Punjab Congress Rahul Gandhi Meeting : पंजाब कांग्रेस में इन दिनों जबरदस्त घमासान मचा हुआ है। 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले जाट सिख बनाम दलित की राजनीति को लेकर पार्टी के अंदर जो विवाद छिड़ा था उस पर राहुल गांधी ने दिल्ली में पार्टी नेताओं की जमकर क्लास लगाई। करीब 3 घंटे चली इस बैठक में राहुल गांधी ने दो टूक शब्दों में कहा कि अनुशासनहीनता को किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। खासतौर पर पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के दलितों को प्रतिनिधित्व न मिलने के बयान पर राहुल गांधी ने कड़ी नाराजगी जताई।

मीडिया में पार्टी की बातें करने पर लगाई सख्त रोक
राहुल गांधी ने बैठक में साफ शब्दों में कह दिया कि कोई भी नेता इस तरह से मीडिया और सोशल मीडिया में बयानबाजी न करे। उन्होंने समझाया कि पार्टी के आंतरिक मामलों की बात पार्टी के ही प्लेटफॉर्म पर होनी चाहिए, बाहर नहीं। राहुल गांधी की इस सख्ती का असर तुरंत दिखा और बैठक के बाद पंजाब कांग्रेस के किसी भी नेता ने मीडिया को कोई बयान नहीं दिया। यह अपने आप में बड़ी बात थी क्योंकि इससे पहले नेता खुलेआम एक-दूसरे पर निशाना साध रहे थे।
बैठक में कौन-कौन था मौजूद?
इस अहम बैठक में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे भी मौजूद रहे। पंजाब से पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के अलावा पार्टी प्रभारी भूपेश बघेल भी बैठक में शामिल हुए। इनके साथ प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग, विधायक दल के नेता प्रताप सिंह बाजवा, गुरदासपुर के सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा, अमर सिंह और विजय इंदर सिंगला भी मौजूद थे। यानी पंजाब कांग्रेस के सभी बड़े चेहरे एक ही छत के नीचे इकट्ठा हुए।

वेणुगोपाल बोले- ग्रुपिज्म बर्दाश्त नहीं होगा
बैठक खत्म होने के बाद कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने मीडिया के सामने आकर जानकारी दी। उन्होंने बताया कि राहुल गांधी ने हर नेता के विचार सुने और नेताओं ने पंजाब कांग्रेस के भविष्य के लिए अपने सुझाव दिए। वेणुगोपाल ने कहा कि यह काफी सार्थक चर्चा रही। उन्होंने स्पष्ट किया कि सभी नेताओं को कहा गया है कि सार्वजनिक बयानबाजी से दूर रहें। पार्टी के आंतरिक मामलों पर मीडिया में बयानबाजी को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और हाईकमान इसको लेकर सख्त कार्रवाई करने से पीछे नहीं हटेगा।
35-40 नेताओं की चिट्ठी पर क्या बोले वेणुगोपाल?
जब वेणुगोपाल से पत्रकारों ने 35-40 नेताओं की चिट्ठी के बारे में सवाल पूछा तो उन्होंने संतुलित जवाब दिया। उन्होंने कहा कि अपॉइंटमेंट मांगने में कोई बुराई नहीं है लेकिन ग्रुपिज्म को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी सभी जाति और वर्गों को प्रतिनिधित्व देती है। मगर सोशल मीडिया या मीडिया में जाने से कोई मामला हल नहीं होगा। वेणुगोपाल ने भरोसा दिलाया कि कल से कांग्रेस पूरी तरह से एकजुट दिखेगी।
भूपेश बघेल ने बताई आगे की रणनीति
पंजाब कांग्रेस के प्रभारी भूपेश बघेल ने बताया कि राहुल गांधी की अगुवाई में पूरे 3 घंटे बैठक चली। इस दौरान आने वाले एक साल में पार्टी की क्या रूपरेखा होगी, इसको लेकर विस्तार से सुझाव दिए गए। बघेल ने बताया कि नेताओं ने मनरेगा पर प्रोग्राम करने का सुझाव दिया है जिससे ग्रामीण इलाकों में पार्टी की पकड़ मजबूत हो सके। उन्होंने भी दोहराया कि अनुशासनहीनता को किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
बाजवा और वड़िंग ने क्या कहा?
