Census 2027 : देश में होने वाली जनगणना 2027 को लेकर केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाते हुए इसकी अधिसूचना जारी कर दी है। इस बार जनगणना सिर्फ लोगों की गिनती तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि हर घर की सामाजिक-आर्थिक स्थिति को गहराई से दर्ज किया जाएगा। पहले चरण में मकान सूचीकरण (House Listing) के लिए सवालों की सूची जारी हुई है, जिसमें कुल 37 अहम सवाल शामिल हैं।
सरकार के मुताबिक, 1 अप्रैल से 30 सितंबर के बीच जनगणना कर्मी हर घर तक पहुंचेंगे और डिजिटल माध्यम से जानकारी जुटाएंगे। इसके बाद दूसरे चरण में जनसंख्या गणना होगी, जिसमें पहली बार 1931 के बाद जाति आधारित गणना भी शामिल होगी।
पहले चरण में क्या-क्या पूछा जाएगा
जनगणना के पहले चरण में मकानों और घरों से जुड़ी बुनियादी लेकिन बेहद अहम जानकारियां जुटाई जाएंगी। इसमें घर का नंबर, फर्श और छत की सामग्री, कितने कमरे हैं और घर पक्का है या कच्चा—जैसे सवाल शामिल हैं। इसके साथ ही यह भी दर्ज किया जाएगा कि घर में शौचालय है या नहीं, और है तो वह घर के अंदर है या बाहर।
LPG कनेक्शन को क्यों बनाया गया खास सवाल
इस बार जनगणना में एलपीजी कनेक्शन को एक अहम संकेतक के रूप में जोड़ा गया है। जनगणना कर्मी पूछेंगे कि घर में खाना बनाने के लिए कौन-सा ईंधन इस्तेमाल होता है—एलपीजी, पाइप्ड गैस, लकड़ी या कोई और साधन। सरकार का मानना है कि इस डेटा से यह साफ हो जाएगा कि किन घरों तक अब भी स्वच्छ ईंधन नहीं पहुंच पाया है, ताकि आगे योजनाएं सीधे उन्हीं तक पहुंचाई जा सकें।
हर घर की ‘डिजिटल कुंडली’ बनेगी
इस बार पूरी जनगणना डिजिटल टैबलेट के जरिए होगी। इससे सरकार के पास हर घर की रियल-टाइम जानकारी जमा होगी। घर में कितने मोबाइल फोन हैं, कितने स्मार्टफोन हैं, लैपटॉप है या नहीं, बाइक-कार कितनी हैं—यह सब दर्ज किया जाएगा। यहां तक कि यह भी पूछा जाएगा कि परिवार के कितने सदस्य पढ़े-लिखे हैं और कौन सरकारी या निजी नौकरी में है।
जनगणना कर्मी और नियम
1990 के नियमों के अनुसार, शिक्षक, क्लर्क या राज्य व स्थानीय निकायों के अधिकारी जनगणना कर्मी बनाए जा सकते हैं। उनके ऊपर एक उच्च रैंक का सुपरवाइजर भी तैनात रहेगा, ताकि पूरी प्रक्रिया सही और पारदर्शी तरीके से पूरी हो।
दूसरा चरण क्यों है ज्यादा अहम
दूसरे चरण में, जिसे मुख्य जनगणना कहा जाता है, हर व्यक्ति की गिनती होगी। इसमें उम्र, शिक्षा, रोजगार और इस बार जाति संबंधी जानकारी भी ली जाएगी। सरकार के मुताबिक, यह डेटा 1 मार्च की रात 12 बजे तक अंतिम रूप ले लेगा और इसके कुछ ही महीनों में पूरी रिपोर्ट तैयार हो जाएगी।
आम लोगों पर क्या होगा असर
इस विस्तृत और डिजिटल जनगणना का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि सरकार की योजनाएं अब अनुमान के आधार पर नहीं, बल्कि सटीक डेटा के आधार पर बनेंगी। जिस घर में एलपीजी नहीं है, वहीं कनेक्शन पहुंचेगा। जहां शौचालय नहीं है, वहीं योजना केंद्रित होगी। यानी सहायता ज्यादा लक्षित और प्रभावी होगी।
जानें पूरा मामला
सरकार की कोशिश है कि दशकों बाद होने वाली यह जनगणना सिर्फ संख्या नहीं, बल्कि देश की असल सामाजिक-आर्थिक तस्वीर सामने लाए। डिजिटल डेटा के चलते योजनाएं तेजी से लागू होंगी और पुराने, अप्रासंगिक आंकड़ों की समस्या खत्म होगी।
मुख्य बातें (Key Points)
- जनगणना 2027 की अधिसूचना जारी
- पहले चरण में 37 सवालों की सूची
- 1 अप्रैल से 30 सितंबर तक हाउस लिस्टिंग
- LPG, शौचालय, मोबाइल, वाहन तक की जानकारी
- पूरी प्रक्रिया डिजिटल और टैब आधारित








