US Adani Case : अमेरिका की सिक्योरिटी एंड एक्सचेंज कमीशन (SEC) ने भारतीय उद्योगपति गौतम अडानी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई को लेकर न्यूयॉर्क की अदालत का दरवाजा खटखटाया है। फरवरी 2025 से लेकर जनवरी 2026 तक भारत के कानून मंत्रालय को भेजे गए सभी नोटिस बैरंग लौटा दिए गए। अब SEC ने 48 घंटे पहले ईस्टर्न डिस्ट्रिक्ट कोर्ट ऑफ न्यूयॉर्क में अर्जी दाखिल कर वैकल्पिक तरीके से नोटिस भेजने की इजाजत मांगी है। इस खबर के बाद अडानी ग्रुप के शेयरों में 3.4% से लेकर 14.5% तक की गिरावट आई और एक ही दिन में 12.5 बिलियन डॉलर का नुकसान हुआ।
जब वाइट हाउस में पूछा गया अडानी पर सवाल
फरवरी 2025 में जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अमेरिका के नए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मिलने वाशिंगटन गए थे, तब वाइट हाउस में एक पत्रकार ने सीधा सवाल पूछ लिया। सवाल था कि क्या प्रधानमंत्री मोदी ने राष्ट्रपति ट्रंप से अडानी मामले में कार्रवाई रोकने की बात की है। इस सवाल पर प्रधानमंत्री मोदी ने जवाब दिया कि भारत एक लोकतांत्रिक देश है और वसुधैव कुटुंबकम की संस्कृति वाला देश है। उन्होंने कहा कि ऐसे व्यक्तिगत मामलों के लिए दो देशों के मुखिया न मिलते हैं, न बैठते हैं और न ही बात करते हैं।
क्या है अमेरिका का आरोप?
अमेरिकी एजेंसियों का दावा है कि 2020 से 2024 के बीच भारत में सोलर पावर प्रोजेक्ट हासिल करने के लिए 250 बिलियन डॉलर की रिश्वत दी गई। इस मामले में जो बॉन्ड ऑफर था वह 750 मिलियन डॉलर का था और इसमें से 175 मिलियन डॉलर अमेरिकी निवेशकों से लिए गए थे। अमेरिकी कानून के मुताबिक अगर निवेशकों से लिया गया पैसा किसी और मकसद में खासकर घूस में इस्तेमाल किया जाता है तो यह गंभीर अपराध है। आरोप है कि यह पैसा भारत के एक अधिकारी को घूस के तौर पर दिया गया।
11 बार नोटिस भेजे, 11 बार लौटाए गए
फरवरी 2025 में पहला औपचारिक पत्र अमेरिका से भारत आया था और जनवरी 2026 में दूसरा। इन दोनों के बीच लगभग 11 बार अलग-अलग पत्रों के जरिए संवाद हुआ। लेकिन भारत के कानून मंत्रालय ने हर बार इन पत्रों को वापस लौटा दिया। मंत्रालय की दलीलें थीं कि इन पत्रों में न तो उचित मोहर है, न हस्ताक्षर हैं और जिस कानून का हवाला दिया जा रहा है उसके तहत ऐसे आरोप लगाए ही नहीं जा सकते। मंत्रालय ने यह भी कहा कि प्रत्यावर्तन (Extradition) का अधिकार अमेरिका के पास नहीं है।
अमेरिका ने क्या जवाब दिया?
