Budget Halwa Ceremony : देश का आम बजट 2026 आने वाला है और इस बार यह 1 फरवरी को रविवार के दिन संसद में पेश किया जाएगा। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार का यह अहम बजट पेश करेंगी। बजट से जुड़ी तैयारियां अंतिम दौर में हैं और हर बार की तरह इससे जुड़ी परंपराएं भी चर्चा में हैं। इन्हीं में से एक है हलवा सेरेमनी, जो आम तौर पर बजट से ठीक पहले होती है। लेकिन एक साल ऐसा भी रहा है, जब इस हलवा सेरेमनी की परंपरा टूट गई थी।
क्या है हलवा सेरेमनी?
हलवा सेरेमनी दरअसल बजट प्रक्रिया का एक प्रतीकात्मक लेकिन बहुत ही महत्वपूर्ण हिस्सा है। जब बजट का मसौदा पूरी तरीके से तैयार हो जाता है तो उसकी छपाई शुरू होने वाली होती है, तब वित्त मंत्रालय के नॉर्थ ब्लॉक में यह रस्म निभाई जाती है।
बड़ी कढ़ाई में हलवा बनता है और वित्त मंत्री खुद अधिकारियों और कर्मचारियों को हलवा परोसते हैं। यह परंपरा बजट की तैयारी में जुटे लोगों की मेहनत का सम्मान करने का प्रतीक है।
हलवा बनाने के लिए गेहूं का आटा, घी, चीनी और सूखे मेवे का इस्तेमाल किया जाता है। यह पारंपरिक भारतीय मिठाई हर शुभ अवसर पर बनाई जाती है।
1947 से चली आ रही परंपरा
भारत में बजट से पहले हलवा सेरेमनी की परंपरा 1947 यानी आजादी के बाद से लगातार चली आ रही है। दशकों से हर सरकार ने इसे निभाया।
चाहे हालात जैसे भी रहे, बजट से पहले मिठास बांटने की यह रस्म कभी नहीं टूटी। और यही वजह है कि जब एक साल यह परंपरा नहीं निभाई गई तो उसने इतिहास में खास जगह भी बनाई।
यह परंपरा ब्रिटिश काल से प्रभावित हो सकती है, लेकिन इसे भारतीय संस्कृति और परंपराओं के अनुसार ढाला गया है।
2022 में टूटी थी परंपरा
साल 2022 वो समय था जब बजट से पहले हलवा सेरेमनी नहीं हुई। यह फैसला किसी प्रशासनिक लापरवाही या फिर परंपरा से दूरी की वजह से नहीं, बल्कि देश में फैली गंभीर स्वास्थ्य संकट के कारण था।
उस वक्त भारत में कोरोना महामारी की तीसरी लहर थी और कोरोना संक्रमण बड़ी तेजी से फैल रहा था। Omicron वेरिएंट के कारण संक्रमण की दर बहुत तेज थी।
कोरोना की तीसरी लहर के दौरान सरकार ने भीड़भाड़ से बचने और संक्रमण रोकने के लिए कई सख्त कदम उठाए। वित्त मंत्रालय ने भी इसी को ध्यान में रखते हुए हलवा सेरेमनी रद्द करने का फैसला किया था।
सुरक्षा को दी गई प्राथमिकता
नॉर्थ ब्लॉक में अधिकारियों और कर्मचारियों को एक जगह इकट्ठा करना उस समय सुरक्षित नहीं माना गया और इसलिए 2022 में बजट से पहले हलवा सेरेमनी नहीं हुई।
सरकार को जन स्वास्थ्य और परंपरा के बीच चुनाव करना पड़ा। स्वास्थ्य को प्राथमिकता देते हुए यह कठिन निर्णय लिया गया।
यह पहली और अब तक की एकमात्र बार थी जब स्वतंत्र भारत में यह परंपरा नहीं निभाई गई।
परंपरा की भावना बनी रही
हालांकि हलवा सेरेमनी नहीं हुई, लेकिन परंपरा की भावना को पूरी तरह छोड़ा नहीं गया। वित्त मंत्रालय ने बजट से जुड़े अधिकारियों और कर्मचारियों को उनके घर या दफ्तर पर मिठाई भिजवाई।
यानी मिठास का वो प्रतीक बना ही रहा, लेकिन उसकी तस्वीर बदल गई। यह कदम सुरक्षा और परंपरा के बीच बैलेंस बनाने के लिए लिया गया।
अधिकारियों ने सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए अपने-अपने स्थानों पर मिठाई का आनंद लिया।
हलवा सेरेमनी के बाद शुरू होता है आइसोलेशन
हलवा सेरेमनी सिर्फ मिठाई बांटने का कार्यक्रम नहीं है। इसके साथ बजट की गोपनीय प्रक्रिया भी शुरू हो जाती है। इस रस्म के बाद बजट से जुड़े अधिकारी और कर्मचारी पूरी तरह से आइसोलेशन में चले जाते हैं।
वो ना मोबाइल फोन इस्तेमाल करते हैं, ना इंटरनेट। और इसका मकसद यह सुनिश्चित करना होता है कि बजट से जुड़ी कोई भी जानकारी सार्वजनिक ना हो।
यह आइसोलेशन बजट की गोपनीयता बनाए रखने के लिए बेहद जरूरी है। कोई भी लीक बाजार को प्रभावित कर सकती है।
नॉर्थ ब्लॉक में रहते हैं अधिकारी
हलवा सेरेमनी के बाद से लेकर बजट पेश होने तक संबंधित अधिकारी नॉर्थ ब्लॉक में ही रहते हैं। इलाज और जरूरी सुविधाओं के लिए विशेष इंतजाम होते हैं, लेकिन बाहरी दुनिया से उनका संपर्क पूरी तरीके से खत्म कर दिया जाता है।
अधिकारियों के लिए नॉर्थ ब्लॉक में ही रहने-खाने की व्यवस्था की जाती है। उनके परिवार से भी संपर्क सीमित कर दिया जाता है।
बजट प्रिंट होने के बाद तक यह गोपनीयता बनाए रखी जाती है। यह दुनिया की सबसे सख्त बजट गोपनीयता प्रणालियों में से एक है।
क्यों जरूरी है गोपनीयता?
