India Attack On Trump को लेकर अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल तेज हो गई है। भारत-अमेरिका ट्रेड डील के बाद जहां विपक्ष लगातार यह आरोप लगा रहा था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दबाव में फैसले लिए हैं, वहीं अब गाजा पीस प्लान को लेकर भारत के रुख ने इस दावे को चुनौती दे दी है। भारत ने अमेरिका की अगुवाई में बनने जा रहे गाजा पीस बोर्ड की पहली बैठक से फिलहाल दूरी बनाने का फैसला किया है, जिसे ट्रंप के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है।
यह पूरा मामला ऐसे वक्त सामने आया है, जब अमेरिका गाजा संकट को लेकर एक अंतरराष्ट्रीय पीस प्लान तैयार कर रहा है और उसमें कई देशों को शामिल करने की कोशिश कर रहा है।
गाजा पीस प्लान और भारत का फैसला
सूत्रों के मुताबिक, अमेरिका की ओर से गाजा पीस प्लान के तहत एक बोर्ड का गठन किया गया है, जिसकी पहली बैठक 19 फरवरी को प्रस्तावित है। इस बैठक में कई देशों को आमंत्रित किया गया है, लेकिन भारत ने फिलहाल इसमें शामिल न होने का फैसला लिया है।
भारत सरकार की ओर से यह साफ किया गया है कि ट्रंप प्रशासन के इस प्रस्ताव का पहले अध्ययन किया जाएगा। उसके बाद ही यह तय होगा कि भारत इस प्रक्रिया में आगे शामिल होगा या नहीं। लेकिन शुरुआती बैठक से दूरी बनाकर भारत ने यह संकेत दे दिया है कि वह किसी भी अंतरराष्ट्रीय मंच पर बिना अपने राष्ट्रीय हितों को देखे कोई कदम नहीं उठाएगा।
पाकिस्तान और तुर्की की मौजूदगी बनी बड़ी वजह
इस पूरे मामले में सबसे अहम पहलू यह है कि गाजा पीस बोर्ड में पहले से ही पाकिस्तान और तुर्की जैसे देश शामिल हैं। भारत के लिए यह एक संवेदनशील मुद्दा है, क्योंकि कश्मीर को लेकर इन दोनों देशों के साथ भारत का पुराना और गहरा विवाद रहा है।
भारत का मानना है कि जब ऐसे देश इस बोर्ड का हिस्सा हैं, जो लगातार कश्मीर मुद्दे पर भारत के खिलाफ रुख अपनाते रहे हैं, तो उस मंच पर बैठना भारत के लिए सहज नहीं हो सकता।
कश्मीर विवाद और ऑपरेशन सिंदूर की पृष्ठभूमि
कश्मीर मुद्दे पर भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव किसी से छिपा नहीं है। वहीं तुर्की भी कई मौकों पर पाकिस्तान के समर्थन में खुलकर सामने आया है। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान तुर्की की ओर से पाकिस्तान के पक्ष में दिए गए बयान अब भी भारतीय कूटनीति के लिए एक कड़वी याद हैं।
तुर्की ने उस वक्त न सिर्फ पर्दे के पीछे, बल्कि खुले मंच से पाकिस्तान को “भाई” बताया था। ऐसे में गाजा जैसे संवेदनशील मुद्दे पर पाकिस्तान और तुर्की की मौजूदगी भारत को असहज कर रही है।
अरब देशों से बातचीत, लेकिन फैसला अधूरा
भारत ने इस मुद्दे पर जल्दबाजी नहीं दिखाई है। हाल ही में अरब लीग के देशों और उनके विदेश मंत्रियों के साथ भारत की बैठक हुई, जिसमें गाजा पीस प्लान और ट्रंप के बोर्ड ऑफ पीस प्रस्ताव पर चर्चा की गई।
हालांकि, इन बैठकों के बाद भी न भारत और न ही अरब देशों ने यह साफ किया कि वे इस बोर्ड की बैठक में शामिल होंगे या नहीं। इसका मतलब साफ है कि कई देश इस प्रस्ताव को लेकर अभी सोच-विचार की स्थिति में हैं।