जब भारत ने हेग कमीशन के तहत मोहर और हस्ताक्षर की मांग की तो अमेरिका ने साफ कहा कि हेग कमीशन में ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है। उन्होंने आंतरिक प्रक्रिया के नियम 5 बी (5 B 7 CFR 2022.5 B) का हवाला दिया और कहा कि इसी के तहत कार्रवाई होनी चाहिए। अमेरिकी पक्ष ने यह भी कहा कि अडानी ग्रुप सार्वजनिक तौर पर बयान दे रहा है और खुद को पाक-साफ बता रहा है, लेकिन कानूनी तौर पर कोई जवाब नहीं दिया गया है।
अब अदालत में पहुंचा मामला
जब सारे रास्ते बंद हो गए तो SEC ने न्यूयॉर्क की ईस्टर्न डिस्ट्रिक्ट कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। जज निकोलस जी गैरोफिक्स के सामने 48 घंटे पहले अर्जी दाखिल की गई। इसमें कहा गया कि भारत सरकार का कानून मंत्रालय बार-बार नोटिस लौटा रहा है इसलिए वैकल्पिक तरीके से नोटिस भेजने की इजाजत दी जाए। SEC ने सुझाव दिया कि अडानी ग्रुप ने अमेरिका में कई वकीलों और कानूनी फर्म्स को हायर किया हुआ है, तो उन्हें ईमेल के जरिए नोटिस दिया जाए। वकील अपने क्लाइंट को सूचित करेंगे और फिर कानूनी कार्रवाई शुरू होगी।
प्रत्यावर्तन और गिरफ्तारी की चर्चा
अदालत में दाखिल अर्जी में इस बात का भी जिक्र है कि अगर भारत सरकार सहयोग नहीं करती है तो दोनों देशों के बीच जो प्रत्यावर्तन का समझौता है उसके तहत आरोपियों को लाया जा सकता है। यह एक तरह से गिरफ्तारी की स्थिति भी बनती है। अर्जी में यह भी लिखा गया है कि भारत सरकार का मंत्रालय बिना प्रधानमंत्री की इजाजत के ऐसे मामलों में कुछ नहीं कर सकता, इसलिए वैकल्पिक रास्ता जरूरी है।
अडानी ग्रुप के शेयरों में भारी गिरावट
इस खबर के आते ही शेयर बाजार में अडानी ग्रुप की सभी कंपनियों के शेयर धड़ाम से गिर गए। अडानी ग्रीन एनर्जी, अडानी एनर्जी सॉल्यूशंस, अडानी एंटरप्राइजेज, अडानी पोर्ट्स एंड SEZ, अडानी पावर और अडानी टोटल गैस जैसी कंपनियों के शेयर 3.4% से लेकर 14.5% तक नीचे चले गए। सिर्फ एक दिन में अडानी ग्रुप की नेटवर्थ में 12.5 बिलियन डॉलर का नुकसान हो गया।
दुनियाभर में फैला है अडानी का कारोबार
अडानी ग्रुप का कारोबार सिर्फ भारत तक सीमित नहीं है। ऑस्ट्रेलिया में कोल माइनिंग और रेल, इजराइल में पोर्ट और डिफेंस, बांग्लादेश में पावर, श्रीलंका में पोर्ट्स, इंडोनेशिया में कोल माइनिंग, तंजानिया में पोर्ट और वियतनाम में एयरपोर्ट व रिन्यूएबल एनर्जी का कारोबार है। डिफेंस सेक्टर में अमेरिकी कंपनी सेप्ट्रोन (एलबिट सिस्टम की सब्सिडियरी) के साथ मई 2025 में समझौता हुआ जो एंटी-सबमरीन वारफेयर सॉल्यूशन बनाती है। फ्रांस की थेल्स ग्रुप के साथ भी पार्टनरशिप है और ब्राजील की इम्ब्रेयर के साथ दिसंबर 2025 में C-390 मिलेनियम मिलिट्री ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट के लिए MOU हुआ है।
राहुल गांधी ने उठाए थे सवाल
