन कर दिया गया। 14 मार्च को PNG कनेक्शन वाले लोगों की LPG बुकिंग पर रोक लगा दी गई।
राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड रेस्टोरेंट्स को एक महीने के परमिट दे रहे हैं ताकि वे बायोमास, केरोसिन और कोयला जला सकें। अगर कमी नहीं है तो यह सब क्यों?
India LPG Crisis के लिए असली जिम्मेदार कौन?
इस संकट की असली वजह सिर्फ ईरान युद्ध नहीं, बल्कि सरकार की दूरदर्शिता की कमी है। जियोपॉलिटिक्स पर नजर रखने वाले लोगों को जनवरी से ही समझ आ गया था कि अमेरिका और इजराइल ईरान पर हमला कर सकते हैं। अगर ईरान पर हमला होता तो वह Strait of Hormuz बंद कर देगा, यह अनुमान लगाने के लिए किसी ज्योतिषी की जरूरत नहीं थी।
वह समय था जब LPG सप्लाई बढ़ाने की कार्रवाई शुरू करनी चाहिए थी, दूसरे देशों से ऑर्डर देने चाहिए थे। लेकिन सरकार ने कुछ नहीं किया। युद्ध से पहले जब नरेंद्र मोदी इजराइल गए और बेंजामिन नेतन्याहू से मिले, तब भी उन्हें अंदाजा लग जाना चाहिए था कि हमला होने वाला है। लेकिन कोई कदम नहीं उठाया गया।
हमले के बाद भी ऐसे प्रयास हो सकते थे कि ईरान भारत को अपना दोस्त माने और भारतीय जहाजों को गुजरने दे, जैसे वह चीनी जहाजों को गुजरने दे रहा है। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। Strait of Hormuz बंद होने के बाद भी सरकार ने एक हफ्ते तक कोई कार्रवाई नहीं की। और जो पहला कदम उठाया, वह था जनता को गुमराह करना और यह झूठ बोलना कि कोई कमी नहीं है।
48 घंटे का LPG रिजर्व: देश की सबसे बड़ी कमजोरी
सबसे डरावनी बात यह है कि भारत के पास LPG का कोई स्ट्रैटेजिक रिजर्व ही नहीं है। मंगलुरु और विशाखापट्टनम में कुछ अंडरग्राउंड केव्स हैं, लेकिन वे स्टॉकपाइलिंग के लिए नहीं हैं, वे सिर्फ फ्लो बनाए रखने के लिए हैं। उनकी कुल क्षमता मात्र 1.4 लाख टन है, जो राष्ट्रीय खपत के 2 दिन से भी कम है।
कल्पना कीजिए, 140 करोड़ आबादी वाले देश में LPG का रिजर्व सिर्फ 48 घंटे का है। पूरी सप्लाई चेन में करीब 18 दिन का ऑपरेशनल LPG है, लेकिन उसके अलावा कुछ नहीं। यह ईंधन असली आयात के लिए इस्तेमाल होता है। जब सप्लाई बंद हो जाती है तो बफर लगभग शून्य रह जाता है।
उज्ज्वला योजना के तहत जैसे-जैसे देश में LPG कनेक्शन बढ़ रहे थे और मांग बढ़ रही थी, वैसे-वैसे सप्लाई इंफ्रास्ट्रक्चर भी तैयार होना चाहिए था। 33 करोड़ घरों की गैस सप्लाई 33 किलोमीटर चौड़ी Strait of Hormuz पर निर्भर नहीं होनी चाहिए थी। LPG आयात को विविध (diversify) किया जाना चाहिए था।
असम पुलिस की धमकी: कमी की बात करोगे तो कार्रवाई होगी
12 मार्च को असम पुलिस ने आधिकारिक तौर पर ट्वीट किया कि अगर कोई LPG की कमी की अफवाह फैलाएगा तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। सरकार की सोच है कि अगर लोगों को कमी के बारे में बोलने से रोक दिया जाए तो कमी अपने आप खत्म हो जाएगी। यह वही तर्क है जो कोविड के दौरान टेस्टिंग को लेकर था: टेस्टिंग बंद करो तो केस अपने आप कम हो जाएंगे।
India LPG Crisis कब खत्म होगा: चार संभावित परिदृश्य
आम आदमी के लिए सबसे जरूरी सवाल यह है कि अगला सिलेंडर कब मिलेगा? इसका जवाब चार परिदृश्यों पर निर्भर करता है।
परिदृश्य 1: जल्दी सीजफायर हो जाए। बातचीत चल रही है, लेकिन ईरान हर्जाने और भविष्य में हमला न करने की गारंटी मांग रहा है। ट्रंप भी कहते हैं कि युद्ध जल्दी खत्म होगा। लेकिन समस्या यह है कि ईरान के नए सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई, जिन्हें 9 मार्च को नियुक्त किया गया, अपने पिता से भी ज्यादा कट्टर बताए जाते हैं। उन्होंने कहा कि जब तक मध्य पूर्व से अमेरिकी सैन्य अड्डे नहीं हटते, हमले जारी रहेंगे।