कांग्रेस विधायक दल के नेता प्रताप सिंह बाजवा ने बैठक के बाद मीडिया से बात करते हुए कहा कि बहुत मुद्दों पर गहन चर्चा हुई है। उन्होंने कहा कि इकट्ठे होकर हम चुनाव लड़ेंगे और जीतेंगे भी। बाजवा ने साफ कहा कि मीडिया में न जाने के जो आदेश दिए गए हैं उनका पूरी तरह से पालन किया जाएगा। वहीं प्रदेश अध्यक्ष राजा वड़िंग ने बहुत कम शब्दों में कहा कि केसी वेणुगोपाल और भूपेश बघेल ने सब कुछ बता दिया है और वह किसी अन्य दिन विस्तार से बात करेंगे।
आखिर क्या था चन्नी का वो विवादित बयान?
यह पूरा विवाद 17 जनवरी को चंडीगढ़ में हुई कांग्रेस SC सेल की बैठक से शुरू हुआ। इस बैठक में चरणजीत चन्नी भी पहुंचे थे। चन्नी ने माइक संभालते हुए सवाल उठाया कि पंजाब में अगर दलितों की 35 से 38 प्रतिशत आबादी है तो फिर उन्हें प्रतिनिधित्व क्यों नहीं मिल रहा। चन्नी ने खुलेआम कहा कि पंजाब कांग्रेस का प्रधान भी अपर कास्ट है, CLP लीडर भी अपर कास्ट है, महिला विंग प्रधान भी अपर कास्ट है और जनरल सेक्रेटरी भी अपर कास्ट है। उन्होंने दर्द भरे लहजे में कहा कि यार हम कहां जाएं, यह लोग कहां जाएंगे?
राजा वड़िंग ने दिया करारा जवाब
जब चन्नी की ये बातें बंद कमरे से बाहर आईं तो जाट सिख नेताओं की तरफ से राजा वड़िंग ने मोर्चा संभाल लिया। वड़िंग ने तीखे लहजे में कहा कि CWC यानी कांग्रेस वर्किंग कमेटी का सबसे बड़ा पद होता है और उसके मेंबर चरणजीत चन्नी खुद हैं। वड़िंग ने सवाल उठाया कि चन्नी तो यह बात कह ही नहीं सकते क्योंकि उनके पास तो सबसे बड़ा पद है। उन्होंने याद दिलाया कि जब चन्नी को CLP लीडर बनाया गया था तो सुनील जाखड़ को उतारा गया था जो कि जाट सिख थे।
वड़िंग ने गिनाए चन्नी को मिले तमाम पद
वड़िंग ने आगे कहा कि चन्नी दोनों जगह से विधानसभा चुनाव हारे थे फिर भी पार्टी ने उन्हें जालंधर से सांसद बनाया। इतना ही नहीं चन्नी लोकसभा की एग्रीकल्चर कमेटी के भी चेयरमैन हैं। वड़िंग ने यह भी याद दिलाया कि जब मुख्यमंत्री बनाने की बात आई तो सुखजिंदर रंधावा मुख्यमंत्री बन रहे थे लेकिन पार्टी ने चरणजीत चन्नी को चुना। वड़िंग ने भावुक होकर कहा कि दलित हमारे सिर का ताज हैं और हमेशा रहेंगे। उन्होंने जोर देकर कहा कि हमारी सेक्युलर पार्टी है और पंजाब सेक्युलर स्टेट है जहां जात-पात नहीं है।
चन्नी ने भी जारी किया अपना वीडियो
जब विवाद बढ़ता देखा तो चरणजीत चन्नी ने भी वीडियो जारी कर अपना पक्ष रखा। चन्नी ने कहा कि वह पार्टी के बड़े धन्यवादी हैं और जो-जो ओहदे उन्हें दिए गए हैं उन पर खरा उतरने की पूरी कोशिश कर रहे हैं। चन्नी ने कहा कि अगर उन्हें संसद एग्रीकल्चर स्टैंडिंग कमेटी का चेयरमैन बनाया गया है तो उन्होंने किसानों के लिए MSP की सिफारिश संसद में रखी है और अपनी जिम्मेदारी निभाई है।
चन्नी बोले- पंजाब एक खूबसूरत गुलदस्ता है
चन्नी ने अपने वीडियो में बड़ी भावुक बात कही। उन्होंने कहा कि पंजाब एक गुलदस्ता है जिसमें अलग-अलग जातियां और धर्म के फूल हैं। इस गुलदस्ते को और बड़ा करना है। चन्नी ने कहा कि अगर पार्टी गुलदस्ता बनेगी और सारे वर्गों को प्रतिनिधित्व मिलेगी तो ही सरकार बन पाएगी। उन्होंने समझाते हुए कहा कि सभी को साथ लेकर चलोगे तो ही पंजाब का भला होगा। यह बयान पहले वाले बयान से काफी अलग और सुलझा हुआ था।
