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The News Air - Breaking News - Vande Mataram New Guidelines: छह छंद अनिवार्य, नया प्रोटोकॉल लागू

Vande Mataram New Guidelines: छह छंद अनिवार्य, नया प्रोटोकॉल लागू

गृह मंत्रालय का 10 पन्नों का आदेश; कई आधिकारिक मौकों पर 3 मिनट 10 सेकंड का पूरा संस्करण बजेगा और गाया जाएगा

The News Air Team by The News Air Team
बुधवार, 11 फ़रवरी 2026
in Breaking News, NEWS-TICKER, राष्ट्रीय
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Vande Mataram New Guidelines
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Vande Mataram New Guidelines को लेकर केंद्र सरकार ने स्पष्ट और औपचारिक प्रोटोकॉल जारी कर दिया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने 10 पन्नों का आदेश सभी राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों, मंत्रालयों और संवैधानिक संस्थाओं को भेजा है। अब सरकारी कार्यक्रमों में ‘वंदे मातरम्’ सिर्फ औपचारिकता नहीं रहेगा; तय नियमों के साथ इसका पूरा छह छंदों वाला संस्करण—करीब 3 मिनट 10 सेकंड—कई मौकों पर अनिवार्य होगा।

यह पहली बार है जब राष्ट्रीय गीत की प्रस्तुति, समय और क्रम को लेकर इतना विस्तृत दिशानिर्देश जारी किया गया है।

कब-कब बजेगा वंदे मातरम्

नए नियमों के मुताबिक तिरंगा फहराए जाने के समय, राष्ट्रपति के किसी कार्यक्रम में आगमन और प्रस्थान पर, राष्ट्र के नाम संबोधन से ठीक पहले और बाद में ‘वंदे मातरम्’ बजेगा। राज्यपाल या उपराज्यपाल के आगमन-प्रस्थान और उनके भाषण से पहले व बाद में भी इसे शामिल किया जाएगा।

अगर किसी कार्यक्रम में ‘वंदे मातरम्’ और ‘जन गण मन’ दोनों प्रस्तुत हों, तो पहले ‘वंदे मातरम्’ और उसके बाद ‘जन गण मन’ होगा।

सावधान मुद्रा में खड़े होना अनिवार्य

जब ‘वंदे मातरम्’ बजाया या गाया जाएगा, तो सभी लोगों को सावधान मुद्रा में खड़ा होना होगा—ठीक वैसे ही जैसे राष्ट्रगान के समय खड़े होते हैं।

हालांकि, अगर यह गीत किसी फिल्म या डॉक्यूमेंट्री में कहानी का हिस्सा है, तो सिनेमा हॉल में दर्शकों से खड़े होने की अपेक्षा नहीं होगी।

तीन श्रेणियों में बांटे गए कार्यक्रम

गृह मंत्रालय ने कार्यक्रमों को तीन कैटेगरी में बांटा है। पहली श्रेणी में वे अवसर हैं जहां राष्ट्रीय गीत सिर्फ बजाया जाएगा—जैसे पद्म पुरस्कार समारोह, राष्ट्रपति के औपचारिक राजकीय कार्यक्रमों में आगमन-प्रस्थान, आकाशवाणी और दूरदर्शन पर राष्ट्र के नाम संबोधन से पहले और बाद में, तथा परेड में ध्वज फहराते समय।

दूसरी श्रेणी में वे कार्यक्रम हैं जहां गीत बजाने के साथ सामूहिक रूप से गाया भी जाएगा—जैसे राष्ट्रीय ध्वज फहराने के अवसर, सांस्कृतिक व औपचारिक समारोह, और राष्ट्रपति के सार्वजनिक कार्यक्रम। इसके लिए कोयर, साउंड सिस्टम और जरूरत पड़ने पर गीत के बोल वितरित करने की सलाह दी गई है।

