Punjab Martyr Soldiers Compensation को लेकर पंजाब सरकार ने अहम कदम उठाया है। पंजाब के रक्षा सेवाएं कल्याण, स्वतंत्रता सेनानी और बागवानी मंत्री मोहिंदर भगत ने आज चंडीगढ़ में 1962, 1965 और 1971 की जंगों में शहीद हुए सैनिकों के उन परिवारों को मुआवजा राशि जारी करने के लिए संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एक विशेष बैठक की, जो दशकों बाद भी इस सहायता से वंचित रह गए हैं। मंत्री भगत ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि पूर्व सैनिकों और शहीद सैनिकों के परिवारों से संबंधित सभी मामलों को प्राथमिकता के आधार पर निपटाया जाए ताकि पात्र परिवारों को जल्द से जल्द मुआवजा मिल सके।
दशकों पुरानी जंगों के शहीदों के परिवार आज भी वंचित
Punjab Martyr Soldiers Compensation का यह मुद्दा इसलिए बेहद संवेदनशील है क्योंकि यह उन सैनिकों के परिवारों से जुड़ा है जिन्होंने 60 से 64 साल पहले देश की रक्षा करते हुए अपने प्राण न्योछावर किए। 1962 में चीन के साथ, 1965 और 1971 में पाकिस्तान के साथ हुई जंगों में पंजाब के हजारों बहादुर सैनिकों ने शहादत दी।
बैठक के दौरान अधिकारियों ने मंत्री को बताया कि इन जंगों में शहीद हुए अधिकांश सैनिकों के परिवारों को पंजाब सरकार की ओर से पहले ही मुआवजा जमीन और नकद राशि के रूप में दिया जा चुका है। लेकिन कुछ परिवार अभी भी इस मुआवजे से वंचित हैं। शेष बचे मामलों और उनकी वर्तमान स्थिति के बारे में अधिकारियों ने मंत्री को विस्तृत जानकारी दी।
यह दुखद है कि जिन सैनिकों ने दुश्मन के सामने सीना तानकर देश की रक्षा की, उनके कुछ परिवारों को दशकों बाद भी उचित मुआवजा नहीं मिल पाया। कई मामलों में कागजी कार्रवाई, विभागीय लालफीताशाही और जमीनी रिकॉर्ड की समस्याओं के कारण मुआवजा अटका रहा। अब पंजाब सरकार ने इन लंबित मामलों को निपटाने की पहल की है।
मंत्री मोहिंदर भगत ने दिए सख्त निर्देश: प्राथमिकता पर निपटाएं हर मामला
Punjab Martyr Soldiers Compensation पर मंत्री मोहिंदर भगत ने अधिकारियों को स्पष्ट और सख्त निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि पूर्व सैनिकों और शहीद सैनिकों के परिवारों से संबंधित सभी मामलों को प्राथमिकता के आधार पर निपटाया जाए। किसी भी पात्र परिवार को और इंतजार नहीं कराया जाना चाहिए।
मंत्री ने कहा, “देश की रक्षा करते हुए अपनी जान न्योछावर करने वाले बहादुर सैनिकों के प्रति पंजाब सरकार पूर्ण सम्मान और श्रद्धा रखती है। पंजाब सरकार पूर्व सैनिकों और शहीद सैनिकों के परिवारों के कल्याण के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और उनकी हर संभव सहायता के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।”
मंत्री के इस बयान से साफ है कि सरकार इन लंबित मामलों को जल्द से जल्द सुलझाना चाहती है। जब मिडिल ईस्ट में युद्ध चल रहा है और दुनिया में सैनिकों के बलिदान की चर्चा हो रही है, तब पंजाब सरकार का अपने शहीदों के परिवारों को याद करना और उनके लंबित मुआवजे का मुद्दा उठाना सही समय पर सही कदम है।
बैठक में कौन-कौन अधिकारी रहे मौजूद
Punjab Martyr Soldiers Compensation पर हुई इस विशेष बैठक में कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे:
- अमरिंदर सिंह टिवाणा: रक्षा सेवाएं कल्याण विभाग के संयुक्त सचिव
- भूपिंदर सिंह ढिल्लों (सेवानिवृत्त): निदेशक, रक्षा सेवाएं कल्याण
- कमांडर बलजिंदर विर्क (सेवानिवृत्त): सेना के पूर्व अधिकारी
