IWDC 3.0 Inland Waterways : भारत के अंतर्देशीय जल परिवहन को नई गति देने की दिशा में यह बैठक एक बड़ा मील का पत्थर मानी जा रही है। परिषद ने नदियों को केवल प्राकृतिक संसाधन नहीं, बल्कि आर्थिक विकास, पर्यटन और लॉजिस्टिक्स का मजबूत इंजन बनाने का स्पष्ट संकेत दिया।
केंद्र–राज्य समन्वय से बना राष्ट्रीय रोडमैप
केरल के कोच्चि में दिनभर चली इस बैठक में हिमाचल प्रदेश, बिहार, नागालैंड, अरुणाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश और पंजाब के मंत्रियों की मौजूदगी रही। बैठक का मुख्य उद्देश्य केंद्र और राज्यों के बीच समन्वय मजबूत कर अंतर्देशीय जलमार्गों को सड़कों और रेलवे के विकल्प के रूप में विकसित करना रहा।
₹1,500 करोड़ से अधिक की परियोजनाओं की पहचान
IWDC 3.0 ने कुल ₹1,500 करोड़ से अधिक की परियोजनाओं को मंजूरी दी, जिनका फोकस ग्रीन मोबिलिटी, बहुआयामी लॉजिस्टिक्स और नदी आधारित आर्थिक विकास पर है। इससे देश की प्रमुख नदियों पर यात्री और माल परिवहन दोनों को गति मिलेगी।
₹900 करोड़ की नई अंतर्देशीय जलमार्ग परियोजनाएं
परिषद को ₹900 करोड़ से अधिक की नई परियोजनाओं की जानकारी दी गई, जिनमें शामिल हैं:
- ओडिशा और पूर्वोत्तर में कुल 110 जेट्टी का निर्माण
- कोच्चि में स्लिपवे सुविधा का विकास
- महाराष्ट्र में राष्ट्रीय नदी यातायात और नौवहन प्रणाली (NRTNS) का कार्यान्वयन
- गुवाहाटी के उजान बाजार घाट पर ₹70 करोड़ का क्रूज टर्मिनल
- ब्रह्मपुत्र नदी (NW-2) पर डिब्रूगढ़ के बोगीबील नदी बंदरगाह के लिए ₹144 करोड़ की एप्रोच रोड परियोजना
₹465 करोड़ की परिसंपत्ति खरीद से क्षमता में इजाफा
सुरक्षा और परिचालन को बेहतर बनाने के लिए ₹465 करोड़ से अधिक की परिसंपत्ति खरीद को मंजूरी दी गई। इसमें शामिल हैं:
- सर्वेक्षण पोत
- रो-पैक्स बर्थिंग जेट्टी
- फ्लोटिंग पोंटून
- हाइब्रिड सर्वे पोत
- ड्रेजर और टग-बार्ज यूनिट
यह सभी संसाधन जलमार्गों को सालभर चालू रखने और नौवहन को सुरक्षित बनाने में मदद करेंगे।
नदी क्रूज और पर्यटन को मिला बड़ा बढ़ावा
केरल, गुजरात, कर्नाटक, ओडिशा और तेलंगाना में ₹150 करोड़ से अधिक की नदी क्रूज जेट्टी परियोजनाओं की आधारशिला रखी गई। इससे देशभर में नदी पर्यटन सर्किट विकसित होंगे और स्थानीय रोजगार को सीधा फायदा मिलेगा।
जम्मू-कश्मीर और आंध्र प्रदेश पर विशेष फोकस
- जम्मू-कश्मीर में झेलम नदी (NW-49) पर तटवर्ती सुविधाओं और 10 हाइब्रिड इलेक्ट्रिक पोतों की तैनाती को मंजूरी
- आंध्र प्रदेश में कृष्णा नदी (NW-4) पर रो-रो और कार्गो टर्मिनलों का विकास
इन परियोजनाओं से पर्यटन के साथ-साथ माल ढुलाई भी तेज होगी।
प्रधानमंत्री के विज़न का उल्लेख
केंद्रीय मंत्री Narendra Modi के नेतृत्व का उल्लेख करते हुए सर्बानंद सोनोवाल ने कहा कि अंतर्देशीय जलमार्ग सड़कों पर भीड़ कम करने, लॉजिस्टिक्स लागत घटाने और ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस बढ़ाने में अहम भूमिका निभा रहे हैं।
पूर्वोत्तर को मिलेगा सबसे बड़ा फायदा
सरकार ने पूर्वोत्तर में ₹500 करोड़ से अधिक के निवेश से 85 घाटों के निर्माण की योजना बनाई है। इससे कनेक्टिविटी, व्यापार और नदी किनारे बसे समुदायों की आजीविका में बड़ा बदलाव आने की उम्मीद है।
आंकड़ों से समझिए जलमार्गों की तेजी
- 2013-14 में माल ढुलाई: 18 मिलियन टन
- 2024-25 में माल ढुलाई: 145.84 मिलियन टन
- राष्ट्रीय जलमार्ग: 3 से बढ़कर 32
- क्रूज जहाज: 5 से बढ़कर 25
विश्लेषण: क्यों यह फैसला रणनीतिक है
IWDC 3.0 के फैसले बताते हैं कि सरकार जलमार्गों को भारत की लॉजिस्टिक्स रणनीति का स्थायी स्तंभ बनाना चाहती है। इससे ईंधन की बचत होगी, प्रदूषण कम होगा और परिवहन लागत में दीर्घकालिक कमी आएगी।
आम लोगों पर असर
इन परियोजनाओं से न सिर्फ माल सस्ता पहुंचेगा, बल्कि पर्यटन, शहरी जल परिवहन और स्थानीय रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।
मुख्य बातें (Key Points)
- IWDC 3.0 में ₹1,500 करोड़ से अधिक की मंजूरी
- ₹900 करोड़ की नई जलमार्ग परियोजनाएं
- ₹465 करोड़ की परिसंपत्ति खरीद
- नदी क्रूज और पर्यटन को बड़ा प्रोत्साहन
- पूर्वोत्तर और जम्मू-कश्मीर पर विशेष फोकस