तीसरी श्रेणी स्कूलों और शैक्षणिक संस्थानों की है। यहां ‘वंदे मातरम्’ गाया जा सकता है और दिन की शुरुआत भी सामूहिक गायन से की जा सकती है, ताकि छात्रों में राष्ट्रीय प्रतीकों के प्रति सम्मान बढ़े।

पहले क्या स्थिति थी

अब तक ‘वंदे मातरम्’ को लेकर कोई स्पष्ट आधिकारिक प्रोटोकॉल नहीं था। इसके विपरीत, राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ के लिए समय, धुन और प्रस्तुति के नियम पहले से निर्धारित हैं।

यह पहली बार है जब छह छंदों वाले पूरे विस्तारित संस्करण को आधिकारिक कार्यक्रमों में शामिल करने का निर्देश दिया गया है।

छह छंदों की वापसी क्यों

‘वंदे मातरम्’ की रचना Bankim Chandra Chattopadhyay ने 1870 के दशक में की थी और 1882 में उनके उपन्यास Anandamath में प्रकाशित हुआ। गीत में कुल छह छंद हैं।

1950 में इसके पहले दो छंदों को भारत का राष्ट्रीय गीत घोषित किया गया था। 1937 में कांग्रेस के फैजपुर अधिवेशन में भी पहले दो छंदों को अपनाया गया था, क्योंकि बाद के छंदों में देवी-देवताओं के उल्लेख पर कुछ आपत्तियां आई थीं।

अब सरकार ने आधिकारिक कार्यक्रमों में पूरे छह छंदों वाला संस्करण बजाने का निर्देश दिया है, जिसकी अवधि लगभग 3 मिनट 10 सेकंड है।

सरकार का जोर क्यों बढ़ा

हाल के समय में केंद्र सरकार ‘वंदे मातरम्’ को व्यापक स्तर पर फिर से लोकप्रिय बनाने पर जोर दे रही है। संसद में इसकी 150वीं जयंती पर चर्चा हुई। गणतंत्र दिवस परेड की थीम भी ‘स्वतंत्रता का मंत्र—वंदे मातरम्’ रही।

प्रधानमंत्री ने भी संसद में कहा था कि गीत के मूल स्वरूप से छेड़छाड़ ने उसके महत्व को कमजोर किया है।

क्या यह कानून है?

यह कोई दंडात्मक कानून नहीं है। उल्लंघन पर सीधे सजा का प्रावधान नहीं है। यह एक प्रशासनिक प्रोटोकॉल है, जिसे सरकारी कार्यक्रमों और संस्थानों में लागू किया जाएगा।

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इससे स्पष्ट है कि ‘वंदे मातरम्’ अब तय नियमों के साथ सरकारी समारोहों का औपचारिक और अनिवार्य हिस्सा बनेगा।

विश्लेषण: सांस्कृतिक प्रतीक से औपचारिक प्रोटोकॉल तक

यह निर्णय सिर्फ एक गीत की प्रस्तुति का मामला नहीं है, बल्कि राष्ट्रीय प्रतीकों के औपचारिक सम्मान की दिशा में कदम है।

एक ओर इससे सरकारी कार्यक्रमों में एकरूपता आएगी, दूसरी ओर छह छंदों की अनिवार्यता सामाजिक-राजनीतिक विमर्श को भी जन्म दे सकती है। आने वाले समय में इसका असर इस बात पर निर्भर करेगा कि इसे जमीन पर किस तरह लागू किया जाता है।

मुख्य बातें (Key Points)
  • गृह मंत्रालय ने 10 पन्नों का नया प्रोटोकॉल जारी किया।
  • कई आधिकारिक मौकों पर 3 मिनट 10 सेकंड का छह छंदों वाला संस्करण अनिवार्य।
  • ‘वंदे मातरम्’ और ‘जन गण मन’ साथ हों तो पहले वंदे मातरम् बजेगा।
  • सावधान मुद्रा में खड़े होना जरूरी; सिनेमा में अपवाद।
  • यह प्रशासनिक प्रोटोकॉल है, दंडात्मक कानून नहीं।
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