- परविंदर कौर पाल: राजस्व विभाग से अधीन सचिव
- उदयपाल सिंह हुंदल: लीगल रिमेम्ब्रेंसर विभाग से संयुक्त एलआर
बैठक में रक्षा सेवाएं कल्याण विभाग, राजस्व विभाग और कानूनी विभाग तीनों के अधिकारी मौजूद थे। इससे साफ है कि सरकार ने इस मुद्दे को बहु-विभागीय समन्वय से सुलझाने का फैसला किया है। जमीन आवंटन का मामला राजस्व विभाग से, कानूनी पहलू लीगल रिमेम्ब्रेंसर विभाग से और समग्र कल्याण रक्षा सेवाएं विभाग से जुड़ा है।
1962, 1965, 1971: जब पंजाब के सैनिकों ने लिखा इतिहास
Punjab Martyr Soldiers Compensation का यह मुद्दा भारत के सैन्य इतिहास के तीन सबसे बड़े युद्धों से जुड़ा है। पंजाब ने इन तीनों जंगों में सबसे ज्यादा सैनिक दिए और सबसे ज्यादा शहादतें भी पंजाब से हुईं।
1962 का भारत-चीन युद्ध: अक्टूबर-नवंबर 1962 में चीन ने भारत की उत्तरी सीमा पर हमला किया। भीषण ठंड और पहाड़ी इलाकों में पंजाब रेजिमेंट के सैनिकों ने बहादुरी से लड़ाई लड़ी। कई सैनिक शहीद हुए।
1965 का भारत-पाक युद्ध: सितंबर 1965 में पाकिस्तान ने पंजाब सीमा पर हमला किया। खेमकरण, असल उत्तर जैसे ऐतिहासिक युद्धों में पंजाब के सैनिकों ने दुश्मन के टैंकों को तबाह किया। यह जंग पंजाब की धरती पर लड़ी गई और यहां के सैनिकों और नागरिकों दोनों ने भारी कुर्बानी दी।
1971 का भारत-पाक युद्ध: दिसंबर 1971 में भारत ने पाकिस्तान को करारी हार दी और बांग्लादेश का जन्म हुआ। पंजाब के सैनिकों ने पश्चिमी और पूर्वी दोनों मोर्चों पर बहादुरी से लड़ाई लड़ी।
इन तीनों जंगों में शहीद हुए सैनिकों के परिवारों का सम्मान और उन्हें उचित मुआवजा देना किसी भी सरकार का नैतिक और कानूनी दायित्व है। भगवंत मान सरकार ने इस दायित्व को पूरा करने की दिशा में कदम बढ़ाया है।
शहीदों का सम्मान: सिर्फ 26 जनवरी और 15 अगस्त तक सीमित न रहे
Punjab Martyr Soldiers Compensation का यह कदम इसलिए भी सराहनीय है क्योंकि अक्सर शहीद सैनिकों को सिर्फ 26 जनवरी और 15 अगस्त पर याद किया जाता है। बाकी दिनों में उनके परिवार सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटते रहते हैं। जो सैनिक देश के लिए सबकुछ न्योछावर कर गए, उनके परिवारों को मुआवजे के लिए दशकों तक इंतजार करना पड़े, यह किसी भी सभ्य समाज के लिए शर्मनाक है।
पंजाब सरकार ने अब इन लंबित मामलों को प्राथमिकता पर रखा है। अगर सरकार की मंशा के अनुसार ये मामले जल्दी निपट जाते हैं तो यह उन शहीद परिवारों के लिए बड़ी राहत होगी जो दशकों से इंतजार कर रहे हैं। यह कदम अन्य राज्यों के लिए भी एक उदाहरण बन सकता है कि शहीदों के परिवारों का सम्मान सिर्फ भाषणों तक नहीं बल्कि जमीनी कार्रवाई से होना चाहिए।
मुख्य बातें (Key Points)
- पंजाब के मंत्री मोहिंदर भगत ने 1962, 1965 और 1971 की जंगों के शहीद सैनिकों के वंचित परिवारों को मुआवजा देने पर वरिष्ठ अधिकारियों के साथ विशेष बैठक की।
- अधिकांश परिवारों को पहले ही जमीन और नकद राशि के रूप में मुआवजा मिल चुका है, लेकिन कुछ परिवार अभी भी वंचित, उनके मामले प्राथमिकता पर निपटाने के निर्देश।
- मंत्री ने कहा: “शहीद सैनिकों के प्रति पंजाब सरकार पूर्ण सम्मान रखती है”, पूर्व सैनिकों और शहीद परिवारों की हर संभव सहायता का वादा।
- बैठक में रक्षा सेवाएं कल्याण, राजस्व और लीगल रिमेम्ब्रेंसर तीनों विभागों के अधिकारी मौजूद, बहु-विभागीय समन्वय से मामले सुलझाने की रणनीति।