इजराइल की चिंता भी एक फैक्टर
सूत्रों के अनुसार, पाकिस्तान को गाजा पीस बोर्ड में शामिल किए जाने को लेकर इजराइल भी पूरी तरह सहज नहीं है। ऐसे में यह बोर्ड कई स्तरों पर विवादों से घिरा हुआ नजर आ रहा है।
भारत इस पूरे समीकरण को ध्यान से देख रहा है और किसी भी फैसले से पहले सभी पक्षों के हितों और प्रभावों का आकलन करना चाहता है।
ट्रेड डील, टैरिफ और बढ़ती आशंकाएं
इस घटनाक्रम को भारत-अमेरिका ट्रेड डील से जोड़कर भी देखा जा रहा है। हाल ही में दोनों देशों के बीच ट्रेड डील हुई थी, जिसके तहत भारत पर लगाए गए कुल 50 प्रतिशत टैरिफ में से 25 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ हटाया गया था।
हालांकि तेल से जुड़े 25 प्रतिशत टैरिफ को घटाकर 18 प्रतिशत करने की बात कही गई थी, जिसे मार्च के पहले या दूसरे हफ्ते से लागू करने की तैयारी है। इन फैसलों को लेकर भारत में सवाल भी उठे थे कि क्या अमेरिका भारत पर दबाव बना रहा है।
क्या ट्रंप नाराज होंगे?
अब बड़ा सवाल यह है कि गाजा पीस प्लान की बैठक से भारत की दूरी क्या डोनाल्ड ट्रंप को नाराज करेगी। क्या इससे भारत-अमेरिका ट्रेड डील में खटास आ सकती है? क्या अमेरिका दोबारा भारत पर टैरिफ बढ़ाने जैसा कदम उठा सकता है?
विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप का रुख अकसर आक्रामक रहता है और भविष्य में किसी भी तरह का दबाव बनाया जा सकता है। खासकर रूस से तेल खरीद को लेकर ट्रंप पहले भी बयान देते रहे हैं कि भारत को रूस से तेल कम खरीदना चाहिए।
रूस, तेल और भारत का संतुलन
हालांकि रूस की ओर से यह साफ किया गया है कि भारत की तरफ से तेल खरीद को लेकर कोई बदलाव का संकेत नहीं मिला है। भारत और रूस के बीच कई अहम ऊर्जा समझौते पहले से मौजूद हैं।
ऐसे में यह सवाल अभी भी बना हुआ है कि क्या भारत अमेरिकी दबाव में रूस से तेल खरीद कम करेगा या फिर अपनी स्वतंत्र विदेश नीति पर कायम रहेगा।
विपक्ष के आरोपों पर भारत का जवाब
विपक्ष लगातार यह आरोप लगाता रहा है कि प्रधानमंत्री Narendra Modi ने डोनाल्ड ट्रंप के सामने झुककर फैसले लिए हैं। लेकिन गाजा पीस प्लान की बैठक से दूरी बनाकर भारत ने यह संदेश देने की कोशिश की है कि वह किसी भी दबाव में नहीं है।
भारत का यह रुख बताता है कि वह अपने राष्ट्रीय हितों और कूटनीतिक संतुलन को सबसे ऊपर रखता है।
आगे क्या करेगा भारत
फिलहाल भारत ने गाजा पीस बोर्ड की बैठक में शामिल होने पर रोक लगाई है। आने वाले समय में अमेरिका के प्रस्ताव का अध्ययन करने के बाद ही कोई अंतिम फैसला लिया जाएगा।
यह भी साफ है कि भारत किसी भी अंतरराष्ट्रीय मंच पर तभी शामिल होगा, जब उसे लगेगा कि वहां उसकी स्थिति मजबूत और सम्मानजनक है।
मुख्य बातें (Key Points)
- गाजा पीस प्लान की पहली बैठक से भारत ने बनाई दूरी
- पाकिस्तान और तुर्की की मौजूदगी बनी बड़ी वजह
- ट्रेड डील के बाद भी भारत ने ट्रंप को दिया सख्त संकेत
- कश्मीर मुद्दे पर समझौते के मूड में नहीं भारत