भारत की राजनीति में अडानी और मोदी की दोस्ती का सवाल राहुल गांधी ने बाखूबी उठाया है। फरवरी 2023 में संसद में उन्होंने सीधा सवाल पूछा था कि अडानी जी के हवाई जहाज में मोदी जी जाते थे, अब मोदी जी के हवाई जहाज में अडानी जी जाते हैं। उन्होंने पूछा कि प्रधानमंत्री मोदी कितनी बार अडानी के साथ विदेश गए और जिन देशों में गए वहां अडानी को कितने कॉन्ट्रैक्ट मिले। यह मामला पहले लोकल था, फिर नेशनल हुआ और अब इंटरनेशनल हो गया है।
प्रधानमंत्री मोदी का पलटवार
दिलचस्प बात यह है कि 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान खुद प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था कि जब से चुनाव घोषित हुआ है, विपक्ष ने अंबानी-अडानी को गाली देना बंद कर दिया है। उन्होंने तेलंगाना की रैली में पूछा कि कांग्रेस ने अंबानी-अडानी से कितना माल उठाया है, काले धन के कितने बोरे भरे हैं। यानी कॉर्पोरेट पॉलिटिकल फंडिंग करता है और राजनीति उस पैसे के बिना नहीं चलती, इस पर खुद प्रधानमंत्री ने मोहर लगाई।
₹7500 करोड़ की नई फंडिंग की तैयारी
इन सब विवादों के बीच भी अडानी ग्रुप को नया कर्ज मिलने वाला है। पावर सेक्टर में ₹7500 करोड़ की जरूरत के लिए भारत के बैंक, म्यूचुअल फंड और इंश्योरेंस कंपनियां तैयार हैं। लगभग 17 इंस्टीट्यूशंस इसमें पैसा डालने वाले हैं। यह दर्शाता है कि देश के भीतर अडानी की ताकत अभी भी बरकरार है।
क्या है पूरी पृष्ठभूमि?
नवंबर 2024 में अमेरिकी अधिकारियों ने पहली बार यह दावा किया कि 2020 से 2024 के बीच सोलर पावर प्रोजेक्ट के लिए भारी रिश्वत दी गई। अडानी ग्रुप ने तुरंत इसे बेबुनियाद बताया और कहा कि कॉर्पोरेट गवर्नेंस का पूरा पालन किया गया। लेकिन फरवरी 2025 से शुरू हुई पत्राचार की प्रक्रिया में भारत सरकार ने हर नोटिस को तकनीकी आधार पर खारिज कर दिया। अब अमेरिकी एजेंसी ने अदालत का रुख किया है और अगले 24 घंटों में कोर्ट का फैसला आ सकता है कि वैकल्पिक तरीके से नोटिस भेजने की इजाजत मिलेगी या नहीं।
विश्लेषण (Analysis)
यह मामला सिर्फ एक कॉर्पोरेट के खिलाफ कानूनी कार्रवाई नहीं है। यह भारत-अमेरिका के बिगड़ते संबंधों, टैरिफ वॉर और जियोपॉलिटिक्स का हिस्सा बन चुका है। अमेरिका की नजर में अडानी भारत सरकार के सबसे करीबी कॉर्पोरेट हैं और उन पर दबाव बनाकर भारत सरकार पर दबाव बनाया जा सकता है। दूसरी तरफ भारत सरकार अपने नागरिक की ढाल बनकर खड़ी है। सवाल यह है कि यह टकराव ब्लैकमेल की दिशा में जाएगा या भारत की अर्थव्यवस्था और राजनीतिक सत्ता को नुकसान पहुंचाएगा। आने वाले दिनों में अदालत का फैसला और भारत सरकार की प्रतिक्रिया बहुत महत्वपूर्ण होगी।
मुख्य बातें (Key Points)
- अमेरिकी SEC ने न्यूयॉर्क कोर्ट में अर्जी दी, वैकल्पिक तरीके से नोटिस भेजने की मांगी इजाजत
- भारत के कानून मंत्रालय ने फरवरी 2025 से जनवरी 2026 तक 11 बार नोटिस लौटाए
- 2020-2024 में सोलर प्रोजेक्ट के लिए 250 बिलियन डॉलर रिश्वत का आरोप
- एक दिन में अडानी ग्रुप को 12.5 बिलियन डॉलर का नुकसान, शेयर 14.5% तक गिरे








