Iran Israel War: ईरान की लीडरशिप पर इजरायल के हमले रुकने का नाम नहीं ले रहे। 17 मार्च 2026 को ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव अली लारीजानी को इजरायली हवाई हमले में मार गिराया गया। लारीजानी के साथ उनके बेटे मुर्तजा लारीजानी और उनके दफ्तर के प्रमुख अलीरजा बायत समेत कई अंगरक्षक भी शहीद हुए। इसी हमले में IRGC की बासिज फोर्स के कमांडर गुलाम रजा सुलेमानी को भी मार दिया गया। और अब 18 मार्च को इजरायल ने दावा किया कि उसने ईरान के खुफिया मंत्री इस्माइल खातिब को भी मार गिराया है। ईरान की तरफ से खातिब की मौत की अभी तक कोई पुष्टि नहीं आई है, लेकिन अगर यह सच है तो 48 घंटों में ईरान के तीन टॉप लीडर मारे गए।
अली लारीजानी कौन थे: ईरान का सबसे अनुभवी चेहरा
अली लारीजानी सिर्फ एक पदाधिकारी नहीं थे, वे ईरान के पूरे पावर स्ट्रक्चर की रीढ़ थे। 28 फरवरी को सुप्रीम लीडर अली खामेनई की हत्या के बाद लारीजानी को ईरान का “डी फैक्टो लीडर” माना जा रहा था। उनका राजनीतिक करियर चार दशकों में फैला था: ईरानी संसद के स्पीकर, IRGC में सीनियर ऑफिसर, संस्कृति मंत्री, प्रोपेगेंडा प्रमुख, राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार और परमाणु वार्ताकार सब कुछ।
सबसे दिलचस्प बात उनकी अकादमिक पृष्ठभूमि थी। लारीजानी ने तेहरान यूनिवर्सिटी से 18वीं सदी के जर्मन दार्शनिक इमैनुअल कांट पर पीएचडी की थी। कांट पर उन्होंने तीन किताबें लिखीं, तेहरान यूनिवर्सिटी में लंबे अरसे तक पढ़ाया और गणित-विज्ञान पर कांट के दर्शन के विशेषज्ञ माने जाते थे। उनकी हत्या से चार दिन पहले इजरायल के अखबार हारेत्ज़ में आधे पन्ने की प्रोफाइल छपी, जिसमें उन्हें “ब्रिलियंट स्कॉलर एंड रूथलेस लीडर” बताया गया।
लारीजानी ईरान के लिए क्यों इतने अहम थे
लारीजानी की खास बात यह थी कि उन्होंने ईरान के पावर स्ट्रक्चर में ऊपर से लेकर नीचे तक हर किसी से संबंध बनाए। सेना, मजहबी नेता, सांसद, कट्टरपंथी और उदारवादी सबसे उनकी पहुंच थी। वे रूस और चीन से ईरान के रक्षा सौदों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते थे। अमेरिका के साथ परमाणु वार्ता में भी उनकी भूमिका मानी जाती थी। ओमान और कतर के माध्यम से जारी बैकचैनल बातचीत में भी लारीजानी शामिल थे।
जॉन्स हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर वली नासर ने कहा कि लारीजानी की जगह जो भी आएगा वह IRGC से होगा और ज्यादा कट्टर होगा, जो ईरान और पूरे क्षेत्र के लिए अच्छा नहीं। CNN ने सूत्रों के हवाले से लिखा कि पिछले साल सितंबर तक लारीजानी अमेरिका और इजरायल के लिए पसंदीदा बातचीत के व्यक्ति थे। पश्चिमी मीडिया में उनकी हत्या को लेकर अफसोस जताया जा रहा है कि अमेरिका ने एक अच्छा निगोशिएटर खो दिया।
लारीजानी ने अपनी नई किताब “Wisdom and Discussion in Governance” में ईरान की अपनी ही सरकार के ढांचे की आलोचना की थी। उन्होंने प्रशासनिक फैसले लॉजिकल आधार पर लिए जाने और सरकार में सुधार के लिए एक विशेष काउंसिल बनाने की वकालत की थी। यहां तक कि हिजाब अनिवार्यता को लेकर सख्ती कम कराने में भी लारीजानी की भूमिका मानी जाती है।
खामेनई से लारीजानी तक: ईरान की मारी गई लीडरशिप की सूची
जून 2025 से लेकर 18 मार्च 2026 तक इजरायल ने ईरान की लीडरशिप में भूचाल ला दिया है। सुप्रीम लीडर अली खामेनई (28 फरवरी), सेना प्रमुख मेजर जनरल मोहम्मद बागेरी, IRGC एयरोस्पेस कमांडर आमिर अली हाजीजादेह, खात अल अंबिया कमांडर अली शादमानी, IRGC चीफ कमांडर मेजर जनरल हुसैन सलामी, नेशनल डिफेंस काउंसिल प्रमुख अली शमखानी, रक्षा मंत्री अजीज नासिरजादेह, बासिज कमांडर गुलाम रजा सुलेमानी और अब अली लारीजानी और संभवत: इस्माइल खातिब तक। जून 2025 में ही इजरायल ने 11 न्यूक्लियर साइंटिस्ट और 20 से अधिक जनरल-ब्रिगेडियर स्तर के अधिकारियों को मारने का दावा किया था।
28 फरवरी के बाद ईरान ने जासूसी के आरोप में 300 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया, एक व्यक्ति को फांसी भी दी गई। लेकिन उसके बावजूद टॉप लीडर्स की हत्या का सिलसिला जारी है, जो बताता है कि ईरान के भीतर इजरायल का जासूसी नेटवर्क कितना गहरा है।
ईरान का जवाब: “एक जाएगा दूसरा आएगा” – लेकिन कब तक?