रंधावा बोले- हर घर में बर्तन खनकते ही हैं
गुरदासपुर से सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा ने इस पूरे विवाद पर बड़ी समझदारी भरी बात कही। उन्होंने कहा कि हर घर में बर्तन तो खनकते ही हैं और इसमें कोई नई बात नहीं है। रंधावा ने कहा कि चन्नी को इस तरह की कॉन्ट्रोवर्सी में नहीं आना चाहिए था। उनका मानना है कि चन्नी को इस खबर पर कोई स्पष्टीकरण देने की जरूरत नहीं है और बयानबाजी की कोई आवश्यकता नहीं थी। रंधावा ने तंज कसते हुए कहा कि बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष सुनील जाखड़ और कार्यकारी अध्यक्ष अश्वनी शर्मा कब हमेशा एक साथ चलते हैं? उन्होंने कहा कि हमारी आपसी लड़ाई की बात न करें बल्कि पंजाब में जो हो रहा है उस पर ध्यान दें।
BJP ने दिया चन्नी को पार्टी में शामिल होने का ऑफर
जैसे ही चन्नी के बयान से राजनीति गर्माई तो बीजेपी भी इस मामले में कूद पड़ी। बीजेपी ने मौके का फायदा उठाते हुए चन्नी को अपनी पार्टी में शामिल होने का खुला ऑफर दे दिया। यह ऑफर इसलिए भी अहम था क्योंकि चन्नी दलित समुदाय के बड़े नेता हैं और उनका आना बीजेपी के लिए बड़ी उपलब्धि होती। हालांकि चन्नी ने इस ऑफर को साफ तौर पर ठुकरा दिया और कहा कि वह कांग्रेस में ही रहेंगे। चन्नी ने गर्व से कहा कि वह कांग्रेस के सच्चे सिपाही हैं और पार्टी से कहीं नहीं जाएंगे।
क्या है पूरी पृष्ठभूमि?
पंजाब में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस के अंदर जाति आधारित राजनीति तेज हो गई है। पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत चन्नी दलित समुदाय से आते हैं और उन्होंने पार्टी में दलितों को ज्यादा प्रतिनिधित्व देने की मांग उठाई। इस पर जाट सिख नेताओं ने आपत्ति जताई और मामला इतना बढ़ गया कि राहुल गांधी को दिल्ली में आपात बैठक बुलानी पड़ी।
बैठक के बाद सभी नेताओं ने एक-दूसरे का हाथ पकड़कर एकजुटता का प्रदर्शन किया। लेकिन असली परीक्षा आने वाले दिनों में होगी जब पार्टी को 2027 के चुनाव के लिए जमीनी तैयारी करनी है। आम पंजाबी के लिए यह विवाद चिंता का विषय है क्योंकि अगर कांग्रेस के अंदर जाति आधारित गुटबाजी जारी रही तो इसका सीधा असर चुनाव परिणामों पर पड़ सकता है और आम आदमी पार्टी को फायदा हो सकता है।
मुख्य बातें (Key Points)
- राहुल गांधी सख्त: दिल्ली में 3 घंटे की बैठक में पंजाब कांग्रेस नेताओं की जमकर क्लास लगाई और अनुशासनहीनता पर कड़ी चेतावनी दी।
- चन्नी के बयान पर नाराजगी: दलित प्रतिनिधित्व को लेकर चन्नी के बयान पर राहुल गांधी ने साफ नाराजगी जताई।
- मीडिया में बयानबाजी पर रोक: पार्टी के आंतरिक मामलों पर सार्वजनिक बयानबाजी पर पूर्ण रोक लगाई गई।
- बीजेपी का ऑफर ठुकराया: बीजेपी ने चन्नी को पार्टी में शामिल होने का ऑफर दिया लेकिन चन्नी ने कांग्रेस में रहने का ऐलान किया।