बजट में कई ऐसे प्रावधान होते हैं जो शेयर बाजार, कमोडिटी की कीमतों और अर्थव्यवस्था को सीधे प्रभावित करते हैं। अगर बजट की जानकारी पहले लीक हो जाए तो:
- शेयर बाजार में हेराफेरी हो सकती है
- कुछ लोग इनसाइड ट्रेडिंग से अनुचित फायदा उठा सकते हैं
- सरकार की नीतियों की विश्वसनीयता पर सवाल उठ सकते हैं
- आर्थिक स्थिरता प्रभावित हो सकती है
इसलिए हलवा सेरेमनी के बाद का आइसोलेशन बेहद महत्वपूर्ण है।
बजट की छपाई कैसे होती है?
हलवा सेरेमनी के बाद बजट दस्तावेजों की छपाई शुरू होती है। यह प्रक्रिया भी पूरी तरह गोपनीय होती है। नॉर्थ ब्लॉक में ही एक विशेष प्रिंटिंग प्रेस होती है।
बजट के हजारों पन्ने प्रिंट किए जाते हैं। इन्हें सांसदों को बांटा जाता है। पहले ये दस्तावेज चमड़े के बैग में रखे जाते थे, अब ये डिजिटल भी होते हैं।
पूरी प्रक्रिया में सुरक्षा के कड़े इंतजाम रहते हैं। कोई भी अनधिकृत व्यक्ति इन दस्तावेजों तक नहीं पहुंच सकता।
1 फरवरी को रविवार को बजट
इस बार बजट 1 फरवरी को रविवार के दिन पेश होगा। सामान्यतः बजट सप्ताह के दिनों में पेश किया जाता है, लेकिन कोई संवैधानिक प्रतिबंध नहीं है।
रविवार को बजट पेश करना असामान्य है, लेकिन पहले भी ऐसा हो चुका है। संसद का विशेष सत्र बुलाया जाएगा।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण लगातार अपने कई बजट पेश कर चुकी हैं। यह उनका अनुभव और विशेषज्ञता दर्शाता है।
हलवा सेरेमनी की तैयारियां शुरू
अभी हलवा सेरेमनी की तारीख की घोषणा नहीं हुई है, लेकिन यह आमतौर पर बजट से कुछ दिन पहले होती है। इस बार भी जल्द ही यह समारोह आयोजित किया जाएगा।
वित्त मंत्रालय के अधिकारी और कर्मचारी इसका इंतजार करते हैं। यह उनकी मेहनत की पहचान और सराहना का क्षण होता है।
बजट तैयार करने में सैकड़ों अधिकारी महीनों की मेहनत करते हैं। हलवा सेरेमनी उनके योगदान का सम्मान है।
बजट 2026 से उम्मीदें
बजट 2026 से मिडिल क्लास को टैक्स राहत की उम्मीद है। इंफ्रास्ट्रक्चर, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार पर भी फोकस की उम्मीद है।
किसानों, महिलाओं और युवाओं के लिए विशेष घोषणाएं हो सकती हैं। आर्थिक विकास को गति देने वाली नीतियां भी आ सकती हैं।
1 फरवरी को जब वित्त मंत्री बजट पेश करेंगी, तभी साफ होगा कि देश की आर्थिक दिशा क्या होगी।
मुख्य बातें (Key Points)
- बजट 2026 एक फरवरी को रविवार को पेश होगा
- हलवा सेरेमनी 1947 से चली आ रही परंपरा है
- 2022 में कोरोना तीसरी लहर के कारण हलवा सेरेमनी नहीं हुई थी
- हलवा सेरेमनी के बाद अधिकारी आइसोलेशन में चले जाते हैं
- बजट की गोपनीयता बनाए रखना बेहद जरूरी है