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराकची ने अलजज़ीरा को दिए इंटरव्यू में कहा कि ईरान का राजनीतिक ढांचा बेहद मजबूत है, किसी एक व्यक्ति के न रहने से ढांचा प्रभावित नहीं होता। नए सुप्रीम लीडर सैय्यद मुस्तफा हुसैनी खामेनई पब्लिक के सामने नहीं आ सके हैं और उन्होंने अपने एकमात्र लिखित संदेश में कहा कि “शहादत का बदला लिया जाएगा”।
लेकिन सवाल यह है कि ईरान कब तक हर हत्या के बाद यही कहता रहेगा कि “एक जाएगा दूसरा आएगा।” अभी तक ईरान खामेनई से लेकर लारीजानी तक किसी की शहादत का बदला नहीं ले पाया है। ईरान इजरायल की लीडरशिप तक पहुंच नहीं सका, जबकि इजरायल ने अपनी लीडरशिप को कोई नुकसान नहीं होने दिया। नेतन्याहू के घायल होने का ईरान ने दावा किया था, लेकिन वह गलत निकला।
बातचीत की हर कोशिश पर हमला: ब्रिटिश सुरक्षा सलाहकार ने खोला राज
इस युद्ध का सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि जब भी बातचीत आगे बढ़ी, तभी हमला हो गया। ब्रिटेन के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जोनाथन पॉवेल ने कन्फर्म किया कि ईरान के साथ न्यूक्लियर डील होने वाली थी। तेहरान ने इतना बड़ा ऑफर दिया था कि हमला टल सकता था। 2 मार्च को बातचीत का अगला दौर तय था, लेकिन 28 फरवरी को हमला कर दिया गया। गार्डियन अखबार ने लिखा कि ईरान का ऑफर “हैरान करने वाला” था, और यही वजह है कि ब्रिटेन अमेरिका के साथ इस युद्ध में शामिल नहीं हो रहा।
ओमान के विदेश मंत्री ने भी कहा कि बातचीत ट्रैक पर थी, फिर भी हमला हुआ। ट्रंप के दामाद जेरेड कुश्नर और मिडिल ईस्ट दूत स्टीव विटकॉफ पर आरोप लग रहे हैं कि इन्होंने इजरायल के इशारे पर काम किया और डील से पलट गए।
जोसेफ केंट का इस्तीफा: अमेरिका के भीतर से उठी आवाज
लारीजानी की हत्या वाले दिन ही अमेरिका के नेशनल काउंटर टेररिज्म सेंटर के डायरेक्टर जोसेफ केंट ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। केंट 11 बार जंग के मैदान में जा चुके हैं, कॉम्बैट के माहिर माने जाते हैं और उनकी पत्नी सीरिया में आत्मघाती हमले में शहीद हुई थीं।
केंट ने अपने इस्तीफे के पत्र में साफ-साफ लिखा: “मैं साफ मन से इस युद्ध का समर्थन नहीं कर सकता। ईरान इस समय अमेरिका के लिए किसी प्रकार का खतरा नहीं था। यह युद्ध इजरायल और उसकी शक्तिशाली अमेरिकी लॉबी के दबाव में शुरू किया गया।” उन्होंने आरोप लगाया कि इजरायली सीनियर अफसरों और अमेरिकी पत्रकारों ने गलत जानकारियां प्लांट कीं जिससे ट्रंप “अमेरिका फर्स्ट” नारे से पीछे हट गए। केंट ने ट्रंप से अपील भी की कि युद्ध से वापस मुड़ें।
ट्रंप ने जवाब दिया: “केंट एक नाइस गाय थे लेकिन सुरक्षा के मामले में कमजोर। मैं उन्हें ज्यादा नहीं जानता था।” डेमोक्रेट नेता बर्नी सैंडर्स ने कहा: “ज्यादातर बातों पर मैं केंट से सहमत नहीं, लेकिन उनकी यह बात सही है कि यह युद्ध इजरायल लॉबी के दबाव में शुरू हुआ।”
मुख्य बातें (Key Points)
- 48 घंटों में इजरायल ने ईरान के तीन टॉप लीडर मारने का दावा: अली लारीजानी, बासिज कमांडर गुलाम रजा सुलेमानी और खुफिया मंत्री इस्माइल खातिब।
- जून 2025 से मार्च 2026 तक ईरान के सुप्रीम लीडर, सेना प्रमुख, IRGC चीफ और 20+ जनरल स्तर अधिकारी मारे गए।
- अमेरिका के काउंटर टेररिज्म चीफ जोसेफ केंट ने इस्तीफा देते हुए कहा: “यह युद्ध इजरायल लॉबी के दबाव में शुरू हुआ, ईरान अमेरिका के लिए खतरा नहीं था।”
- ब्रिटेन ने कन्फर्म किया कि न्यूक्लियर डील होने वाली थी, ईरान का ऑफर “हैरान करने वाला” था, लेकिन हमले ने सब खत्म कर दिया।








