Badrinath-Kedarnath Entry Ban : उत्तराखंड के बदरीनाथ और केदारनाथ मंदिर परिसरों में गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर रोक लगाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया जा सकता है। यह संकेत खुद उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के बयान से मिला है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा है कि धार्मिक स्थलों का प्रबंधन संबंधित समितियां करती हैं और यदि समितियों ने कोई निर्णय लिया है तो उसी के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
मंदिर समिति के बयान से शुरू हुआ मामला
दरअसल, बद्री-केदारनाथ मंदिर समिति के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने एक दिन पहले बयान दिया था कि समिति के अंतर्गत आने वाले सभी मंदिरों में गैर-हिंदुओं के प्रवेश को रोका जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि इस संबंध में जल्द ही समिति की बैठक में प्रस्ताव लाया जाएगा।
48 मंदिरों पर लागू हो सकता है फैसला
बद्री-केदारनाथ मंदिर समिति के अधीन कुल 48 मंदिर आते हैं। अगर प्रस्ताव पारित होता है तो यह फैसला केवल बदरीनाथ और केदारनाथ तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि समिति द्वारा प्रबंधित सभी मंदिरों में लागू हो सकता है। इसी को लेकर अब राज्य में धार्मिक और प्रशासनिक स्तर पर चर्चाएं तेज हो गई हैं।
सीएम धामी ने क्यों दी ‘हरी झंडी’
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि उत्तराखंड देवभूमि है और यहां के पौराणिक व धार्मिक स्थलों की परंपराओं का सम्मान होना चाहिए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इन मंदिरों के संचालन से जुड़े तीर्थ समाज, गंगा सभा, केदार सभा और बद्री-केदार मंदिर समिति की राय अहम है। सरकार उन्हीं की सहमति और मौजूदा कानूनी प्रावधानों के अध्ययन के आधार पर आगे बढ़ेगी।
कानूनी पहलुओं पर भी नजर
सीएम धामी के अनुसार, इन धार्मिक स्थलों से जुड़े कुछ पुराने कानून पहले से मौजूद हैं। सरकार उन नियमों का अध्ययन कर रही है ताकि कोई भी निर्णय कानूनी दायरे में रहकर लिया जाए और भविष्य में विवाद की स्थिति न बने।
लागू करना कितना आसान?
इस फैसले को लेकर सबसे बड़ा सवाल इसके पालन को लेकर उठ रहा है। स्थानीय स्तर पर यह चर्चा है कि गैर-हिंदुओं की पहचान और जांच कैसे होगी। खासतौर पर वीवीआईपी आगंतुकों और बड़े नेताओं के मामलों में इस नियम को लागू करना प्रशासन के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
आम श्रद्धालुओं पर असर
अगर यह फैसला लागू होता है तो इससे तीर्थ स्थलों की परंपरागत धार्मिक पहचान को मजबूत करने का संदेश जाएगा। वहीं, प्रशासन के सामने नियमों को समान रूप से लागू करने की जिम्मेदारी भी बढ़ेगी।
क्या है पृष्ठभूमि
गैर-हिंदुओं के प्रवेश को लेकर यह मुद्दा नया नहीं है। पिछले वर्ष भी इस पर चर्चा हुई थी और अब एक बार फिर मंदिर समिति के स्तर से इसे औपचारिक रूप देने की तैयारी की जा रही है। मुख्यमंत्री के बयान से साफ है कि सरकार इस मुद्दे पर समिति के फैसले के साथ खड़ी नजर आ रही है।
मुख्य बातें (Key Points)
- बदरीनाथ-केदारनाथ में गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर रोक की तैयारी।
- बद्री-केदारनाथ मंदिर समिति की बैठक में प्रस्ताव लाने की योजना।
- मुख्यमंत्री धामी ने समिति के फैसले को मान्य बताया।
- कुल 48 मंदिरों में लागू हो सकता है निर्णय।