परिदृश्य 2: वैकल्पिक सप्लाई काम करे। भारत ने अमेरिका, नॉर्वे, कनाडा और रूस से इमरजेंसी सप्लाई शुरू की है। दो जहाज, नंदा देवी और शिवालिक, 92,700 टन LPG लेकर आए हैं। यह अच्छी खबर लगती है, लेकिन भारत को सालाना 3 करोड़ मीट्रिक टन चाहिए। यह जहाज सिर्फ एक दिन की सप्लाई लाए हैं।
परिदृश्य 3: बिना सीजफायर के Strait of Hormuz खुले। ट्रंप कहते हैं कि जलडमरूमध्य खुलेगा। ईरान कहता है कि एक बूंद तेल भी नहीं गुजरेगा। ईरान ने माइंस (बारूदी सुरंगें) बिछा दी हैं। यह परिदृश्य भी जल्दी संभव नहीं दिखता।
परिदृश्य 4: युद्ध जारी रहे लेकिन भारत की सप्लाई किसी तरह आए। इस पर काफी चर्चा हो रही है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर के अनुसार, भारतीय ध्वज वाले जहाजों को ईरान में जाने देने का कोई ब्लैंकेट एग्रीमेंट नहीं है। हर जहाज की आवाजाही एक अलग मामला है और भारत को ईरान से एक-एक करके बातचीत करनी पड़ रही है।
एक यथार्थवादी अनुमान यह है कि यह संकट कम से कम 4 से 8 हफ्ते और चल सकता है।
आम लोग क्या कर सकते हैं: कुछ व्यावहारिक उपाय
पहला: इंडक्शन कुकर का इस्तेमाल करें। India LPG Crisis के चलते Amazon पर दो दिनों में इंडक्शन कुकर की बिक्री 30 गुना बढ़ गई है। एक अच्छा इंडक्शन स्टोव 2,000 से 3,000 रुपये में मिल जाता है। लेकिन याद रखें, इस पर सिर्फ फ्लैट-बॉटम बर्तन ही काम करते हैं और बिजली की निर्भरता बनी रहती है।
दूसरा: अगर आपके इलाके में PNG (Piped Natural Gas) उपलब्ध है तो उसका कनेक्शन ले लें। PNG पाइपलाइन से आती है, यह Strait of Hormuz पर निर्भर नहीं करती।
तीसरा: अगर कोई सिलेंडर काला बाजार में बेच रहा है तो शिकायत करें। यह आवश्यक वस्तु अधिनियम (Essential Commodities Act) के तहत अपराध है। राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन नंबर 1800-11-4000 पर या जिला मजिस्ट्रेट कार्यालय में शिकायत कर सकते हैं।
चौथा और सबसे जरूरी: पैनिक बाइंग मत करें। अगर जमाखोरी करेंगे तो किल्लत और बढ़ेगी। जरूरत से ज्यादा सिलेंडर जमा न करें।
गांवों की महिलाएं लौटीं चूल्हे पर: संकट का सबसे दर्दनाक पहलू
दुर्भाग्य की बात यह है कि ये सारे उपाय अस्थायी हैं, खासकर गांवों में रहने वाले लोगों के लिए। ग्रामीण भारत में बिजली अनियमित है, इसलिए इंडक्शन वहां काम नहीं करता। रिपोर्ट्स के अनुसार लोग फिर से पारंपरिक चूल्हों पर लौट गए हैं।
और यही इस India LPG Crisis का सबसे दर्दनाक पहलू है। वह महिला जिसने सालों की मेहनत के बाद धुएं भरी रसोई छोड़ी थी, जिसके घर में पहला गैस सिलेंडर आया था, जिसने सोचा था कि अब उसके बच्चों को धुआं नहीं सहना पड़ेगा, वह आज फिर से चूल्हे पर खाना पका रही है। इस संकट की सबसे बड़ी कीमत वही चुका रही है। और इसलिए नहीं कि गैस खत्म हो गई, बल्कि इसलिए कि देश को तैयार रखने की जिम्मेदारी जिनकी थी, वे सोए रहे। वही लोग जो 66 साल के भूषण कुमार को बचा सकते थे, जो धूप में सिर्फ एक सिलेंडर के लिए खड़े थे।
मुख्य बातें (Key Points)
- ईरान ने Strait of Hormuz बंद किया, जिससे भारत की 60% LPG सप्लाई ठप हो गई। पंजाब और UP में सिलेंडर की लाइन में खड़े दो बुजुर्गों की मौत हो चुकी है।
- भारत के पास LPG का स्ट्रैटेजिक रिजर्व सिर्फ 48 घंटे का है, जो 140 करोड़ की आबादी के लिए बेहद खतरनाक स्थिति है।
- काला बाजार में घरेलू सिलेंडर 3,000 और कमर्शियल 6,000 रुपये तक बिक रहा है। बेंगलुरु-मुंबई में 20-30% रेस्टोरेंट बंद हो चुके हैं।
- सरकार ने कमी से इनकार किया, लेकिन खुद ही LPG कंट्रोल ऑर्डर, बुकिंग अंतराल बढ़ाने और कमर्शियल सप्लाई पर 20% कैप जैसे कदम उठाए, जो उनके दावों के विपरीत हैं।
FAQ: अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न








